आज हम बात करने वाले हैं नाना पाडकर के जीवन से जुड़ी उन तमाम बातों के बारे में जिनके बारे में लोग बहुत कम जानते हैं। अगर आप सभी नाना पाडकर की पूरी कहानी जानना चाहते हैं तो वीडियो के अंत तक हमारे साथ बने रह। साथ ही हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूलें। आज हम इस वीडियो में जानेंगे नाना पाडकर के शुरुआती जीवन के बारे में। आखिर उनका जन्म कब और कहां हुआ? उनका बचपन कैसे बीता और वे फिल्मों तक कैसे पहुंचे। इसके बाद हम बात करेंगे उनके कंट्रोवर्सी की। किन-किन अभिनेत्रियों के साथ उनका नाम जुड़ा और उनके लव अफेयर्स को लेकर क्या-क्या चर्चाएं हुई। फिर हम उनके शानदार फिल्मी सफर पर एक नजर डालेंगे। यानी उन्होंने किन-किन फिल्मों में काम किया। उनकी कौन-कौन सी फिल्में सुपरहिट रही और किन फिल्मों के लिए उन्हें सम्मान मिला यानी कि अवार्ड मिला। तो अंत में बात करेंगे उनके फैमिली के बारे में। उनकी शादी किससे हुई? वह कौन थी? उनके परिवार में कौन-कौन है? और उनके कितने बच्चे हैं? तो चलिए बिना देरी किए शुरू करते हैं नाना पाटेकर के जीवन की पूरी कहानी। तो नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुट जंजीरा में हुआ था। उनके पिता का नाम दिनकर पाटेकर था जो टेक्सटाइल प्रिंट का कारोबार करते थे। कहा जाता है एक समय उनके परिवार का कारोबार काफी अच्छी स्थिति में था। लेकिन बाद में आर्थिक परिस्थितियों के कारण सब कुछ बदल गया। परिवार को भारी नुकसान उठाना पड़ा और हालात इतने खराब हो गए कि उन्हें कठिन संघर्षों का सामना करना पड़ा।
घर की आर्थिक मदद के लिए नाना पाटेकर ने बचपन से ही छोटे-छोटे काम करने शुरू कर दिए। उन्होंने जेब्रा क्रॉसिन और दीवारों पर पेंटिंग करने के साथ-साथ सिनेमाघर के लिए बड़े-बड़े फिल्मी हॉर्डिंग भी हाथ से पेंट करने लगे थे। हालांकि इन संघर्षों के बीच भी उनके मन में फिल्मों और अभिनय के प्रति गहरा जुनून था। इसी जुनून ने उन्हें थिएटर की ओर आकर्षित किया। उन्होंने ड्रामा ग्रुप ज्वाइन किया जहां उन्हें अभिनय सिखा जहां उन्होंने अभिनय सिखा। हालांकि इन संघर्षों के बीच भी उनके मन में फिल्म और अभिनय के प्रति गहरा जुनून था। हालांकि इन संघर्षों के बीच भी उनके मन में फिल्मों और अभिनय के प्रति गहरा जुनून था। इसी जुनून ने उन्हें थिएटर की ओर आकर्षित किया। उन्होंने ड्रामा ग्रुप ज्वाइन किया जहां उन्होंने अभिनय सीखा और धीरे-धीरे अपनी प्रतिभा को निखारना शुरू किया। तो वहीं थिएटर में अभिनय करते-करते नाना पाटेकर की अलग पहचान बनने लगी। वह जहां भी मंच पर प्रदर्शन करते अपने दमदार डायलॉग और शानदार अभिनय से दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया करते थे। उनके बोलने का अंदाज शुरू से ही सबसे अलग था जो बाद में उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई। इसी दौरान मशहूर निर्देशक मुजफ्फर अली की नजर नाना पाटेकर पर पड़ी। उन्हें लगा कि इस युवा कलाकार में गजब का प्रतिभा है। इसके बाद मुजफ्फर अली ने उन्हें अपनी फिल्म कमन जो साल 1978 में रिलीज हुई थी उसमें काम करने का मौका दिया। यानी कि ब्रेक। जहां इस फिल्म में फारुख शेख और स्मिता पाटिल भी मुख्य भूमिका में नजर आई थी। कहा जाता है कि अभिनेत्री स्मिता पाटिल ने भी नाना पाटेकर की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें इंडस्ट्रीज में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। यानी उनके शुरुआती करियर में स्मिता पाटिल का योगदान भी काफीेंट माना जाता है। हालांकि गमन में मुख्य फोकस फारुख शेख के किरदार पर था। इसलिए नाना पाटेकर को उस फिल्म से ज्यादा पहचान नहीं मिल सकी।
लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे। इसके बाद नाना पाटेकर को कई फिल्मों में काम करने का मौका मिला। धीरे-धीरे उनकी पहचान मजबूत होती गई और इसके बाद आई फिल्म परिंदा जो 1989 में रिलीज़ की गई थी। इसी फिल्म ने बॉलीवुड के सबसे दमदार अभिनेताओं की सूची में नाना पाटेकर को लाकर खड़ा कर दिया। इसके बाद तो उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। तो चलिए अब बात करते हैं नाना पाटेकर के जीवन से जुड़ी उन विवादों की जो समय-समय पर सुर्खियों में बनी रही। इनमें सबसे ज्यादा चर्चाएं मनीषा कोयराला, आयशा जुल्का और तनुश्री दत्ता से जुड़े विवाद काफी हाईलाइट में रहे। तो सबसे पहले बात करते हैं मनीषा कोयराला और नाना पाटेकर के रिश्ते की। 1996 में नाना पाटेकर और मनीषा कोयराला की दो बड़ी फिल्में रिलीज हुई। पहली फिल्म थी अग्निशा जिसमें नाना पाटेकर, मनीषा कोयराला और जगी श्रॉफ मुख्य भूमिका में नजर आए थे। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और दर्शकों ने नाना पाटेकर के अभिनय को खूब सराहा। तो वहीं इसी साल उनकी दूसरी फिल्म खामोशी द म्यूजिक रिलीज हुई। इस फिल्म में नाना पाटेकर के साथ सलमान खान, मनीषा कोडाला और सीमा विश्वास भी अहम भूमिका में नजर आई थी। फिल्म खामोशी में नाना पाटेकर ने एक ऐसा कैरेक्टर किया था जो बोल और सुन दोनों नहीं सकता और उसमें उन्होंने पिता का रोल निभाया था। तो यह उनके करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण और यादगार किरदारों में से एक माना जाता है। बिना डायलॉग बोले उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया। इसके बाद भी नाना पाटेकर और मनीषा कोराला की जोड़ी एक बार फिर 1996 में रिलीज हुई फिल्म अग्नि साक्षी के बाद चर्चा में रही। तो वहीं युग पुरुष फिल्म में मनीषा कोडाला और नाना पाटेकर साथ नजर आए थे। इसी दौरान दोनों के रिश्तों को लेकर भी मीडिया में कई तरह की खबरें सामने आने लगी। यानी 1996 में लगातार दो फिल्मों में साथ काम करने के बाद नाना पाटकर और मनीषा कोराला की नजदीकियां की खबरें तेजी से फैलने लगी। उस दौर में बॉलीवुड की कई मैगजीन और अखबारों ने दोनों के रिश्ते को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मनीषा कोयराला अक्सर नाना पाटेकर के घर आया जाया करती थी। कई रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि उन्हें कई बार सुबह के समय नाना पाटेकर के घर से निकलते हुए देखा गया। हालांकि एक इंटरव्यू में हालांकि एक इंटरव्यू में नाना पाटेकर ने बताया था कि उनकी मां मनीषा कोयराला को बहुत पसंद करती थी। उनका कहना था कि मनीषा स्वभाव से अच्छी थी और अक्सर उनके घर आया करती थी।
तो वहीं उनके बेटे को भी मनीषा काफी पसंद थी। इसीलिए परिवार के साथ उनका अच्छा रिश्ता था। तो आपको बता दें कि उस समय नाना पाटेकर अपनी पत्नी नीला कांत पाटेकर से अलग रहा करते थे। हालांकि दोनों का तलाक नहीं हुआ था। लेकिन वह लंबे समय से एक दूसरे से अलग रह रहे थे। इसी वजह से नाना पाटेकर और मनीषा कोयराला के रिश्ते की खबरें लंबे समय तक बॉलीवुड की सबसे चर्चित लव स्टोरी में शामिल रही। हालांकि उस समय सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की थी कि मनीषा कोयराला नाना पाडेकर से लगभग 20 साल छोटी थी। उम्र में इतना बड़ा अंतर