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मोदी की डिग्री के बाद अब नागरिकता पर सवाल, पासपोर्ट ने मचाया सरकार में बवाल।

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दोस्तों आखिर प्रधानमंत्री मोदी की पहली डिग्री और अब उनकी आइडेंटिटी यानी कि उनकी नागरिकता प्रमाणिकता पर किसने सवाल उठा दिए? दोस्तों आखिर लोग क्यों कह रहे हैं कि लोगों का पैर कुल्हाड़ी पर पड़ता है। यहां तो सरकार खुद ही कुल्हाड़ी पर पैर देकर मार रही है। दोस्तों वो कहते हैं ना दिन जब बुरे चल रहे होते हैं तो ऐसा ही होता है।

इस सरकार के सामने अलग-अलग मुद्दों पर कई मोर्चों पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं और जिसका जवाब ये सरकार देने की सूरत में नहीं है या फिर वो देना नहीं चाहती। इस बीच एक अजीबोगरीब कंट्रोवर्सी खड़ी कर दी गई है और उस कंट्रोवर्सी के बहाने लोग ये पूछ रहे हैं कि पहले यह बताइए कि प्रधानमंत्री के पास कौन सी प्रमाणिकता है कि वो भारतीय होने का खुद को प्रमाण दें। दरअसल ये कंट्रोवर्सी शुरू तब हुई जब एमईए यानी कि जो विदेश मंत्रालय है उनकी तरफ से किसी बात को लेकर एक बयान दिया गया।

दोस्तों, एमए द्वारा एक बातचीत में कहा गया कि जो पासपोर्ट है ना, यह आपकी नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है। यह तो बस एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है। अब अजीब बात देखिए दोस्तों, एनईए कह रहा है विदेश मंत्रालय कह रहा है कि यह नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है पासपोर्ट। तो फिर यह पासपोर्ट के बाहर भारत गणराज्य जो लिखा होता है, रिपब्लिक ऑफ इंडिया, यह क्यों लिखा होता है? दूसरा सवाल।

दोस्तों, आपके पास कोई डॉक्यूमेंट ना हो। हालांकि आज के दौर में ऐसा हो नहीं सकता कि किसी के पास कोई डॉक्यूमेंट ना हो। आधार तो सबके पास होता है लेकिन फिर भी चलो मान लिया नहीं है। पासपोर्ट इतना पावरफुल डॉक्यूमेंट है जो अपने आप में सारे डॉक्यूमेंट्स पर भारी पड़ता है। लेकिन अब विदेश मंत्रालय कहता है ये तो बस ट्रेवल डॉक्यूमेंट है। तो बड़ा सवाल यह है दोस्तों आधार कार्ड को नागरिकता प्रमाण पत्र नहीं माना जाता। पैन कार्ड को नागरिकता प्रमाण पत्र नहीं माना जाता। या फिर आपका जो डीएल है ड्राइविंग लाइसेंस लाइसेंस है उसको नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं माना जाता। इसके अलावा आप आपके पास वोटर आईडी कार्ड है तो उसको भी नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं माना जाता।

और अब सरकार कह रही है कि पासपोर्ट भी नागरिकता का प्रमाण पत्र थोड़ी है। इससे थोड़ी साबित होता है कि आप भारतीय हैं। इससे तो बस ये तो बस ट्रेवल डॉक्यूमेंट है। तो फिर साबित कैसे होता है कि आप भारतीय हैं। क्योंकि दोस्तों देश के प्रधानमंत्री हो, देश के सारे मंत्रालय में जितने भी मंत्री हैं वो हों या फिर खुद राष्ट्रपति महोदया हो। सबके पास सेम डॉक्यूमेंट है। ऐसा तो है नहीं कि पीएम के पास या उनके मंत्रियों के पास अलग डॉक्यूमेंट है। वही आधार कार्ड आपके पास भी है, मेरे पास भी है, पीएम के पास भी होगा। वही पैन कार्ड आपके पास भी है, मेरे पास भी है, पीएम के पास भी होगा। या जो भी शख्स जो भी प्रेसिडेंट से लेकर एक आम आदमी सबके पास सेम कार्ड्स हैं ना।

