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आखिर क्यों कोई बड़ी अभिनेत्री दारा सिंह के साथ काम करने को तैयार नहीं थी? फिर मुमताज ने जो किया..

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हेलो दोस्तों, स्वागत है आपका एक बार फिर से हमारे YouTube चैनल एमके केसरी में। तो दोस्तों, अपने जमाने की मशहूर ग्लैमरस अभिनेत्री मुमताज 79 साल की हो चुकी हैं। मुमताज 70 के दशक की सबसे टॉप की हीरोइन मानी जाती हैं। उनकी ज्यादातर सुपरहिट फिल्में राजेश खन्ना के साथ दर्ज हैं। लेकिन उससे भी पहले मुमताज ने पहलवान दारा सिंह के साथ कुल 16 फिल्में की हैं। तब वह दारा सिंह से उम्र में आधी छोटी थी। तो दोस्तों, कैसे बनी थी यह बेमेल जोड़ी? आइए जानते हैं इसकी पूरी जानकारी के बारे में और इसकी जानकारी देने से पहले अगर आप हमारे चैनल पर नए हैं, तो हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर लें ताकि आपको भी इसी प्रकार की जानकारियां मिलती रहे।

तो दोस्तों, 1969 में जब राजेश खन्ना की दो रास्ते फिल्म आई तब मुमताज की बियां कुछ यूं चमकी जिसकी चकाचौंध से बॉक्स ऑफिस ही नहीं गुलजार हुआ बल्कि दोनों सितारों की केमिस्ट्री भी जगमगा उठी। उनकी फिल्मों के गाने बििया चमकेगी, चूड़ी खनकेगी या फिर यह रेशमी जुल्फें यह शराबी आंखें इन गानों की तरह ही फिल्म इंडस्ट्री में एक सदाबहार जोड़ी का आगाज हुआ। आगे चलकर इस जोड़ी की कई कामयाब फिल्में आई। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिल्वर स्क्रीन पर राजेश खन्ना से भी पहले मुमताज की जोड़ी मशहूर पहलवान दारा सिंह के साथ चमकी थी। वह एक बेमेल जोड़ी थी। मुमताज कम सीन और नई थी। जबकि दारा सिंह उनसे दो गुनी उम्र में बड़े थे और लोकप्रिय भी। मुमताज ने अमिताभ बच्चन के साथ भी महज एक फिल्म बंधे हाथ 1973 में काम किया था। फिल्मी पर्दे पर दारा सिंह और मुमताज की बेमेल जोड़ी की कहानी बहुत ही दिलचस्प है। कहानी 60वें दशक के शुरुआती सालों की है।

यह जोड़ी मजबूरी में बनी थी। दारा सिंह अपनी पहलवानी के दाव पेच से दुनिया भर में मशहूर हो चुके थे। उनकी प्रसिद्धि का अपना ग्लैमर था। दर्शकों में उनको देखने का एक अलग ही क्रेज था। वह देवानंद या शमी कपूर की तरह एक ग्रेड की फिल्मों में भले ही रोमांटिक रोल नहीं करते थे, लेकिन रिंग के भीतर एक पहलवान किरदार का करिश्मा जरूर दिखाते थे। जिसका अपना दर्शक वर्ग था। उधर मुमताज का भी यही हाल था। अभिनय की शुरुआत सन 1958 में लाजवंती फिल्म से 11 साल की उम्र में ही कर दी। इसके बाद भी उन्होंने सन 1963 में स्त्री या फिर सेहरा जैसी बी ग्रेड की फिल्मों में रोल किए। लेकिन कोई बड़ा मौका नहीं मिला था। इस वक्त मीना कुमारी, नरगिस, मधुबाला, वैजयंती माला जैसी बड़ी अभिनेत्रियां एक ग्रेड की फिल्मों में मुख्य रोल पा रही थी। मुमताज बेशक दिखने में जितनी खूबसूरत रही नृत्य कौशल में भी उतनी ही पारंगत थी। हालांकि उनके नृत्य परंपरागत कम बल्कि मॉडर्न ज्यादा होते थे।

