] हमारी एक मांग है कि हम कागज नहीं दिखाएंगे। और अब बड़ी खबर आपको बता दें। पासपोर्ट पर भारत सरकार का बड़ा फैसला आया है। नागरिकता का प्रमाण अब पासपोर्ट नहीं होगा। विदेश मंत्रालय की तरफ से साफ कर दिया गया है। देश में सोशल मीडिया से सियासत तक नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष सवाल उठा रहा है कि अगर आधार, [संगीत] पहचान पत्र और पासपोर्ट भी नागरिकता का दस्तावेज नहीं है तो फिर नागरिकता कैसे साबित होगी? विदेश मंत्रालय ने सफाई जारी कर कहा है कि पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का सबूत नहीं रहा है।
साथियों नमस्कार मैं हरिश्चंद्र बनवार इस वीडियो में आप सभी का स्वागत करता हूं। दोस्तों प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने गृह मंत्री अमित शाह ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। दोस्तों यह फैसला ऐसा है जिससे ना सिर्फ लेफ्ट लिबरल गैंग बल्कि भारत के भीतर जो भी घुसपैठिए होंगे उनमें हड़कंप मच गया है दोस्तों। और यह जो फैसला है यह आर्टिकल 370 से भी बड़ा फैसला है दोस्तों। आप समझ लीजिए जो आर्टिकल 370 है वह क्या है दोस्तों देश के एक राज्य में अलगाववाद की भावना को आगे बढ़ाने का काम करता था यह आर्टिकल ये समझ लीजिए संविधान का ही एक प्रावधान है
लेकिन नेहरू ने क्या किया था इसके जरिए जो भी अलगाववादी ताकतें हैं उनको बल मिलता था और यहां तो पूरा का पूरा राज्य ही अलगाववाद की राह में चल पड़ा था दोस्तों लेकिन इस बार एक ऐसा ऐसा फैसला किया गया है जिसमें अलगाववाद की भावना रखने वाले देश के तमाम राज्यों में रहने वाले लोगों को बहुत बड़ा झटका लगा है और यह झटका कितना बड़ा है ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी आपने सुना है ना कल तक क्या होता था यही कहते थे ना हम कागज नहीं दिखाएंगे सभी का खून शामिल है इस मिट्टी में यही सब चलता था ना हम कागज नहीं दिखाएंगे बस यही होता अब मोदी शाह ने कहा है कि हमको कागज देखना भी नहीं है। हम कागज मांगेंगे ही नहीं। अब तो भागो इधर-उधर। अब हम कागज भी नहीं देखेंगे और कागज दिखाओगे तो मानेंगे भी नहीं। आखिर क्या है पूरा मामला दोस्तों? वही डिकोड करने जा रहा हूं। मेरा निवेदन है जरूर एक कमेंट कीजिएगा। जिन लोगों को लगता था कि 240 सीटों पर आने पर यह सरकार खत्म हो गई है। मोदी जी के जाने की भविष्यवाणियां करते थे। उनको देखिए क्या-क्या झेलने पड़ रहे हैं। आपके कमेंट का इंतजार रहेगा दोस्तों। जरूर लाइक कीजिएगा, शेयर कीजिएगा। आइए शुरू करते हैं।
पहले मैं इसकी शुरुआत करूं। मैं जिस पासपोर्ट की बात करने जा रहा हूं। उससे पहले एक बंगाल की खबर दिखाता हूं ताकि संदर्भ आपको समझ में आ जाए। इस बार बकरी ईद में जानते हैं क्या हुआ? दोस्तों जब शुभेंदु अधिकारी की सरकार आई खुलेआम [नाक से की जाने वाली आवाज़] गौवंश की हत्या होती थी। पशुओं की बलि बलि क्या मतलब पशुओं की हत्या होती थी। शुभेंदु अधिकारी सरकार ने कुछ नहीं किया। कोई नया नियम नहीं बनाया। कोई कानून नहीं बनाया। दोस्तों 1950 का कानून केवल लागू कर दिया। सिर्फ इतना किया। यह लोग हाई कोर्ट में गए कि अरे शुभेंदु अधिकारी पता नहीं क्या कर रहे हैं। कोई गैर कानानूनी काम कर रहे हैं। ढूंढा पता चला अच्छा यह कानून तो 1950 में बना है। बस उसको लागू कर दिया। सब कुछ समझ में भी आ गया और सारे नियम कानून पटरी में आ गए। जो चाहते थे वो हो भी गया। यही काम मोदी सरकार ने किया है। दोस्तों, भारतीय नागरिकता को लेकर एक बहुत बड़ी जानकारी सामने आई है। जिसे मैं फैसला कह रहा हूं। फैसला करने का मतलब कोई नया कानून बनाना नहीं है। उस कानून को सिर्फ इंप्लीमेंट करना है। यह बहुत पुराना कानून है। क्या हुआ है दोस्तों? आप समझ लीजिए। