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NEET परीक्षा में फिर भयंकर झोल? नंबर में बड़ा खेल? आपबीती सुन आंखें भर आएंगी!

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यहा न्यूज़ पर आर्या सिंह से खास बातचीत**एंकर:** इस वक्त मेरे साथ एबीपी न्यूज़ पर आर्या सिंह मौजूद हैं। यह वही आर्या सिंह हैं, जिनका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। उस वीडियो में वह कह रही हैं कि इस साल जब उन्होंने नीट (NEET) की परीक्षा दी थी, तब उन्हें काफी उम्मीदें थीं कि अच्छे नंबर आएंगे। तैयारी भी बहुत अच्छी थी। लेकिन जब रिजल्ट आया, तो उसके बाद निराशा होना स्वाभाविक था। निराशा इस बात की है कि उनका असली रिजल्ट क्या है? यह अभी तक उनके सामने साफ नहीं है।पूरा मामला क्या है? वह इस निराशा से क्यों जूझ रही हैं? और जो सवाल उन्होंने पूछे हैं, उनके जवाब उन्हें अब तक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से क्यों नहीं मिले हैं? आर्या सिंह खुद हमारे साथ हैं। सबसे पहले उनसे ही बात करते हैं।आर्या जी, वीडियो में आप कई सवाल उठा रही हैं। आपका रिजल्ट तो आ गया है, लेकिन आपका असली रिजल्ट क्या है, यह अभी तक आपको ही साफ नहीं है। आपके साथ क्या समस्या हुई है?**आर्या सिंह:** जी मैम, मेरे पास सबसे पहले जो ओएमआर (OMR) आई थी, वह 13 जुलाई को रात करीब

9 बजे आई थी, जो कि यह वाली थी। इसमें हमारा जो सीक्वेंस नंबर (प्रश्नों का क्रम) था, उसमें गड़बड़ी थी—जैसे 77 दो बार दे दिया गया था, 77 को हटाकर 85-85 दो बार दे दिया गया था, इसमें 176 नहीं था बल्कि 1707 दो बार दिया हुआ था। यहाँ Invigilator (निरीक्षक) के हस्ताक्षर हैं, यहाँ समय 1:30 लिखा हुआ है, जबकि हमें ओएमआर ही 1:45 के बाद मिली थी। तो फिर यह 1:30 बजे का साइन कहाँ से आया? और यहाँ सीक्वेंस नंबर में ट्रिपल 3 (333) लिखा है। लेकिन जो हमारी दूसरी ओएमआर आई, वह बदल गई।इसके बाद इसमें जितनी भी समस्याएँ थीं, हमने उन्हें एनटीए के चैलेंज पोर्टल पर चुनौती दी। वे चैलेंज का विकल्प देते हैं। आपको बता दें कि एनटीए रिजल्ट देने से पहले ओएमआर मार्कशीट अपलोड करता है।**एंकर:** जब वे अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ओएमआर अपलोड करते हैं, तो छात्रों को दो दिन का समय दिया जाता है कि यदि किसी छात्र या छात्रा को कोई समस्या है, तो वे तुरंत ईमेल करें, जिसके बाद उसका समाधान किया जाएगा। अब चूंकि आर्या सिंह को समस्या थी, उनकी ओएमआर मार्कशीट में गड़बड़ी थी, जिसके बाद उन्होंने ईमेल किया। इस ईमेल में आपने क्या कारण बताया था?**आर्या सिंह:** मैंने बताया था—चूंकि हम उसमें ज्यादा लिख नहीं सकते थे—इसलिए मैंने उनसे कहा था कि ‘सर, मेरा 77 नंबर गायब है, 85-85 दो बार दिया गया है’। यह बात मैंने उन्हें 200 रुपये की फीस देकर चैलेंज पोर्टल के माध्यम से भेजी थी। फिर उसी दिन शाम को मुझे दूसरी अपडेटेड ओएमआर मिली, जो कि यह वाली है।य

