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मन्नत को खरीदने के लिए शाहरुख खान ने जो किया था; वो किसी फिल्म स्टोरी से कम नहीं!

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यार शाहरुख खान की जिंदगी का सबसे बड़ा फाइनेंसियल रिस्क क्या था? कोई फ्लॉप फिल्म, रेड चिल्ली एंटरटेनमेंट या आईपीएल की टीम? शायद इनमें से कुछ भी नहीं। वो था उनका अपना घर। आशिक हूं। एक ऐसा बंगला जिसे वह तब से चाहते थे, जब उसे खरीदना उनके लिए आसान नहीं था। और जब आखिरकार उन्होंने उसे खरीदा, तो कहानी यहां तक पहुंची कि इंटीरियर पर खर्च करना मुश्किल हो गया। अब यह बात थोड़ी अजीब है क्योंकि एसआरके को हम सिर्फ एक्टर के तौर पर जानते हैं। वो बिजनेस समझने वाले आदमी भी हैं। अपनी प्रोडक्शन कंपनी बनाई, आईपीएल टीम खरीदी, ब्रांड्स बनाए। फिर एक घर के मामले में फाइनेंसियल लॉजिक इतना पीछे कैसे चला गया। और उससे भी इंटरेस्टिंग बात यह है कि सालों बाद एसआरके ने इसी घर के बारे में कहा कि वह चाहते हैं कि उनके बच्चे ही नहीं, आने वाली जनरेशन भी शायद यहीं रहे। यार कोई आदमी एक बंगले के लिए अपनी फाइनेंशियल लिमिट तक क्यों जाएगा और फिर उसी बंगले को 100 सालों तक आगे अपने परिवार से जोड़कर क्यों देखेगा? शायद इसलिए क्योंकि एसआरके के लिए मन्नत सिर्फ कभी एक प्रॉपर्टी थी ही नहीं। लेकिन यह समझने के लिए हमें मन्नत से बहुत पहले की कहानी समझनी पड़ेगी। 1997 में यस बॉस की शूटिंग के दौरान शाहरुख खान बैंड्रा के पुराने सी फेसिंग बंगलो को देखते हैं। उस वक्त उसका नाम था विलावेना। शाहरुख को घर पसंद आ गया और उसके मन में उसे खरीदने की इच्छा बैठ जाती है। लेकिन उस समय वो आज वाले शाहरुख खान नहीं थे। डीडीएलजे आ चुकी थी।

बाजीगर डर जैसी फिल्म उन्हें बड़ा स्टार बना चुकी थी। लेकिन मन्नत जैसा बंगला खरीदना फिर भी कोई छोटी बात नहीं थी। इसलिए घर पसंद आया। सपना वही रह गया। कुछ साल बाद जब मौका आया तो एसआरके ने उस सपने को जाने नहीं दिया और वो विला आखिरकार उनका हो गया। लेकिन यार यहीं से कहानी बहुत ज्यादा इंटरेस्टिंग हो जाती है। आमतौर पर कोई आदमी अपनी फाइनेंशियल कैपेसिटी को देखकर घर खरीदता है। पहले बजट तय करता है फिर घर देखता है। एसआरके के मामले में शायद सीक्वेंस उल्टा था। उन्होंने पहले घर देख लिया। उससे प्यार हो गया और फिर तय किया कि इसे लेना है। बाद में उन्होंने खुद बताया कि घर खरीदना इतना बड़ा खर्चा था कि इंटीरियर के लिए पैसे कम पड़ गए। गौरी ने खुद घर के इंटीरियर पर काम करना शुरू किया और धीरे-धीरे वही काम उनके अपने इंटीरियर डिजाइनिंग करियर का हिस्सा बन गया। यानी थोड़ा फनी तरीके से कहें तो एसआरके ने बंगला तो खरीद लिया लेकिन अब उसे घर कौन बनाए? इसका जवाब बनी गौरी। एसआरके ने बिल्डिंग खरीदी और गौरी ने उसे घर बनाया। लेकिन आखिरकार इस एक बिल्डिंग से इतना अटैचमेंट आया कहां से?

