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क्यों अंडरवर्ल्ड भी कांपता था इस औरत से? कौन थी लेडी डॉन

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बंबई के डोंगरी का इलाका जहां पे बड़े से बड़े अंडरवर्ल्ड के डॉन का एक वक्त पर कब्जा था उसी डोंगरी में दाऊद से पहले एक ऐसी महिला डॉन पैदा हुई जिसे खुद गैंगस्टर वर्ल्ड कप बादशाह दाऊद मौसी कहकर पुकारता था यह वो डॉन थी जिसे अंडरवर्ल्ड के बड़े से बड़े डॉन जैसे कि हाजी मस्तान करीम लाला वर्ध राजन वर्धा सलाम ढोकते थे यह कहानी है एक ऐसी लेडी डॉन की जिसने मर्दों के अंडरवर्ल्ड पे अपनी धौश जमा रखी थी जब अंडर वर्ल्ड का दबदबा शुरू भी नहीं हुआ था उससे पहले ही इस लेडी डॉन ने अपना लोहा पूरे मुंबई में मनवा रखा था जब भी यह मुंबई की सड़कों पर जाती तो मानो सब निगाहें इन्हीं पर होती थी पूरे मुंबई में एक ऐसा तगड़ा नेटवर्क बिछा रखा था कि पुलिस भी इस डॉन का कुछ कर नहीं पाती थी ऐसी पावरफुल महिला जिसके एक इशारे पे अंडरवर्ल्ड के बड़े से बड़े डॉन डरते थे लेकिन एक महिला इतनी बड़ी लेडी डॉन बनी कैसे कैसे इसने एक मर्दों से भरे अंडरवर्ल्ड में अपनी पहचान बनाई और आखिरकार ऐसा क्या हुआ कि जुर्म का रास्ता छोड़ने पर इन्हें मजबूर होना पड़ा देखिए इस कहानी की शुरुआत होती है

आजादी से पहले के भारत में जहां अंग्रेजी हुकूमत कायम थी और लोगों पे जुल्म पे जुल्म हुए जा रहे थे इनके खिलाफ लड़ने के लिए भारत के स्वतंत्र सेनानी आगे आए इनका एक ही इरादा था भारत से अंग्रेजी हुकूमत को हटाने का इस देश में तब बंबई शहर के डोंगरी में 1920 में पैदा हुई जेनाबाई दारूवाली दारूवाली इनके नाम के पीछे कैसे लगा यह आगे वीडियो में जानेंगे जेनाबाई एक मुस्लिम मेमन परिवार में पैदा हुई थी उनके पिता सामान की ढुलाई और सवारी लाने ले जाने का काम किया करते थे उनका परिवार काफी बड़ा था जिसमें छह भाइयों के बीच वो अकेली एक बहन थी भारत उस वक्त आर्थिक परेशानियों और कई सारी चीजों से जूझ रहा था चारों तरफ आंदोलन और अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का माहौल चल रहा था जनाब भी इस माहौल में क्रांति का एक हिस्सा बन गई महज 12 साल की उम्र में महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन में जुड़ गई थी वो बंबई में चल रहे उस वक्त के हर आंदोलन में जेना बाई बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती थी इन सबके बीच 14 साल की उम्र में उनकी शादी करा दी गई क्रांति की आग इस तरह की उनकी जिंदगी में लगी कि वो शादी के बाद भी आंदोलन में जाया करती थी वो विचारों की खुली थी जिसकी वजह से वह हिंदू मुस्लिम एकता में विश्वास रखती थी मगर वही यह सोच उनके पिता को बिल्कुल रास नहीं आती थी

