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क्या इस सुपरस्टार ने सच में अपनी ही पत्नी को उतार दिया मौत के घाट? नवीन निश्चल का वो काला सच!

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ये माना मेरी जान मोहब्बत सजा है। मजा इसमें एक आज हम बात करेंगे 70 के दशक के एक ऐसे एक्टर की जो अमिताभ बच्चन से भी बड़ा था। जा जल्दी भाग जा नहीं बाबा नहीं बोलता हूं भाग जा नहीं बाबा नहीं। [संगीत] अरे जा जल्दी भाग जा। एक ऐसा हीरो जिसकी सिर्फ दो मूवीज ने उसे नंबर वन बना दिया था। एक समय था जब इस एक्टर के कैमियो से मूवी हिट हो जाती थी। तो हम बात कर रहे हैं गुजरे जमाने के बेहतरीन एक्टर रहे नवीन निश्चल की। ना 17 से ऊपर ना 16 से कम ना 17 से ऊपर ना 16 से। कैसे जिस लड़की के लिए उन्होंने अपनी पत्नी को छोड़ा उसी लड़की ने नवीन को खून के आंसू रुलाए। कैसे नवीन निश्चल के सगे भाई ने उनकी जिंदगी बर्बाद कर दी। क्या सच में उन्होंने अपनी ही पत्नी को मौत के घाट उतार दिया था? अमीरों के दरवाजे पर टुकड़ों के इंतजार में खड़े कुत्तों में पली हुई तू। आज तेरी यह जुर्रत कि तू मुझसे बदसलूकी करे। इस एक्टर की जिंदगी किसी मूवी की कहानी से कम नहीं है। तो चलिए जानते हैं नवीन निश्चल की अनसुनी कहानी। नवीन निश्चल का जन्म 11 अप्रैल 1946 को लाहौर में हुआ था। उनके जन्म के अगले साल ही लाहौर पाकिस्तान बन गया और अंग्रेज भारत से भाग गए। मतलब यह लालू यादव से कम नहीं थे। लालू यादव का जन्म हुआ 1948 में। हमारे यहां आने के पहले अंग्रेज भाग गया। उनके घर का पाकिस्तान बनने के बाद उनका परिवार वहां से भारत आ गया और नवीन निश्चल की पढ़ाई लिखाई बेंगलुरु से हुई। जैसे ही नवीन निश्चल जवानी के दिनों में आए तो वह बहुत अट्रैक्टिव लगने लगे थे और हर कोई उन्हें कहने लगा था। बस इस बात को नवीन ने इतना सीरियस ले लिया कि पढ़ाई लिखाई छोड़कर वो मॉडलिंग करने लगे और दीवारों से चिपक कर लड़कियों वाले पोज में फोटो खिंचवाकर अपना खर्च चलाने लगे।

ना 17 से ऊपर ना 16 से कम। तभी उन्हें किसी ने एक सलाह दी कि अगर तुम्हें हीरो बनना है तो एक्टिंग स्कूल ज्वाइन करो। और इसके बाद नवीन खुद को नवीन करने के लिए पहुंच गए भारतीय फिल्म एंड टेलीविज़ संस्थान यानी कि ड्रामा स्कूल और यहां से उन्होंने एक प्रोफेशनल एक्टर बनने की पढ़ाई की। नवीन ने नवीन बनने के लिए इतने निश्चल मन से एक्टिंग सीखी कि वह ना सिर्फ इंस्टट्यूट के टॉपर बने बल्कि वहां से गोल्ड मेडल लेकर बाहर निकले। [संगीत] डिग्री लेने के बाद नवीन पूरे निश्चल मन से मुंबई पहुंच गए और फिल्मों में काम ढूंढने लगी। अब इतने टैलेंटेड और गोल्ड मेडलिस्ट एक्टर को काम कैसे नहीं मिलता? तो उन्हें बंबई जाते ही लीड रोल में काम मिल गया और बंबई जाते ही वह हीरो बन गए। कान में [संगीत] झुमका जाल में ठुमका कमर पे चोटी लटके हो गया दिल का पुरजा। मतलब नवीन निश्चल को हीरो बनने के लिए उतना ही स्ट्रगल करना पड़ा जितना आमिर खान को नई बीवी ढूंढने के लिए करना पड़ता है। यानी कि बिल्कुल भी नहीं। बात तो सही है। 