इस राज को कभी बाहर आने ही नहीं देगा कि सोने की कीमत असल तय करता कौन है? 35,000 से 75,000 कब पहुंच गया? 75,000 से 1.5 लाख कब पहुंच गया? फिर वो 2 लाख भी टच करने लगा। आप देखिए यह यात्रा सोने की और वही खेल यह सारा खेल चल रहा है कहां से? साउथ मुंबई से। अब हैरानी की बात यह है कि ये जो 17 बैंक हैं वो बैंक क्यों इस तरह के धंधे में शामिल है? ये 60 ही डीलर को थोक में सोना क्यों उपलब्ध कराते हैं?
इनके पीछे अंडर हैंड डील क्या है? बैंक यह कह सकता है कि हम हिफाजात तरीके से सबसे डील नहीं कर सकते हैं। तो हम डीलिंग पार्टनर्स जो है उसको सीमित रखना चाहते हैं। उनके साथ हम डील कर सकते हैं। फिर वो बाजार को नियंत्रित करें। मतलब अगर वो 60 लोग आज चाह ले कि सोने की कीमत हमें कल ₹00 तक ले जाना है। बढ़ा देना है। ₹1.5 लाख है तो उसको 2 लाख पहुंचा देना। यह 60 लोग चाहे तो यह 60 लोग पहुंचा देंगे। 60 लोग वह तय कर देंगे जो सोने की कीमत को घटाना है या बढ़ाना है।
अब बैंक को तो फायदा हो रहा है। भाई बैंक में सोने सोना लाया ही है बैंक किसी के लिए। बैंक कोई मोरल इंस्टीट्यूशन तो है नहीं। वह तो शुद्ध और शुद्ध प्रॉफिट पर टिका हुआ है। तो बैंक वहां से अपना सोना खरीद के ला रहा है। तो जाहिर है कि वह अपने सोने को बेचना चाहेगा अधिक से अधिक कीमत पर और अधिक से अधिक कीमत ये छोटे-मोटे खुदरा व्यापारी तो दे नहीं सकते। तो वो एक लिमिटेड लोगों के साथ डील करता है। तो यह 50 से 60 ही लिमिटेड डीलर्स हैं जिसके साथ ये 17 के 17 बैंक डील करते हैं। अब कल्पना कीजिए जो राजेश एक्सपोर्ट है वो गारमेंट में था। यकायक वो सोने की माइनिंग और सोने की रिफाइनिंग वाली कंपनी खरीद ली स्विट्जरलैंड में और वहां रिफाइनिंग करने का काम शुरू किया गया और रिफाइनिंग करके जो सोने का वैल्यू्यूएशन है उस वैल्यूएशन को रुपीस में ट्रांसफर कर दिया और अपना मार्केट कैप ले चला गया।
15 लाख करोड़ और इस पर वो खेल शुरू कर दिया सोने के वैल्यू्यूएशन जो वैल्यू्यूएशन इनटेंजिबल है टेंजिबल नहीं है जिसे आप देख नहीं सकते हैं मतलब आप मान लीजिए कि सोने की कीमत जो है वह आप मन में मान लें कि भैया इतना वैल्यू्यूएशन का हो सकता है हमारे पास गोल्ड इतना वैल्यू्यूएशन का गोल्ड है और उस वैल्यू्यूएशन को वो स्टॉक एक्सचेंज में घेर रहा था। जैसे कि शेयर मार्केट में या आपके पास कोई स्टॉक है और आप बैंक के पास जाए और बैंक को बोले कि मेरे पास 15,000 करोड़ का स्टॉक है। अब बैंक कहेगा कि हां ठीक बात है। 15,000 करोड़ का स्टॉक है। 