वो अक्सर अपने घर में आंदोलनकारी लोगों को छुपाती थी चाहे वह किसी भी धर्म से हो एक बार उन्होंने आंदोलन में एक हिंदू भाई की जान भी बचाई थी जिसको अंग्रेज सिपाही मार देना चाहते थे दूसरे धर्म के लोगों की सहायता करते देख उनका पति बहुत गुस्सा होता था इस वजह से वह अक्सर उनको मारा भी करता था कहानी में असली ट्विस्ट तब आता है जब 1947 में भारत को आजादी मिली देश आजाद हो चुका था मगर अंग्रेजों ने इस देश के दो टुकड़े कर दिए थे भारत और पाकिस्तान पाकिस्तान देश ऐसा देश बनाया गया जहां मेजॉरिटी मुस्लिम लोगों की थी इसके चलते पूरे भारत में दुनिया की सबसे बड़ी माइग्रेशन देखी गई कुछ लोग भारत में शरण लेने गए और कुछ पाकिस्तान इसी बीच जेनाबाई के पति ने भी पाकिस्तान जाने की ठान ली मगर उन्होंने साफ जाने से इंकार कर दिया वो भारत की एक स्वतंत्रता कारी थी और वो यहीं रहना चाहती थी उनका पति तभी के तभी भारत से पाकिस्तान के लिए रवाना हो गया और उनको अपने पांच बच्चों के साथ भारत में ही अकेला छोड़ दिया देश अभी-अभी आजाद हुआ था और वह आर्थिक स्थिति से जूझ रहा था इसके चलते भारत में राशन की कमी भी होने लगी थी जिसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने गरीबों के लिए रास्ते पर राशन की व्यवस्था की जैसा आपने सुना होगा कि मुश्किल वक्त में आदमी सबसे ज्यादा ताकतवर बन जाता है वैसे ही चेना भाई अपने बच्चों को पालने के लिए सरकारी राशन बेचने के धंधे में लग गई इस धंधे से ही पहली बार जेनाबाई अंडरवर्ल्ड से मुखातिब होती हैं जेनाबाई यहां एक ब्रोकर के तौर पे चावल गेहूं और दाल की स्मगलिंग अनलाइसेंस्ड होलसेलर और रिटेलर को करने लगी

भारत सरकार ने जहां बिना लाइसेंस के राशन को आगे बेचना और अपने पास रखने की मना की थी वहीं वह गलत तौर तरीके से इसको रखती और अनलाइसेंस्ड लोगों को बेचा करती थी इस धंधे ने उनका नाम चारों तरफ बिखेर दिया उनका इन्फ्लुएंस इसमें इतना बढ़ गया कि कई बार पुलिस इनके घर पर छापेमारी करने भी जाया करती थी मगर कोई सबूत हाथ ना लग पाता था इस धंधे ने जेनाबाई को नहीं पहचान दी जिसके बाद उन्होंने इकबाल गांधी नामक बंदे से दूसरी शादी कर ली मगर धीरे-धीरे इसमें मुनाफे कम होने लगे और जेनाबाई परेशान रहने लगी जहां उन्होंने अपनी इमेज अंडरवर्ल्ड में टॉप में बना ली थी और सारे अंडरवर्ल्ड के लोगों के साथ रिश्ते बहुत ही अच्छे बना लिए थे वहीं उनके परेशानी को दूर करने के लिए उनकी मुलाकात वर्ध राजन मुदालियर से हुई वर्ध राजन अंडरवर्ल्ड की दुनिया का सबसे बड़ा डॉन माना जाता था उसका धारावी की स्लम में काफी बोलबाला था बंबई में रह रहे तमिल कम्युनिटी के लोग उसको अपना मसीहा मानते थे फिर एक दिन वो जेनाबाई से मिलने पहुंचा जहां उसने उनको दारू के धंधे में घुसने का सुझाव दिया पहले तो उन्होंने इस धंधे में आने के लिए ही मना कर दिया क्योंकि वह एक मुसलमान थी मगर इस धंधे में इतना पैसा देख उनकी लालच बढ़ गई उ उने डोंगरी में ही शराब बनाने का धंधा शुरू कर दिया फिर क्या धीरे-धीरे हर गली मोहल्ले बस्ती और पूरे मुंबई शहर में उनके नाम का सिक्का चलने लगा वो माफिया क्वीन के नाम से जाने जाने लगी यह वही पल था जहां उनके नाम के पीछे दारू वाली ऐड हो गया किसी भी व्यक्ति को कोई दिक्कत होती तो वह उनके घर जा पहुंचता था आम लोगों से लेकर माफिया भी उनके घर आते जाते थे यहां तक कि पुलिस के कई ऑफिसर्स उनके घर उनसे मिलने आते थे पहली दफा मुंबई में ऐसा हो रहा था जहां एक महिला की इ इतनी पावर बन चुकी थी कि बड़े से बड़ा नेता और सेलिब्रिटीज तक उनकी पहुंच बन चुकी थी शराब बनाने और बेचने का उनका नेटवर्क पूरे बंबई में फैल चुका था शराब ऐसे बिक रही थी जैसे राशन की दुकान में गेहूं और चावल 1960 के दशक तक जेनाबाई का धंधा चरम सीमा पर था फिर एक दिन वर्ध राजन ने उनकी मुलाकात उस वक्त के मशहूर अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान और करीम लाला से करवाई वर्धराजन हाजी मस्तान और करीम लाला को पहले से जानता था वो जब कस्टम डॉग के इलाके में तस्क करी के धंधे में लिप्त था उसी समय पुलिस ने उसे एंटीना चुराने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था जब वह जेल में था तब हाजी मस्तान उससे मिलने पहुंचा हाजी की वहां एंट्री उसकी जिंदगी पलटने वाली थी उसे यह बिल्कुल मालूम ना था वो उन दिनों सफेद कपड़े पहनता था और हाथ में सिगरेट उसके रहती थी वह वर्धराजन के लॉकअप के पास पहुंचा और उसे वन कम थली वियर कह के पुकारा अब तक व अंडरवर्ल्ड की दुनिया में उसे पहले किसी ने ऐसा ना कहा था क्योंकि हाजी खुद मद्रास से था और उसका नाम अंडरवर्ल्ड में बहुत था यह देखते हुए वर्धराजन भी हाजी मस्तान के साथ मिल गया अब क्योंकि जेनाबाई का नाम शराब की तस्करी में इतना बड़ा बन गया था इसलिए हाजी ने उनसे मिलने की बात वर्धराजन के सामने रखी उनके साथ मिलते ही

