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ना कॉलेज, ना बड़ी डिग्री फिर कुणाल शाह को कैसे मिला whatsapp CEO बनने का मौका? जानकर होगी हैरानी।

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बिना किसी बड़े बिजनेस घराने का सपोर्ट, बिना किसी आईआईटी और आईएम की डिग्री। एक ऐसा लड़का जिसने कॉलेज भी बीच में छोड़ दिया।

डाटा एंट्री की नौकरी की और डिलीवरी एजेंट तक का काम किया। आज वही इंसान भारत के सबसे सफल स्टार्टअप फाउंडर्स में गिना जाता है और अब साल 2026 में मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा ने इन्हें WhatsApp का ग्लोबल हेड बना दिया है। हम बात कर रहे हैं क्रेड और फ्री चार्ज के फाउंडर कुणाल शाह की। लेकिन आखिर एक फिलॉसफी के स्टूडेंट ने हजारों करोड़ का बिजनेस साम्राज्य कैसे खड़ा कर दिया। आइए जानते हैं उनकी ये दिलचस्प कहानी।

कुणाल शाह का जन्म 30 मई 1979 को अहमदाबाद के एक गुजराती परिवार में हुआ था। लेकिन उनकी परवरिश मुंबई में हुई। भले ही गुजराती होने के नाते घर में बिजनेस का माहौल था, लेकिन कुणाल का शुरुआती जीवन आसान नहीं रहा। उनके परिवार ने एक ऐसा दौर देखा जब बिजनेस में भारी आर्थिक संकट आया। वे लगभग दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गए।

साथियों, इसी मुश्किल वक्त ने कुणाल को बहुत कम उम्र में पैसों की असली कीमत सिखा दी। जहां बाकी बच्चे स्कूल, कॉलेज और खेल कूद में बिजी रहते थे, वहां कुणाल यह समझने में लगे रहते थे कि आखिर पैसा काम कैसे करता है और लोग अमीर कैसे बनते हैं। साथियों, जब भी हम भारत के बड़े टेक फाउंडर्स की बात करते हैं तो दिमाग में आईआईटी, आईआईएम और विदेशी यूनिवर्सिटीज के नाम आते हैं। लेकिन कुणाल की कहानी इससे बिल्कुल अलग है।

उन्होंने मुंबई के विल्सन कॉलेज से फिलॉसफी यानी दर्शनशास्त्र में ग्रेजुएशन किया। लोग उस जमाने में इस सब्जेक्ट को करियर के लिहाज से बेकार मानते थे। लेकिन कुणाल कहते हैं कि इसी फिलॉसफी ने उन्हें ह्यूमन बिहेवियर यानी इंसानों के बर्ताव को समझना सिखाया और यही समझ आगे चलकर उनके हर बिजनेस की नीव बनी। इसके बाद उन्होंने एमबीए में एडमिशन तो लिया लेकिन कुछ ही महीनों में उन्हें लगा कि क्लासरूम से ज्यादा सीख तो बाहर की असली दुनिया में मिल रही है। नतीजा यह हुआ कि 2004 में उन्होंने एमबीए बीच में ही छोड़ दिया।

पैसे की जरूरत थी इसलिए कुणाल ने कभी काम को छोटा नहीं समझा। उन्होंने डाटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी की। डिलीवरी एजेंट का काम किया और कई छोटे-मोटे बिजनेस ट्राई किए। वे लगातार सीख रहे थे कि कस्टमर को आखिर चाहिए क्या? साल 2010 में उन्होंने अपने दोस्त संदीप टंडन के साथ मिलकर ल्च किया फ्री चार्ज। आईडिया एकदम सिंपल लेकिन धांसू था। अगर आप मोबाइल रिचार्ज करेंगे तो आपको उतने ही रुपए के डिस्काउंट कूपन मुफ्त मिलेंगे। यह मॉडल सुपरहिट रहा। जनता को फ्री का फायदा मिला और कंपनियों को नए ग्राहक। साल 2015 में Snapde ने फ्री चार्ज को करीब ₹2800 करोड़ में खरीद लिया। कुणाल शाह रातोंरात स्टार बन चुके थे। अक्सर लोग कंपनी बेचकर आराम की जिंदगी चुनते हैं। पर कुणाल ने ऐसा नहीं किया। उनके दिमाग में एक सवाल था जो लोग समय पर अपने बिल भरते हैं उन्हें कोई इनाम क्यों नहीं मिलता?

इसी सोच से 2018 में जन्म हुआ क्रेड का। शुरुआत में लोगों ने सोशल मीडिया पर क्रेड का खूब मजाक उड़ाया। लोग पूछते थे भाई यह कंपनी आखिर पैसा कैसे कमाती है? लेकिन कुणाल शाह इंसानी दिमाग को अच्छे से समझते थे। उन्हें पता था कि लोगों को पहचान और रिवॉर्ड्स पसंद हैं। उन्होंने पहले एक भरोसेमंद कस्टमर बेस बनाया। फिर धीरे-धीरे पेमेंट्स, लोन, इंश्योरेंस और वेल्थ मैनेजमेंट जैसी सर्विज भी जोड़ दी। आज क्रेड के 1.7 करोड़ से ज्यादा मेंबर हैं और कंपनी का सालाना रेवेन्यू करीब ₹3200 करोड़ तक पहुंच चुका है। अब आते हैं साल 2026 के सबसे बड़े धमाके पर। टेक जंट मेटा ने कुणाल शाह की कंपनी क्रेड में एक बड़ा इन्वेस्टमेंट किया है।

इस बड़ी डील के साथ ही कुणाल शाह ने एक हैरान करने वाली घोषणा की। उन्होंने क्रट के सीईओ पद से हटने का फैसला किया है। क्योंकि अब वे मेटा के हिस्सा बनकर WhatsApp के ग्लोबल हेड के तौर पर पूरी दुनिया में इसका नेतृत्व करने जा रहे हैं।

डाटा एंट्री ऑपरेटर से लेकर WhatsApp के ग्लोबल हेड बनने तक का कुणाल शाह का यह सफर हमें सिखाता है कि कामयाबी के लिए किसी बड़ी डिग्री या बड़े खानदान की जरूरत नहीं होती। जरूरत होती है तो बस इंसानी जरूरत को समझने की। लगातार सीखते रहने की और रिस्क लेने की, हिम्मत रखने की।

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