Cli

नूतन ने क्यों अपने ही पति को आग में धकेल दिया?सच जानकर कांप उठेंगे।

Uncategorized

भारतीय हिंदी सिनेमा का एक ऐसा सितारा जिसकी अदाकारी की रोशनी में आज भी बॉलीवुड जगमगा रहा है क्या करें मजबूरी क्या कुछ नहीं कराती पिताजी है नहीं और मां गांव में बीमार पड़ी है उसका नाम लेते ही अगर हमको कुछ याद आता है तो उनकी सादगी उनकी प्यारी सी मुस्कान उनकी मोहक खूबसूरतीहै जो भी देंगे वतन जिसकी अदाकारी में वह आकर्षण था कि फिल्म जगत को विवस होना पड़ा उन्हें लगातार 30 सालों तक फिल्म फेयर अवार्ड देने के लिए हां हम उस दौर की बात कर रहे हैं जब फिल्मों में हीरोइन महज सो पीस के तौर पर इस्तेमाल होती थी।

उस दौर में इस अदाकारा ने हीरोइन प्रधान फिल्में करके इस परंपरा को तोड़ दिया था पर इन चंद लाइनों में इनकी कहानी कहां खत्म हो जाती है हां तो आज हम इस वीडियो में आपको इनसे जुड़ी बेहद रोचक दुख भरी और मनोरंजक कहानी को आपसे रूबरू कराएंगे सुनो छोटी सी गुड़िया की लंबी कहानी सुनो छोटी जैसे कि आपको पता है कि कैसे 50 के दशक में अदाकारा मिस इंडिया बनी वह दौर जब औरतों को पर्दे में और पल्लू में ही रखा जाता था।

उस समय फिल्मी पर्दे पर स्विमिंग सूट पहन कर जब वह आई तो आखिर पूरे भारत में क्या हुआ पर जब आखिर इन्हें इनके पड़ोसी इनके रिश्तेदार बेहद बदसूरत और काली कहते थे फिर यह कैसे दर्शकों की चहती बन गई इन्होंने अपनी खूबसूरती से कैसे दर्शकों को अपना दीवाना बना लिया समझने वाले समझ गए हैं ना समझे वो अनाड़ी है पर आपको फिर यकीन नहीं होगा जिस अदाकारा के लिए दर्शक दीवाने थे उस अदाकारा को अपनी ही फिल्म देखने को नहीं मिली जब वह सिनेमा घर में गई तो धक्के मारकर आखिर उन्हें क्यों निकाल दिया गया कौन से दो बड़े सुपरस्टार थे जो उनसे शादी करने के लिए दीवानों की तरह पागल थे बुरा ना मानो माजो भी तो साफ-साफ कह दो मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं बकायदा निकाह आपको जानकर बड़ा ताज्जुब होगा कि संजीव कुमार जैसे कलाकार ने आखिर नूतन जी के साथ ऐसा क्या कर दिया था कि नूतन जी ने सबके सामने इन्हें जोरदार थप्पड़ जड़ दिया था फूलो के और पर एक सफल शादीशुदा जिंदगी जीने वाली यह अदाकारा आखिर क्यों बेहद दुखी रही किसी से मिलन है किसी से जुदाई आखिर क्यों इनके जीवन की सबसे चहती शख्स इनकी मां जिनसे उनको नफरत हो गई थी।

अपनी मां के साथ ही ऐसा क्या हो गया था कि मां और बेटी कोर्ड तक लड़ती रही परछाई तक से लोग दूर रहना चाहते हैं मैं सिर्फ पूछूं हां आखिर ऐसी कौन सी ख्वाहिश थी जिसे अपने अंतिम समय में यह पूरा कर पाई तो नमस्कार दोस्तों स्वागत है आप सभी का आपके अपने फेवरेट youtube0 फुल बॉलीवुड में इस वीडियो के अंत में आपको हम यह भी बताएंगे कि आखिर क्या कहानी है इनके मरने के बाद इनकी भटकती की उस आत्मा ने आखिर किन लोगों से चुनचुन बदला लिया भेजा है 4 जून 1936 को मुंबई के बेहद तटस्थ फिल्मी परिवार में नूतन का जन्म हुआ पिता कुमार सेन समर्थ जो कि फिल्मी दुनिया के जानेमाने निर्देशक थे साथ ही वह एक प्रतिष्ठित कवि भी थे इनकी मां शोभना समर्थ 40 के दशक की एक बेहतरीन अदाकारा थी और तो और नूतन जी की नानी भी अपने समय की एक बहुत बड़ी भजन गायिका होने के साथ-साथ एक नामी गिरामी अभिनेत्री भी थी नूतन जी की दो छोटी बहनें भी थी एक तनुजा और दूसरी चतुरा और एक छोटे भाई जयदेव थे जहां नूतन की मां बेहद खूबसूरत थी ।