1970 में आई नवीन निश्चल की पहली मूवी सावन भादो जिससे हीरो बनकर उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। सुन सुन सुन ओ [संगीत] गुलाबी कली मेरी मेरी बात। इस मूवी की हीरोइन थी रेखा और उनकी भी यह पहली हिंदी मूवी थी। मतलब इससे पहले रेखा सिर्फ साउथ में काम करती थी और इसी मूवी से उनकी हिंदी फिल्मों में एंट्री हुई थी। मतलब अगर देखा जाए तो नवीन निश्चल ही रेखा को बॉलीवुड में लेकर आए। चुप हो जा रे [संगीत] सो जा सांवरिया रे चुप हो जा रे सो जा। सावन भादो बड़ी हिट हुई जिसके गाने भी बड़े हिट हुए। आंखें मेरी [संगीत] मैं खाना मैं खाना मैं खाना पी के हो जा दीवाना [संगीत] दीवाना और नवीन निश्चल और रेखा की जोड़ी ऐसी जमी कि रातोंरात यह जोड़ी बिना इंटरनेट के वायरल हो गई। मेरा मन घबराए तेरी रेखा इस समय केवल 16 साल की थी

और उसे देखकर किसी को हीरोइन जैसा फील ही नहीं आ रहा था। मतलब उस समय हर किसी ने रेखा को एक बदसूरत और जीरो एक्टिंग वाली लड़की कहकर नकार दिया था। लेकिन आगे चलकर इसी रेखा ने बॉलीवुड में वो रेखा खींची जिसे आज तक कोई हीरोइन पार नहीं कर पाई। आई आई आई या आ एक दर्द उठाय। [हंसी] नवीन निश्चल पहली ही मूवी से स्टार बन गए और उनके सामने मूवीस की लाइन लग गई। इसके बाद 1971 में आई नवीन की दूसरी मूवी नादान। इस मूवी में भी नवीन का लुक बड़ा अट्रैक्टिव लगा और उनकी एक्टिंग भी दमदार रही। जीवन भर ढूंढा जिसको वो प्यार [संगीत][गाना गाने की आवाज़] मिला। मूवी में उनकी दो हीरोइन थी। एक तरफ थी सलमान खान की दूसरी वाली मम्मी यानी कि हेललेन। वो आ गया। देखो देखो वो आ गया। और दूसरी तरफ थी आशा जिसे देखकर लोगों की आशा जाग गई। अरे [नाक से की जाने वाली आवाज़] इस सीन से नहीं मतलब पूरी मूवी से नवीन निश्चल को भी लोगों ने खूब पसंद किया और खासकर मूवी के गाने लोगों के दिलों में बस गए। है बादल झूम के चल जमीन [संगीत] को झूम के चल मौसम महका मेहनत हमारा जीवन मेहनत हमारा जीवन मेहनत हमारा नारा इसके बाद आई बुड्ढा मिल गया मतलब मूवी का सिर्फ नाम था बुड्ढा मिल गया बाकी मिला उसे जवान ही था यह मूवी भी गजब की थी रात खली एक ख्वाब [गाना गाने की आवाज़] में आई और गले इसके बाद आई गंगा तेरा पानी अमृत जिसमें रफी साहब का गाया हुआ यह गाना आज भी लोगों को उनकी तारीफ करने पर मजबूर करता है। गंगा तेरा पानी अमृत झरझर बहता जाए। इस मूवी के गाने भी बड़े हिट हुए और हीरोइन नवीन निश्चल को मक्खन सा लड़का बोलकर मक्खन लगा रही थी। ओ लड़के मक्खन से झगड़ मत अक्न से घुस कर ले। इसके बाद आई परवाना। यह वो मूवी थी जिसमें पहली बार अमिताभ बच्चन विलेन बने थे। यह वो समय था जब नवीन निश्चल एक स्टार बन चुके थे और अमिताभ बच्चन कुछ भी नहीं थे। मूवी से जुड़ा एक किस्सा भी बड़ा रोचक रहा। मूवी के प्रमोशन के समय नवीन निश्चल ने अमिताभ बच्चन के साथ खड़ा होने से मना कर दिया था क्योंकि नवीन निश्चल को लगता था कि वह एक स्टार हैं और वह एक साधारण से लड़के के साथ खड़े होकर फोटो कैसे खिंचवा सकते हैं। वो