नमस्कार, मैं दृष्टि उपाध्याय। पाकिस्तान जब-जब भारत से पंगा लेता है तब-तब उसे मुंह की खानी पड़ती है। वो बात अलग है कि आज तक पाकिस्तान ने कोई भी युद्ध नहीं जीता। लेकिन फिर भी उसके सेना के अधिकारी इतने मेडल पहनकर घूमते हैं कि ना जाने उन्होंने कितनी जंगे जीती होंगी। ऑपरेशन सिंदूर में तगड़ी पिटाई खाने के बाद भी पाकिस्तान सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। वह लगातार बॉर्डर पर ऐसी हरकतें कर रहा है जो तनाव बढ़ाने वाली है। भले ही पाकिस्तान के पास खाने के लिए आटा ना हो, लेकिन बारूद के लिए वो अपनी जमीन और जमीर दोनों बेचने के लिए तैयार रहता है। और इसके लिए वो अपने सदावार दोस्त चीन को चुनता है। पाकिस्तान सबसे ज्यादा चीनी हथियार ही इस्तेमाल करता है।
हालांकि चीन के हथियार कितने कमजोर होते हैं। हाल ही में दुनिया ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देख चुकी है कि किस तरह से चीन के लड़ाकू विमान और मिसाइलों को हमारे हथियारों ने टुकड़े-टुकड़े कर दिया था। लेकिन अब पाकिस्तान चीन से हंगोर क्लास की पनडुब्बी लेकर आया है। यह सिर्फ एक सबमरीन की एंट्री नहीं बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में बदलते सामरिक समीकरणों का संकेत माना जा रहा है। क्योंकि हंगोर पनडुब्बी एआईपी जैसे मॉडर्न तकनीक से लैस है। जिसकी वजह से इस पनडुब्बी को हफ्तों तक सतह पर आने की जरूरत नहीं होगी। यह समुद्र की गहराइयों में लंबे समय तक ओझल रह सकती है। हंगोर पनडुब्बी के जरिए पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में भारत के खिलाफ बड़ी साजिश रचने की कोशिशों में लगा है। हालांकि इतिहास गवा रहा है कि अरब सागर और हिंद महासागर में भारतीय नौसेना का पलड़ा हमेशा से ही भारी रहा है।
जैसे ही पाकिस्तान ने चीन की बनी पनडुब्बी को उतारा तो भारत ने भी समंदर में अपने सबसे बड़े बाहुबलियों की एंट्री करा दी। जिसने दुश्मनों में खलबली मचा दी है। दरअसल भारत ने पनडुब्बियों को डुबो देने वाले तीन घातक स्वदेशी युद्धपोत नीले समंदर में उतार दिए हैं। पीएम मोदी और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में तीन नए युद्धपोतों, आईएएस दुनागिरी, आईएनएस अग्र और आईएएस संशोधक को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। इस दौरान पीएम मोदी ने दुश्मनों को साफ संकेत दिया कि शांति की रक्षा के लिए सामर्थ्य जरूरी है और भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत कर रहा है। आईएएस दूनागिरी में ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली लगी है जो एंटीशिप और एंटी सरफेस युद्ध में बेहद प्रभावी मानी जाती है। यह फ्रिगेट दुश्मन के हमलों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है। तो वहीं आईएएस अग्र एंटी सबमरीन रॉकेट लांचर लाइट वेट टॉर्पिडो 30 एमm नेवल गन हल माउंटेड सोनार और वेरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है। बात आईएएस संशोधक की करें तो यह 25 दिनों से ज्यादा समय तक समुद्र में रहने में सक्षम है और इसकी अधिकतम रफ्तार 18 नट है।
दरअसल इससे पहले 15 जनवरी 2025 को भी मुंबई मुखिया मोदी की मौजूदगी में नीलगिरी क्लास का पहला स्टेल्थ फ्रिगेट आईएएस नीलगिरी डेस्ट्रॉय आईएएस सूरत और पनडुब्बी आईएएस वागशीर भारतीय नौसेना में शामिल किए गए थे। तो इस तरह से भारतीय नौसेना लगातार अपनी ताकत में इजाफा कर रही है। अब तीन और अत्याधुनिक युद्धपोत उतारकर बंगाल की खाड़ी में खलबली मचा दी है। ऐसे में अगर चीन से उधारू हथियार के जरिए पाकिस्तान ने किसी भी तरह की हिमाकत की तो इसका अंजाम उसे बहुत भारी भुगतना पड़ेगा। देखते रहिए जी न्यूज़। नमस्कार।