ह अपडेटेड ओएमआर थी, जिसमें प्रश्नों के सीक्वेंस या सीरियल नंबर में जो भी गलतियाँ थीं, उन्होंने सब ठीक कर दी थीं। लेकिन इसके आखिर में जो ‘ट्रिपल 3′ था, वह यहाँ बदलकर ’38’ हो गया। यानी ओएमआर का सीरियल नंबर ही बदल दिया गया था।**एंकर:** यानी, जो ओएमआर शीट पहले आर्या के पास आई थी, उसका सीरियल नंबर आप देख सकते हैं—वह था 38233… 39, मुझे लगता है सही है? क्या मैं सही पढ़ रही हूँ?**आर्या सिंह:** नहीं मैम, इसके आखिर में ट्रिपल 3 है।**एंकर:** पूरा पढ़कर सुनाइए।**आर्या सिंह:** जी मैम, 3823323823।**एंकर:** यह ओएमआर शीट का पहला सीरियल नंबर था। इसके बाद उनके पास जो अपडेटेड शीट आई, उसका सीरियल नंबर बदला हुआ था। इसे लेकर भी आर्या सिंह का परिवार सवाल उठा रहा है। इसके बाद जो शीट उनके पास आई, उसका सीरियल नंबर क्या है? **3824838**। इस पर भी उनकी तरफ से सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर यह सीरियल नंबर क्यों बदला गया? अब मुझे बताइए, इसके बाद आपको क्या दिक्कत हुई?**आर्या सिंह:** इसके बाद जो हमारी बबलिंग (उत्तरों के गोले भरना) थी—इसकी बबलिंग और पहली ओएमआर की बबलिंग बिल्कुल एक जैसी थी, जिससे मेरे 690 नंबर आ रहे थे। लेकिन यहाँ हस्ताक्षर… जो अपडेटेड ओएमआर आई, उसमें हस्ताक्षर भले ही वही थे, लेकिन समय बदल गया। जो समय पहले 1:30 बजे था, वह अब 2:00 PM हो गया।

बाकी चीजें हमारी ठीक थीं; बबलिंग में कोई अंतर नहीं था, सीक्वेंस भी उन्होंने सही कर दिया था।ठीक है, इसके बाद 16 तारीख की रात लगभग 10:30 बजे उन्होंने अपने आधिकारिक पोर्टल पर रिजल्ट घोषित कर दिया।**एंकर:** इन दोनों मार्कशीट के हिसाब से आपने जो नंबर जोड़े थे, वे कितने थे?**आर्या सिंह:** मैम, हमने दोनों मार्कशीट के अनुसार उनकी ओर से जारी आधिकारिक आंसर-की (Answer Key) से मिलान किया था। दोनों ही मार्कशीट से मेरे 690 नंबर आ रहे थे। ओएमआर में बाकी जो भी खामियाँ रही हों, बबलिंग दोनों में एक समान ही थी।इसके बाद 16 तारीख की रात 10 बजे के आसपास उन्होंने पोर्टल पर रिजल्ट अपलोड किया, जिसे मैंने 11:38 बजे खोला।**एंकर:** 16 तारीख की रात को।**आर्या सिंह:** तो जब मैंने देखा, तो उसमें 540 नंबर थे। मुझे इसकी उम्मीद बिल्कुल नहीं थी; मुझे लग रहा था कि 600 के आसपास नंबर आएंगे। इसलिए मुझे लगा कि शायद साइट में कोई तकनीकी खराबी (ग्लिच) है। मैंने तीन-चार बार दोबारा चेक किया, लेकिन 540 ही दिखा रहा था।इसके बाद जब दोपहर करीब 2 बजे हमने अपना रिजल्ट फिर से चेक करने के लिए खोला, तो वह घटकर केवल **167** रह गया। यहाँ समय भी दर्ज है—17 तारीख को 2 बजकर 34 मिनट पर। और उनका यह 167 नंबर वाला रिजल्ट दोबारा ओपन होता है।**एंकर:** यानी उनका फाइनल रिजल्ट दो बार अपलोड किया गया। एक में उनके अंक 540 थे और दूसरे में घटकर 167 हो गए। यहाँ वे सवाल उठा रही हैं कि आखिर उनके साथ ऐसा क्यों और कैसे हुआ? इसके बाद क्या आपने मदद के लिए एनटीए से संपर्क करने की कोशिश की?