अलग बात है कि जब यह साधारण सा लड़का एंग्री यंग मैन बना तो उसने बॉलीवुड की दिशा ही बदल दी और जो नवीन निश्चल उनके साथ फोटो खिंचवाने को अपना अपमान समझ रहे थे वो अमिताभ बच्चन की आंधी में कहां उड़ गए पता भी नहीं चला। सोनिया ये तुम जानती हो कि यह रिवॉल्वर खाली है। मैं जानता हूं कि यह रिवाल्वर खाली है। लेकिन [संगीत] पुलिस नहीं जानती कि ये रिवाल्वर खाली है। [संगीत] हालांकि परवाना की हीरो नबी नहीं थी और विलेन अमिताभ बच्चन इसके बाद आई संसार और इस मूवी के गाने भी लोगों ने खूब सुने। बस अब तरसाना छोड़ो। यूं ही शर्माना [संगीत] छोड़ो। बस अब तरसाना नवीन निश्चल ने भी बेहतरीन काम किया और अब वो हर तरफ छा रही थी। हाथों में किताब बालों में गुलाब करना है आज किसी आई एक ऐसी मूवी जिसे आज भी बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन मूवीज में से एक माना जाता है। मूवी का नाम था विक्टोरिया नंबर 203। यह मूवी कई मायनों में बेहतरीन थी। पहली थी अशोक कुमार और प्राण साहब की जोड़ी जिसने कॉमेडी का तड़का लगाया। हैरान मैं दीवाना यह मस्ताना दोनों मिलके गाए गाना ओ हसीना दूसरी थी सायरा बानो जिसने अपनी खूबसूरती के झंडे गाड़े और तीसरा था मूवी का विलेन रंजीत जिसे दिलीप कुमार की बीवी के साथ रोमांस करने का मौका मिला था। पूरा होगा तुम्हारा इरादा मैं हूं सारी की सारी तुम्हारी। और चौथे थे मूवी के हीरो यानी कि नवीन निश्चल जिसने इस मूवी से खूब झंडे गाड़े। तू ना [गाना गाने की आवाज़] मिली तो तू ना मिली तो हम जोगी बन जाएंगे। इसके बाद आई धर्म। इस मूवी में एक बार फिर से नवीन की हीरोइन बनी थी रेखा। और यह भी नवीन निश्चल की एक यादगार मूवी बनी। यह शबाब है। हाय या गुलाब है। हिसाब कोई नहीं। यह तो बेहिसाब है और खासकर मूवी के गाने जिन्हें आज भी लोग सुनते हैं। पर माफ करना यार मैं फिर भी तेरा प्यार हूं। इसके बाद नवीन एक मल्टीस्टारर मूवी धुंध में भी दिखाई दिए। हालांकि इसमें वो मेन लीड में नहीं थे। 1973 में ही नवीन की एक और बेहतरीन मूवी आई। हंसते जख्म। इस मूवी का भी सब कुछ हिट था और खासकर इसके गाने जिन्हें लोगों ने रिपीट पर सुना और इसी मूवी का गाना था ये माना मेरी जान [संगीत] मोहब्बत सजा है जो आज भी नया लगता है मजा इसमें इतना मगर किसलिए है इसके बाद भी बरखा बहार छलिया निर्माण और पैसों की गुड़िया जैसी कई मूवीज आई पैसों की गुड़िया बनी थी सायरा बानू और नवीन निश्चल ने दिलीप कुमार की पत्नी के साथ रोमांस किया और इस मूवी का यह गाना लोगों ने खूब पसंद किया। कोई फूल ना खिलता ये कली भी ना होती। इसके बाद नवीन ने रेखा की कमर का नाप लिया और उसे सावधान किया। अरे इसे पतली कमर में ना डाल के लहंगा खिसक जाएगा। [संगीत] और जब उसने रेखा को अपने जाल में फंसा लिया। कौन हो तुम? आपको क्या लगता हूं? मुझे तो कोई चोर और डाकू लगते हो। बस ऐसा ही कुछ समझे। [चीखने की आवाज़] तो रेखा ने कहा वो मैं नहीं। इस [गला साफ़ करने की आवाज़] मूवी में नवीन ने डबल रोल प्ले किया था। मतलब हीरो और विलेन वो खुद ही थे और