वहीं नूतन बचपन में बेहद दुबली पतली और सांवली थी घर में बेहद फिल्मी माहौल था बड़ी-बड़ी हस्तियों का आना जाना लगा रहता पर नूतन को को जब भी कोई देखता तो सिर्फ यही कहता शोबना तुम तो इतनी सुंदर हो पर तुम्हारी बेटी बेहद दुबली पतली और सामली है छोटी सी बच्ची नूतन को यह सब ताने सुनकर बेहद दुख होता उन्हें लगता कि मेरी मां को मेरे लिए ताने सुनने पड़ते हैं नूतन हमेशा उदास रहती और दौर कभी-कभी वह रात रात भर रोती रहती नूतन की मां ने यह सब देखकर एक दिन नूतन को समझाया तुम इतना परेशान क्यों होती हो देखना जब तुम बड़ी हो जाओगी तो खुद बखुदा खूबसूरत हो जाओगी देखना एक दिन तुम मुझसे भी कई गुना ज्यादा सुंदर होगी तो घर में फिल्मी माहौल के चलते उनके पिता कुमार सेन समर्थ ने उन्हें एक फिल्म में बाल कलाकार के रूप में काम दिया।

नूतन उस समय महज नौ वर्ष की थी फिल्म का नाम था नल दमयंती पिता ने ही इस फिल्म का निर्माण किया और तो और पिता ने ही निर्देशन भी किया नूतन को इस फिल्म में बाल कलाकार के रूप में लोगों ने पहचान तो लिया था धीरे-धीरे नूतन बड़ी हो रही थी समय बीत रहा था इधर नूतन की मां और उनके पिता के बीच में कुछ असहमति हुई बगैर किसी खटपट के नूतन की मां और उनके पिता एक दूसरे से अलग हो गए इन सभी बातों का नूतन के निजी जीवन पर बड़ा गहरा प्रभाव पड़ा नूतन और भी दुखी रहने लगी देख बन के तकदीरों का मिट जा पर नूतन की मां शोभना बेहद महत्वाकांक्षी थी उन्होंने अपनी बेटी के लिए शुरू से ही सोच रखा था।

वह नूतन को एक बड़ी एक्ट्रेस बनाएंगी धीरे-धीरे समय बीता साल आया 1950 शोभना समर्थ ने एक फिल्म प्रोड्यूस की और इस फिल्म का निर्देशन भी किया पर उससे भी बड़ी बात यह थी कि शोभना ने अपनी बेटी नूतन को इस फिल्म से लंच किया था महज 14 साल की उम्र में नूतन फिल्म हमारी बेटी की हीरोइन बन गई थी।

हालांकि यह फिल्म सफल तो नहीं रही पर नूतन की स्क्रीन प्रेजेंट ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था और यह नूतन की एक्टिंग की जादूगिरी ही थी उस फ्लॉप फिल्म के बाद भी इन्हें तीन फिल्मों में काम मिला पहली फिल्म थी सवाब दूसरी हम लोग और तीसरी नगीना पर यह तीनों की तीनों फिल्में बुरी तरह से फ्लॉप हो गई हां नगीना फिल्म से जुड़ा हुआ एक किस्सा बहुत मशहूर है फिल्म नगीना का प्रीमियर था नूतन भी अपनी फिल्म देखने के लिए थिएटर पहुंची पर नगीना फिल्म को उस दौर में एडल्ट फिल्म का दर्जा मिला था यानी कि 18 वर्ष से कम उम्र के लोग इस फिल्म को देख नहीं सकते थे हुआ कुछ यूं कि 14 वर्ष की नूतन अपनी ही फिल्म को देखने के लिए थिएटर में प्रवेश फस करने लगी तभी गेटकीपर ने उन्हें फटकार लगाते हुए रोक दिया तुम्हें पता नहीं यह फिल्म सिर्फ लोगों के लिए है और इतनी छोटी होकर भी तुम फिल्म देखने जा रही हो नूतन ने बड़ी भोली सूरत बनाते हुए कहा सर इस फिल्म की मैं हीरोइन हूं चौकीदार साहब कहां मानने वाले थे।

उन्हें तो अपनी ड्यूटी पूरी करनी थी उन्होंने नूतन का हाथ पकड़ा और नूतन को थिएटर से बाहर ढकेल दिया नूतन के लाग समझाने पर भी नूतन की बात किसी ने नहीं मानी नूतन अपनी फिल्म का प्रीमियर नहीं देख पाईन में रे लिए लाई मैं प्यार लाई होलाई मैं प्यार लाई कुल मिलाकर बात तो यहां पर अटक गई थी जहां शोभना इन्हे एक बड़ी अदाकारा बनाना चाह रही थी वहीं इनकी शुरू की तीन से चार फिल्में ही लॉफ हो गई थी।