ये जानने के लिए शाहरुख खान की जिंदगी में थोड़ा सा पीछे जाना पड़ेगा। शाहरुख खान बहुत छोटे थे जब उनके पिता मीर ताज मोहम्मद खान का निधन हो गया था। फिर 1991 में जब शाहरुख खान सिर्फ 25 साल के आसपास के थे और उनकी जिंदगी का नया चैप्टर शुरू होने वाला था। उनकी मां फातिमा खान भी चल बसी। बॉलीवुड में उनकी पहली बड़ी सक्सेस देखने से पहले ही उनके माता-पिता जा चुके थे। शाहरुख ने बाद में कई बार अपने पेरेंट्स के खोने के बारे में बात की और बात उनकी इंटरव्यूज में हर बार निकल कर आई [संगीत] कि उनके जाने के बाद घर का मतलब उनके लिए बदल गया था। इसीलिए यहां एक डिस्टिंक्ट होना बहुत जरूरी है। ऐसा नहीं कि शाहरुख खान के सिर पर छत नहीं थी या उनके पास लिटरली रहने की कोई जगह नहीं थी। बात उस घर की थी जहां लौटने पर मां-बाप मिलते हैं। जहां आपको लगता है कि दुनिया में कुछ भी बदल जाए। यह जगह आपकी है। वो फीलिंग बहुत कम उम्र में चली गई थी। एसआरके की बहन शहनाज उनके साथ थी और गौरी उनकी जिंदगी में थी। [संगीत] लेकिन माता-पिता के जाने के बाद जिस तरह का परमानेंट फैमिली होम उन्होंने खोया था, शायद अपना घर उनके लिए तभी से सिर्फ चार दीवारी का सवाल नहीं रहा। और यही मन्नत की कहानी अचानक प्रॉपर्टी डील से एक इमोशनल स्टोरी बन जाती है। शाहरुख खान ने अपनी डॉक्यूमेंट्री द इनर वर्ल्ड ऑफ शाहरुख खान में अपने घर को लेकर अपने इस अटैचमेंट की बात भी की है। उन्होंने कहा कि पेरेंट्स के गुजर जाने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि उनका कोई अपना घर नहीं है और शायद इसीलिए उन्हें घर को लेकर इस तरीके का ऑब्सेशन है। अब मैं यह नहीं कह रही कि शाहरुख खान ने मन्नत सिर्फ अपने पेरेंट्स को खो जाने की वजह से खरीदा। जाहिर है वह सक्सेसफुल रहे हैं। उनका परिवार बड़ा हुआ है और उन्हें एक बड़े घर की जरूरत थी।

लेकिन उनकी बातें सुनो तो यह साफ महसूस होता है कि मन्नत उनके लिए स्क्वायर फीट सीवू बैंड्रा एड्रेस से कहीं ज्यादा है। और शायद यहां गौरी की कहानी भी [संगीत] उतनी इंपॉर्टेंट है। क्योंकि शाहरुख खान ने सिर्फ अपना पुराना घर नहीं खोया था। उन्होंने इसके बाद अपना नया परिवार बनाया था। गौरी के साथ मुंबई आए। दोनों ने साथ में जिंदगी शुरू की। आर्यन हुए फिर सुहाना और बाद में इब्राहिम। यानी जिस आदमी के लिए घर की पुरानी डेफिनेशन बहुत जल्द खत्म हो गई थी उसके लिए अब एक नई फैमिली थी जिसके [संगीत] लिए वो एक नई डेफिनेशन बना सकता था और मन्नत शायद उसी डेफिनेशन का फिजिकल रूप है। एक ऐसी जगह जहां फैमिली आए और जाए नहीं बल्कि वहीं से जनरेशन शुरू हो। यार मुझे इस कहानी की सबसे इंटरेस्टिंग बात यह लगती है कि जब हम मन्नत को देखते हैं तो हमें शाहरुख खान दिखाई देते हैं। बंगले के बाहर हजारों फैंस खड़े होते हैं। बर्थडे पर भीड़ लगती है। ईद पर एसआर के बालकनी में आते हैं। हाथ फैलाते हैं। पूरा रास्ता लोगों से भर जाता है। हमारे लिए मन्नत लगभग बॉलीवुड का टूरिस्ट स्पॉट है। दिल्ली से आया एक लड़का बॉलीवुड का किंग बना और अब मुंबई के सबसे फेमस घरों में से एक में रहता है। इसीलिए हमारे लिए मन्नत सक्सेस का एक सिंबल है। लेकिन हो सकता है

कि शाहरुख खान के लिए उसी घर का मीनिंग बिल्कुल अलग हो। इसका एक क्लू उन्हीं की बातों से मिलता है जिसमें उन्होंने मन्नत को सिर्फ अपने बच्चों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने भविष्य की जनरेशन की बात की। वो चाहते हैं कि एक ऐसा फैमिली होम बने जहां उनके बच्चे रहे और शायद उनके भी बच्चे और उनके भी बच्चे। इस डिजायर को सिर्फ इन्वेस्टमेंट की तरीके से देखो तो इसका कोई खास मतलब नहीं बनता। मुंबई की प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ेगी, बेच देंगे, दूसरा घर ले लेंगे। लेकिन एसआर के जिस तरह मन्नत के बारे में बात करते हैं उसमें बेचने [संगीत] वाली प्रॉपर्टी कम और फैमिली इनहेरिटेंस वाली फीलिंग ज्यादा दिखाई देती है। जैसे वो सिर्फ अपने लिए घर नहीं खरीद रहे थे। वो अपने परिवार के लिए एक परमानेंट एड्रेस बना रहे थे। और शायद यही वजह है कि मन्नत की कहानी बाकी इन्वेस्टमेंट से इतनी अलग है। आईपीएल टीम बिजनेस हो सकती है, प्रोडक्शन कंपनी बिजनेस हो सकती है, फिल्म बिजनेस हो सकती है। लेकिन मन्नत का हिसाब शायद एक्सेल शीट से नहीं पूरा बैठता क्योंकि कुछ परचेस रिटर्न ऑफ इन्वेस्टमेंट के लिए नहीं होती। वो किसी चीज को परमानेंट बनाने की कोशिश होती है जो जिंदगी में कभी परमानेंट नहीं रही। और शायद एसआरके के लिए फैमिली और होम का रिश्ता कुछ ऐसा ही है। और यार इस कहानी को सिर्फ दुख में भी नहीं देखना चाहिए। मन्नत उस लॉस की याद जरूर दिला सकता है। लेकिन उससे कहीं ज्यादा वो जिंदगी का प्रूफ है जो शाहरुख खान ने उस लॉस के बाद बनाई। गौरी के साथ परिवार बनाया। बच्चे उसी घर में बड़े हुए, फेस्टिवल हुए, बर्थडे हुए। दुनिया भर के लोग उसी गेट के बाहर जमा होने लगे। जिस आदमी को कभी लगा था कि उसके [संगीत] पेरेंट्स के जाने के बाद उसका घर चला गया। उस आदमी का घर आज इंडिया के सबसे पहचाने जाने वाले घरों में से एक है।

कितनी अजीब बात है ना? जिस चीज की कमी शायद सबसे ज्यादा उन्हें महसूस हुई, आखिर में वही चीज उनकी पब्लिक आइडेंटिटी का हिस्सा बन गई। शायद शाहरुख खान के लिए मन्नत इस बात का प्रूफ है कि आखिरकार उनके पास कुछ ऐसा है जिसे वो अपने बच्चों को दे सकते हैं और कह सकते हैं कि यह है हमारा घर। तो अब शुरुआत वाले सवाल पर आते हैं। फाइनेंशियली स्मार्ट आदमी ने अपने घर के लिए इतना बड़ा रिस्क क्यों लिया? शायद इसलिए क्योंकि उस वक्त वो सिर्फ बिजनेसमैन के तरीके से फैसला नहीं कर रहे थे। शायद उसमें वो हस्बैंड भी था। वो गौरी के साथ परिवार बनाना चाहता था। एक पिता भी था जो अपने बच्चों के लिए परमानेंट घर खरीदना चाहता था और कहीं बहुत दूर वो 25 साल का लड़का भी था जिसके माता-पिता दोनों जा चुके थे और जिसे अपना घर शब्द का मतलब बाकी लोगों से थोड़ा अलग समझ में आया था। और शायद मन्नत की सबसे खूबसूरत आयरनी भी यही है। बाहर खड़े फैंस के लिए सुपरस्टार शाहरुख खान का घर है। लेकिन अंदर रहने वाले शाहरुख खान के लिए शायद सुपरस्टार बनने से भी पुरानी किसी चीज की जरूरत का जवाब है। दुनिया उसके गेट को देखकर सक्सेस देखती है। हो सकता है शाहरुख खान उसी गेट को देखकर स्टेबिलिटी देखते हो। दुनिया कहती है देखो कितना बड़ा घर खरीद लिया। शायद एसआरके के लिए ज्यादा इंपॉर्टेंट बात यह है कि आखिरकार उसने ऐसा घर बनाया जिसमें उनकी अगली जनरेशन भी रह सके और उससे जुड़ सके। इसीलिए मुझे अब सवाल यह ज्यादा इंटरेस्टिंग नहीं लगता कि शाहरुख खान ने मन्नत को कितने में खरीदा और आज उसकी कीमत कितनी [संगीत] है? मुझे ज्यादा इंटरेस्टिंग सवाल यह लगता है कि अगर मन्नत सिर्फ एक इन्वेस्टमेंट होता तो क्या शाहरुख खान कभी अपने ग्रेट ग्रैंड चिल्ड्रन के उसी घर में रहने की बात करते? शायद नहीं। क्योंकि इन्वेस्टमेंट अगली अच्छी डील मिलने पर बदल जाती है। घर नहीं और यार शायद इस पूरी कहानी को एक लाइन में समझना हो तो मेरे लिए वो यह होगी। दुनिया के लिए मन्नत उस शाहरुख खान ने खरीदा [संगीत] जो सुपरस्टार बन चुका था। लेकिन शायद उस घर को सबसे ज्यादा उस लड़के की जरूरत थी जिसने बहुत कम उम्र में अपने घर के मायने खो दिए थे। अब आप बताओ मन्नत आपके लिए शाहरुख खान की सक्सेस का सिंबल है या उनकी पूरी जिंदगी को समझने की एक छोटी सी खिड़की कमेंट में जरूर बताना और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल मत भूल जाना।

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