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पीएम मोदी को झालमुड़ी खिलाने वाले की कमाई कितनी ?

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भाई हमें अपना जालम खिलाओ। ऐसे ही हां। अच्छे वाला कितने का होता है? 10 20 हां जो भी है बना दो। हां। थोड़ी खाएंगे? खाएंगे बिलकुल खाएंगे। तो कितना ₹10 देना है। दुकान में आए सर एक। हां। ₹10 देना है। नहीं भाई ऐसा नहीं। हां। बोले एक मुड़ी बनाओ।” बोले कैसा खाइएगा? बोला जैसा बनाते हो बढ़िया बनाओ। बोला ठीक है। उसके पहले कोई आया था बताने कि पीएम जी आ सकते हैं आप क्या कोई बताने आया था आपको? उनके स्क्रूटी लोग खाए थे मुड़ी। अच्छा कब? बोले सर आएंगे। बोले सर तुम्हारा जिंदगी चेंज करने वाले हैं। हम तो नहीं जानते थे कि सर पीएम आएंगे यहां पर। घर कहां है? मैंने ऐसा बोले बोले हम बिहार के हैं गया जिला घर है। आप लोग यहां पर कब से आए? आपका परिवार कब आया यहां झारग्राम में? हम 12 साल से रह रहे हैं इधर। 12 साल पहले ठेला लगाते थे वो साइड में क्या लगा क्यों आना पड़ा बिहार से आप लोगों को यहां पे भाई सब स्थितियां ठीक थी हां परिस्थिति कुछ खराब था

सर म गरीबपन ज्यादा था कौन सी पार्टी पसंद है आप लोगों के परिवार को देखिए सर पार्टी के बारे में हम नहीं बोल सकते कोई भी कस्टमर आवेंगे चाहे ममता दीदी आए चाहे नरेंद्र मोदी आए सब के मेरा हम लोग को कस्टमर समझ के नहीं हम चलावेंगे खिलावेंगे हैं हम लोग किसी से कोई विरोध नहीं है अच्छा के बात है बहुत लोग बहुत रकम की बात बोलते हैं तो बिहार के है ऐसे है वैसे है इधर में क्यों व्यवसा करता है इधर खाता है ऐसा कुछ ऐसा बोलता है लोग बोलते हैं बहुत लोग बोलते हैं बिहार चले जाओ वापस देखिए सर बिहार चले जाएंगे वापस नहीं तो रोजगार तो करना ही पड़ेगा ना कहीं पर तो रोजगार करके खाना पड़ेगा हमारे पास तो कोई रोजगार है ही नहीं इसका सिवा नमस्ते मेरा नाम सिद्ध है। ललन इस समय झारग्राम में है। पश्चिम बंगाल का झारग्राम और यहां पर विक्रम कुमार साह की वो दुकान है जहां पे कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक झालमुड़ी ब्रेक लिया था। इसी दुकान से झालमुड़ी बनवा के खाई थी। जिसका वीडियो आपने देखा सुना होगा हर जगह। वीडियो के आने के बाद से विक्रम कुमार साहू की दुकान पर बहुत सारे लोग पहुंचने लगे हैं। बहुत सारे लोग आके बाहर सेल्फी खींचाते हैं।

सड़क से आते-जाते हुए लोग दुकान की तरफ पॉइंट करके दिखाते हैं कि देखो यही वो दुकान थी जिस दुकान पे रोजाना 100 200 कस्टमर आते थे। उस दुकान पे अब 400 500 कस्टमर्स आने लगे हैं। लेकिन एक दिन की ही बात है। लेकिन असल कहानी क्या है? विक्रम जी से हम समझने की कोशिश करेंगे। विक्रम जी बात हो सकती है। कल कितने बजे के करीब पीएम साहब आए थे आपकी दुकान पे? क्या कितना क्या समय क्या हो रहा था? वही 4:00 बज रहे थे मिनिमम 4:00 बजे करीब आए थे। अच्छा हां ये बोले एक मुड़ी बनाओ। अच्छा हम मुड़ी खिलाओ। खिलाओ। हां बोले मुड़ी खिलाओ। फिर मुड़ी बोले कैसा खाइएगा? बोला जैसा बनाते हो बढ़िया बनाओ। बोले ठीक है। फिर मुड़ी बनाए सब कुछ देकर खाएं। बोले बहुत बढ़िया है। बहुत बढ़िया है। ऐसा करके बोले बहुत बढ़िया है। फिर बोले तेरा नाम क्या है? बोले मेरा नाम सर विक्रम कुमार है। माता-पिता का नाम बोले पिता का क्या नाम है? बोले श्री उत्तम साहू माता का क्या नाम है?

