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पागल अभिनेता जिससे डरता था पूरा बॉलीवुड, काली सच्चाई जानकर रूह कांप जाएगी।

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अपने दमदार अभिनय से जाने जाने वाले वह दमदार अभिनेता हमें ऊंची आवाज सुनना भी पसंद नहीं जिसकी शेर जैसी आवाज से ही सामने वाले की हवा टाइट हो जाती थी वो तो था और है और हमेशा रहेगा लेकिन यही आवाज अपने आवाज को सुनने के लिए तरस गया हम तुम्हें मारेंगे और जरूर मारेंगे जिनके सामने अच्छे-अच्छे स्टारों की कोई वैल्यू ही नहीं हुआ करता था हमें मालूम है.

इसीलिए तो जूते तुम्हारे मुंह के सामने रखे हैं चाहे वह अमिताभ धर्मेंद्र या जितेंद्र हो या फिर राजेश खन्ना या फिर गोविंदा चाहे यहां तक कि सलमान खान भी इनके शिकार हुए हैं ना तलवार की धार से ना गोलियों की बछर से साथ ही जानेंगे इनके जीवन से झूरी हर एक बातें चौधरी साहब यह जोश दिखाकर आप हुकूमत इरा नहीं बदल सकते आखिर यह फिल्मों में कैसे आए मरते मरते क्यों इन्होंने अपने घर वालों से इनकी की खबर दुनिया से छुपाने को कहा साथ ही जानेंगे कि यह एक ऐसे अभिनेता थे जो अपनी हर एक फिल्म के बाद अपनी फीस बढ़ा दिया करते थे.

आखिर क्यों इन्होंने नाना पाटेकर को पागल कहा था फिर बाद में एक दूसरे के मित्र बन गए अपना तो उसूल है पहले मुलाकात फिर बात एक-एक इनकी जीवन से झूरी हर एक पहलू पर नजर डालेंगे जानी बस आप सभी से गुजारिश है कि वीडियो के अंत तक जरूर बने रहें तो स्वागत है आप सभी का हमारे चैनल अभी तक अगर अपने हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो प्लीज चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें काश के मेरे बच्चे मेरे पास होते अपने बाप को प्रशित करते हुए देख लेते आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसा हिंदी फिल्म का सितारा जिसे भारतीय दर्शकों ने अपने पलकों पर बैठाया जिसके एक-एक डायलॉग के लोग दीवाने थे अगर फर्क है तो सिर्फ सोचने के ढंग में और काम करने के तरीके में राजकुमार का जन्म 8 अक्टूबर 1926 को बलूचिस्तान में हुआ था जो कि अब यह पाकिस्तान में है इनके पत्नी का नाम गायत्री था इनके तीन बच्चे थे.

पुरु राजकुमार पन्नी राजकुमार और और वास्तविकता राजकुमार लेकिन राजकुमार का वास्तविक नाम कुलभूषण पंडित था जो कि फिल्मों में आने के बाद इनका नाम राजकुमार हो गया तुम्हारे इंतजार का मेरे पास एक ही जवाब है इनके नाम के पीछे भी एक राज है जिसकी चर्चा हम बाद में करेंगे यहां के कायदे और कानून तुम्हें मालूम होने चाहिए पहले बात कर लेते हैं इनके फिल्मी सफर और इनके बुरे बर्ताव के बारे में राजकुमार लगभग 40 के दशक में मुंबई आ जाते हैं ना कभी फिल्में देखने वाले ना ही कभी फिल्मों में काम करने की सोच रखने वाले आखिर अभिनेता कैसे बने तो यह उस समय की बात है.

जब राजकुमार मुंबई के माहिम एक थाने में सब इंस्पेक्टर के ड्यूटी पर तैनात थे एक दिन ड्यूटी के दौरान एक कांस्टेबल ने सोचते हुए कुलभूषण पंडित यानी राजकुमार से कहा कि आप फिल्मों में हीरो बनने के लिए क्यों नहीं ट्रॉय करते हैं बस यही बात राजकुमार के दिल में बैठ गई बहुत ही जल्द वह समय भी आ जाता है जो कि कुलभूषण पंडित को राजकुमार बना सके दरअसल राजकुमार मुंबई के जिस थाने में तैनात थे वहां फिल्मों के लोग अक्सर किसी ना किसी काम से आया करते थे हमारा इ देखोगी तो जल्दी अध हो जाओग ऐसे ही एक दिन एक हिंदी फिल्म जगत के जानेमाने निर्माता बलदेव दुबे आए हुए थे.