15,000 करोड़ बैंक ले लेती है और आपको 20,000 करोड़ लोन दे देती है। अब वहां तो स्टॉक है। वहां तो उनके पास कैश नहीं था। तो क्या था? स्टॉक था। शेयर था। तो शेयर वो जमा करता है बैंक में और ₹00 करोड़ ले लेता है। इसीलिए कॉरपोरेट क्या करता है? अपने बुक्स एंड अकाउंट्स में लोन एक्सपेंडिचर खर्चा देनदारी ज्यादा दिखाता है और टैक्स रिलैक्सेशन लेता है कि हमारा खर्च ज्यादा हो रहा है। हमें टैक्स में रिलीफ दीजिए। हमारे पास तो इतने बैंक का लोन है। और वह लोन कैसे लिया? वह कोई चल अचल संपत्ति नहीं रख दिया। अचल संपत्ति नहीं रखा है वहां पर वह एक वैल्यूएशन को बैंक में मोरगेज कर दिया यही खेल चलता है टैक्स तो हम और आप दे रहे हैं मिडिल क्लास दे रहा है जिनको सीधासीधी टेंजिबल टैक्स आपको देना पड़ता है ये इनकम है ये आपका टैक्स आपको पे करना पड़ेगा बैंक में आपके यहां इतना पैसा क्रेडिट हुआ उसका 12 महीने का निकाल लेगा भैया ये क्रेडिट हुआ है आपके अकाउंट में तो ये क्रेडिट हुआ है तो ये पूरे आपके टैक्सेबल लायबिलिटी है अगर वो वो टैक्सेबल जो स्लैब है उसमें फॉल कर रहा है।
तो आपको टैक्स पे करना पड़ेगा। इंडिविजुअल के अकाउंट में अगर अगर कंपनी में भी जा रहा है तो आपको बुक्स एंड अकाउंट दिखाना पड़ेगा। इस तरह से चल रहा है कॉमन मैन के लिए साधारण लोगों के लिए। लेकिन जो बड़े कॉरपोरेट्स हैं उनका खेल अलग चल रहा है। वो कोई उनको टैक्स रिलैक्सेशन आप देखते हैं ना उनको टैक्स रिलैक्सेशन कैसे मिलता है? 2% 3% 4% या पूरा का पूरा लोन वेव ऑफ हो जाता है। क्यों? क्योंकि वो स्टॉक मार्केट में खेल रहे होते हैं सारा। स्टॉक मार्केट में स्टॉक मार्केट का शेयर वो बैंक में देते हैं। बैंक से लोन लेते हैं और फिर उसी लोन से फिर स्टॉक मार्केट में फिर शेयर खरीद परचेस शुरू कर देते हैं। फिर उसका वैल्यू्यूएशन आगे बढ़ा तो फिर वो शेयर कर देते हैं।
मतलब लोन को रीप करने के लिए फिर वो दूसरा लोन ले लेते हैं। इस तरह का एक साइकिल स्टॉक मार्केट में कॉरपोरेट्स जो बड़े-बड़े बिजनेस घराने आप देख रहे हैं वो चलाते रहते हैं और बुक एंड अकाउंट उनका बिल्कुल परफेक्ट रहता है। इस तरह का खेल उनका चलते रहता है। अभी वही खेल वह जो राजेश जिन्होंने 12 लाख 15 लाख करोड़ का घोटाला किया वही खेल सोना के वैल्यू्यूएशन से वह स्टॉक मार्केट में खेल रहा था।
लेकिन अब ये जो 50 60 डीलर्स हैं ये अगर एक साथ मन बना लें कि साहब हमें सोने के प्राइस को ऊपर ले जाना है तो उन्हें कौन रोक लेगा? उस 50 60 को आप ढूंढते रह जाएंगे मिलेगा नहीं। आप ताकत लगा लीजिए कि कौन है 50 60 डीलर कुछ का आएगा नाम कुछ का नाम नहीं आएगा वो सब नेपथ्य में है पर्दे के पीछे है लेकिन सरकार को इस बात की जानकारी है कि यह पर्दे के पीछे से 50 60 लोग हैं जो पूरे सोने के बाजार को नियंत्रित कर रहे हैं।
अब अगर प्रधानमंत्री ने कह दिया सोना मत खरीदो। वह जो 50 60 लाख जो अभी तक उनकी हज़मनी चल रही थी उनका ही आदेश चल रहा था। उनके ऊपर अंकुश लग गया और उनको लगा कि साहब ये जो बैंक सोना खरीद रही है ये हमारा डॉलर लेके जा रही है। सोना खरीदते जा रही है। हमको पे करना पड़ता है डॉलर। हमको डॉलर में पे करना पड़ता है। हमारा जो रिजर्व डॉलर है वो कहीं ना कहीं तो जा ही रहा है ना। तो यह डॉलर कब तक हम अपना खपाते रहेंगे? और यह खेल कौन कर रहा है? वह 50 60 लोग कर रहे हैं। यह हमारे सोने के मार्केट को आगे बढ़ाते जा रहे हैं। डिमांड भी कम होने नहीं दे रहे हैं। बल्कि महंगा होते जा रहा है तब भी यह सोना बेचे जा रहे हैं।