खुद अंग्रेजों का हुलिया बनाकर देसी खेतों में पंजाबी गाने गाते हुए रोमांस कर रहे थे। चीच गरिया [संगीत] दो तेरिया दो मेरिया। [संगीत] इसके बाद नवीन करण अर्जुन की मां के हीरो बने और राखी ने उनसे कहा मेरे सजना। इसमें भी नवीन निश्चल ने बेहतरीन काम किया और राखी गुलजार के साथ उनकी जोड़ी भी खूब जमी। इसके बाद नवीन जोरो बनी और इसमें भी उनकी हीरोइन रेखा ही बनी थी। इस मूवी में दो आइटम गर्ल थी। एक तरफ थी राजा बाबू की मां जो उस समय क्या लगती थी। हाय हाय मैं मर गई। [संगीत] और दूसरी तरफ थी बिंदु जिसे आपने हमेशा घूसड़ सास के रूप में देखा होगा। लेकिन सच में इन दो बहनों का भी एक दौर रहा है जब उन्हें देखकर लोग लार टपकाते थे। दिल वालों से प्यार कर लो। इसके बाद भी एक से बढ़कर एक आफत तुम्हारी कसम जानदार दो लड़के दोनों लड़के सबूत एक बार कहो और द वर्निंग ट्रेन जैसी एक से बढ़कर एक मूवीज में नवीन निश्चल ने काम किया। वो हर बड़ी हीरोइन के हीरो बन चुके थे और हर तरह का किरदार निभाकर हर किसी के दिल में अपनी जगह भी बना चुके थे। नवीन निश्चल वो एक्टर बन चुके थे जो दर्जनों के हिसाब से मूवी दे रहे थे। वो अलग बात है कि उनकी ज्यादातर मूवीज कब आकर चली जाती थी किसी को पता भी नहीं चलता था। नवीन निश्चल ज्यादातर बी ग्रेड की मूवीज का हिस्सा भी बनने लगे थे। जिसका परिणाम यह हुआ

कि उनकी मूवीज की क्वांटिटी तो बढ़ती गई लेकिन क्वालिटी घटने लगी। मैं लुट रही [संगीत] आसरिया मैं लग रही। रामसे ब्रदर्स की हॉरर मूवीज का भी नवीन निश्चल हिस्सा बनी और उन्होंने उनकी कई मूवीज में काम किया जिनमें सबसे चर्चित रही 1981 की दहशत जिसे उस समय लोगों ने खूब पसंद किया और रामसे ब्रदर्स की हॉरर मूवी का भी एक दौर था। मतलब उस समय उनकी हॉरर मूवी देखते हुए बच्चा पेंट में ही हग देता था। वह अलग बात है कि आज वही मूवीस फनी लगती हैं। इसके बाद भी नवीन निश्चल ने कई मूवीज में काम किया। कुछ हिट हुई और कुछ फ्लॉप। जानता है ये कौन है? ये ये दिल का खून पीने वाली डाय है। 1982 में आई थी मूवी अनोखा बंधन जिसे आपने टीवी पर कभी ना कभी जरूर देखा होगा। हालांकि इस मूवी की कहानी देवर भाभी के अंतर्गत चलती है और नवीन निश्चल इस मूवी में सिर्फ एक सपोर्टिंग किरदार जैसे ही लगते हैं। हालांकि फिर भी मूवी बहुत अच्छी थी। जिसे देखकर घर की माताएं बहनें आज भी आंसुओं की गंगा जमुना बहा देती हैं। तू इतनी दूर क्यों है मां बताना क्यों है मां? 1982 में ही अमिताभ बच्चन देश प्रेमी बने। हालांकि सिर्फ मूवी में यह मूवी बड़ी हिट हुई। अब नवीन निश्चल मैन हीरो के किरदार से हट गए थे और सपोर्टिंग किरदार निभाने लगे थे। बोलता हूं भाग जा नहीं बाबा [संगीत] नहीं। सीधा जेल जाएगा कोई बात नहीं। बड़ी मार खाएगा और उन्होंने सैकड़ों ऐसी मूवीज में काम किया जिनमें उनका किरदार बहुत ही छोटा होता था जिस पर ज्यादातर लोगों का ध्यान ही नहीं जाता था जिनमें उनकी कुछ खास मूवी रही कुंवारी बहू बाबू समुंदर मर्द की जुबान परम धर्म सोने पर सुहागा देश के दुश्मन राजू बन गया