उन्होंने जब कुछ समय तक राजकुमार से बातें की तो राजकुमार के बात करने के अंदाज से काफी प्रभावित हुए और बातों ही बातों में राजकुमार से पूछ बैठे क्या तुम मेरे फिल्म में काम करोगे अभिनेता बनोगे मेरी फिल्म का बिना हिले जुले खामोश खड़े रहो तो इधर राजकुमार भी फिल्मों में जाने का मन बना चुके थे उन दिनों बलदेव दुबे को अपनी फिल्म शाही बाजार के लिए एक नए चेहरे की तलाश थी जिसके लिए राजकुमार को चुन लिया जाता है है इसके बाद राजकुमार फिल्मों के चक्कर में सब इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़ देते हैं.

इस बात को सुनकर कि कुलभूषण फिल्मों में हीरो बनने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी तो बहुत लोगों का आलोचना भी झेलना पड़ा था राजकुमार को कोई कहता था कि यह इंसान पागल हो गया है तो कोई कहता था हीरो नहीं बल्कि इसकी सकल विलेन का है लेकिन राजकुमार इन सभी बातों को अनसुना करर फिल्मी दुनिया की ओर आगे बढ़ गए दुनिया ये महफिल लेकिन राजकुमार को क्या पता था जो सपने फिल्म निर्माता या फिर निर्देश दिखाते हैं उसे हासिल होने में कभी-कभी समय भी लग जाता है और ऐसा ही हुआ राजकुमार के साथ उ से आप बए हमें क्या हो गया है फिल्मों के चक्कर में तो नौकरी छोड़ चुके थे तो वहीं इनकी फिल्म शाही बाजार बनने में काफी वक्त लग गया जिसके कारण राजकुमार को खाने तक के लाले पड़ने लगे थे अब राजकुमार के दिन काफी कठिनाई वाली होने लगी थी इसी बीच उन्हें एक और फिल्म में काम करने का मौका मिला जो कि 1952 में प्रदर्शित की गई और उस फिल्म का नाम था रंगीला जिसमें एक छोटे से किरदार में नजर आए थे यह फिल्म सिनेना घरों में कब लगी और कब उतर गई किसी को नहीं पता चला खैर अभी राजकुमार को अपनी आने वाली फिल्म शाही बाजार का का बेसब्री से इंतजार था की आ ते होती है अच्छे अच्छ को जलाकर खा कर लेकिन इस फिल्म को पूरी तरह से तैयार होने और सिनेमा घरों में आने तक 5 साल का वक्त लग गया फिर 1957 को फिल्म शाही बाजार को प्रदर्शित किया गया और राजकुमार का हीरो बनने का सपना भी टूटता हुआ नजर आने लगा क्योंकि यह फिल्म फ्लॉप साबित होती है जब यह बात घर वालों और दोस्त रिश्तेदारों में फैली तो सभी लोग राजकुमार पर हंसे लगे और राजकुमार को ताने मारने लगे नीले गगन के तले कितनों ने तो यहां तक कह दिया कि हीरो की शकल तो है नहीं विलेन ही बन जाते.

तो फिल्म कहीं हिट भी हो जाती पुकारे मेरा प्यार 1952 से 1957 के बीच यानी पाच सालों तक नौकरी छोड़ने के बाद एक गुमनामी और गरीबी के साथ-साथ लोगों के ताने और फिल्मों में स्ट्रगल करना जारी रहा जिसके बाद कई फिल्में की लेकिन सभी फिल्में फ्लॉप रही जिनमें से कुछ फिल्मों के नाम इस प्रकार है जो फ्लॉप हो गई अवसर घमंड अनमोल कृष्णा सुदामा सहारा नीलमणि ऐसी कई फिल्में आई जिनसे राजकुमार की कोई खास पहचान नहीं बन पा जिनम कल बच्चों कावा शामिल है लेकिन अगर किस्मत में एक सुपरस्टार बनना लिखा हो तो कौन टाल सकता है भला और यही बात लागू होती है राजकुमार के ऊपर इसी साल यानी 1957 में ही एक और फिल्म राजकुमार की प्रदर्शित की जाती है.

इस फिल्म में भी व एक छोटे किरदार में ही नजर आते हैं तोड़ना कोई हसी ट्टा है आदी जमीन में तो पत्थर और आदी जमीन में ये मोटी मोटी जड़े मेरे बैल दो दिन में मर जाएंगे हालांकि यह फिल्म अभिनेत्री नरगिस पर फिल्म आई गई थी और उस फिल्म का नाम था मदर इंडिया मदर इंडिया फिल्म को पहले दिलीप कुमार को ऑफर किया गया था लेकिन उन्होंने इस फिल्म के दो-दो किरदार होने के कारण छोड़ दिया था फिर इसमें सुनील दत्त और राजकुमार को लिया जाता है इसी फिल्म ने दोनों की किस्मत बदल दी राजकुमार का किरदार भले ही छोटा था.