यही दौर था जब दारा सिंह भी फिल्मों में अभिनय कर रहे थे। वह फिल्म निर्माण में पैसे भी लगाते थे। दोनों की जोड़ी बनने का किस्सा बड़ा अनोखा है। दरअसल दारा सिंह की पर्सनालिटी ऐसी थी कि कोई भी बड़ी हीरोइन उनके साथ अपोजिट रोल करने से मना कर देती थी। हीरोइन का तर्क था कि दारा सिंह की पर्सनालिटी के आगे उनकी छवि उभर नहीं पाएगी और उनके करियर को इससे नुकसान होगा। ऐसे में दारा सिंह को अपनी फिल्मों के लिए हीरोइनें बहुत मुश्किल से मिलती थी। साल 1963 की फिल्म फौलाद में दारा सिंह और मुमताज को पहली बार साथ-साथ काम करने का मौका मिला था। इसका किस्सा सीने प्लॉट को दिए एक इंटरव्यू में दारा सिंह ने खुद ही बयां किया था। मुझे फौलाद फिल्म पर काम शुरू करना था।

निदेशक मोह हुसैन ने कहा कि मैंने सभी टॉप की हीरोइनों से संपर्क किया है। लेकिन कोई भी तैयार नहीं हो रही है। यहां तक कि दूसरे दर्जे की अभिनेत्रियों से भी संपर्क किया है लेकिन वे भी तैयार नहीं है। अगर आप कहे तो एक नई लड़की है। उसे हीरोइन ले लूं। दारा सिंह ने इसके बाद कहा कि एक दिन जब हम सेट पर शूटिंग कर रहे थे। वहीं मुमताज अपनी बड़ी बहन के साथ वहां मौजूद थी। उसे देखकर डायरेक्टर दौड़ता हुआ मेरे पास आया और पूछा कि क्या हम इस लड़की को हीरोइन के लिए ले लें? तो मैंने कहा यह तुम्हारी इच्छा है। वह तब करीब 15 से 16 साल की थी। हम दोनों ने उस फिल्म में साथ-साथ काम किया और संयोगवश वह फिल्म हिट हो गई। वास्तव में जो हाल दारा सिंह का था, वही हाल मुमताज का भी था। इस समय एक तो बड़ी हीरोइनों का अपना जलवा था। उनके बीच मुमताज को जगह बनाने में भारी संघर्ष का सामना करना पड़ रहा था।

बड़े एक्टर की हीरोइन बनने का मौका नहीं मिल पा रहा था। आपको जानकर हैरत होगी कि जिस साल फौलाद फिल्म में मुमताज ने दारा सिंह के साथ काम किया था तब उनकी उम्र महज 15-16 साल थी। जबकि दारा सिंह 35 साल के प्रसिद्ध पहलवान थे। मुमताज ने अपने अनेक इंटरव्यूज में बताया है कि उस समय उनके पास दारा सिंह की हीरोइन बनने के सिवा दूसरा कोई विकल्प नहीं था। मजबूरी दोनों तरफ थी। एक तरह से विकल्प की मजबूरी ने हमारी जोड़ी बना दी। इसके बाद दोनों कलाकारों की एक दो नहीं बल्कि कुल 16 फिल्में आई और उनकी साथ की फिल्में वीर भीमसेन सैमसन हरकुलस टार्जन कम्स टू दिल्ली टार्जन एंड किंग कंग सन ऑफ हातिम ताई सिकंदर एआम रुस्तम ए हिंद जादुई अंगूठी डाकू मंगल सिंह इत्यादि तो दोस्तों आपको बता दें कि दारा सिंह के साथ इन बी ग्रेड की फिल्मों में काम करने के दौरान ही मुमताज की अभिनय प्रतिभा पर देवानंद से लेकर राज खोजला जैसी बड़ी हस्तियों की नजर पड़ चुकी थी और देवानंद ने जीतन अमान से पहले मुमताज को ही हरे रामा हरे कृष्णा में हिप्पी गर्ल का रोल ऑफर किया था। लेकिन मुमताज ने उसे करने से इंकार कर दिया। 70 के दशक के अंत तक आते-आते मुमताज और दारा सिंह के बीच किन्हीं मुद्दों पर विवाद हो गया। इसके बाद उनकी एक साथ फिल्में आनी बंद हो गई। तभी राज खोसला ने उन्हें जब राजेश खन्ना के साथ दो रास्ते में बतौर अभिनेत्री मौका दिया तो बिया की चमक ने बॉक्स ऑफिस को गुलजार कर दिया और दोनों कलाकारों की किस्मत भी चमक उठी। तो दोस्तों, यह जानकारी आपको कैसी लगी? अच्छी लगी तो लाइक करें, सब्सक्राइब करें और बने रहे हमारे चैनल पर। तब तक के लिए धन्यवाद।

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