तो इस खेल को पकड़ा जाए। मोदी ने भांप लिया। मोदी के सलाहकारों ने मोदी को समझाया कि साहब यह खेल चल रहा है। तो यह दोनों काम हो सकता है। एक तो सोने के कंजमशन पर भी रोक लगे जिसकी वजह से हमको डॉलर ज्यादा एक्सपेंड करना पड़ रहा है। डॉलर हमारा विदेशी मुद्रा भंडार खत्म हो रहा है। क्योंकि सोने खरीदने के लिए हमें डॉलर में पे करना पड़ता है। रुपैया थोड़ी पे करते हैं हम। सोना खरीदते हैं तो डॉलर देते हैं। तो डॉलर वहां ज्यादा खपत हो रहा है। 99% हम इंपोर्ट ही कर रहे हैं। हमारे यहां कोई सोना है नहीं। तो इसका इंपोर्ट सबसे ज्यादा है और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंजमशन का मार्केट भारत है। ये तो सबसे बड़ी आबादी है। ऊपर से यहां लोगों को दिखाने का शौक है साहब। सोना नहीं खरीदे तो जीवन इनका खत्म हो जाएगा। मर जाएंगे ये। महिलाएं यहां पर सोना के लिए जान गवा सकती है। उनके दिमाग में भर दिया है।
महिला क्या पुरुष भी सारे लोग सोना सिकड़ी चैन पहन करके देखते नहीं है। ठेकेदार कैसे चलते हैं? रियल स्टेट वाले, बड़े-बड़े अंगूठी वाले, बड़े-बड़े सीकड़ी पहनने वाले तो सोने का बड़ा बिस्किट सोने का, स्मगल सोने का हर तरह का धंधा यहां पर सोने में चल रहा था और खजाना खाली हो रहा था सरकार का और वो 50 60 आदमी मिलकर के इन कनाइबेंस विद बैंक वो सारा खेल चला रहे थे। मोदी ने कह दिया कि भैया साल भर सोने कम खरीदो। इशारा उसी 60 लोगों को है कि धंधा बंद करो। यह काला खेल जो चल रहा है इस खेल को तुम बंद करो और नहीं तो अब सरकार कोई रेगुलेशन लाएगी।
अब मैं हैरान हूं कि सरकार ये कह तो दी कि सोने मत खरीदिए
लेकिन आप प्राइसिंग फिक्स करते हैं ना कुछ। इस तरीके से आपको कोई ना कोई रेगुलेशन लाना पड़ेगा। आप कहिएगा कि नहीं उसको सोना से नहीं तुलना हो सकती हो सकती है। कोई ना कोई तो तरीका निकाला जा सकता है। ऐसे तो नहीं हो सकता है कि 50 60 लोग मिल जो पर्दे के पीछे हैं जिसका कुछ अता पता नहीं है। वो 50 60 डीलर मिलकर के ये खेल कर रहे हैं। कौन है वो डीलर वो पता ही नहीं है। ये ज्वेल थीफ चल रहा है। भरी ब्रॉड डे लाइट में ये ज्वेल थीफ का सिनेमा पूरी दुनिया देख रही है। खेल चल चलते जा रहा है।
सोने का कालो काला बाजार चल रहा है। तो भारत सरकार अब इस दिशा में प्लानिंग शुरू कर दी है। यह सूचना है। मुझे नहीं मालूम कि भारत सरकार सोने की प्राइसिंग को लेकर के कोई ट्रांसपेरेंट रेगुलेशन कब बहाल करती है, कैसे बहाल करती है। यह देखने वाली बात होगी। लेकिन काला राज यह है जिसके लिए मोदी ने कहा सोना मत खरीदो।