जेंटलमैन आस्था लहू के दो रंग खौफ प्यार दीवाना होता है और आशिक बनाया आपने [संगीत] आशिक बार आया आशिक बार आया आशिक [संगीत] बार आया इन सभी मूवीज में नवीन निश्चल ने छोटे-मोटे किरदार निभाए। अब उनकी उम्र ढल चुकी थी और वह एक साइड एक्टर बन चुकी थी जिसके मूवी में होने या ना होने से कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता था। वो बी ग्रेड मूवीज में भी काम कर रही थी और किसी भी तरह का किरदार निभा लेती थी। आस्था में उन्होंने रेखा के साथ ऐसे बोल्ड सीन दिए जिन्हें देखकर हर कोई शर्मा गया। मतलब अधेड़ उम्र के नवीन निश्चल को इस तरह देखना सबके लिए बड़ी बात थी क्योंकि एक समय पर वो मूवीज का चार्म हुआ करते थे। लेकिन नवीन को इससे कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ा और उनका स्तर दिन पर दिन गिरता चला गया। जिंदगी [गाना गाने की आवाज़] है जीने [संगीत] के लिए। याद करे ये दुनिया ऐसे। लेकिन बड़ी बात यह भी रही कि नवीन निश्चल ने 80 के दशक में ही सपोर्टिंग किरदार निभाना शुरू कर दिया था और सन 2010 तक वो सपोर्टिंग किरदार ही निभाते रहे। उन्होंने हर छोटा बड़ा रोल किया लेकिन उन्हें काम मिलना कभी कम नहीं हुआ। एक समय का हैंडसम एक्टर अब हीरो हीरोइन का दादा बनने लगा था और छोटे-मोटे किरदार निभाकर खुश हो रहा था। नवीन निश्चल ने आखिरी बार 2010 में आई मूवी ब्रेक के बाद में काम किया। नवीन निश्चल ने सिर्फ मूवीज में काम नहीं किया बल्कि उन्होंने छोटे पर्दे का भी रुख किया और कई बेहतरीन टीवी सीरियल में भी काम किया। उन्होंने दूरदर्शन पर कई सीरियल में काम किया जिन्हें लोगों ने खूब पसंद भी किया जिनमें सबसे खास रहे रिश्ते नाते देख भाई देख आहट दाल में काला चूड़ियां और आशीर्वाद जैसी सीरियल शामिल रहे। नहीं नहीं नहीं किसी की लिस्ट फ्लॉप नहीं है। किसी की लिस्ट हिट नहीं है। क्योंकि सबका अपना स्टाइल है। लेकिन बड़ी बात यह थी कि जो एक्टर 70 के दशक में टॉप पर चल रहा था। एक साथ छह-छह मूवीज में काम कर रहा था। वो अचानक से बर्बाद कैसे हुआ? तो नवीन निश्चल की बर्बादी का असली कारण भी वह खुद ही रहे। एक समय ऐसा आया जब नवीन अपने करियर के पीक पर थी और डायरेक्टर प्रोड्यूसर उनके दरवाजे पर लाइन में खड़ी रहती थी और नवीन निश्चल का समय बुलंदी पर था। मैं यहां खुद मरने के लिए आई थी और अगर तुम मुझे गोली मार दोगे तो मैं उल्टा तुम्हारा एहसान मानूंगी। अरे इसमें एहसान की क्या बात है? आपने इतना मार दिया। हम आपका इतना सा काम नहीं करेंगे। ये लीजिए। लेकिन इसी समय और पोजीशन ने उनके दिमाग के घोड़े शांत कर दिए। नवीन निश्चल खुद को सुपरस्टार मानने लगे थे। घमंड उनके सर चढ़कर बोलने लगा था। वह छोटे-मोटे एक्टर को अपने सामने कुछ भी नहीं समझते थे और मुंह पर ही उसकी बेइज्जती कर देते थे। परवाना मूवी से जुड़ा किस्सा बड़ा रोचक रहा। इस मूवी के हीरो नवीन निश्चल थे और अमिताभ बच्चन ने मूवी में नेगेटिव किरदार निभाया था। इस समय अमिताभ बच्चन बड़ा नाम नहीं थे। नवीन निश्चल अपने घमंड में ऐसे डूबे थे