लेकिन इस बार अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो चुके थे हमारा पैगाम तो उन तक पहुंच चुका है इसी फिल्म मदर इंडिया के लिए राजकुमार को अवार्ड से सम्मानित भी किया गया था इसके बाद राजकुमार हिंदी फिल्म जगत के नजरों में आ चुके थे हकीकत छुप नहीं सकती बनावट के उसूलों से अब एक अभिनेता के तौर पर देखे जाने लगे फिर उस दौर के सुपरस्टार महानायक दिलीप कुमार के साथ एक फिल्म अति है जो कि साल 1959 में प्रदर्शित की जाती है और उस फिल्म का नाम था पैगाम दिलीप साहब के दमदार अभिनय के बीच फिर से एक बार राजकुमार ने अपनी दमदार अभिनय का परिचय दिया.

लड़की से शादी करना शादी इस बार भी दर्शकों के दिल में जगह बनाने में कामयाब हुए जिसके बाद राजकुमार ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा एक के बाद एक हिट फिल्में देते चले गए अगर इनके फिल्मों की बात की जाए तो 1960 में इनकी एक फिल्म रिलीज होती है जिसका नाम था दिल अपना और प्रीत पराई फिर अगले साल यानी 1961 फिल्म घरा और 61 में गोदान आई फिर साल 1974 में राजकुमार की दो फिल्में आई दूज का चांद और दिल एक मंदिर लेकिन अभी तो वह फिल्म आनी बाकी थी जो राजकुमार को स्टारों के बिच लाकर खरा कर सके हालांकि पहले भी दर्शक राजकुमार की फिल्मों से और अदाकारी से खुश थे साल आया 1965 जहां इनकी दो-दो जबरदस्त फिल्में रिलीज हुई जो कि राजकुमार को स्टारों के सूची में लाकर खड़ा कर दिया और उन दो फिल्मों में एक थी काजल और दूसरा वक्त इसके बाद कई फिल्में आई जो कि दर्शकों को काफी पसंद आई जिनमें से मुख्य फिल्में हैं नील कमल हियर रांझा पाकीजा हमराज राजकुमार एक ऐसे कलाकार हुए जिन्हें जिस रोल में फिल्में करा लिया जाए.

उस रोल में ढल जाते हैं और इस बात को कई बार राजकुमार ने साबित भी किया है अपने अभिनय से फिर एक ऐसा दौर भी राजकुमार के जीवन में आया जहां बस इनका ही बोलबाला था साल 1981 से लेकर साल 1995 का यह वह समय था जो कि राजकुमार का फिल्मों में होना ही फिल्म हिट की गारंटी हो जाती थी 1981 से 1990 के बीच इनके कई फिल्में रिलीज की गई जिनमें से राज तिलक मरते दम तक जंगबाज जैसी फिल्में शामिल है लेकिन अभी तो वह फिल्में आनी बाकी थी जिससे घर-घर और बच्चे के जुबान पर इनका नाम आता.

दरअसल हम बात कर रहे हैं फिल्म तिरंगा और सौदा की साथ ही जानेंगे इनकी रवैया और इनके नाम के बारे में और इनकी मृत्यु के बारे में फिल्म फिल्म के निर्माता निर्देशक मेहुल मेहुल कुमार जब तिरंगा फिल्म बबानी को सोचा तो पहले इस फिल्म के लिए राजकुमार को साइन कर लिया एक इंटरव्यू के दौरान मेहुल कुमार ने यह बताया था कि राजकुमार को फिल्म में तो साइन कर लिया था लेकिन शिवाजी वागले वाला रोल करने को राजकुमार के साथ कोई भी राजी नहीं हो रहा था नाना पाटेकर ने जो शिवाजी वाग वाला रोल फिल्म तिरंगा में किया था.

यह रोल पहले नसरुद्दीन को ऑफर किया गया था लेकिन नसरुद्दीन ने राजकुमार के साथ काम करने से मना कर दिया फिर इस रोल को लेकर मेहुल कुमार रजनीकांत के पास गए रजनीकांत को भी इस रोल से कोई भी तकलीफ नहीं थी लेकिन राजकुमार के साथ काम करने से मना कर दिया फिर इस यह ओफर नाना पाटेकर को दिया गया और उन्होंने इस रोल को करने के लिए राजी हो गए लेकिन एक शर्त पर की राजकुमार साहब उनके शूटिंग या किरदार में कोई भी दखल अंदाजी नहीं करेंगे जब यह बात राजकुमार को पता चली तो उन्होंने मेहुल कुमार से कहा कि उस पागल सनकी के साथ मैं फिल्म नहीं करूंगा वह तो सेट पर ही लोगों को गाली देता है.