बोले सुनीता देवी घर कहां है? मैंने ऐसा बोले बोले हम बिहार के हैं। गया जिला घर है। कितने क्लास तक पढ़े हो? बोले नाइन ये सब पूछे वो हां में तो ये सब आया नहीं था देखिए सर जो पूछे बस नाइंथ क्लास तक पढ़े हैं। नहीं नहीं वह समझ गए हम लेकिन वह जब वीडियो जो आया था ना आपकी दुकान का पीएम साहब आए थे उसमें बहुत सारी चीजें नहीं आई थी या शायद हो सकता है मेरे से मुझसे भी देखने में चूक हुई हो कैमरा जो हुए उनको मुड़ी जब बनाए ना उतना पड़ता है पर ऐसा ही थोड़ा बहुत बात हुई है अच्छा 10 मिनट पैसा दिए वो दीजिए हां ₹10 दिए ₹10 ₹1 अच्छा उनका मुड़ी में क्या-क्या डाले थे आप जो सबको देते हैं हम उनको भी मुड़ी बनाए वही बनाए हैं जो सबको बनाते हैं सर वही उनको भी दिए हैं। अच्छा जी ये बताइए कि आप आपने जैसे अभी खुद बताया कि आप बिहार के गया के रहने वाले हैं। हां आप लोग यहां पर कब से आए? आपका परिवार कब आया यहां झारग्राम में? सर मिनिमम हम 12 साल से रह रहे हैं इधर। 12 साल पहले ठेला लगाते थे। वो साइड में इसी का मुड़ी का ही हां मुड़ी का ही। सामने उधर ठेला लगाते। अच्छा ये सामने लगाते थे। इधर लगाते थे ठेला।

ये दुकान होने से फिर दुकान अच्छा ले लिए फिर दुकान में व्यवसाय करते हैं। और गया में कौन-कौन है अभी घर का सर कोई नहीं रहता है ताला लगा रहता है हम अकेला है तो मां है बाबा है और हम है शादी किया तीन हां मेरा तो शादी हो गया अच्छा बहन तीन बहन की शादी हो गई तो कहां-कहां पे बहन सब बिहार में ही हैं बिहार बिहार में अच्छा क्या लगा क्यों आना पड़ा बिहार से आप लोगों को यहां पे भाई सब स्थितियां ठीक थी हां परिस्थिति कुछ खराब था सर म गरीबपन ज्यादा था मतलब कोई व्यवसाय करके संसार चले बस रोजगार करके खाने की चेष्टा करें। नौकरीव उधर नौकरी तो सर हमें नहीं क्योंकि तो पढ़ा सुना कम है इसलिए नौकरी का चांस तो नहीं था बस तो क्या सोच के मतलब झारग्राम आने का आप लोगों ने सोचा तो झारग्राम ही क्यों चुना कहीं और भी आकेक भी बहुत सारे लोग बिहार से आते हैं रह जाते हैं ना झारग्राम एक बढ़िया जगह है सर जो बंगाली लोग मुड़ी बहुत पसंद करते हैं इसी आईडिया से हम लोग आए अच्छा हम एक बात बताइए कई सारे सारे लोग यह भी जानना चाहते हैं कि आप और आपका परिवार कौन सी पार्टी को सपोर्ट करता है? कौन सी पार्टी पसंद है आप लोगों के परिवार को? देखिए सर पार्टी के बारे में हम नहीं बोल सकते हैं। क्यों? पार्टी के बारे में क्योंकि इधर मेरे को वोट इधर है ही नहीं मेरा। आपका वोट कहां पे है? मेरा वोट में बिहार में है। अच्छा आपका वोट बिहार में है। बिहार में है।

इधर का बात में पार्टी पार्टी के लिए हम कुछ भी नहीं बोलेंगे सर। कस्टमर कस्टमर व्यवसाय तो हां जो भी है सब सम्मान है सर। हां एक हम दुकानदार हैं। कोई भी कस्टमर आवेंगे चाहे ममता दीदी आए चाहे नरेंद्र मोदी आए सब के मेरा हम लोग को कस्टमर समझ के नहीं हम चलावेंगे खिलावेंगे हैं। हम लोग किसी से कोई विरोध नहीं है। अच्छा के बात है। ये बताइए जब जैसे कल प्रधानमंत्री जी आए थे आपके यहां? उसके पहले कोई आया था बताने कि पीएम जी आ सकते हैं आपके यहां। कोई बताने आया था आपको? क्योंकि देखिए सिक्योरिटी होती है ना पीएम की। हां हां वो सिक्योरिटी सिक्योरिटी तो बहुत सुरक्षा करनी पड़ती है पीएम की उनके सिक्योरिटी लोग खाए थे मुड़ी अच्छा कब बोले सर आएंगे कब खाए थे वही 10-15 मिनट के पहले ही 10-15 दिन पहले 10-15 मिनट मिनट पहले ही समय 10-15 मिनट पहले उसकी बॉडीगार्ड खाए थे। अच्छा बोले सर तुम्हारा जिंदगी चेंज करने वाले हैं। तो हमें ये तो हम बोले अरे यार क्या मजाक है सही चल रहे हैं। हम तो नहीं जानते थे कि सर पीएम आएंगे यहां पर। अच्छा हां आपको बता दिया था उन्होंने 15 मिनट पहले कि आने वाले हैं। आने वाले हैं। फिर आए हैं बांस घेरा था। बास खुले हैं। अच्छा बांस इधर घिरा हुआ था। बांस खोल दिया गया। बांस खोल दिया गया। हां। फिर सर आए और कुछ देर पहले सर आए। देखिए सर हम ऐसे भी साफ सफाई रहते हैं।