कि उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ फोटो खिंचवाने और उनके साथ खड़ा होने तक से मना कर दिया था। ये वर्दी क्या भाड़े का दिखता है तेरे को? अरे हम हैं इंस्पेक्टर खत्म चेंज पोखली पुलिस स्टेशन से स्टेशन चेंज पोखली पुलिस स्टेशन वहां का ऑफिसर मैं हूं। मतलब उस समय वो अमिताभ बच्चन को अपने सामने कुछ नहीं समझते थे। नवीन निश्चल काम को लेकर भी बहुत ज्यादा सीरियस नहीं होते थे और वह अक्सर अपनी ही चलाते थे। वह रात-रात भर पार्टी करते थे और फिर सुबह सीधे शूटिंग पर पहुंच जाते थे। जिससे शूटिंग तो नहीं हो पाती थी। उल्टा डायरेक्टर उनसे परेशान हो जाता था। जब उनकी यह हरकतें ज्यादा बढ़ने लगी, तो इंडस्ट्री में बात फैलने लगी कि नवीन निश्चल एक लापरवाह एक्टर हैं। उन्हें हीरो लेकर मूवी शुरू करना मतलब अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है और यही कारण था कि लोग उनसे किनारा करने लगे और धीरे-धीरे नवीन निश्चल को काम मिलना कम होने लगा। मुझे जो आपसे बात करनी है वह कुछ लंबी है। एतियातन कुछ ठंडा मंगवा कर रख ही लीजिए। उन्हें मेरे अपने में विनोद खन्ना वाले किरदार के लिए साइन किया गया था। जिससे शत्रुघ्न सिन्हा यह कहती श्याम कहां है? वह तो बिटो को लेकर दवा खाने गया है। आए तो उससे कह देना छेनू आया था। बहुत गर्मी है खून में तो बेशक आजा मैदान में। लेकिन बाद में नवीन निश्चल को इससे हटा दिया गया और विनोद खन्ना को उनकी जगह पर साइन कर लिया गया और बाद में यह मूवी इतनी बड़ी हिट हुई कि इसी के बाद विनोद खन्ना की किस्मत बदल गई। इसी तरह दीवार मूवी में शशि कपूर वाला किरदार भी नवीन निश्चल को मिलना था और अगर यह होता तो डायलॉग ऑफ द सेंचुरी यानी कि मेरे पास मां है। इसके लिए आज हम नवीन निश्चल को ही याद कर रहे होते। लेकिन इस रोल से भी उन्हें हटा दिया गया। मनोज कुमार की सुपरहिट मूवी रोटी कपड़ा और मकान में भी नवीन निश्चल को साइन किया गया था। लेकिन बाद में यह किरदार भी शशि कपूर को दे दिया गया और नवीन निश्चल पछताते रह गए। इन सब का मुख्य कारण था नवीन की इमेज और लापरवाही और उनका घमंड जो उन्हें ले डूबा था। पूरे 5 साल का हिसाब निकालो गौरी शंकर वरना काली शंकर बना दूंगा। दूसरा कारण यह भी था कि इन मूवीज में अमिताभ बच्चन थे जिनके साथ कभी नवीन निश्चल ने फोटो खिंचवाने से भी मना कर दिया था और उनके साथ खड़े होने को अपने इंसल्ट मानते थे। अब वही अमिताभ बच्चन उनसे बहुत ज्यादा आगे निकल चुके थे और करियर को लेकर अमिताभ बच्चन किस किस्म के इंसान हैं यह पूरी दुनिया जानती है। मतलब उन्होंने कभी किसी इंसान का भला नहीं किया और बदला लेने में वह नंबर वन रहे हैं। यही कारण था कि बाद में उन्होंने अपनी बेइज्जती का बदला नवीन निश्चल से लिया