होने के बावजूद दोनों के रिश्ते की खबरें लगातार मीडिया की सुर्खियां बनी रही। उस दौर में कई लोगों के लिए यह बहुत हैरान करने वाली बात थी। इसी बीच दोनों ने एक और फिल्म युग पुरुष जो 1998 में रिलीज हुई थी उसमें साथ काम किया। इस फिल्म के बाद भी उनके रिश्ते को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई। इसके बाद नाना पाटेकर को फिल्म कोहराम जो 1999 में रिलीज हुई थी जिसमें उनके साथ बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन भी नजर आए थे। इस फिल्म में नाना पाटेकर का किरदार उनके बाकी रोल से काफी अलग था। तो वहीं खास बात यह रही कि फिल्म के एक गाने में वह वेस्टर्न स्टाइल में डांस करते हुए भी दिखाई दिए जो उनके करियर में बहुत कम देखने को मिला। तो वहीं कोहराम की अभिनेत्री आयशा जुल्का थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर और आयशा जुलका के बीच भी अच्छी दोस्ती हो गई थी। इसके बाद दोनों की नजदीकिया को लेकर कई तरह की खबरें सामने आने लगी। हालांकि नाना पाटेकर और मनीषा कोयराला के रिश्ते में अक्सर अनबन की खबरें सामने आने लगी थी। कहा जाता है कि दोनों ही अपने-अपने स्वभाव के कारण काफी गुस्सैल थे। जिसकी वजह से दोनों के बीच कई बार बहस हो जाती थी। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि नाना पाटेकर से पहले मनीषा कोरेला का नाम अभिनेता विवेक मुशरान के साथ जोड़ा गया था। यह भी कहा गया कि नाना पाटेकर और मनीषा कोरेला का रिश्ता लंबे समय तक नहीं चल सका। दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगी और रिश्ते में तनाव आ गया। उस समय सबसे ज्यादा चर्चा ऐसी घटना की हुई जिसमें मनीषा कोराला ने नाना पाटेकर और अभिनेत्री आयशा जुलका को एक ही कमरे में एक साथ देख लिया था। कहा जाता है कि इसी बात को लेकर दोनों के बीच काफी विवाद हुआ और इसके बाद उनका रिश्ता टूट गया। हालांकि बाद में आयशा जुलका ने भी अफवाहों को खारिज करते हुए कहा था कि नाना पाटेकर उनके सीनियर और सम्मानित सह कलाकार थे। उन्होंने साफ कहा कि उनके और नाना पाटेकर के बीच प्रेम संबंध जैसी बातें केवल अफवाह थी। लेकिन अब बात करते हैं नाना पाटेकर के जीवन से जुड़े उस विवाद की जिसने पूरे बॉलीवुड को हिला दिया था। यह विवाद किसी प्रेम संबंध का नहीं बल्कि अभिनेत्री तनुश्री दत्ता द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप से जुड़ा है। यह मामला फिल्म हॉर्न के पुलिस की शूटिंग के दौरान का है। तनुश्री दत्ता का आरोप था कि एक गाने के रिहर्सल के दौरान नाना पाटेकर ने उनके साथ अश्लील व्यवहार किया और उन्हें गलत तरीके से छूने की कोशिश की। तनुश्री दत्ता इस घटना के बाद उन्होंने तुरंत शूटिंग छोड़ दी और अपनी वेनिटी वैन में चली गई। इसके बाद उन्होंने दोबारा शूटिंग करने से इंकार कर दिया। इस घटना के चलते फिल्म की शूटिंग भी रुक गई थी। बाद में उस गाने के लिए राखी सावंत को लिया गया और उन्होंने उस आइटम नंबर की शूटिंग पूरी की। तो वहीं फिल्म की मुख्य अभिनेत्री रिमी सेन थी। तो वहीं यह मामला धीरे-धीरे मीडिया की बड़ी सुर्खियां बन गई। तनु श्री दत्ता ने कई इंटरव्यू में नाना पाटेकर पर लगाए गए आरोप को दोहराया। इसके बाद यह विवाद पुलिस तक पहुंची और लंबे समय तक चर्चा में बनी रही। तो वहीं नाना पाटेकर ने इन सभी आरोपों से इंकार किया और उन्होंने बेबुनियाद बताया।