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने एक वरिष्ठ अधिकारी ने पासपोर्ट सेवा दिवस मनाया जाता है। आप जानते हैं। उस मौके पर एक सवाल पूछा गया और उसमें साफ-साफ कहा कि भारतीय पासपोर्ट जो है वो नागरिकता का सबूत नहीं है। मतलब अगर आपके पास हमारे पास पासपोर्ट है और हम बताएं कि बस मेरे पास पासपोर्ट है इसलिए हम नागरिक हो गए। तो ऐसा नहीं है। यह नागरिकता का सबूत नहीं है। उन्होंने एक जानकारी दी है विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कि [नाक से की जाने वाली आवाज़] 2025 में सरकार ने डेढ़ करोड़ पासपोर्ट और इससे जुड़ी सेवाएं लोगों को दी है। लेकिन कितने पासपोर्ट इस्तेमाल किए गए? सिर्फ 1 करोड़ 39 लाख।
इनसे सवाल पूछा गया था। दरअसल कि एसआईआर के दौरान बहुत सारे लोगों को मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया। उनके पास पासपोर्ट था तो क्या इसका इस्तेमाल नहीं करते कि मेरे पास पासपोर्ट है तो मैं भारतीय नागरिक हूं। विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा बिल्कुल नहीं इसका इस्तेमाल नहीं हो सकता और एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है दोस्तों स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन आप [नाक से की जाने वाली आवाज़] जानते हैं कि इस समय सारे दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। सब दिखा रहे हैं। मेरे पास तो क्या-क्या नहीं है। आधार है, राशन कार्ड है, वोटर कार्ड है, पासपोर्ट है, सब कुछ है। आधार कार्ड तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा, भाई यह भी ले लो। कोई बात नहीं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? आधार कार्ड सिर्फ आपके पहचान का दस्तावेज है। नागरिकता का सबूत नहीं है। अब जाकर के यह भी क्लेरिटी हो गई सरकार ने दे दी कि पासपोर्ट यात्रा का दस्तावेज है। आपकी नागरिकता का सबूत नहीं है। और जैसे ही यह बात आई दोस्तों, सारे लेफ्ट लिबरल गैंग में आग लग गई। सब भड़क गए। कपिल सिब्बल, जावेद अख्तर सब सब बोल रहे हैं। अरे हमारा वोट का अधिकार छीन लिया। अभी तक यही बोल रहे थे ना कागज नहीं दिखाएंगे। आप बोल रहे हैं कागज दिखा भी देंगे तो ये मानने को तैयार नहीं। ये मोदी जी तो बड़े जालिम निकले। अमित शाह तो बहुत जालिम निकले। मैं ऐसे ही नहीं कह रहा दोस्तों। अभी मैं इसकी थोड़ी तह तक जाऊंगा। ये आर्टिकल 370 से बड़ा मामला है दोस्तों। यह गजब का मामला है। अब जरा मैं आपको एक-एक करके जरा कुछ ट्वीट दिखाता हूं पहले कि जानिए कि कितनी आग लगी है। कितनी गहरी आग लगी है। वोटर जा रहे हैं इनके। अब जैसे कपिल सिब्बल ये तो बड़े वकील भी हैं। क्या लिखा है? एमईए जून 24, 2026 अ पासपोर्ट इज़ ए ट्रेवल डॉक्यूमेंट एंड नॉट ए डॉक्यूमेंट ऑफ सिटीजनशिप। व्हिच डॉक्यूमेंट देन इज़ प्रूफ ऑफ सिटीजनशिप। बीएलओ कैन डाउट माय सिटीजनशिप डिप्र्राइव मी ऑफ माय वोट रिजल्ट बीजेपी विंस द इलेक्शन ओवर टू सुप्रीम कोर्ट।
