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बच जाती अगर नाना की जान! 2:30 से 5:20 के बीच क्या हुआ ?

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7 अक्टूबर की सुबह तक नाना बिल्कुल ठीक थे। फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि यह दिग्गज अभिनेता अगले दिन का सूरज नहीं देख सका? 2:30 बजे से 5:20 बजे के बीच आखिर क्या-क्या घटा? डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद सिनेमा के इस लेजेंड की सांसें क्यों नहीं बचाई जा सकीं? नाना के आखिरी पलों की यह दुखद कहानी सामने आई है।इस समय पूरा सिनेमा जगत शोक में डूबा है। हर आंख नम है और हर दिल टूटा हुआ है। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 75 वर्ष की आयु में 8 अक्टूबर की सुबह उनका निधन हो गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, नाना को गंभीर कार्डिएक अरेस्ट (दिल का दौरा) पड़ा था, जिसके बाद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।जैसे ही नाना पाटेकर के निधन की दुखद खबर आई, हर कोई सदमे में आ गया और सभी के मन में एक ही सवाल उठा: जो नाना पाटेकर महज चार दिन पहले एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे, अचानक उनकी जिंदगी का इस तरह अंत कैसे हो गया? 7 अक्टूबर की रात 2:30 बजे से लेकर 8 अक्टूबर की सुबह 5:20 बजे के बीच ऐसा क्या हुआ?नाना पाटेकर के अंतिम पलों की पूरी कहानी गोवा के मणिपाल अस्पताल के डॉक्टर के बयान से सामने आई है।

डॉक्टर के मुताबिक, अस्पताल पहुंचने से पहले ही नाना पाटेकर का निधन हो चुका था। उन्हें ‘ब्रॉट डेड’ (मृत अवस्था में) अस्पताल लाया गया था। हालांकि, इससे पहले उनकी जान बचाने के लिए घर पर ही सीपीआर (CPR) दिया गया था।आपको बता दें कि नाना पाटेकर अपने गोवा वाले घर पर थे जब देर रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। रात करीब 2:30 बजे उन्होंने अपने एक दोस्त को मैसेज किया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं लग रही है। उन्होंने शरीर के बाएं हिस्से में असहजता और दर्द महसूस होने की बात लिखी थी। लेकिन देर रात होने के कारण दोस्त तुरंत मैसेज नहीं देख सका।सुबह करीब 4:00 बजे जब दोस्त नाना के घर पहुंचा, तब तक उनकी हालत काफी बिगड़ चुकी थी।

डॉक्टर के अनुसार, उस समय नाना को सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही थी और वे पसीने से तर-बतर थे। दोस्त ने तुरंत उनकी देखभाल की और फिर नाना के केयरटेकर को बुलाया। इसके बाद उन्हें बचाने की जद्दोजहद शुरू हुई।> > डॉक्टर का बयान: “नाना पाटेकर को करीब 4:30 बजे मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था और सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हमने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उन्हें अस्पताल मृत अवस्था में ही लाया गया था। लगभग 45 मिनट से एक घंटे तक लगातार कार्डिएक मसाज दी गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।”> > > > > डॉक्टर के अनुसार, जब तक एम्बुलेंस पहुंची, नाना ने प्रतिक्रिया देना बंद कर दिया था। इसके बाद उनके घर पर ही सीपीआर देना शुरू किया गया। नाना को 4:20 से 4:30 के बीच मणिपाल अस्पताल लाया गया।

लेकिन तब तक वे पूरी तरह से अचेत (unresponsive) हो चुके थे। डॉक्टरों ने लगातार करीब 45 मिनट तक सीपीआर और कार्डिएक मसाज दी, लेकिन उनके शरीर में कोई हलचल नहीं हुई। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद नाना को बचाया नहीं जा सका और फिर सुबह करीब 5:20 बजे नाना पाटेकर को मृत घोषित कर दिया गया।> > > > > डॉक्टर ने आगे बताया: “उन्होंने रात करीब 2:30 बजे अपने दोस्त को मैसेज भेजकर बताया था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। लेकिन रात का समय होने के कारण दोस्त मैसेज तुरंत नहीं देख पाया।

इसके बाद उसने फोन किया और करीब 4:00 बजे उनके घर पहुंचा। उस समय तक उन्हें बहुत पसीना आ रहा था। उन्होंने तुरंत प्राथमिक उपाय किए, लेकिन नाना धीरे-धीरे बेहोश हो रहे थे। फिर उन्होंने केयरटेकर को भेजा, जो हमारे अस्पताल के पास ही रहते हैं। जब हमारी इमरजेंसी रिस्पॉन्स (ER) टीम वहां पहुंची, तब तक वे पूरी तरह से अचेत हो चुके थे, इसलिए टीम ने रास्ते में ही कार्डिएक मसाज शुरू कर दी। उन्हें कार्डिएक मसाज देते हुए ही 4:20 या 4:30 बजे अस्पताल लाया गया। हमने यहां भी हर संभव प्रयास किया, लेकिन उन्हें मृत अवस्था में ही लाया गया था।”> > > नाना पाटेकर के अचानक चले जाने की खबर से पूरे बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके फैंस भावुक हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर नाना पाटेकर को सही समय पर चिकित्सीय सुविधाएं मिल जातीं, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। लेकिन शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था। 75 वर्ष की आयु में नाना पाटेकर हम सभी को अलविदा कह गए।

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