ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामिनई के मारे जाने के 4 महीने से अधिक समय बाद उनकी श्रद्धांजलि सभा शनिवार 4 जुलाई से तेहरान में शुरू हो गई। ईरानी अधिकारी इसे सदी का अंतिम संस्कार बता रहे हैं। ईरानी अधिकारियों के अनुसार करीब डेढ़ से 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। तैयारियों का स्तर ईरान में किसी भी सरकारी समारोह की तुलना में अभूतपूर्व बताया जा रहा है। इससे पहले शुक्रवार को ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामिनई के लिए शोक सभा आयोजित की गई।
शनिवार को शुरू होने वाले अंतिम संस्कार से पहले लाखों लोग अपने सर्वोच्च नेता को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। माना जा रहा है कि इस सभा में 100 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इन सबके बीच एक नाम जिसकी गैर मौजूदगी की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वो है अली खामिनई के बेटे और ईरान के नई सुप्रीम लीडर मुस्तफा खामिनई की। मुस्तबा अपने पिता के शोक सभा में शामिल नहीं हुए। मुस्तबा खामिनई के जनाजे में शामिल नहीं होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिया परंपरा के मुताबिक कब्र में पहली तीन मुट्ठी मिट्टी कौन डालेगा? आमतौर पर यह जिम्मेदारी मृतक के सबसे करीबी पुरुष वारिस की होती है। शिया इस्लामी थियोलॉजी के मुताबिक हर मृतक का एक कानूनी वारिस होना जरूरी माना जाता है।
ग्रैंड अयातुल्लाह अली अली सिस्तानी के फतवों पर आधारित किताब इस्लामिक लॉज़ ऑफ डेथ एंड बर के मुताबिक किसी पुरुष की मौत के बाद उसका बेटा ही मिट्टी डालने का पहला जिम्मेदार व्यक्ति होता है। वहीं पूरे दफ़न की व्यवस्था की निगरानी करता है। अगर बेटा या कोई करीबी रिश्तेदार मौजूद नहीं हो तो यह जिम्मेदारी इलाके के वरिष्ठ इमाम को दी जाती है। यही नियम अयातुल्लाह अली खामने के जनाजे में भी लागू किए जा रहे हैं। शिया इस्लामी कानून असाधारण परिस्थितियों के लिए भी रास्ता बताता है।
अगर सुरक्षा खतरे या किसी अन्य वजह से परिवार का सदस्य अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाता तो वरिष्ठ धार्मिक नेता या स्थानीय इमाम पूरी प्रक्रिया को पूरा कराते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि जनाजा धार्मिक नियमों के अनुसार पूरी गरिमा और सम्मान के साथ संपन्न हो। ईरान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया है कि मिट्टी डालने का अधिकृत वारिस कौन होगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है किकिकि खामने का पार्थिव शरीर लगभग 4 महीने तक सुरक्षित रखा गया था। इसीलिए इस पूरी प्रक्रिया की तैयारी पहले ही गोपनीय तरीके से कर ली गई थी। शुक्रवार को देश के राजनीतिक और सैन्य नेता उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए इकट्ठा हुए।
अली खामने की मौत मधेपुर में शुरू हुए संघर्ष के दौरान अमेरिका इजराइल के हमलों में हुई थी। उसका शव अंतिम संस्कार से पहले तेहरान की ग्रैंड मौसाला में रखा गया था। तेहरान से आई तस्वीरों में शोक मनाने वालों को खामने के ताबूत को जिस पर ईरान का झंडा लिपटा हुआ था। ग्रैंड मौसाला में ले जाते हुए देखा गया। अंतिम संस्कार से पहले के समारोह में काले कपड़े पहने लोगों की भीड़ जमा हुई। ताबूत को लाल फूलों और लटकी हुई सफेद चितड़ी की सजावट के बीच रखा गया था। देश दुनिया की ताजा खबरें और वीडियोस के लिए अभी डाउनलोड करें पत्रिका ऐप।