मैं क्या कहूं दोस्तों? इसमें सोचने की जरूरत है। कपिल सिब्बल तो बहुत बड़े वकील हैं। सुप्रीम कोर्ट में बड़े-बड़े दलील रखते हैं। बड़ी-बड़ी बातें कहते हैं। जानकार भी हैं। ये भी आप मान सकते हैं। क्या उनको नहीं पता कि पासपोर्ट एक्ट में क्या लिखा है? सिटीजनशिप के लिए कौन सी जरूरी चीजें होती है? क्या इनको नहीं पता? इसी तरीके से आप देखिए जावेद अख्तर ये भी सीए एनआरसी में आप जानते हैं इनको तो मोदी जी वैसे भी नहीं पसंद आते। लेकिन इनकी जो बिलबिलाहट है वो दूसरे लेवल की है। क्या लिखते हैं ये? ये हैरानी जताते हैं। द मिनिस्ट्री ऑफ़ एक्सटर्नल अफेयर सेस दैट ए पासपोर्ट इज़ ए डॉक्यूमेंट ट्रेवल एंड नॉट द प्रूफ ऑफ़ सिटीजनशिप। रियली। सो आर दे प्रोवाइडिंग दिस ट्रेवल डॉक्यूमेंट टू सम पीपल विदाउट बीइंग टोटली कन्विंस्ड दैट दिस पर्सन इज एन इंडियन सिटीजन। इट इज अब्सर्ड। ये लिख रहे हैं कि विदेश मंत्रालय ने ये कहा है कि ये डॉक्यूमेंट ट्रेवल डॉक्यूमेंट है। सिटीजनशिप नहीं है। रियली। अच्छा ऐसे कह रहे हैं। सो आर दे प्रोवाइडिंग? यानी ये उन लोगों को भी दे रहे हैं पासपोर्ट जो भारतीय नहीं है। ये लिख रहे हैं। इट इज एब्सर्ड। अब जरा इनका जवाब दूंगा। ध्यान से देखिएगा आगे के हिस्से में दोस्तों क्योंकि जो सवाल उठाए गए हैं उसका जवाब जानना जरूरी है। सिर्फ आंख में पट्टी बांधकर विरोध नहीं करना चाहिए। अगर सही कह रहे हैं तो साथ है। गलत कह रहे हैं तो बताऊंगा मैं। इसके लिए आपको थोड़ा सा दो-चार मिनट इंतजार कीजिए। सुप्रिया श्री नेत कांग्रेस कांग्रेस में तो आग लग गई है। भाई जो भारतीय नागरिकता से बाहर हो जाएंगे वो किसके वोटर हैं? सोचिए। यह कांग्रेसी वोटर होते हैं। दोस्तों, पहले ममता के थे। अब अगर ममता गई वहां से तो कांग्रेस के वोटर हो जाएंगे। [नाक से की जाने वाली आवाज़] क्या लिखती हैं सुप्रिया श्रीनेत? मोदी सरकार का कहना है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। क्या हिंदुस्तान का पासपोर्ट गैर हिंदुस्तानियों को भी दिया जाता है? इसका जवाब दूंगा। पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस क्या जांच करने आती है? आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है। पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। पैन नागरिकता का प्रमाण नहीं है। वोटर आईडी नागरिकता का प्रमाण नहीं है। तो फिर नागरिकता का प्रमाण है क्या? बताता हूं मैं। मैं सिर्फ दिखा रहा हूं कि कितनी आग लगी। महुआ मोहित्रा क्या लिखती हैं? महुआ मोहित्रा ने सरकार पर तंज कसा है। उन्होंने एक्स पे लिखा है जो मैं आपको दिखा रहा हूं।