कला अंधे के पास हो या कोड़ी के पास मैं उसकी इज्जत करती हूं पर शोबना एक मझी हुई कलाकारा थी उन्होंने अपनी बेटी नूतन के लिए एक के बाद एक तरकीब सोच रखी थी उन्होंने नूतन को भारत से बाहर विदेश पढ़ाई करने के लिए भेज दियानी अकेली य जा यहां नूतन ने पढ़ाई के साथ-साथ अपने लुक्स पर भी ध्यान दिया पढ़ाई पूरी करने के साथ जब नूतन अपनी मां के पास मसूरी छुट्टी बिताने आए समझने वाले समझ गए ना समझे तो मानो उनकी मां ने उनके लिए पूरी तैयारी कर रखी थी नूतन को 1952 में ही उनकी मां ने मिस इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा दिलवाया नूतन इस प्रतियोगिता में विनर भी रही विदेश से लौटने के बाद नूतन ऐसी दिख रही थी मानो कि कोई आसमान से परी उतर आई हो तब शोभना समर्थ जी ने उनके लिए एक और फिल्म का प्लान किया जिसके हीरो थे।

बलराज साहनी का नाम था सीमा साल 1955 में जब यह फिल्म रिलीज हुई तो सिनेमा घरों के बाहर लंबी-लंबी लाइने थी फिल्म रिलीज होने के बाद ही हर तरफ नूतन की ही प्रशंसा हो रही थी नूतन की ही चर्चाएं थी और सुन मैं काम के लिए दरबदर भटकती रही हूं लेकिन मुझ पर हर दरवाजा बंद कर दिया गया दो दिन से रोटी का टुकड़ा तक नसीब नहीं हुआ कल जो लोग नूतन को अजीब और बदसूरत कहते थे वह आज शोबना जी के घर बधाई देने के लिए खड़े मगर आप उन मॉडर्न लोगों में से हैं कि अगर किसी और की बह बेटी क्लब में नाचे तो तालिया बजाती फिल्म सीमा के लिए नूतन को बेस्ट एक्ट्रेस का अपना पहला फिल्म फेयर अवार्ड मिला फिल्म फेयर अवार्ड का शानदार जश्न वो खुशियो भरा मेला है।

नूतन आज सफलता के उस मोड़ पर खड़ी थी जहां उन्हें पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं थी चांद खिला वो तार हसे ये रात अजब आपको बता दें कि यह वो दौर था जब फिल्मों में ठीले वदन की महिलाओं का चलन था पर आज नूतन जी ने फैशन और सुंदरता की परिभाषा को ही बदल कर रख दिया था मेरे लहंगे में रू लगा दे तो फिर मेरी चाल देख और नूतन ने एक के बाद एक कई सुपरहिट फिल्में दी जैसे बसंत लाइट हाउस हीर बारिश हबली कभी अंधेरा कभी उजाला और और अनाड़ी जैसी फिल्में जैसा यह राग क्या है।

कोई हमें बता दे पर क्या आपको पता है नूतन जी एक अच्छी अदाकारा होने के साथ-साथ एक अच्छी गायिका भी थी उन्होंने छबी ली पे गेस्ट हमारी बेटी जैसी फिल्मों में गायन भी किया की बा मत पूछो हम होश में आना पर इधर नूतन जी की शुरुआती हिट फिल्मों से उनकी जो छवि बनी थी वो बेहद सीरियस और ट्रैजिक रोल की थी उनकी मां को यह छवि पसंद नहीं आ रही थी तभी नूतन जी ने पेइंग गेस्ट फिल्म की अब नूतन की छवि एक सीरियस हीरोइन की नहीं थी क्या क रहे आप हमारे यहां जब कोई मर जाता है अजजा तो ये बोल पड़े जाते तभी उन्होंने एक ऐसी फिल्म की जिसने पूरे भारत में तहलका मचा दिया फिल्म का नाम था दिल्ली का ठक तहल के का कारण था कि नूतन जिस दौर में फिल्मों में अपना जोहर दिखा रही थी उस दौर में बहू और बेटियां मुख्यता पर्दे के पीछे ही रहती थी रही बात अंग प्रदर्शन की तो मानो यह तो घोर पाप था पर नूतन ने इस फिल्म में स्विमिंग सूट पहनकर दृश्य दिए थे और यह दृश्य बेहद भड़काऊ और बोल्ड अंदाज मेंl थे इन दृश्यों ने भारत के दर्शकों को हैरान कर दिया था नूतन ऐसे सीन देने वाली भारत की पहली अभिनेत्री बन गई थी।