**आर्या सिंह:** जी मैम, हमने एनटीए को ईमेल भी किया है। शुरुआत से मेरे साथ जो भी समस्याएँ हुईं, मैंने सब कुछ विस्तार से लिखकर उन्हें मेल किया। लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं आया। यह उनका ईमेल है—यह वाला। मैंने उन्हें यह मेल भेजा था।मेरी जितनी भी समस्याएँ थीं, मैंने इस मेल में उनका जिक्र किया। उनकी तरफ से मुझे जो-जो दस्तावेज मिले थे, वे सभी कागजात मैंने इसके साथ जोड़े थे। और दूसरा मेल मैंने शिक्षा मंत्री सर को किया था। उनकी तरफ से भी मुझे कोई जवाब नहीं मिला है। न एनटीए की ओर से कोई उत्तर आया और न ही हमारे शिक्षा मंत्री सर की तरफ से अब तक कोई जवाब मिला है।**एंकर:** अब सोचिए, जो छात्र सालों-साल तैयारी करते हैं, अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करके पढ़ाई करते हैं, और उनके माता-पिता अपने बच्चों की सफलता के लिए उतनी ही लगन से प्रयास करते हैं ताकि उनके बच्चों के सपने पूरे हो सकें… ऐसे में निराशा होना तो तय है। निराशा तब और बढ़ जाती है जब आपको यह भी पता न चले कि आपका असली रिजल्ट आखिर है क्या!यहाँ आर्या सिंह के पिता भी हमारे साथ मौजूद हैं। आइए उनसे भी बात करते हैं। सर, अगर आप थोड़ा इधर आ जाएं और हमसे बात करें। सर, यह कितनी निराशाजनक बात है कि बेटी का वर्तमान रिजल्ट क्या है, यही पता नहीं चल पा रहा है? क्योंकि जिस तरह से आप आर्या के नंबर जोड़ रहे हैं, आप कह रहे हैं कि 600 या 610 के आसपास होने चाहिए। लेकिन जो फाइनल रिजल्ट उन्होंने दिया है, उसमें कभी 540 तो कभी 167 दिखाया जा रहा है। इतने बड़े अंतर पर आप क्या कहेंगे?**राकेश कुमार सिंह (पिता):** सबसे पहले मैं अपना परिचय दे दूँ—मैं पूर्व सैनिक राकेश कुमार सिंह हूँ और कानपुर से आया हूँ, मैम। एनटीए की ओर से जो लापरवाही हुई है… हम तो 609 नंबर की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन 609 की जगह हमें 167 नंबर मिल रहे हैं, यह तो किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है।यदि एनटीए चाहे, तो मैं अपनी बेटी को दोबारा बैठाकर परीक्षा दिलवाने के लिए तैयार हूँ। प्रश्नपत्र कितना भी कठिन क्यों न हो, अगर मेरी बेटी के सच में 167 नंबर ही आते हैं, तो मैं इस परिणाम पर फिर कभी कोई सवाल नहीं उठाऊँगा। मैं चुनौती देता हूँ, मुझे अपनी बेटी पर इतना भरोसा है कि पिछले दो सालों में उसने जिस तरह से पढ़ाई की है… चाहे प्रश्नपत्र कितना भी कठिन बना दिया जाए, नीट का स्तर कैसा भी हो, अगर 167 ही आते हैं तो मैं आगे कोई दावा नहीं करूँगा।और जहाँ तक शिक्षा मंत्री की बात

है, उन पर तो अब कोई भरोसा बचा ही नहीं है। हमें नहीं लगता कि शिक्षा मंत्री या एनटीए हमें कोई न्याय दिला पाएंगे। अब तो सिर्फ प्रधानमंत्री पर ही भरोसा है। मैं एक पूर्व सैनिक हूँ और मुझे विश्वास है कि प्रधानमंत्री जी हमें न्याय जरूर दिलाएंगे। क्योंकि एक सैनिक का दर्द, दर्द ही होता है और प्रधानमंत्री जी इसे जरूर सुनेंगे। देश के एक सैनिक की बात अगर वे नहीं सुनेंगे, तो फिर किसकी सुनेंगे?**एंकर:** कानपुर से दिल्ली तक का यह सफर तय करना क्या बहुत जरूरी हो गया था?**राकेश कुमार सिंह:** हमने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि हमारी बात कोई नहीं सुन रहा था। न एनटीए सुन रही थी और न ही शिक्षा मंत्री। इसीलिए हमें जंतर-मंतर आना पड़ा, मैडम। हम जंतर-मंतर भी गए थे और वहाँ विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए। मेरी बेटी ने वहाँ मंच भी साझा किया था। इसीलिए हमें यहाँ तक आना पड़ा।**एंकर:** अब भविष्य को लेकर आपकी क्या उम्मीदें हैं? आपकी यह तैयारी कितने सालों की थी और आपने इसमें कितनी बार भाग लिया है?**आर्या सिंह:** मैम, मेरी पूरे दो साल की तैयारी थी। मैम, यह मेरा दूसरा प्रयास (Attempt) था—पहला प्रयास 2025 में और दूसरा 2026 में। इसलिए मैम, मैं एनटीए से पूछना चाहती हूँ कि हम जो दिन-रात 7-8 घंटे पढ़ाई करते हैं, इस एक परीक्षा के लिए अपनी रातों की नींद भूल जाते हैं… तो हमें एनटीए से यह पूछना है कि किस आधार पर मेरे 167 नंबर आए हैं?167 नंबर का मतलब… जैसा कि मेरे पापा ने कहा, आप मुझे दोबारा परीक्षा में बैठने का मौका दीजिए। अगर 167 आते हैं, तो हम यह लड़ाई यहीं छोड़ देंगे। 167 नंबर मेरे आ ही नहीं सकते। कोई भी छात्र पढ़ाई में कितना भी कमजोर क्यों न हो, दो साल की तैयारी में उसकी बायोलॉजिकल (जीव विज्ञान) पकड़ इतनी मजबूत हो जाती है कि वह 300 से ज्यादा नंबर तो आसानी से ले आता है। उसके बाद फिजिक्स और केमिस्ट्री चाहे जैसी भी हो, बायोलॉजी के दम पर ही 300 से अधिक अंक आ जाते हैं। 167 आने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता!अगर उनका दावा है कि 167 ही मेरा फाइनल रिजल्ट है, तो मुझे मेरी 167 नंबर वाली ओएमआर शीट भेजी जाए। मैंने उनसे ओएमआर माँगी है, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया। इसलिए मुझे मेरी 167 नंबर वाली ओएमआर दी जाए, फिर मैं देखूँगी कि वह मेरी ओएमआर है भी या नहीं, और उसी हिसाब से आगे का कदम उठाया जाएगा।**एंकर:** तो देखिए, यह आर्या सिंह हैं, जिन्होंने कानपुर से दिल्ली तक का सफर इस उम्मीद में तय किया है कि उन्हें न्याय मिलेगा या कम से कम उनके सवालों के जवाब मिलेंगे। आखिर इस पूरी घटना में किसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए? यह सवाल भी उठ रहा है।लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि जो छात्र कड़ी मेहनत करते हैं और मेहनत के बाद परीक्षा देते हैं, वे इस परिणाम से इसलिए खुश नहीं हैं क्योंकि जो रिजल्ट आया है, उसमें यह साफ ही नहीं है कि उनका अंतिम परिणाम क्या है। क्योंकि अलग-अलग तरह के जवाब दिए जा रहे हैं, दो-दो बार अलग ओएमआर अपलोड की जाती है और दो-दो बार अलग मार्कशीट जारी की जाती है।सवाल कई हैं, लेकिन इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—

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