ऐसा लगता है कि आज भारतीय नागरिकता का एकमात्र सबूत हिंदू और भाजपा का मतदाता होना है। इसके अलावा और कुछ नहीं बचेगा। अब भाजपा का मतदाता होना है। ये तो चलिए आलोचना है। होना चाहिए। कोई बुरा नहीं है। लेकिन हिंदू होना अब ये बात को वहां लेकर जा रही हैं जहां आपको भी पहुंचने की जरूरत है। ध्यान दीजिएगा। अभी मैं एक डिबेट सुन रहा था। कोई पार्टी का था। मुझे ध्यान नहीं है। एक मुस्लिम प्रवक्ता था। वो कह रहा था कि मुसलमानों को टारगेट करने के लिए। फिर उसमें वो धीरे से जोड़ देते हैं दलितों को भी। अरे भाई दलितों को क्यों टारगेट करेंगे? मोदी जी ने सीएए कानून बना दिया। अगर विदेशी भी है और हिंदू है, सिख है, जैन है, ईसाई है तो उसको अपने आप मिल जाएगी भारत की नागरिकता। क्योंकि वो भारत का ही हिस्सा रहे। उनको दिक्कत ही नहीं है। असदुद्दीन ओवैसी एक और रिएक्शन दिखा देता हूं दोस्तों। वो भी एकदम से गुस्से में है। भयंकर गुस्से में है। उनको समझ में नहीं आ रहा है। कितना दर्द देगी ये सरकार। कभी राम मंदिर, कभी आर्टिकल 370, कभी कुछ अब नया दर्द मिल गया है। जरा सुन लीजिए इस हिस्से को दोस्तों। उसके बाद मैं फिर कहानी में दोबारा लॉ लेकर आता हूं। पासपोर्ट क्या है? देखिए जाकर पासपोर्ट एक्ट का सेक्शन सिक्स सब सेक्शन टू सब सेक्शन ए जिसमें यह कहा गया है कि उसको पासपोर्ट नहीं दिया जाएगा जो भारत का नागरिक नहीं है। अब इससे बढ़ के आपको प्रूफ क्या चाहिए? आप वोटर आईडी कार्ड को नहीं मानते। आप बोल दिया आधार नहीं है। चलिए आपने कह दिया कि बर्थ सर्टिफिकेट वो भी नहीं। क्या है फिर? क्या है फिर? यानी सरकार कल किसी को भी पूछे बोल देगी कि भैया तुम सिटीजन नहीं है। अब मैं लड़ते रहूं। हां नहीं एक ही एक ही कार्ड होगा सिटीजन बीजेपी का मेंबरशिप कार्ड बस। कुछ पॉइंट्स और रह गए दोस्तों वह भी दिखा देता हूं। जैसे झारखंड मुक्ति मोर्चा उसने भी सवाल उठाया है क्योंकि झारखंड में अभी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन होना है और यहां 30 जून से बीए लोग घर-घर जाकर जो इन्यूमरेशन फॉर्म है वो भरेंगे। अब ये कह रहे हैं कि भाई अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है तो सर में उसे स्वीकार क्यों किया गया है? यह विरोधाभास है। स्पष्टता चाहिए। बहुत अच्छी बात है। मैं जरा इनका ट्वीट भी दिखा देता हूं। देखिए सर में क्रम संख्या एक पर पासपोर्ट को नागरिकता संबंधी दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। लेकिन विदेश मंत्रालय कहता है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं सिर्फ एक ट्रेवल डॉक्यूमेंट है। तो फिर करोड़ों नागरिकों से पूछा जाना चाहिए कि इसको स्वीकार क्यों किया जा रहा है। यह बात तो सच है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में जो 12 दस्तावेज स्वीकार किए गए हैं दोस्तों उसमें भारतीय पासपोर्ट भी है। क्या-क्या है? सरकारी कर्मचारी का पहचान पत्र, पुराने सरकारी दस्तावेज जो 1 जुलाई 197 87 से पहले का है। जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, स्थाई निवास प्रमाण पत्र ऐसे 12 दस्तावेज हैं जो स्वीकार किए जा रहे हैं। लेकिन यहां विदेश मंत्रालय का दोस्तों स्पष्टीकरण आया और यह बड़ा स्पष्टीकरण है। जैसे मैंने अभी बंगाल का दिखाया था ना 1950 का नियम। यह वही स्पष्टीकरण है। विदेश मंत्रालय ने यह कहा कि भैया हमने कोई नई नीति नहीं बनाई है और इस सरकार से इसका कोई संबंध ही नहीं है। बल्कि भारतीय कानून में जिस संविधान को लहराते हैं ना राहुल गांधी उसी संविधान जो कानून बना है। भारतीय कानून में पासपोर्ट को कभी भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना गया है। क्या बोला है? है। मैं कोर्ट अनकोट में