हाजी मस्तान और करीम लाला को ऐसा लगा कि कोई अपने ही घर की बड़ी हस्ती से मिल रहे हो तब से वो लोग जेनाबाई को मौसी कहकर पुकारने लगे मौसी का दर्जा तो दिया ही दिया साथ ही मौसी की बातों को पत्थर की लकीर जैसे माना वो जो कहती थी वैसा ही होता था अगर कहीं पुलिस के साथ कुछ आपा सुनी हो जाती तो व ही उस मामले को सुलझा थी पुलिस से लेकर अंडरवर्ल्ड तक का हर डॉन मौसी को बहुत मानता था वह ऐसी पगडंडी बन चुकी थी जो हर किसी के इल्लीगल काम को छुपाती थी उनके घर कई बार छापे मारी भी होती थी मगर वह दिमाग की इतनी तेज थी वह दारू की बोतलें भगवान की मूर्ति के पीछे छुपा देती थी पुलिस को यह भनक तक नहीं होती थी कि मूर्ति के पीछे कोई शराब भी छुपा सकता है इन सब चालाकी और दिमागी खेलों की वजह से ही उनके आगे सब झुकते थे व जिस टोंगरी के इलाके में रहती थी वहीं उनके घर के पास एक और फैमिली रहती थी जिनके यहां उनका उठना बैठना था यह वो फैमिली थी जिसका बेटा आगे जाके वन ऑफ द मोस्ट वांटेड डॉन की लिस्ट में शामिल हुआ और वो था दाऊद इब्राहिम वो दाऊद को बचपन से ही जानती थी उसके बचपन से लेकर बड़े होते-होते किए गए हर कांड को वो जानती थी जब भी वह कुछ गलत काम करता वह अपनी मौसी के यहां पर जाकर छिप जाया करता था जब वो अंडरवर्ल्ड में अपनी पकड़ ही बना रहा था उस समय उसकी दूसरी गैंग वालों से बनती नहीं थी हर वक्त वो दूसरी गैंग से भिड़ होता रहता था जिसके चलते करीम लाला की पठान गैंग और खुद हाजी मस्तान भी उसकी उन हरकतों से बहुत परेशान हो चुका था हाजी मस्तान को धंधा करने में दिक्कत आने लगी थी और वहीं दूसरी गैंग वाले भी उसके पास अपनी शिकायत लेके पहुंचते थे अब यह सब देख वो जेनाबाई के घर जा पहुंचा जहां उसने उनको इन सब दिक्कतों से अवगत कराया वैसे तो वह सब जानती थी मगर उन्होंने हाजी को वादा किया कि वह दाऊद को मना लेंगी और वह दूसरी गैंग से हाथ जरूर मिला लेगा अब उन्होंने हाजी को तो वादा कर दिया था पर वो परेशान थी कि आखिर कैसे वह गर्म बुद्धि वाले दाऊद को समझा पाएंगी मगर उस दिन कुछ ऐसा हुआ कि उनकी दिक्कत तभी के तभी सुलज गई उनके घर का दरवाजा कोई बार-बार जल्दी में बजा रहा था और जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला तो दाऊद खून से लथपथ था उनको समझ में आ गया कि आज वह कोई एक बड़ा कांड करके आया है और वहां वह छिपने के लिए आया है दाऊद ने अपनी मौसी को बताया कि उसने किसी गैंग के बंदे को इतना पीटा

कि अब वह आईसीयू में है और पुलिस उसके पीछे पड़ी है वो उनके सामने गिर गड़ गिराने लगा कि कैसे भी करके उसको मौसी बचा ली तब उनका वही तेज दार दिमाग दौड़ा और उन्होंने उससे कहा कि एक ही शर्त पर बचा पाऊंगी अगर वह उनकी बात मानेगा वो इतना घबराया हुआ था कि उसने बिना सुने ही जेनाबाई को बोला कि आप बस बचा लो मुझे जो बोलोगे मैं वो करूंगा अगले ही दिन वह मुंबई क्राइम ब्रांच के दफ्तर पहुंच गई जैसे कि आपको पता चल गया होगा कि उनकी पुलिस में पकड़ काफी थी तो वो डायरेक्ट ही सीनियर ऑफिसर के पास जा पहुंची उनसे बात करते वक्त उन्होंने दाऊद की बात चालू कर दी ऑफिसर ने बताया चारों ओर उसको ढूंढ रहे हैं मगर वह कहीं मिल नहीं रहा जिसके जवाब में उन्होंने कहा वह जानती हैं वह कहां है मगर वह एक ही शर्त पर बताएंगे अगर ऑफिसर उनकी एक कंडीशन मान ले उन्होंने बिना डरे ही उनको कहा कि दाऊद पे रजिस्टर्ड सारे क्रिमिनल्स रिकॉर्ड हटा दिए जाएं और वह आपका एक इनफॉर्मेंट बन जाएगा उन्होंने वहां यह समझाया कि वह उनको अपनी मां के समान मानता है और वह उनकी यह बात मान लेगा फिर सुबह अचानक उनके दरवाजे पर किसी ने खटखटाया जब उन्होंने दरवाजा खोला तो दाऊद ने दरवाजा खोलते ही कहा मौसी कुछ हो पाया क्या वोह मुस्कुराते हुए बोली तुम्हारी मौसी ने सब ठीक कर दिया है अब परेशानी की कोई बात नहीं जेनाबाई भी कहां दाऊद के किए वादे को भूलने वाली थी उन्होंने तभी उसको समझाया कि हाजी गैंग वॉर की वजह से परेशान हो गया