लेकिन मेहुल कुमार जो कि राजकुमार के सबसे अच्छे मित्र थे उन्होंने राजकुमार साहब को किसी तरह नाना पाटेकर के साथ काम करने को राजी कर ही लेते हैं जब यह खबर फिल्मी गलिया में फैली कि राजकुमार और नाना पाटेकर एक साथ फिल्म कर रहे हैं तो फिर अधिकांश लोगों ने यह सोच लिया था कि यह फिल्म नहीं बन पाएगी क्योंकि पूरब और को पश्चिम से मिलाना इतना आसान नहीं है लेकिन मेहुल कुमार ने इस बात को गलत साबित किया और फिल्म तिरंगा महज छह महीने में बनकर तैयार हो गई.

फिल्म सौदागर का भी एक एक डायलॉग आज भी लोगों के जुबान पर है यह राजकुमार की दूसरी फिल्म थी दिलीप कुमार साहब के साथ राजकुमार इतने बड़े स्टार बन चुके थे कि बॉलीवुड के बड़े-बड़े अभिनेताओं को कुछ नहीं समझते थे अपने सामने उनकी खिंचाई करने में थोरा भी नहीं झिझक थे राजकुमार ऐसे ही कुछ वाक्य हो चुका था कई फिल्मी सितारों के साथ अगर खबरों की माने तो एक बार एक पार्टी के दौरान संगीत निर्देशक बप्पी लहरी की मुलाकात राजकुमार से हो जाती है.

जैसे कि हम जानते हैं कि बप्पी लहरी अपने कामों से तो जाने जाते ही है लेकिन अपने स्टाइल से लेकर उनके ज्वेलरी की खूब चर्चा होती है ऐसे जब राजकुमार की नजर बप्पी लहरी पर परी तो राजकुमार ने ताना मरते हुए कहा बस मंगलसूत्र की जरूरत है जानी ऐसे ही एक घटना महानायक अमिताभ बच्चन के साथ हो चुका है एक दिन एक स्टेज पर दोनों आमने-सामने हुए तो राजकुमार ने अमिताभ बच्चन से पूछ लिया कि कोर्ट का कप डिड्डा काफी अच्छी है कहां से लिया तो अमित जी ने उस दुकान का पता बता दिया जिसके बाद राजकुमार ने अमिताभ बच्चन से कहा कि यह कपड़ा मुझे पसंद है मैं अपने घर का पर्दा ऐसे ही कपड़ों से लगवाना चाहता हूं जब अमिताभ बच्चन नहीं बचे राजकुमार से तो फिर गोविदा कैसे बच पाते फिल्म जंगबाज के शूटिंग के दौरान राजकुमार गोविदा से कहने लगते कि तुम्हारी शर्ट बहुत सुंदर है.

मुझे चाहिए तुम्हारी शर्ट गोविंदा खुश होकर अपनी शर्ट राजकुमार को दे देते हैं फिर अगले दिन उस शर्ट के कपड़े से रूमाल बनाकर राजकुमार शूटिंग पर घूम रहे थे भाईजान यानी सलमान खान के साथ कुछ ऐसा ही हुआ था मीडिया रिपोर्ट की माने तो एक पार्टी के दौरान सलमान ऐसे ही राजकुमार से पूछ लेते हैं आप कौन है मैंने आपको पहचाना नहीं तब राजकुमार ने सलमान खान से कहा जाओ अपने बाप से पूछ के आना कि मैं कौन हूं तो कुछ ऐसे थे.

राजकुमार लेकिन उनके करीबी मित्र ने राजकुमार को एक अच्छा इंसान एक साफ दिल और दूसरों की मदद करने वाला बताया है कुछ बातें सोशल मीडिया में बस एक अफवाह है और कुछ नहीं अपने से पहले राजकुमार ने अपनी की खबर उनके अंतिम संस्कार करने के बाद ही मीडिया में कहने को कहा था ताकि भीड़ भाड़ ज्यादा ना हो फिर वह समय भी आ गया जब राजकुमार हमें छोर इस दुनिया से चले गए .

साल था 3 जुलाई 1996 जब इन्होंने बीमारी से जुज हुए अपनी अंतिम सांसे लिया डबल एजे राजकुमार जी ने और अपनी अभिनय से आज भी हम सबके बीच मौजूद है

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