पढ़ता हूं। यह फैसला 24 जून 2026 को नहीं लिया गया कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। यह पिछले 12 वर्षों में भी तय नहीं हुआ। जब से मोदी जी आए हैं। पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं रहा है। और जो पासपोर्ट अधिनियम 1967 के तहत ध्यान से सुनिएगा। गैर नागरिकों को भी पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज जारी किए जा सकते हैं। यह महत्वपूर्ण दस्तावेज हो सकता है, लेकिन नागरिकता का निर्विवाद प्रमाण नहीं माना जाता। मतलब जैसे आधार कार्ड है, जैसे जन्म प्रमाण पत्र है, वैसे ही पासपोर्ट एक मजबूत हिस्सा है। लेकिन अंतिम हिस्सा नहीं है। इसका मतलब है कि पासपोर्ट गैर भारतीयों को भी दिया जा सकता है। आपने समझे आप समझ गए होंगे क्या लिखा है? पासपोर्ट अधिनियम 1967 के तहत कुछ परिस्थितियों में गैर नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी किए जा सकते हैं। पासपोर्ट एक्ट क्या कहता है दोस्तों? वो देखिए। पासपोर्ट एक्ट 1967 धारा 20 इसमें साफ लिखा है कि केंद्र सरकार चाहे तो किसी ऐसे व्यक्ति को भी पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज दे सकती है
जो भारत का नागरिक नहीं है। यह जो जवाब है ना दोस्तों यह दरअसल जितने लोग उलजुलूल बातें कह रहे हैं चाहे वो जावेद अख्तर हो, कांग्रेस के हो या बाकी नेता हो उनका जवाब है। शर्त सिर्फ यही है कि सरकार को लगे कि ये जनहित में जरूरी है। यानी कानून खुद कहता है कि पासपोर्ट और नागरिकता दोनों अलग-अलग चीजें हैं। अब आप समझ गए गैर भारतीय भी हो सकता है। अच्छा मैं एक बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला लेकर आता हूं। ये कब का है? साल 2013 मोदी जी प्रधानमंत्री नहीं थे। मुख्यमंत्री थे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे। ये गांधी परिवार की ही सत्ता थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यही बात साफ कही थी कि पासपोर्ट होने का मतलब यह नहीं है कि वो व्यक्ति भारत का नागरिक ही है। कोर्ट ने कहा था कि पासपोर्ट को नागरिकता के अंतिम सबूत के रूप में नहीं देखा जा सकता है। यानी ना तो यह कानून मोदी जी ने बनाया। ना तो यह कानून पिछले 12 साल में बना है। यह तो बहुत पुराना कानून है जिसकी क्लेरिटी दे दी है। और पीआईबी ने दोस्तों नागरिकता को लेकर के 20 दिसंबर 2019 को एक बड़ा व्यापक जवाब दिया था। कुछ जरूरी सवालों के जवाब दिए थे। क्या लिखा था? कोई भी व्यक्ति अपनी जन्मतिथि और जन्म के स्थान का प्रमाण देकर अपनी नागरिकता साबित कर सकता है। भारत में नागरिकता देने या तय करने का काम नागरिकता नियम 2009 के तहत होता है जो कि हमारे मूल नागरिकता कानून 1955 के आधार पर बने हैं। और 1955 में क्या प्रावधान है दोस्तों वो भी आप समझ लीजिए। कैसे नागरिकता मिलती है? पहला जन्म से नागरिकता। 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्मे हर व्यक्ति को नागरिकता मिली। 