और वह चाहता है कि तुम बाकी सभी गैंग से हाथ मिला लो यहां व कुछ ना कह सका और यहीं से ही एक नई अंडरवर्ल्ड की शुरुआत हुई जेनाबाई के कहने पे सभी गैंग ने अपने-अपने धंधे और एरिया बांट लिए थे इसके बाद अंडरवर्ल्ड की पकड़ इतनी मजबूत हो गई कि मानो पुलिस प्रशासन सब फीका पड़ चुका था अंडरवर्ल्ड के नामी डॉन उनसे ही सलाह लेते थे और वह जैसा कहती थी वो हुआ करता था उनका हाथ इन सबके ऊपर एक ताज की तरह चमक रहा था मगर जैसा आप जानते हैं कि अच्छा समय ज्यादा नहीं टिकता और वो ऐसा अच्छा समय जहां जुर्म पे जुर्म सिर्फ और सिर्फ गलत काम तुम किए जा रहे हो वो तो बिल्कुल नहीं टिकेगा भारत में तब की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पूरे भारत में इमरजेंसी लगा दी जिसके बाद इसका असर अंडरवर्ल्ड की दुनिया पर भी पड़ा एक तरफ इमरजेंसी के बाद देश की राजनीति तेजी से बदल रही थी तो दूसरी तरफ मुंबई का अंडरवर्ल्ड भी तेजी से बदल रहा था नए-नए डॉन नया-नया बिजनेस कर रहे थे गैंग वॉर हो रहा था अंडरवर्ल्ड कई ग्रुप में बढ़ चुका था लेकिन चेना बाई एक तरफ से सारा तमाशा देख रही थी हाजी मस्तान से लेकर दाऊद तक अपना नेटवर्क बढ़ा रहे थे इन गैंग वॉर में जनाबाई का बेटा भी शामिल था और एक दिन अचानक ही एक गैंग वॉर में उसकी मौत हो गई इसके बाद जेनाबाई को एक बहुत बड़ा झटका लगा अपराधियों तक पुलिस और वह साथ पहुंची लेकिन फिर उन्होंने हथियारों को छोड़ दिया और कहा कि इन्हें ऊपर वाला ही सजा देगा वो उम्र के एक पड़ाव पर पहुंच गई थी ऊपर से बेटी की मौत का दर्द और दुख दे रहा था अब वो धर्म के रास्ते पर आ गई थी वो हिंदू मुसलमान एकता के लिए काम करने लगी जहां भी सांप्रदायिक झड़प होती वो हिंदू और मुस्लिम संप्रदाय के रसूखदार लोगों के साथ वहां पहुंचती और एकता की बात करती इससे उनकी छवि तेजी से बदलने लगी इस दौरान अपराध की दुनिया से उनकी पकड़ कम होने लगी दारू का धंधा भी पूरी तरह से बदल गया था नई तरह के नशे और नई तरह की स्मगलिंग भी शुरू हो चुकी थी वो इन सबसे दूर हो रही थी उनका नेटवर्क भी खत्म हो गया था

ऐसे में हाजी मस्तान से लेकर दाऊद तक उनसे दूरी बना रहे थे उनको अपनी जिंदगी में बेटे की मौत के बाद एक और बड़ा झटका लगा जिसके बाद वह अपने को संभाल नहीं पाई 1993 बंबई बम धमाके के बाद वह काफी परेशान रहने लगी थी उन्हें पछतावा भी था कि अगर उनका नेटवर्क रहता तो इस धमाके की पहले ही उन्हें जानकारी हो जाती और वह इसे रोक सकती दाऊद को लेकर भी उनकी नाराजगी सबसे ज्यादा थी उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि जिस बंबई ने उन सबको इतना सब दिया उसी बंबई में उसने लोगों की लाशें बिछा दी इन मौतों ने उन्हें अंदर तक हिला दिया था और वह उससे उभर नहीं पाई जिसके चलते बीमारी बढ़ने लगी और उनका निधन हो गया तो ये थी दोस्तों स्वतंत्रता सेनानी से अंडरवर्ल्ड की फर्स्ट लेडी डॉन की कहानी जिन्हें बड़े से बड़े डॉन सलाम ठोकते थे अगर आपको कुछ ऐसे ही टॉपिक पे और वीडियोस चाहिए तो हमें कमेंट में अपने पसंदीदा टॉपिक जरूर मेंशन करें तब तक के लिए हम आपसे विदा लेते हैं जल्द हाजिर होंगे एक नए इंटरेस्टिंग टॉपिक के साथ अगर यह वीडियो पसंद आया है तो इसे अपने दोस्तों के साथ तो शेयर कर दें और हां वीडियो को लाइक करना ना भूलें और अगर आपने हमारे चैनल को अभी तक सब्सक्राइब नहीं किया है तो वह भी कर दें साथ ही बेल आइकॉन प्रेस करना बिल्कुल ना भूलें ताकि हमारी वीडियो आप तक जल्द से जल्द पहुंच सके

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