और उन्हें हर उस मूवी से बाहर करवाया जिसमें वो काम करते थे। क्योंकि इस समय पर उनका रुतबा नवीन से बड़ा हो चुका था। सीधा जेल [संगीत] जाएगा कोई बात नहीं। मार खाएगा कोई बात नहीं। [संगीत] और यही कारण था कि अमिताभ बच्चन ने नवीन निश्चल को अपनी कई मूवीज से बाहर करवा दिया था और नवीन निश्चल भी अपना स्वाभिमान बचाते हुए उन मूवीज से बाहर निकल गए। नवीन निश्चल ने सिर्फ इंडस्ट्री के लोगों को नजरअंदाज नहीं किया था बल्कि वह जनता और मीडिया को भी एक समय पर कुछ नहीं समझते थे। किसी के साथ भी बदतमीजी कर देते थे। किसी भी रिपोर्टर को खरी-खोटी सुना देते थे और अब इन सब का नतीजा उनके सामने था। हर किसी ने उन्हें सीरियस लेना ही छोड़ दिया था। एक समय ऐसा भी आया जब उनकी खबरें आना बंद हो गई। रिपोर्टर उन्हें कवर ही नहीं करते थे। मीडिया उनसे किनारा कर चुकी थी और मैगजीन में उनके बारे में कुछ भी नहीं लिखा जाता था। जब वो किसी फंक्शन में जाते तो कैमरामैन उन्हें कवर ही नहीं करते थे। दौलत को भगवान समझने वाले उस मुर्गन से कह दो कि तीर्थ और मंदिर खरीदे नहीं जाते हैं, पूजे जाते हैं। और यह एक एक्टर के लिए बहुत दुख पहुंचाने वाली बात थी। खासकर उस एक्टर के लिए जिसने कभी आसमान की ऊंचाई देखी थी जो कभी एक साल में छह-छह मूवीज में लीड रोल में काम कर रहा था। और आज उसे कोई सीरियस ही नहीं ले रहा था। लेकिन अभी उनकी जिंदगी में असली भूकंप आना बाकी था। जो उनकी जिंदगी बदलने वाला था। तो अब हम बात करेंगे नवीन निश्चल की पर्सनल लाइफ की। मुझे अपने ही रंग में तूने रंग दिया। नवीन निश्चल ने इंडस्ट्री में आने से पहले ही देवानंद की भांजी से शादी कर ली थी। जो शिखर कपूर की बहन थी और इस तरह वो इंडस्ट्री के लोगों के खास बन गए थे। जिससे उन्हें काम मिलने में और इंडस्ट्री में अपने कदम जमाने में बहुत आसानी हुई। बाद में यह भी कहा गया कि नवीन निश्चल बहुत ज्यादा सेल्फिश टाइप के इंसान हैं। उन्होंने नीलू कपूर से भी अपने फायदे के लिए शादी की थी ताकि उनके रिश्तेदारों यानी कि देवानंद और शिखर कपूर के द्वारा वो इंडस्ट्री में अपनी जगह बना लें। नवीन निश्चल की पत्नी थी नीलू कपूर जिससे नवीन निश्चल को दो बेटियां हुई। नोबिता और नताशा। लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद जैसे ही नवीन एक्टर बने, तो उनका इंटरेस्ट अपनी पत्नी से खत्म होने लगा और वह बाहर मुंह मारने लगे। में चुभ [संगीत] गई सुई मैं जवान उनकी जिंदगी में एक दूसरी हीरोइन आ गई जिसका नाम था पद्मिनी कपिला। धीरे-धीरे नवीन ने उससे इतनी नजदीकियां बढ़ाई कि वो अपनी पत्नी और दोनों बेटियों को भूलकर उस नई लड़की के साथ प्यार की पतंग उड़ाने लगे। मतलब वो खुद दो बच्चों के बाप थे और अपनी बेटी की उम्र की लड़की के साथ प्यार के समुंदर में गोते लगा रहे थे

और वह भी इतना सीरियस होकर कि उन्होंने अपनी पत्नी को तलाक ही दे दिया। एक लड़की के प्यार में पड़कर नवीन निश्चल ने अपने परिवार को छोड़ दिया और उस समय लड़की का पल्लू पकड़ कर घूमने लगे। हम दोनों मिलके कहां से दिल के चिट्ठी लिखे। [संगीत] लेकिन उन्हें धक्का तब लगा जब उस हीरोइन ने नवीन के साथ-साथ दूसरी जगह पर भी अपना टांका फिट कर लिया और कुछ ही समय बाद वो नवीन को ठेंगा दिखाने लगी क्योंकि उसे दूसरा बड़ा फिल्म मेकर प्रकाश मेहरा मिल गया था। मतलब