1987 से 2003 के बीच माता या पिता में से एक के भारतीय नागरिक होने पर नागरिकता मिलती है और 2003 के बाद दोनों माता-पिता भारतीय नागरिक हो या एक नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी ना हो तब मिलती है। अवैध प्रवासी नहीं होना चाहिए। दूसरी चीज है वंश से नागरिकता। मतलब विदेश में जन्मे बच्चे को भारतीय माता-पिता के आधार पर वंश से नागरिकता मिल सकती है। बशर्ते उसका भारतीय दूतावास में पंजीकरण कराना पड़ेगा। तीसरा रजिस्ट्रेशन या नेचुरलाइजेशन से नागरिकता। मतलब भारतीय मूल के लोगों के लिए कुछ खास स्थितियों में आवेदन करके रजिस्ट्रेशन के जरिए नागरिकता मिल सकती है। कोई विदेशी नागरिक जो गैर कानानूनी प्रवासी ना हो। यह ध्यान रखिएगा। गैर कानानूनी प्रवासी ये सब रोहिंग्या बांग्लादेशी ऐसे ही आते हैं गैर कानानूनी तरीके से अगर भारत में लगातार 12 साल रहता है तो केंद्र सरकार उसे नेचुरलाइजेशन सर्टिफिकेट दे सकती है और शपथ लेने के बाद वो भारत का नागरिक बन जाता है। क्षेत्र के विलय से नागरिकता है। यदि कोई नया क्षेत्र भारत में मिल जाए विलय हो जाए तो नागरिक हो जाएंगे। जैसे सिक्किम बाद में जुड़ा ना गोवा बाद में तो वहां के लोग भारत के नागरिक हो गए और नागरिकता का प्रमाण भारतीय नागरिकता का कानूनी आधार नागरिकता अधिनियम 1955 है जो तय करता है कि भारत का नागरिक कौन है और कैसे पांच तरीकों से मिलती है? इसका मतलब क्या हुआ? इसका मतलब यह हुआ दोस्तों कि मोदी जी ने कोई नया कानून नहीं बनाया। सिर्फ पुराने कानून के आधार पर एक बात सामने रख दी और इसका असर बहुत व्यापक होना है। एक बात और बताता हूं दोस्तों। मान लीजिए कि पासपोर्ट अगर नागरिकता का अंतिम प्रमाण पत्र मान लिया जाए तो फिर तो यह होगा कि अगर आपका पासपोर्ट रद्द हो गया तो आपकी नागरिकता गई। ऐसा होता है क्या? कभी नहीं होता। पासपोर्ट रद्द होने से, निलंबित होने से किसी की नागरिकता नहीं जाती। और पासपोर्ट क्यों रद्द होता है? यह भी समझिए। आप गलत जानकारी देकर बनवाते हैं। कानूनी मामलों में कारवाई होती है। सुरक्षा के कारण होते हैं। पासपोर्ट अधिनियम के तहत कोई उल्लंघन होता है तो आपकी आपका पासपोर्ट तो रद्द हो जाता है लेकिन नागरिकता रद्द नहीं होती है। इसका मतलब है दोस्तों कि पासपोर्ट दरअसल नागरिकता का अंतिम प्रमाण बिल्कुल नहीं है। यह सिर्फ विदेश यात्रा करने के लिए दिया जाता है। वीजा प्राप्त करने के लिए होता है। विदेश में पहचान पत्र के रूप में होता है। इंटरनेशनल हवाई यात्रा के दौरान इमीग्रेशन और सुरक्षा जांच में इसका इस्तेमाल किया जाता है। अब आप समझ लीजिए कि मोदी सरकार सिर्फ नए कानून बनाकर ही जो घुसपैठिए हैं उस पे सोटा चलाने की कोशिश नहीं कर रही है। बल्कि जो पुराने कानून है उसको लागू करके एक व्यापक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस बात को याद रखिएगा और अभी दोस्तों आप समझिए कितने काम हो रहे हैं। भाई सेंसस चल रहा है ना यह बहुत बड़ी पहल है। मैं इस पे अलग से वीडियो बना चुका हूं। स्मार्ट बॉर्डर बनाने की तैयारी चल रही है और ये सब चीजें भी जानबूझ के अभी लोगों की जानकारी में लाई जा रही है। ये ऐसा नहीं कि अचानक से हो गया। ये जानबूझकर लाया जा रहा है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन भी चल रहा है। आपको आने वाले एक दो साल में दोस्तों बहुत व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेंगे। बस इंतजार करते जाइए। उम्मीद करता हूं दोस्तों ये वीडियो आपको पसंद आया होगा। जरूर कमेंट कीजिएगा दोस्तों। लाइक कीजिएगा, शेयर कीजिएगा।