समय के साथ साथ स्विमिंग सूट के इन दृश्यों की आलोचना शायद अभी कुछ ठंडी ही पड़ी थी नूतन ने अपनी अगली फिल्म बारिश में कुछ और बोल्ड सीन दिए और इन दृश्यों ने आग में घी डालने का काम किया था च ताज्जुब की बात तो यह थी जहां पूरे देश में इनकी आलोचना हो रही थी वहीं इनकी सब की सब फिल्में हिट हो रही थी नूतन जी का नाम अब बड़ी-बड़ी फिल्म एक्ट्रेस मधुबाला नरगिस मीना कुमारी बजंती माला और माला सिन्हा के साथ लिया जाने लगा था और तो और रही बात फीस की तो नूतन शायद इन सभी हीरोइनों से कई गुना ज्यादा फीस ले रही थी मैड मैड माने पागल बी ओ वाय बॉय बॉय माने लड़का अरे मतलब जिका तुम कहो तो बारिश फिल्म के कुछ ही दिनों बाद नूतन ने सुजाता और वंदनी जैसी फिल्मों में अत्यंत मर्म स्पर्शी रोल करके एक बार फिर अपनी बोल्ड छवि को धूमिल कर दिया था आप कितने बड़े वंश के हैं कितनी ऊंची जात है आपकी सुजाता फिल्म को हारती इस सिनेमा का मील का पत्थर कहा गया इतनी अली जान मेरे बंग इस फिल्म में नूतन ने एक अछूत कन्या का किरदार निभाया था मैं बहुत नीची जात की मैं अछूत हू एकदम अच्छ और इस अदाकारी में नूतन को हर जगह वाहवाही मिल रही थी कहते हैं।

उस वक्त के मौजूदा प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी इस फिल्म की खूब तारीफ [संगीत] की बताते हैं मशहूर एक्टर सम्मी कपूर और नूतन बचपन से ही बड़े अच्छे दोस्त थे इन दोनों फिल्मी परिवारों में खूब दोस्ती थी नूतन और समम कपूर साथ ही बड़े हुए नूतन ने 1953 में समम कपूर जी के साथ लैला मजनू फिल्म में काम किया और फिल्म की शूटिंग के दौरान यह दोस्ती कब मोहब्बत में बदल गई यह पता ही नहीं लगा पर सम्मी कपूर साहब उन दिनों एक एस्टेब्लिश एक्टर नहीं थे उनकी एक या दो ही फिल्में आई हुई थी और राज कपूर की नकल करने वाला एक्टर इन्हें कहा जाता था और इधर नूतन जी एक बड़ी अदाकारा बन गई थी समी कपूर साहब नूतन से शादी करना चाहते थे ही थी कितनी खुशनसीब होगी वो लड़की जिससे आप प्यार करेंगे एक दिन समम कपूर साहब शोभना जी के घर नूतन का रिश्ता मांगने पहुंचे शोभना जी को नूतन और सम्मी कपूर का य रिश्ता बिल्कुल मंजूर नहीं था जब से मैंने होश संभाला है मेरे पिताजी हमेशा मुझसे यही कहते रहे य मत करो वो मत करो कहीं अकेले जाओ मत उन्होंने तुरंत इस शादी के लिए ना कर दिया और नूतन को सम्मी कपूर से दूरी बनाने के लिए कहा नूतन एक सीधी शादी भोली लड़की थी।

उन्होंने अपनी मां की बात मान ली पर नूतन की सुंदरता को कहां छुपाया जा सकता था दूसरी तरफ जुबली कुमार कहे जाने वाले राजेंद्र कुमार भी नूतन की सुंदरता के कायल थे वे कुछ दिनों बाद नूतन के घर उनकी मां से उनका रिश्ता मांगने पहुंच गए धु बन खुशबू देता सागर सावन देता है अब शोबना जी के मन में न जाने क्या चल रहा था उन्होंने शादी के लिए तो हां की नहीं और तो और राजेंद्र कुमार को जलील करके घर से भगा दिया देखे बनके तफर का मिट जाना नूतन की मां ने साल 199 में भारतीय नौसेना के लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीश बहल से नूतन की शादी कर दी नूतन ने भी एक भारतीय नारी की तरह इस शादी को स्वीकार कर लिया मेरा बर्ताव देखकर एक दिन आप खुद कहेंगे कि इस संसार में लक्ष्मी जैसी कोई नहीं बताते हैं शादी के कुछ दिनों पहले ही इनकी सुजाता फिल्म रिलीज हुई थी और जैसा कि आपको पहले बताया कि सुजाता बहुत बड़ी हिट थी इस फिल्म के लिए इन्हें अपना दूसरा बेस्ट एक्ट्रेस फिल्म फेयर अवार्ड मिला था।

नूतन कामयाबी के शिखर पर थी शादी के बाद उन्होंने फिल्में ना करने की ठान ली अब इसके बारे में हम बाद में बात करेंगे मेरे मंद तुम ही मेरी पूजा पर साल 1960 में निर्माता विमल राय ने वंदनी फिल्म का प्रस्ताव नूतन के सामने रखा नूतन ने इस फिल्म को करने से साफ मना कर दिया उन्होंने कहा कि मैं एक शादीशुदा महिला हूं अब मुझे फिल्म में काम नहीं करना तेरा मेरा साथ रहे हो तेरा मेरा साथ शायद कारण यह भी था कि नूतन उन दिनों गर्भवती थी पर विमल राय जी वंदनी फिल्म के लिए नूतन को ही लेना चाहते थे वह अपनी जिद पर अड़ गए थे कि अगर फिल्म बनेगी तो वह नूतन जी के साथ ही बनेगी वरना मैं इस फिल्म को ही नहीं बनाऊंगा उन्होंने नूतन जी के पति से भी आग्रह किया फिर उनके पति रजनीश बहल ने नूतन से कहा कि तुम इस फिल्म को कर क्यों नहीं लेती और तो और उन्होंने इस फिल्म को करने के लिए नूतन पर जोर भी दिया।

