अगर आपकी गाड़ी का बीमा नहीं है, तो निकट भविष्य में आपको पेट्रोल पंप से बिना तेल लिए लौटना पड़ सकता है। बेरंग नहीं बे तेल। नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल वाला सिस्टम आ सकता है। पेट्रोल पंप पर लगे कैमरे आपकी गाड़ी की नंबर प्लेट पढ़कर स्पीकर पर बोल सकते हैं कि भाई साहब पहले बीमा करवाओ तब तेल मिलेगा।
जब तक नो बीमा तब तक नो तेल। गाड़ियों के इंश्योरेंस को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने काफी कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने बिना बीमा के सड़कों पर चल रही गाड़ियों को लेकर कड़ी टिप्पणी की है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि बिना बीमा वाली गाड़ियों को फ्यूल नहीं दिया जाए। अदालत ने इसके लिए बीमा विनिमयक और विकास प्राधिकरण यानी आईआरडीएआई को पेट्रोल पंपों पर बीमा जांच के लिए पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। जो आपको लगे कि ऐसी कितनी ही गाड़ियां होंगी जिनके पास बीमा कवर नहीं होगा तो यह आंकड़े हैरान करने वाले हैं। कोर्ट ने संसदीय समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत में करीब 56% गाड़ियां बिना वैलेट बीमा के चल रही हैं।
लगभग 30.48 करोड़ गाड़ियों में से 16.54 करोड़ गाड़ियों के पास में इंश्योरेंस नहीं है। वारंट बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने आईआरडीएआई को नई गाड़ियों के लिए अनिवार्य थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस की अवधि बढ़ाने का भी निर्देश दिया है। अब नई कारों के लिए थर्ड पार्टी बीमा 3 साल की जगह 4 साल का और टू व्हीलर के लिए 5 साल की जगह छ साल का लेना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने कहा कि साल 2018 में दिए गए निर्देश के बावजूद बड़ी संख्या में गाड़ियां बिना बीमा के सड़कों पर चल रही हैं।
ऐसे में सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों के हित को देखते हुए बीमा की अवधि में एक साल की वृद्धि जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मोटर अधिनियम की धारा 146 के तहत अनिवार्य थर्ड पार्टी बीमा का उद्देश्य केवल दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा दिलाना नहीं है बल्कि उन्हें लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से बचाना भी है। कोर्ट का कहना है कि बीमा की चेकिंग के लिए हाईवे और सड़कों पर लगे ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन एएनपीआर कैमरों को बीमा डेटाबेस और वाहन पोर्टल से जोड़ दिया जाए। पता है आपके मन में सवाल होगा कि थर्ड पार्टी बीमा क्या है और कैमरा कैसे नंबर प्लेट को बांच लेगा? हम बताते हैं क्या होता है.
थर्ड पार्टी इंश्योरेंस? मोटर वाहन अधिनियम के तहत भारत में थर्ड पार्टी वाला बीमा सभी गाड़ियों के लिए कानूनी रूप से अनिवार्य है। जब आपकी गाड़ी से किसी अन्य व्यक्ति की गाड़ी संपत्ति या व्यक्ति को नुकसान पहुंचता है तो उसका वित्तीय भुगतान आपकी बीमा कंपनी करती है। अगर दुर्घटना में आपकी अपनी गाड़ी क्षतिग्रस्त होती है तो उसका खर्चा थर्ड पार्टी इंश्योरेंस से नहीं मिलेगा। उसके लिए तो आपको कंप्रहेंसिव इंश्योरेंस की ही जरूरत होगी। आपकी गाड़ी चोरी होने पर भी इसमें कोई मुआवजा नहीं मिलता। मोटा-मोटी ये समझिए कि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस होने से कम से कम सामने वाले को तो वित्तीय सहायता मिल जाती है। एएनपीआर क्या है? एक इमेज प्रोसेसिंग पर बेस्ड तकनीक है जो वाहन नंबर मतलब लाइसेंस प्लेट को पढ़ने के लिए ऑप्टिकल कररेक्टर रिकॉग्निशन ओसीआर का यूज़ करती है।
ये एक मशीन लर्निंग बेस्ड सिस्टम है जिसको ट्रेंड किया गया है नंबर प्लेट्स को पढ़ने के लिए फोटो पहचानने के लिए। ऐसे कैमरों को नंबर प्लेट की साइज से लेकर उसके ऊपर अंकित अक्षरों से फीड किया जाता है। एकदम फोकस रखकर कहें तो सिर्फ प्लेट पर ध्यान देना है। दुनिया जान पर नहीं। वैसे भी गाड़ियों की नंबर प्लेट कोई 50 किस्म की नहीं होती है।
मतलब एक किस्म की होती है। इसलिए एएनपीआर के लिए नंबर प्लेट पढ़ना कोई बड़ी बात नहीं है। दिल्ली में तो सभी पेट्रोल पंप पर ऐसे कैमरे लगे हैं जो स्पीकर पर बोलकर बताते हैं कि फला गाड़ी में पीयूसी नहीं है। ऐसी गाड़ियों को तब तक तेल नहीं दिया जाता जब तक वह पीयूसी नहीं बनवाते हैं। यही व्यवस्था बीमा के लिए भी लागू हो सकती है। इसी सिस्टम का उपयोग बिना बैरियर वाले टोल पर भी होने लगा है। यही है फ्यूचर। लेकिन आप फ्यूचर से वर्तमान में लौट आइए।