तो, सौरभ हत्याकांड में मौत की सजा के बाद मेरठ के साहिल और मुस्कान की पहचान बदल गई है। अब, वे दोनों कैदी नंबर 395 और 396 होंगे। कल शाम 4:16 बजे, जब मेरठ जिला अदालत ने मौत की सजा सुनाई, तो मुस्कान और साहिल दोनों रो पड़े। शायद दोनों को उम्मीद थी कि उन्हें उम्रकैद मिलेगी। दोनों को काउंसलिंग दी गई। मुस्कान और साहिल ने रात में खाना भी नहीं खाया।
मुस्कान पहले से ही नवरात्रि का व्रत रख रही है। 590 दिन, 126 सुनवाई और 22 गवाह। 116 पन्नों के फैसले में जज ने कोई नरमी नहीं दिखाई। फैसला सुनाते हुए गीता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सजा देना भी एक कर्तव्य है। सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान ने जेल में पूछा कि आगे क्या होगा?
वे अपील कैसे करेंगे? दोनों के पास अब हाईकोर्ट जाने का विकल्प है। सौरभ के परिवार के सदस्य न्याय मिलने से खुश हैं। मर्चेंट नेवी में काम करने वाले सौरभ को मुस्कान और साहिल के अंधे प्यार ने मार डाला, जो उसे नीले ड्रम में पैक कर दिया था, और उन्हें अब अपनी सजा मिल गई है। लेकिन फांसी की प्रक्रिया लंबी है। पूरी रात बेचैनी में बीती। उनके चेहरों पर डर और खामोशी साफ दिख रही थी। मौत की सजा सुनाए जाने के बाद मेरठ जेल में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला बहुत व्यथित नजर आए।
जेल प्रशासन के अनुसार, दोनों दोषी रात में ठीक से सो नहीं पाए। उन्होंने रात का खाना भी नहीं खाया। सुबह नाश्ता दिया गया, लेकिन दोनों ने वह भी खाने से इनकार कर दिया। मुस्कान और साहिल दोनों को जिला जज ने मौत की सजा सुनाई है। उसके बाद, हमें भी देर रात आदेश मिला। जैसे ही उन्हें मौत की सजा मिली, वे फूट-फूट कर रोने लगे, और उन्होंने रात का खाना ले लिया था, लेकिन मुझे अभी पता चला कि उन्होंने कहा था कि वे रात में खाएंगे, लेकिन उन्होंने नहीं खाया।
जब मुस्कान ने 3 मार्च 2025 को अपने पति सौरभ की हत्या की, तो उसने अपने प्रेमी साहिल के साथ जीवन बिताने के सपने देखे थे। लेकिन सब कुछ बदल गया। जब इस भयानक घटना से जुड़े सभी सबूत अदालत में पहुंचे, तो मुस्कान और साहिल दोषी साबित हुए। उसके बाद ही अदालत ने मौत की सजा तय की। सजा की घोषणा के तुरंत बाद, दोनों दोषियों के संबंध में जेल के अंदर कानूनी नियम-कायदे लागू कर दिए गए। जेल में मुस्कान को बैरक नंबर 12B में रखा गया है। जबकि साहिल बैरक नंबर 15 में है। दोनों को जेल की वर्दी दी गई है। साथ ही, दोनों के कैदी नंबर भी फाइनल कर दिए गए हैं। साहिल का कैदी नंबर 395 है। जबकि मुस्कान का कैदी नंबर 396 है। जेल की आगे की प्रक्रिया में, उनकी पहचान इन नंबरों के आधार पर दर्ज की जाएगी। जब उन्हें निर्धारित जेल के कपड़े पहनकर रहना होगा। साहिल को सफेद कुर्ता पायजामा के दो जोड़े दिए गए हैं। वहीं, मुस्कान को सफेद और क्रीम रंग के कपड़े मिले हैं। इनमें एक साड़ी और एक सूट शामिल है। उनके नंबर आवंटित कर दिए गए हैं।
आपराधिक कैदी नंबर, जिसे सजायाफ्ता कैदी नंबर कहा जाता है। और साहिल का नंबर 395/2026 है और मुस्कान का कैदी नंबर 396/2026 है। दोनों को दो-दो जोड़ी जेल के कपड़े दिए गए हैं। साहिल को सफेद कुर्ता पायजामा दिया गया है, जो पुरुषों को दिया जाता है, और मुस्कान को महिलाओं को दी जाने वाली प्रीमियम साड़ियां और सूट दिए गए हैं। दोनों ने पहले जो काम कर रहे थे उसे जारी रखने की अपनी इच्छा व्यक्त की है। तो मुस्कान कढ़ाई का काम करेगी और साहिल वही बागवानी और खेती का काम करेगा।मुस्कान और साहिल अब सजायाफ्ता कैदी हैं।
