नेपाल की बाढ़ ने हजारों लोगों की जिंदगियां तबाह कर दी। सोशल मीडिया पर इस वक्त नेपाल की भीषण बाढ़ का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में नदी के किनारे एक बहुत ही विशाल रहस्यमई काले रंग का पत्थर दिखाई दे रहा [संगीत] है। जिस पर सुदर्शन चक्र जैसे निशान बने हैं।
दावा किया जा रहा है कि नेपाल में आई भयानक बाढ़ के तेज बहाव ने नदी के सीने को चीर दिया और करोड़ों साल पुराना 31 टन भारी साक्षात भगवान विष्णु का रूप यानी शालिग्राम पत्थर अचानक बाहर निकल आया। इंटरनेट पर लोग इसे चमत्कार मानकर नमन कर रहे हैं। लेकिन क्या वाकई यह पत्थर इस बाढ़ की वजह से बाहर आया या फिर इस वीडियो के पीछे की कहानी कुछ और है। चलिए इस वीडियो में जानते हैं। सच्चाई जानने से पहले यह समझना जरूरी है कि शालिग्राम पत्थर क्या होता है और इसकी इतनी चर्चा क्यों है। सनातन धर्म में शालिग्राम पत्थर को साक्षात भगवान विष्णु का विग्रह रूप माना जाता है। यह पत्थर सिर्फ और सिर्फ नेपाल की मुक्तिनाथ घाटी में बहने वाली काली गंडकी नदी के तट पर मिलते हैं। विज्ञान की भाषा में कहें तो यह करोड़ों साल पुराने अमोनाइट जीवाश्म यानी समुद्री जीवों के फॉसिल्स हैं
जो टेथिस सागर के समय के हैं। यह पत्थर बेहद पवित्र होते हैं और इनके अंदर प्राकृतिक रूप से चक्र बने होते हैं। पिछले साल अयोध्या के राम मंदिर के लिए भी इसी नदी से विशाल देव शिलाएं लाई गई थी। यही वजह है कि जब बाढ़ के बीच ये विशाल शिला दिखी तो लोगों की आस्था इससे तुरंत जुड़ गई। लेकिन दोस्तों अब आते हैं सबसे बड़े खुलासे पर। सोशल मीडिया और न्यूज़ एजेंसीज ने इस वीडियो की पड़ताल की तो सच कुछ और ही निकला। यह दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है कि यह पत्थर इस बाढ़ के कारण नदी से बाहर आया है। सच तो यह है कि यह पत्थर बाढ़ आने से महीनों पहले से इसी जगह पर शांत से खड़ा था।
कई यात्रियों और स्थानीय लोगों ने जून 2026 में ही इस पत्थर के साथ अपनी वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी। जब वहां मौसम बिल्कुल साफ था और दूर-दूर तक बाढ़ का नामोनिशान नहीं था। तो फिर 22 फीट ऊंचा 31 टन का महाकाय शालिग्राम यहां आया कहां से? दरअसल यह कोई प्राकृतिक रूप से निकला पत्थर नहीं बल्कि एक मानव निर्मित कलाकृति यानी स्कल्प्चर है। नेपाल के मुस्तांग जिले के जोमसोम में नेपाल ललित कला प्रज्ञा प्रतिष्ठान ने अप्रैल और मई 2026 के महीने में एक आर्ट वर्कशॉप का आयोजन किया था।
वहां के स्थानीय कलाकारों ने कालीगंडकी नदी के किनारे पड़े एक विशाल प्राकृतिक चट्टान को खुद अपने हाथों से तराशा और इसे शालिग्राम का एक विशाल रूप यानी रेप्लिका दे दिया ताकि यहां धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। बाढ़ के पानी का स्तर बढ़ने के कारण यह कलाकृति पानी के बीच घिर गई और कुछ इंटरनेट यूज़र्स ने इसे चमत्कार बताकर वायरल कर दिया। तो साथियों, आस्था अपनी जगह है और कलाकारों की मेहनत अपनी जगह। भगवान विष्णु के स्वरूप यानी शालिग्राम का सम्मान जरूर करना चाहिए। लेकिन सोशल मीडिया पर बिना जांच पड़ताल के किसी भी अंधविश्वास या भ्रामक खबर का हिस्सा बनने से बचना चाहिए। आपदा के समय ऐसी झूठी अफवाहएं केवल भ्रम फैलाती हैं। अगर आपको आज की यह जानकारी पसंद आई हो तो इसे लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूलें।