कौन है माखनलाल सरकार? पश्चिम बंगाल में सबकी निगाहें जहां शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद की शपथ पर टिकी थी, वहीं अचानक एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने पूरे देश को चौंका दिया है। मंच पर मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक आगे बढ़े और एक बुजुर्ग शख्स के [संगीत] पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। जैसे ही यह तस्वीर सबके सामने आई, सोशल मीडिया पर हलचल मच गई।
हर कोई यही पूछने लगा आखिर यह बुजुर्ग शख्स कौन है जिनके पैर प्रधानमंत्री मोदी [संगीत] ने सार्वजनिक मंच पर छुए। दरअसल यह शख्स हैं माखनालाल सरकार। बंगाल की राजनीति और सामाजिक जीवन में माखनलाल सरकार का नाम लंबे समय से सम्मान के साथ दिया जाता है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस और जनसंघ के शुरुआती दौर के सबसे वरिष्ठ और समर्पित कार्यकर्ताओं में [संगीत] से एक गिना जाता है।
58 साल की उम्र में भी माखनालाल सरकार सार्वजनिक जीवन में सक्रिय माने जाते हैं। उनका जीवन संगठन विचारधारा और राष्ट्रवादी आंदोलन के लिए समर्पित रहा है। यही वजह है कि बीजेपी और संघ परिवार के कई बड़े नेता उन्हें एक मार्गदर्शक की तरह सम्मान देते हैं। माखनलाल सरकार पहली बार चर्चा में तब आए जब साल 1952 में जम्मू कश्मीर में तिरंगा फहराने को लेकर बड़ा आंदोलन चल रहा था। उस समय वो श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कश्मीर पहुंचे थे। आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। उस दौर में यह आंदोलन सिर्फ राजनीति नहीं थी बल्कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता का प्रतीक माना जाता था।
बाद में जब साल 1980 में भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ तब माखना लाल सरकार को पश्चिम बंगाल के कई जिलों की संगठन की जिम्मेदारी दी गई। उन्हें गांव-गांव जाकर संगठन को मजबूत किया। बेहद कम समय में हजारों नए सदस्यों को पार्टी में जोड़ लिया। बताया जाता है कि सिर्फ 1 साल के भीतर उन्होंने करीब 10,000 लोगों को बीजेपी से जोड़ दिया था। 1981 से लगातार 7 साल तक वह जिला अध्यक्ष के पद पर रहे। उस समय बीजेपी में किसी नेता का इतने लंबे समय तक एक ही संगठन पद पर बने रहना बहुत बड़ी बात मानी जाती [संगीत] थी।
इससे उनकी संगठन समता और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ का अंदाजा भी लगाया जा सकता है। माखनलाल सरकार हमेशा सुर्खियों से दूर रहे लेकिन जमीन पर रहकर उन्होंने दशकों तक संगठन के [संगीत] लिए काम किया। बंगाल की राजनीति को करीब से समझने वाले लोग मानते हैं कि उन्होंने नई पीढ़ी के नेताओं को तैयार करने में भी बड़ी भूमिका निभाई है। [संगीत] यही वजह है कि
जब प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक मंच पर उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया तो इसे सिर्फ सम्मान नहीं बल्कि पुराने कार्यकर्ता के योगदान को सलाम देने के रूप में देखा गया। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस तस्वीर को भारतीय संस्कृति [संगीत] और बड़ों के सम्मान की मिसाल बताया है। आपके इस पे क्या विचार है कमेंट में जरूर बताइए। फिलहाल के लिए बस इतना ही। ऐसी खबरों के लिए देखते रहिए india.com। अब आप जहां भी हैं वहीं से खबर भेज सकते हैं। आपके आसपास कुछ घट रहा है या कोई खास बात? तो बस अपना मोबाइल उठाइए और pin न्यूज़ के ऐप पर शेयर कर दीजिए।