नतीजतन, जेल के अंदर भी उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव आया है। पहचान से लेकर काम तक, सभी नियम पहले से अलग हो गए हैं। इस पूरी प्रक्रिया के बीच, इस बात पर भी गहन चर्चा हो रही है कि सौरभ राजपूत के हत्यारों को फांसी कब दी जाएगी? इस सवाल का जवाब भी केवल कानूनी रूप से ही मिल सकता है। बीएनएस की धारा 22 और 407 के अनुसार, निचली अदालत द्वारा दी गई मौत की सजा को तब तक सीधे तौर पर अंजाम नहीं दिया जा सकता जब तक कानूनी प्रक्रिया के सभी चरण पूरे नहीं हो जाते। जिला अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा की पुष्टि का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा जाएगा। दोषी मुस्कान और साहिल को इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने का अधिकार है। अगर हाईकोर्ट सजा को बरकरार रखता है, तो वे इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं।
अगर सुप्रीम कोर्ट भी मौत की सजा पर अपनी मुहर लगा देता है, तो वे राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर कर सकते हैं। अगर राष्ट्रपति भी दया याचिका खारिज कर देते हैं, तो सभी कानूनी विकल्प खत्म होने के बाद केस की फाइल वापस मेरठ जिला अदालत में आएगी। इसके बाद, जिला जज दोनों की फांसी की तारीख और वारंट जारी करेंगे। उन्हें बताया गया है कि कानूनी लड़ाई अभी बहुत लंबी है। हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक अपील होगी और फिर फाइल राज्यपाल और राष्ट्रपति के पास जाएगी। तो छह साल तक उसका बच्चा उसके साथ जेल में रह सकता है जब तक वह छह साल का नहीं हो जाता, वह नवंबर में लगभग एक साल की होने वाली है। वह उसके साथ रह सकती है।
तो वह इस बच्चे के बारे में संतुष्ट हो गई। तो, वह बार-बार अपनी बड़ी बेटी के बारे में पूछ रही थी, तो उसे बताया गया है कि अगर मिलने की अर्जी दी जाती है, तो व्यवस्था की जाएगी; अन्यथा, उसने पत्र लिखने की अनुमति मांगी थी, जो दे दी गई है।कुल मिलाकर, मुस्कान और साहिल के पास अभी भी कई कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं। लेकिन वे अपनी बेगुनाही कैसे साबित कर पाएंगे? यह सवाल हमेशा बना रहेगा। सौरभ की हत्या का खुलासा 18 मार्च 2025 को हुआ था। 54 दिनों की जांच के बाद, पुलिस ने अदालत में लगभग 1000 पन्नों की चार्जशीट दायर की। मुकदमे के दौरान, 22 गवाहों ने अदालत में अपने बयान दर्ज कराए। 590 दिन बाद, दोनों दोषियों को सजा सुनाई गई।
फिलहाल, यह कहना मुश्किल है कि इस सजा को अमल में आने में कितना समय लगेगा।निचली अदालत से मौत की सजा मिलने के बाद, मामले में अगली कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। कहा जा रहा है कि फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। ऐसे मामलों में, सजा की पुष्टि और अपील की प्रक्रिया कानून के अनुसार आगे बढ़ती है। सौरभ राजपूत हत्याकांड में सजा सुनाए जाने के बाद, मुस्कान और साहिल के लिए जेल की व्यवस्था, पोशाक और पहचान बदल गई है। अब दोनों को अलग-अलग जेलों में भेजने की तैयारी चल रही है। अगर ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो मुस्कान की मंजिल लखनऊ होगी और साहिल की मंजिल आगरा होगी। मतलब, सिर्फ उनकी पहचान ही नहीं, बल्कि उनकी जेल भ