थोड़ा बहुत तो सारा दिन दुकान खुला रहता है। थोड़ा बहुत दूल्हा पड़ा पड़ता है। लेकिन हम रहने से यहां पर पूरा साफ सफाई खाना देते हैं। कोई टेंशन नहीं। कोई चीज भी हो प्याज हो ये हो सब काट कर टाइम में जो भी यकी नहीं है कि आपको हम पुराना तो है म खाना खराब देते हैं नहीं वैसा नहीं जो भी हमारा देखिए वैरायटी साफ सफाई रहेगा हम चलिए आखिरी सवाल आपको और आपके परिवार को सरकार से भले ही बंगाल सरकार से भले ही बिहार सरकार से भले ही भारत सरकार से अगर कोई चीज मांगनी हो अपने लिए अपने समुदाय के लिए अपने लोगों के लिए अपने गांव के लिए अपने शहर के लिए अपने बिजनेस के लिए क्या मांगना चाहेंगे आप देखिए सर हम यही चाहते हैं कि ऐसा ही अपना व्यवसा करते रह, खाते रहे और कमाते रह और किसी से मुझे उम्मीद नहीं है मांगने के लिए।

बस अपना व्यवसाय करें और खुद खाएं। बस यही मैं चाहते हैं कि हमें कोई दिक्कत ना हो। सर आए हैं। कोई पार्टी हमें दिक्कत ना करे यहां पर बंगाल में जैसे बंगाल में लफड़ा भी ये सब भी चलता है ना। बंगाल में कोई लफड़ा ना करे हमारे साथ। यही मुझे डर की बात है और कुछ नहीं। बहुत लोग बहुत रकम की बात बोलते हैं तो बिहार के है ऐसे है वैसे है इधर में क्यों व्यवसा करता है इधर खाता है ऐसा कुछ ऐसा बोलता है लोग बोलते हैं बहुत लोग बोलते हैं बिहार चले जाओ वापस देखिए सर बिहार चले जाएंगे वापस फिर तो रोजगार तो करना ही पड़ेगा ना कहीं पर तो रोजगार करके खाना पड़ेगा हमारे पास तो कोई रोजगार है ही नहीं इसका सिवा कोई रोजगार नहीं है। पांचवा बाल बच्चे हैं सर। बिहार चल जाएंगे तो क्या चीज खाएंगे? कहां से खाएंगे? कल तो कल हम कष्ट नहीं करेंगे। अपने हाथ से मेहनत करेंगे नहीं तो कहां से पैसा आवेगा? खा लेंगे पांच को परिवार। एक वक्त का रोटी कोई घट जाएगा सर। तो कोई नहीं देखने वाला नहीं खिलाने वाला है।

मेहनत करते हैं खाते हैं। बस इस सिवा से कुछ नहीं जानते। मेरी बच्चे 5 साल की है सर। अच्छा पढ़ाई कर रही है। हां पढ़ाई कर रही है। ट्यूशन जाती है। ट्यूशन जाती है। छोटा बच्चा है तो स्कूल स्कूल सर इधर नहीं अभी इंतजाम उसने नहीं किए हैं। अभी गरीबी हाल थोड़ा चल रहा है तो हम बोले कुछ सरकारी स्कूल में तो पैसा नहीं लगता है ना। सर इधर देखिए सब तो ये बंगला है ना हिंदी में पढ़ाना है। हम सोचे कि यही बस ठीक है सर। आई एम सॉरी। आपके काम धंधे के समय लेकिन सब दुकान वकान बंद है इस समय यहां पे। हां इस समय दुकान मेरा खुला रहता है। सबका बंद रहता है। हम लोग क्योंकि दो तीन परिवार है तो समय कुछ समय पापा रहते हैं।

4:00 बजे के बाद मैं इधर बैठ जाता हूं। अच्छा आपका खुला रहता है। बाकी सबका अलग जो भादू सब खुल जाएगा। 4:00 बजे के बाद सब खुल जाता है। 2:00 बजे क्रिमिनल बंद होता है। उसके बाद सब खुल जाता है। तो ये थे झारग्राम के भाई साहब जिनकी दुकान पर झालमड़ी ब्रेक लिया गया और झालमुड़ी ब्रेक के बाद ये दुकान एक अलग तरीके से लाइमलाइट में आ गई है। पीछे ध्यान देना हेमराज। लल्लन टॉप की कवरेज जो है वो चलती रहेगी। अपना आप ख्याल रखिएगा और लल्लन टॉप जरूर देखते रहिएगा। बहुत-बहुत शुक्रिया।

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