उस हीरोइन ने प्रकाश मेहरा के लिए नवीन को अपनी जिंदगी से लात मारकर भगा दिया। नवीन निश्चल कहीं के नहीं रहे। जिस लड़की के लिए उन्होंने अपनी पत्नी और अपने बच्चों को छोड़ा था, अब वही उन्हें छोड़कर किसी दूसरे आदमी के साथ चली गई थी। हालांकि नवीन निश्चल यहीं नहीं रुके। इसके बाद उनकी जिंदगी में तीसरी लड़की आई जिसका नाम था पिम्मा। यह भी उनकी उम्र से बहुत छोटी थी। इस लड़की के साथ भी नवीन निश्चल ने प्यार के खूब गुल खिलाए और कुछ समय तक नवीन ने इसके साथ भी मजे लिए। मन में लगे [संगीत] जो पगन वो सजन तुम बुझा दो जाने [संगीत] के बाद बड़ी बात यह थी कि यह पिम्मा भी शादीशुदा थी और अपने पति को छोड़कर नवीन निश्चल के साथ लिबिन में रह रही थी। मतलब दो बच्चों के बाप के साथ खुद के पति को छोड़कर वह लिबिन में रह रही थी और बिना शादी के पति-पत्नी बनकर अपनी जिंदगी जी रही थी। लेकिन फिर धीरे-धीरे इसके साथ भी नवीन की तू तू मेंम होने लगी क्योंकि पिम्मा को भी नवीन की हरकतें नहीं जमी और दोनों में बहस होने लगी तो नवीन निश्चल ने इसे भी छोड़ दिया। लेकिन कहानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती। इसके बाद नवीन की जिंदगी में चौथी औरत आई गीतांजलि जो शादीशुदा थी और अपने पति से तलाक ले चुकी थी। नवीन निश्चल भी अब पक्के खिलाड़ी बन चुके थे। 1996 में नवीन निश्चल ने गीतांजलि से शादी कर ली और चौथी औरत के साथ अपनी गृहस्ती बसाकर रहने लगे। मुझसे शादी करोगी? आज अभी इसी वक्त नवीन निश्चल का एक भाई भी था प्रवीण निश्चल जो नवीन के साथ ही रहता था। लेकिन उसने भी जब अपना रंग दिखाया तो नवीन के पैरों के

नीचे से जमीन खिसक गई। दोनों भाइयों में हमेशा बहस होती रहती थी और धीरे-धीरे झगड़े इतने बढ़ने लगे कि एक दिन प्रवीण ने दावा कर दिया कि यह सारी संपत्ति और घर उसका है। नवीन का कुछ भी नहीं है। मतलब इतने सालों से काम करने के बाद भी नवीन निश्चल कंगाल थे क्योंकि उनके भाई ने धोखे से सब कुछ हथिया लिया था और फिर अचानक से एक दिन नवीन निश्चल के भाई ने उन्हें उनकी पत्नी के साथ घर से बाहर निकाल दिया और नवीन निश्चल अचानक से सड़क पर आ गए। यह मेरे पुरखों की जमीन है और मैं इसे तीर समझता हूं। इस जमीन को मैं किसी भी कीमत पर नहीं बेचूंगा। और मुर्गन अपनी पसंदीदाई जमीन को किसी भी कीमत पर हासिल कर लेता है। लेकिन अभी भी नवीन निश्चल की जिंदगी में असली मूड आना बाकी था। 3 महीने के बाद ही अचानक से नवीन निश्चल की पत्नी गीतांजलि ने खुद ही अपनी जिंदगी खत्म कर ली और एक बड़े हादसे की वजह से वह इस दुनिया से चल बसी। लेकिन जाते-जाते वो एक खत छोड़ गई जिसमें उन्होंने लिखा कि नवीन निश्चल ने उनकी जिंदगी नर्क बना रखी थी। वह उन्हें मारते थे और शराब पीकर अपनी नाकामयाबी का गुस्सा उन पर निकालते थे। वह किसी जानवर से कम नहीं है। उन्होंने मेरी जिंदगी नर्क बना रखी थी और इसलिए उनके साथ जीने से अच्छा मुझे मरना लगा। इस खत के सामने आने के बाद नवीन को अपनी पत्नी क

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