वही डीएल होगा सबके पास। अगर किसी के पास नहीं है तो चलो डीएल नहीं हो सकता। ठीक है? वो चुनाव आयोग जो देता है वोटर आईडी कार्ड वही होगा और पासपोर्ट होगा। तो बड़ा सवाल ये है कि प्रधानमंत्री अगर देश के प्रधानमंत्री हैं तो कैसे साबित करेंगे कि वो देश के नागरिक हैं? क्योंकि यही सारे डॉक्यूमेंट तो उनके पास भी हैं। तो फिर वो देश के पीएम कैसे बन गए? पूरा मंत्रालय वैसे चल रहा है। अब ये कितनी अजीबोगरीब बात है दोस्तों? इसका कोई और छोर है? हमारे देश के कोई भी नागरिक विदेश घूमने जाते हैं, किसी काम से जाते हैं तो वो अपने हाथ में जेब में हमेशा पासपोर्ट लिख रखते हैं। क्यों? कोई भी दिक्कत हुई एंबेसी उनकी मदद करती है। वो पासपोर्ट दिखाते हैं।

भारतीय नागरिक हैं। ठीक है? तो ये तो अजीब बात हो गई। एंबेसी वाले मदद क्यों करते हैं? एंबेसी वालों को बोल देना चाहिए ये तो ट्राइबल डॉक्यूमेंट है। और अगर पासपोर्ट ट्रेवल डॉक्यूमेंट है तो वीजा क्या है? फिर अब ये बात इतनी अजीब है ना इसको सुनकर कई लोगों ने अलग-अलग की प्रतिक्रियाएं दी। जैसे वरिष्ठ पत्रकार है प्रशांत टंडन उनका कहना है सरकार कह रही है पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है। चुनाव आयोग पहले ही आधार, वोटर आईडी कार्ड, राशन कार्ड को रिजेक्ट कर चुका है। कैसे पता करें? जिस आदमी को तीन बार प्रधानमंत्री पद के लिए शपथ दिलवा दी, वह भारत का नागरिक है भी कि नहीं? उसके पास ऐसा कौन सर्टिफिकेट है जिससे नागरिकता साबित होती है? भाई वरिष्ठ पत्रकार मतलब मजाक में ही कह रहे हैं लेकिन बात तो सीरियस है।

अगर पासपोर्ट ट्राइबल डॉक्यूमेंट नहीं है तो सरकार बताएं कि वो कौन सा डॉक्यूमेंट है जिससे यह तय होता है कि यह भारत का नागरिक है कि नहीं है। दूसरा जब पासपोर्ट आपको मिलता है ना इट्स नॉट दैट इजी। आपके घर में पुलिस आती है वेरिफिकेशन के लिए आपके पास के लोकल थाने से। जब भी आपका पासपोर्ट बनेगा जब आपको ऑनलाइन आप देख सकते हैं स्टेटस जब ऑनलाइन स्टेटस दिखाता है कि भाई आपका पासपोर्ट जो है वो आगे बढ़ गया है और पुलिस वेरिफिकेशन होगा तो आपको घर पे रहना होगा नहीं तो पुलिस चली जाएगी बिना वेरिफिकेशन करे आपका पासपोर्ट अटक जाएगा तो पुलिस वेरीफाई क्या करने के लिए आती है इतना पासपोर्ट बनाना सबसे मुश्किल है आपको पासपोर्ट ऑफिस के धक्के खाने हैं।

आपकी फोटो चेक होगी आंखों की पुतलियां हाथों का बकायदा निशान वगैरह लिया जाएगा तो पॉइंट ये है कि फिर किस चीज के लिए है ये? ये अपने आप में सवाल है ना। महवा मोहित्रा कह रही हैं कि अब भारत का नागरिक होने का एक ही प्रमाण होगा। एक तो आप हिंदू हो दूसरा आप बीजेपी के वोटर हो। ठीक है? सुप्रिया शहीद भी यही कह रही है कि सरकार कह रही है कि पासपोर्ट जो है वो नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है। तो पासपोर्ट तो तभी इशू किया जाता है ना एक सोवरन नेशन के तौर पर उन लोगों को जो इंटरनेशनल ट्रैवल करते हैं। मतलब दुनिया के किसी भी हिस्से में जाते हैं। क्या इसका मतलब यह है कि पासपोर्ट उन लोगों को भी दिया जाएगा जो भारत के नागरिक नहीं है। मतलब पासपोर्ट अगर सरकार कह रही है कि ट्रेवल डॉक्यूमेंट है तो मतलब ये तो किसी को भी दे दिया जाएगा। तो एजेंसीज इतना वेरीफाई क्यों करती है पासपोर्ट इशू करने से पहले? और इसके अलावा सुप्रिया नेत ने लिखा कि जो दुनिया भर के दूसरे मुल्क हैं या फिर उनकी इमीग्रेशन डेस्क है उनको भी अपने पैकअप कर लेना चाहिए। क्यों? क्योंकि वो तो जो भारत का पासपोर्ट लेके घूम रहे हैं उनके पास ट्रेवल डॉक्यूमेंट है।