अंतत नूतन इस फिल्म को करने के लिए राजी हो गए इधर 1961 में नूतन ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम रखा मोनीज बहल रानी को अब आने भी दे और वादे के मुताबिक नूतन ने बंदनी फिल्म में काम किया 1963 में इनकी यह फिल्म रिलीज हुई मोरा गोरा अंग लेले एक बार फिर आज नूतन ने अपनी अदाकारी का लोहा मनवा दिया था बंदनी सुपर डुपर बंपर हिट रही वैसे बंदनी फिल्म को आज भी भारतीय सिनेमा की ऑल टाइम क्लासिकल हिट में शामिल किया जाता है इस फिल्म के लिए इन्हें एक बार फिर इनका तीसरा बेस्ट एक्ट्रेस फिल्मफेयर अवार्ड मिला नूतन ने बंदनी फिल्म के बाद फिल्म ना करने की सोची पर इनके पति ने कहा जब तुम इतना अच्छा काम कर रही हो तो क्यों नहीं आगे की फिल्में करती हो बनाना कोई आसान काम नहीं 60 के दशक में छलिया तेरे घर के सामने खानदान रिश्ते नाते दिल ने फिर याद किया और सरस्वती चंद्र जैसी कई लगातार हिट फिल्में दी धीरे से तेरा ये मुस्काना जहां 60 के दशक का अंत हो रहा था।

वहीं नूतन ने एक बार बढ़ती उम्र के साथ-साथ मिलन फिल्म में काम किया यह फिल्म भी भारतीय सिनेमा की ऑल टाइम हिट मानी गई इस फिल्म के लिए एक बार फिर इन्हें चौथा बेस्ट एक्ट्रेस फिल्मफेयर अवार्ड मिला मिलन है किसी से जुदाई नए रिश्तो फिर आया साल 1970 जब संजीव कुमार और नूतन जी की फिल्म देवी आई वैसे इस फिल्म से संजीव और नूतन की बड़ी अच्छी दोस्ती हो गई थी पर यह समाज एक पुरुष और महिला की दोस्ती को कहां दोस्ती मानता है चर बोले आज राधा के नैनों में लोग नूतन और संजीव कुमार के बारे में तरह-तरह की बातें करने लगे बात यहां नहीं थमी थी फिल्मी पत्रिकाओं में दोनों के फेयर की तरह-तरह की चर्चाएं छपने लगी बताते हैं।

संजीव कुमार उन दिनों एक नए एक्टर थे पर नूतन तो उस समय एक स्थापित कलाकारा थी जिनके सिर्फ नाम से ही फिल्में चल जाया करती थी हां जब ये अपवाह नूतन जी को पता लगी तो उन्होंने किसी से भी बगैर कुछ पूछे सीधे संजीव कुमार से जानने की कोशिश की पर संजीव कुमार जी ने इन सभी बातों को गंभीरता से ही ले लिया नूतन को यह बहुत खराब लगा भगवान के चरणों में मुझे क्या था तकलीफ जब से उन्हें पाया है इस मिट्टी के शरीर को आंखें मिल गई नूतन जी को भी बुरा लगना लाजमी था कारण यह था कि नूतन को उड़ती उड़ती खबर लगी थी कि यह सारी अपवाह खुद बखुदा रहे हैं कारण था कि उन्हें इन अपवाह से थोड़ी पॉपुलर मिल जाएगी।

नूतन जी को यह बहुत ही ऊची हरकत लगी संजीव कुमार के कुछ ना बोलने को इस हरकत को सच समझ लिया और शायद इसी गुस्से में नूतन ने संजीव कुमार को जोरदार तमाचा जड़ दिया मेरे दिल से ना लो [संगीत] बदला और तो और उन्होंने 1972 में एक इंटरव्यू में कहा मुझे अपनी इस हरकत का कोई भी पस्तावा नहीं इसके बाद संजीव कुमार और नूतन में कभी कोई बातचीत नहीं हुई यह सभी चर्चाएं उन दिनों खूब वायरल हुई हां नूतन जी के करियर पर इसका जरा सा भी प्रभाव नहीं पड़ा वो लगातार एक के बाद एक हिट फिल्में देती रही फिर चाहे वह उन दिनों का बड़ा सा बड़ा कलाकार हो या नए से नया एक्टर उन्होंने किसी के साथ काम करने में कोई परहेज नहीं किया सभी के साथ उन्होंने बेहद यादगार भूमिकाएं की रुकिए पर शायद आप उन दिनों के बेहद एक प्रतिष्ठित नाम को भूल ही गए हां वह नाम था।

