हिंदी सिनेमा के सबसे बेबाक और आत्मविश्वासी अभिनेताओं में गिने जाने वाले राजकुमार का अंदाज़ बिल्कुल अलग था। कहा जाता है कि अगर उनकी कोई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं होती थी, तब भी वे अपनी अगली फिल्म के लिए फीस कम करने के बजाय बढ़ा देते थे।इसके पीछे उनकी सोच भी उतनी ही अनोखी थी।
राजकुमार का मानना था कि किसी फिल्म की सफलता या असफलता केवल एक अभिनेता पर निर्भर नहीं करती। कहानी, निर्देशन, संगीत, निर्माण और प्रचार-इन सभी का बराबर योगदान होता है। इसलिए वे अपनी मेहनत और अभिनय का मूल्य कम नहीं आंकते थे।फिल्म निर्माताओं से वे साफ कहते थे कि अगर उन्हें राजकुमार की शख्सियत, संवाद अदायगी और अभिनय चाहिए, तो उसकी एक तय कीमत होगी।
हैरानी की बात यह थी कि कई निर्माता उनकी इस शर्त को मान भी लेते थे, क्योंकि उनका नाम और उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस अपने आप में एक बड़ी पहचान थी।हालांकि, इस किस्से का कोई ठोस आधिकारिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
यह बात लंबे समय से फिल्मी गलियारों में प्रचलित एक लोकप्रिय किस्से के रूप में सुनाई जाती है। लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि राजकुमार ने अपने आत्मविश्वास और स्वाभिमान से इंडस्ट्री में एक अलग मुब बनाया।