बाद में कानूनी प्रक्रिया भी चली और इसी मामले को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से अपनी-अपनी बातें सामने रखी गई और सबकी अपनी अलग-अलग सफाई दी। अब बात करते हैं नाना पाटेकर के फिल्मी करियर के उन बेहतरीन फिल्मों की जिन्होंने उन्हें बॉलीवुड के सबसे दमदार अभिनेताओं में शामिल कर दिया। आज भी दर्शक उनकी कई फिल्में और किरदारों को बड़े सम्मान के साथ याद करते हैं। उनकी सबसे यादगार फिल्मों में परिंदा, प्रहार, क्रांतिवीर, तिरंगा, खामोशी, द म्यूजिक, गुलाम मुस्तफा, यशवंत, कोहराम, शक्ति, अपहरण, अब तक छप्पन और वेलकम जैसी फिल्में शामिल है। इन सभी फिल्मों में नाना पाटेकर ने अपने अलग-अलग अंदाज से दर्शकों का दिल जीता। अगर क्रांतिवीर की बात करें तो इस फिल्म ने नाना पाटेकर को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। फिल्म का उनका मशहूर संवाद आ गए मेरे मौत का तमाशा देखने तो व दूसरा डायलॉग था यह मुसलमान का खून है या हिंदू का बताएं इसमें से मुसलमान कौन सा है हिंदू कौन सा यह डायलॉग आज भी लोगों के जुबान पर है वहीं उनका चर्चित डायलॉग एक मच्छर आदमी को बनाया देता है आज भी बेहद लोकप्रिय है तो वहीं गुलाम मुस्तफा में उन्होंने एक गंभीर और भावनात्मक किरदार निभाया जबकि खामोशी द म्यूजिक में उन्होंने गूंगे और बहरे का रोल प्ले किया था जो कि आज भी उनकी बेहतरीन परफॉर्मेंस में गिनी जाती है। वहीं फिल्म शक्ति में उनका खतरनाक और प्रभावशाली अवतार दर्शकों को खूब पसंद आया। अब तक छप्पन में उन्होंने एक शख्स पुलिस अधिकार का किरदार निभाया। अपनी अभिनय क्षमता का एक और शानदार उदाहरण पेश किया था उन्होंने फिल्म अब तक छप्पन से। अगर वेलकम की बात करें तो इस फिल्म में उनका निभाया गया उदय शेट्टी का किरदार आज भी कॉमेडी के सबसे यादगार किरदारों में गिना जाता है। उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी सोशल मीडिया पर मीम्स और रील के रूप में खूब वायरल होते रहते हैं। यही वजह है कि नाना पाटेकर को सिर्फ एक अभिनेता ही नहीं बल्कि बॉलीवुड के सबसे दमदार कलाकारों में गिना जाता है। तो व अगर फिल्म तिरंगा की बात करें तो यह नाना पाटेकर के करियर की सबसे यादगार फिल्मों में से एक मानी जाती है। इस फिल्म में उनके कई दमदार डायलॉग आज भी लोगों के जुबान पर है और सोशल मीडिया पर अक्सर सुनने को मिल जाते हैं। तिरंगा में नाना पाठकर और राजकुमार जैसे दो दमदार कलाकारों को एक साथ लाना फिल्म में आसान नहीं था। लेकिन फिल्म के निर्देशक और निर्माता मेहुल कुमार ने यह चुनौती स्वीकार की और दोनों को एक साथ फिल्म में लाकर दिखाया। कहा जाता है कि दोनों कलाकार अपनी बेबाक छवि के लिए जाने जाते थे। हालांकि शूटिंग के दौरान दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई थी और दोनों ने एक दूसरे के साथ शानदार तालमेल के साथ काम किया। यही वजह है कि फिल्म में उनकी केमिस्ट्री दर्शकों को बेहद पसंद आई। अगर नाना पाटेकर के पूरे फिल्मी करियर पर नजर डालें तो उन्होंने बहुत ज्यादा फिल्में में काम तो नहीं किया लेकिन जितनी भी फिल्में की उनमें अपने दमदार अभिनय की एक छाप छोड़ी कि हर किरदार आज भी यादगार है। यही कारण है कि नाना पाटेकर को बॉलीवुड के