दिलीप कुमार साहब दिलीप कुमार साहब के साथ काम करने की तमन्ना नूतन की अभी तक अधूरी ही रह गई थी कहते हैं सिकवा नाम की एक फिल्म में दिलीप कुमार के अपोजिट नूतन को कास्ट किया गया था पर किन्हीं वजहों से उसकी शूटिंग रुक गई नूतन की यह ख्वाहिश अधूरी रह गई पर इन दिनों नूतन ने लगातार हिट फिल्में देने का सिलसिला जारी रखा 1978 में उनकी एक और सुपरहिट फिल्म आई जिसका नाम था मैं तुलसी तेरे आगन की यह वही फिल्म थी जिसमें उनके लाजवाब अभिनय के लिए उन्हें उनका का पांचवा बेस्ट एक्ट्रेस फिल्मफेयर अवार्ड मिला मैं तेरे कुर्जी की कोई इसलिए नहीं कि मुझे खरीद कर नहीं लाया गया मेरे कुर्जी की तोत सब कुछ है क्योंकि वो तुझे हर रात खरीदते हैं ।

आपको यकीन नहीं होगा नूतन जी सिनेमा जगत की पहली अदाकारा हो गई थी जिनके नाम लगातार पांच फिल्मफेयर अवार्ड थे यह नूतन ही तो थी जिन्हें उम्र के 40 पड़ाव पार करने के बाद भी फिल्मों में लीड रोल ऑफर हो रहे थे नूतन जी बेहद समझदार अदाकारा थी 80 का दशक आते-आते नूतन ने खुद के रोलों में बदलाव किए वह स्वयं मेन एक्ट्रेस रोल छोड़कर कैरेक्टर रोल करने लगी जैसे मेरी जंग कर्मा नाम झूठ बोलता है कमीना अपनी मां से झूठ बोलता है बेशर्म को शर्म भी नहीं आती झूटी मा ऐसी अदाकारी की कि उन फिल्मों में नूतन के रोल को आज भी यादगार माना जाता है है जोही वतन वैसे उन्हें उनका छठवां बेस्ट सपोर्टिंग रोल फिल्मफेयर अवार्ड मेरी फिल्म के लिए मिला जिग हरदम इ नहीं है हां तो आप बिल्कुल सही समझ रहे हैं फिल्मों में नूतन का सफर बड़ा ही सुनहरा दिखता है पर शायद नूतन के निजी जीवन की सच्चाई इतनी ही दुखद है कहते हैं शोबना समर जी ने अपने स्वार्थ के लिए अपनी बड़ी बेटी नूतन को जबरन फिल्मी पृष्ठभूमि में पदार्पण करवाया नूतन को उनकी मां पैसे कमाने की मशीन समझती थी शायद यही कारण तो था जब सम्मी कपूर और राजेंद्र कुमार जैसे लोगों का रिस्ता नूतन जी के लिए आया तो उन्होंने इसीलिए मना कर दिया कि अगर नूतन जी शादी कर लेंगी तो शायद पैसे कमाने का जरिया खत्म हो जाएगा यही कारण था कि नूतन की मां ने नूतन की साथ अपनी पसंद के लड़के से कराई शोबना समर जी को लगता था कि नूतन के पति को हमेशा अपने काबू में रख लेंगी जिधर देखती हूं उधर तुम ही तुम हो पर बताते हैं कि रजनीश नूतन की मां की चालाकी को भाप गए थे।

कहते तो यह भी है कि रजनीश ने ही नूतन को उनकी मां की सारी चालाकी समझाई उन्होंने नूतन को समझाया कि यह सब पैसे का चक्कर है इसीलिए तो तो तुम्हारी मां तुम्हारी सारी फिल्मों का हिसाब रखती हैं वाक्य कुछ ऐसा था कि जब नूतन जी के पास एक इनकम टैक्स का नोटिस आया तब नूतन ने अपनी मां से बड़े ही प्यार से कहा मां आप ये सारे टैक्स को चुका दीजिए शायद नूतन अपनी जगह सही भी थी क्योंकि वह अपनी फीस का महज 30 फीसद ही अपने पास रखती थी पर नूतन की मां ने कहा यह सारा टैक्स तुम्हें चुकाना है कंपनी पर टैक्स बहुत अधिक था नूतन ने कहा हर वर्ष की सारी कमाई तो आप ही रखती हैं मैं आखिर कैसे टैक्स चुका सकती हूं और यही आप हर साल करती आ रही है मेरी सारी की सारी कमाई तो टैक्स चुकाने में ही चली जाती है ।