वो भारत के नागरिक थोड़ी हैं। वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश कहते हैं कोई बता सकता है भारत में नागरिकता का कौन सा प्रमाण पत्र है? सरकार आधार कार्ड को नहीं मानती। अब पासपोर्ट को भी नहीं, चुनाव आयोग कार्ड को भी नहीं। फिर नागरिकता कार्ड कौन सा है? आजादी के 79 साल बाद यहां के लोग नागरिकता प्रमाण के बगैर ही भारतीय कहलाते रहे। हम भी क्या मुल्क हैं? सवा5 करोड़ का ये मुल्क है। किसी के पास राशन कार्ड है। मोस्टली लोगों के पास आधार तो है ही। ठीक है? लेकिन सरकार ने सारे डॉक्यूमेंट्स के लिए बोल दिया है कि वो नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है। एकमात्र बचा था पासपोर्ट जो ऑलरेडी इस देश में बहुत कम लोगों के पास है। अब सरकार कह रही है वो भी नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है। तो ये जो सवा5 करोड़ लोग रह रहे हैं इस देश में ये किस मतलब इनका क्या प्रमाण है कि ये सब भारतीय हैं? बताइए। आप बताइए मुझे कमेंट बॉक्स में क्या प्रमाण है आपके पास कि आप भारतीय हैं। अगर आपके पास पासपोर्ट है और आप सोचते हैं पासपोर्ट सबसे तगड़ा डॉक्यूमेंट है आपका। अच्छा एक और अजीब बात बताती हूं मैं आपको। पासपोर्ट और आधार कार्ड यह दिखाकर ना आप कोई भी डॉक्यूमेंट बना सकते हैं। आपका डीएल भी इजीली बन जाएगा अगर आपके पास पासपोर्ट या आधार कार्ड है तो। ठीक है? तो पासपोर्ट आधार कार्ड दिखाकर आप कोई भी डॉक्यूमेंट बना सकते हैं। लेकिन पासपोर्ट आपका नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है। मैं तो यह कह रही हूं दोस्तों जिस भारत के अधिकारी ने भाई विदेश मंत्रालय का कोई तो अधिकारी होगा ना जिसने यह बात बोली होगी। उसके पास कौन सा प्रमाण पत्र है? इन डॉक्यूमेंट्स के अलावा जिनको सरकार कह रही है कि वो नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है। उसके अलावा उस अधिकारी के पास क्या ऐसा स्पेशल डॉक्यूमेंट है जिससे वो बाकियों से कह रहा है कि ये ट्राइबल डॉक्यूमेंट है। भाई उस अधिकारी के पास इतनी तो जानकारी होगी कि अगर वो पासपोर्ट को ट्राइबल डॉक्यूमेंट कह रहा है तो कौन सा डॉक्यूमेंट है जो हमें नागरिक बनाएगा भारत का। दोस्तों इस देश में नागरिकता के नाम पर पिछले 12 सालों में कुछ ना कुछ आप देखिए चला आ रहा है। लगातार कभी एनआरसी की बात हो जाती [संगीत] है। कभी सीएए की बात हो जाती है। फिर एसआईआर पूरे के पूरे देश में एसआईआर कर दिया गया। उसके नाम पर मोदी ने अमित शाह ने पूरे देश में प्रचार किया कि आप घुसपैठियों को निकालने का प्रबंध हो रहा है। चुन चुन के घुसपैठियों को बाहर निकाला जाएगा। ठीक है? चुनाव आयोग ने इस नाम पर एसआईआर किया कि भाई हमको जो वोटर लिस्ट है उसका शुद्धिकरण करना है। घुसपैठियों को वोट नहीं देने का अधिकार दिया जाएगा। तो आप देखिए साल दर साल कोई ना कोई ऐसा विवाद खड़ा होता है या किया जाता है जिससे बात बातबात पर लोगों को ये बताया जाए कि भारत के नागरिक होने के लिए आपको यह विशेष करना है। तो क्या आप कोई नई लाइन खड़ी करने का पूरा प्रबंध किया जा रहा है।

अब कोई नया डॉक्यूमेंट रखा जाएगा। जिस डॉक्यूमेंट के लिए बोला जाएगा यह आपके पास है तो आप भारत के नागरिक हैं या फिर जो विपक्ष वाले चटकारे ले रहे हैं कि एक्चुअली में जब आप बीजेपी को वोट करेंगे ना तो ही माना जाएगा कि आप भारत के नागरिक हैं कि नहीं है। अच्छा इसमें भी एक झोल है। कैसे पता चलेगा कि बीजेपी को वोट कर रहे हैं या किसी और को क्योंकि भाई ईवीएम तो गुप्त है ना। बंद कमरे में जाकर आप बटन दबाते हैं ना। आपको यह बात सुनकर कितनी अजीब लगती है दोस्तों?

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