उन चुनिंदा अभिनेताओं में गिना जाता है जिन्होंने फिल्मों पर नहीं ज्यादा कैरेक्टर पर भरोसा किया और अपने अभिनय के दम पर हमेशा खुद को एक बेहतरीन कलाकार साबित किया। अब बात करते हैं नाना पाटेकर के पारिवारिक जीवन के बारे में। अपने थिएटर के शुरुआती दिनों में उनकी मुलाकात नीलांत से हुई। नीला कांत उस समय एक बैंक में नौकरी करती थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती हुई जो बाद में प्यार में बदल गई। कुछ समय बाद दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद उनके घर बेटे का जन्म हुआ। लेकिन जन्म के समय ही वह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा रहा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बच्चे की तबीयत बेहद नाजुक थी और कुछ समय बाद उसका निधन हो गया। यह घटना नाना पाटेकर और उनके परिवार के लिए बहुत ही बड़ा सदमा था। हालांकि इसके बाद उनके घर दूसरे बेटे मल्हार पाटेकर का जन्म हुआ। मल्हार ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद फिल्म निर्माण और अभिनय के क्षेत्र में भी रुचि दिखाई थी। समय के साथ-साथ नाना पाटेकर और उनकी पत्नी के रिश्ते में दूरियां आ गई। हालांकि दोनों ने कभी आधिकारिक रूप से तलाक नहीं लिया लेकिन लंबे समय तक दोनों एक दूसरे से अलग रहे। सोशल मीडिया पर समय-समय पर यह अफवाह भी फैली कि नाना पाटेकर अपने बेटे की मौत के जिम्मेदार हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनके पहले बेटे का निधन जन्म से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुआ था। ऐसा कहना है नाना पाटेकर के पड़ोसियों का। अब बात करते हैं नाना पाटेकर को मिले सम्मान यानी कि अवार्ड्स के बारे में। अपने दमदार अभिनय के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय और फिल्म फेयर अवार्डों को अपने नाम किया। यानी साल 1994 में फिल्म क्रांतिवीर के लिए नाना पाटेकर को नेशनल अवार्ड्स और बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड मिला था। इसके अलावा फिल्म परिंदा और अंगार के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड मिल चुका है। तो वहीं फिल्म अपहरण में उनके दमदार विलेन के लिए बेस्ट विलेन का फिल्म फेयर अवार्ड मिला था। हालांकि हिंदी के फिल्मों के अलावा उन्होंने मराठी फिल्मों में भी शानदार अभिनय किया जिसके लिए उन्हें मराठी सिनेमा में कई अवार्ड्स मिले हैं। जिनमें से एक बेस्ट एक्टर का अवार्ड शामिल है।
हालांकि इसके अलावा उन्हें साल 2013 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। अब बात करते हैं कि आजकल नना पाटेकर क्या कर रहे हैं। इन दिनों वह बहुत सोच समझकर फिल्म और वेब सीरीज का चुनाव करते हैं। अगर उन्हें कोई अच्छी कहानी पसंद आती है तभी वह उसमें काम करना चाहते हैं। फिल्मों के अलावा नाना पाटेकर अपना ज्यादातर समय महाराष्ट्र स्थित अपने फाउंडेशन और गांव में बिताना पसंद करते हैं। वह सादगी भरा जीवन जीने के लिए जाने जाते हैं और फिल्मी चकाचौंध से दूर रहना भी पसंद करते हैं। सामाजिक कार्यों में भी नाना पाटेकर हमेशा आगे रहते हैं। व अभिनेता मकरंद अनाजपुरे के साथ मिलकर नाम फाउडेसर चलाते हैं। इस संस्था के माध्यम से किसानों और जरूरतमंद लोगों के आर्थिक सहायता की जाती है। कई मौके पर उन्होंने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा भी समाज सेवा में लगा दिया। यही वजह है कि नाना पाटेकर सिर्फ एक बेहतरीन अभिनेता ही नहीं बल्कि एक संवेदनशील और समाजसेवी इंसान के रूप में भी पहचाने जाते हैं। अगर आप सभी को बॉलीवुड सितारों के जीवन से जुड़े ऐसे ही अनसुने किस्से और उनके बायोग्राफिक जानने में रुचि है तो हमारे चैनल को सब्सक्राइब अभी कर लें और जानकारी अच्छी लगी हो तो वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब कर लें। मिलते हैं अगले वीडियो में। धन्यवाद।