आपस की यह सारी बातचीत कुछ ही मिनटों में विवाद में बदल गई नूतन ने अपनी मां पर पैसों की धोखाधड़ी के आरोप लगाए र का मिट जाना अब मां और बेटी एक दूस दरे के दुश्मन बन गए थे नूतन ने आगे चलकर अपनी मां के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट तो यहां तक बताती है कि नूतन ने 20 वर्षों ततक अपनी मां से बात तक नहीं की और तो और उनकी शक्ल भी नहीं देखी हर कम है इस दुश्मनी ने इतना बड़ा रूप ले लिया था कि एक बार जब नूतन प्लेन से कहीं जा रही थी उन्होंने प्लेन में इंटर किया सामने जिस पर उनकी नजर पड़ी वह थी उनकी मां अपनी मां को देखते ही नूतन चुपचाप उस फ्लाइट से उतर गई उन्होंने अपनी फ्लाइट कैंसिल कर दी कुछ देर बाद वह अगली आने वाली फ्लाइट से गई हां इन सभी नोक झोक के बीच वर्ष 1983 में कोर्ट का फैसला आया कोर्ट का फैसला नूतन के पक्ष में था शोभना समर जी को नूतन जी की सारी रकम वापस करनी पड़ी है तुम्हारी ले जाऊ किस र बहरहाल नूतन ने कभी इन सब विवादों को मीडिया में जाहिर नहीं किया नूतन ने कभी अपने जिंदगी का दुख और दर्द किसी के सामने नहीं रखा पर्दे पर हमेशा मासूम दिखने वाली नूतन अंदर से शायद बहुत दुखी थी कहते तो यह भी हैं कि नूतन के अपने पति रजनीश से भी अच्छी पटरी नहीं खाती थी।

उनके पति रजनीश भी घर पर उनके साथ सेना के कमांडेंट वाला पहार रखते थे और तो और लोग तो यह भी कहते हैं कि कभी-कभी तो वो इतना नूतन के ऊपर गुस्सा हो जाते कि अगल-बगल के पड़ोसी रिश्तेदारों और दोस्तों के सामने भी नूतन की बेइज्जती कर दिया करते थे जिसकी वजह से नूतन ने अपने करीबियों से मिलना जुलना ही बंद कर दिया था ये मांग मेरी है लेकिन सिंदूर तुलसी का नूतन के पति हमेशा नूतन पर शक करते कई जगह पर तो यह भी सुनने को मिला कि नूतन ने संजीव कुमार जी को जो जोरदार तमाचा जला था वह अपने पति के कहने पर ही जला था सपने फूलो के अब अंगारों पर नूतन ऐसे स्वभाव की महिला कभी थी नहीं पर पति के दबाव में मासूम नूतन ने यह सब कर दिया तुसे मेरी आखरी प्रार्थना है मेरी मांग का सिंदूर ना बिखरने देना भले ही नूतन समाज में हमेशा मुस्कुराती हुई दिखती पर वह अंदर अंदर हमेशा दुखी रहती थी कहते हैं वह अंदर से इतना दुखी रहती कि कई बार वह अपने आप को खत्म करने की भी सोचती ऐसी ही दुख दर्द भरी जिंदगी के बीच साल 1990 में नूतन के सीने में अचानक दर्द उठा और जब इस दर्द को डॉक्टर को दिखाया गया तो मालूम हुआ कि नूतन को ब्रेस्ट कैंसर है हमारे यहां कहते हैं ना कि कैंसर का नाम भी मुंह से नहीं निकलना चाहिए पर जब नूतन को पता लगा कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर है तो शायद बहुत खुश हो गई थी ।

