कभी-कभी कुछ लोग अपनी छोटी सी उम्र में ऐसा काम कर जाते हैं, जो उन्हें हमेशा के लिए लोगों के दिलों में जिंदा कर देता है। आज की कहानी भी एक ऐसे ही छोटे से हीरो की है। जिसकी उम्र तो सिर्फ आठ साल थी लेकिन उसका हौसला पहाड़ों से भी बड़ा था।
रूस [संगीत] के कागज मुस्लिम आबादी वाले इलाके के इंगोशतिया में रहने वाला आठ साल का खिजल दिलचे अपने दोस्तों के साथ नदी के किनारे खेल रहा था। हर तरफ हंसीज़ाक का माहौल था। किसी को क्या पता था कि अगले ही कुछ लम्हों में सब कुछ बदल जाएगा।
अचानक खिजिर का एक दोस्त तेज बहाव वाली सुनजा नदी में गिर गया। वहां मौजूद बच्चे घबरा गए। बुखार मच गई। ऐसे वक्त में अक्सर लोग मदद के लिए बड़ों को बुलाते हैं। लेकिन खिजर ने कुछ और ही सोच लिया। बताया जाता है कि उसने अपने दोस्तों से कहा, क्या हम मर्द नहीं है? हमें उसे बचाना चाहिए।
यह अल्फाज कहकर आठ साल का वो बच्चा बिना एक पल गवाए उफती नदी में कूद पड़ा। उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर अपने दोस्त कोके मुंह से बाहर निकाल दिया। उसका दोस्त बच गया। लेकिन खिजे खुद तेज लहरों की गिरफ्त में। कुछ ही लम्हों में वो सबकी नजरों से ओजल हो गया।
जब यह खबर पूरे इलाके में फैली तो सिर्फ एक घर में बल्कि पूरा काकस खिद्र कीतलाश में निकल पड़ा। इंगुश चेचन दागिस्तानी कराचाय बलकार अदिगे और कई दूसरी कौमों के लोग एक साथ जमा हो गए।
10,000 [संगीत] से ज्यादा लोग सैकड़ों वालंटियर्स और लाखों दुआएं। हर कोई बस एक ही उम्मीद लगाए बैठा था कि काश खिजर वापस मिल जाए। पूरी दुनिया से लोग उसके लिए दुआ कर रहे थे। सोशल मीडिया पर सिर्फ एक ही नाम था खिजर। लेकिन आठ दिनों तक चली तलाश के बाद वो खबर आई जिसने लाखों दिलों को तोड़ दिया।
खिजर का जिस्म बरामद कर लिया गया। सिर्फ 8 साल का यह बच्चा दुनिया से चला गया। लेकिन जाते-जाते वो इंसानियत, दोस्ती और कुर्बानी का एक ऐसा सबक दे गया जिसे शायद आने वाली भी याद रखें।
खिजर ने जो बहादुरी दिखाई वो बहुत से बड़े लोग भी शायद ना कर पाते। l