नूतन ने अपनी सहेलियों से हंसते-हंसते कह दिया कि अब जाकर मैं अपने इस जीवन से छुटकारा पा सकूंगी तो आप भली बात सोच सकते हैं कि नूतन की जिंदगी में अंदर ही अंदर कितना कष्ट था वह अपनी जिंदगी से कितना परेशान थी और फिर 21 फरवरी 1991 को नूतन का इसी बीमारी से निधन हो गया भारतीय सिनेमा का एक जगमगाता सितारा हमेशा हमेशा के लिए ओजल हो गया न की एक मित्र ललिता जिन्हें वह अपनी बेटी की तरह मानती थी उन्होंने अपनी एक किताब में लिखा जिसमें वह बताती हैं कि वह बेहद आध्यात्मिक स्वभाव की महिला थी हां जब उन्हें यह पता लगा कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर है और वह चंद दिनों की मेहमान है तो उन्होंने वही किया जो उन्हें पसंद था व हमेशा भजन लिखती और भजन गाती ललिता बताती है अक्सर रात को एक से 2 बजे के बीच उनका फोन आ जाया करता था नूतन कहती ललिता आज मैं ने एक भजन लिखा है तुम्हें सुनाओ ललिता का जवाब हां आने से पहले ही वह अपने भजन को सुनाने लगती थी सदा बहार एक्टर देवानंद साहब नूतन जी के बारे में कहते हैं नूतन हमेशा दो पहलुओं में जीवन जीती थी एक बाहरी और एक भीतरी हां भले ही वह अपना भीतरी यानी कि वास्तविक जीवन कभी जी ही नहीं पाई बाहर से नूतन जितना खुश दिखती थी भीतर से नूतन उतना ही उदास और दुखी थी ता नहीं सबको संसार में कई जगह तो सुनने में आता है कि नूतन की मृत्यु के बाद उनकी मां शोभना को जरा सा भी दुख नहीं हुआ शोभना समर्थ जी जब नूतन के अंतिम संस्कार के बाद घर पहुंची तो उन्होंने अपने नौकर को जोर से आवाज देते हुए कहा जरा आज बड़ा ही लजीज और स्वादिष्ट खाना खिलाओ यह एक मां के वाक्य थे अपनी बेटी की के बाद के उनकी मित्र ललिता कहती हैं नूतन जी अगर चाहती तो और भी जी सकती थी पर वह जीवन से दुखी थी पर अपने जीवन से दुखी नूतन अब जीना ही नहीं चाहती थी वह अपने जीवन में एक्टिंग कर कर के थक गई थी अपनी आंखों से तुम मुझे जितना देख समझ रही हो मैं सिर्फ वही तो नहीं हूं वर्ष 2000 में नूतन की मां शोभना की भी हो गई पर हैरान करने वाली बात तो यह है कि शोभना की मृत्यु बेहद संदिग्ध थी कहते हैं कुछ तो रहस्यमय था शोबना की मौत में और इसके बाद एक बार फिर वैसा ही हुआ उनके पति रजनीश की साल 2004 में हुई यह भी बेहद रहस्यमय थी कहते हैं रजनीश के अपार्टमेंट में आग लग गई थी और रजनीश उसी अपार्टमेंट में जलकर मर गए हां ब्रिगेड अधिकारी बताते हैं कि हालात इतने खराब नहीं थे उस अपार्टमेंट से सभी के सभी लोग बाहर आ गए थे वहीं एक आर्मी ऑफिसर होने के बाद भी जिसे दुर्घटनाओं से निकलने की ट्रेनिंग दी जाती है ।

आखिर वह शख्स कैसे फंसा रह गया पर ताज्जुब तो तब हुआ जब दुर्घटना के एक चश्मदीद ने बड़ा डरावना और हैरत अंगेज बयान दिया उसने कहा कि मैं भी उसी बिल्डिंग में आग में फंसा हुआ था और जब मैं आग की लपटों से बचता बचाता बाहर निकल ही रहा था तभी मैंने रजनीश को भी बाहर आते हुए देखा हां रजनीश बाहर आ ही रहे थे तभी अचानक मानो रजनीश को किसी ने पीछे की ओर ढकेल दिया हो और रजनीश उसी कमरे में गिर गए न जाने कैसे वह दरवाजा भी बंद हो गया और रजनीश की दुर्घटना में जलकर हो गई।

उस चश्मदीद के बयान के बाद नूतन के करीबी यही मानते हैं कि शोबना और रजनीश की मौत अपने आप नहीं हुई बल्कि उन्हें नूतन की आत्मा ने मार दिया शायद इन दोनों से दुखी नूतन की आत्मा ने इन दोनों से बदला ले लिया था इन दोनों की मौत के बाद ललिता जी ने कहा इस आत्मा वाली बात से मुझे एक वाक्य और याद आया जब नूतन की मां शोबना समर्थ ने कहा था कि जब नूतन छोटी थी और बेहद उदास रहा करती थी।

तब एक ज्योतिषी ने नूतन का हाथ देकर कहा था यह एक महान और पवित्र आत्मा है जो धरती पर दोबारा आना ही नहीं चाहती थी पर शायद कुछ काम अधूरे रह गए थे उन्हीं कामों को य पूरा करने आई है उस ज्योतिषी ने शोबना से यह भी कहा था हां शोबना यह तुम याद रख लो कि इस बार यह आत्मा कुछ भी काम अधूरा छोड़कर नहीं जाएगी यह अपने सारे के सारे अधूरे काम अब पूरा ही कर लेगी आखिर नूतन ने अपना बदला ले ही लिया था नूतन की बहन तनुजा जो अपनी मां के साथ ही रहती थी उन्होंने भी हमेशा अपनी मां का ही साथ दिया इसी कारण नूतन और तनुजा के रिश्ते भी बेहद खराब हो गए थे बेकरार जाने मेरा नूतन को हिंदी सिनेमा में छह बार फिल्म फेयर अवार्ड से नवाजा गया उनके इस रिकॉर्ड की बराबरी उनकी बहन की बेटी काजोल ने की नूतन जी को वर्ष 1974 में पद्मश्री अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।

नूतन एक ऐसी प्रतिभा थी जिनके अंदर हुनर कूटकूट कर भरा था उन्होंने वह सब पाया जो सभी के सभी लोग पाने की ख्वाहिश रखते हैं छोटी सी गुड़िया की लंबी कहानी जैसे पर नूतन की जिंदगी में अगर कमी रह गई तो ईमानदार रिश्तों की वह चंद बेईमान रिश्तों के बीच पिसकर रह गई

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *