अरिजीत अगर तुम शो पर वापस आओगे तो हमारे लिए खतरा है। मगर मुझे चैलेंज पसंद है इसलिए मैंने तुम्हें वोट [संगीत] किया है। साल 2005 17 से 18 साल के अरिजीत सिंह सिंगिंग शो फेम गुरुकुल से लगभग बाहर ही हो गए थे। मगर ऐन मौके पर दूसरे प्रतिभागी [संगीत] काजी तौकीर ने उन्हें अपने इन्हीं शब्दों के साथ रिवाइव कर दिया। यही वो मौका था जिसने अरिजीत और काजी को पक्का दोस्त बना दिया। अजीत फेम गुरुकुल [संगीत] जीत तो नहीं सके मगर अगले दो दशक में इंडियन म्यूजिक के सबसे बड़े स्टार बन गए। दूसरी तरफ काजी उस शो को जीतने के बावजूद लगभग गुमनामी में खो गए। इन दिनों वो बिग बॉस 20 में बतौर कंटेस्टेंट जुड़े हैं। वहां काजी के अनोखे [संगीत] अंदाज ने उन्हें एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। ऐसे में एक नजर डालते हैं उनकी इस अनोखी सी कहानी पर। श्रीनगर के एक मिडिल क्लास परिवार में पैदा हुए काजी की मां टीचर थी। वहीं उनके पिता वकालत किया करते थे। लेकिन हवा का रुख कुछ ऐसा बना कि उनकी रुचि [संगीत] सूफी संगीत में बढ़ गई। काजी के चाचा भी एक गायक हुआ करते थे। इसलिए घर में शुरुआत से ही म्यूजिक [संगीत] को लेकर अच्छा माहौल बना हुआ था। फिर भी काजी ने गाने की कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं ली थी। उन्हें कश्मीरी लोकगीत और बॉलीवुड के [संगीत] गाने सुनने का बहुत शौक था। इसलिए काजी ने उनकी धुन को ही अपना गुरु बना लिया। 2000 के शुरुआती दौर में टीवी और केबल कनेक्शन देश के कोने-कोने तक पहुंच चुका था। ऐसे में रियलिटी शोज़ की डिमांड आसमान छूने लगी। इंडियन आइडल जैसे म्यूजिक शोज़ घर-घर में देखे जाने लगे। [संगीत] साल 2005 में Sony एंटरटेनमेंट ने भी अपना म्यूजिक शो शुरू किया। नाम रखा फेम गुरुकुल। यह इंटरनेशनल सिंगिंग शो फेम एकेडमी का देसी वर्जन था। देश भर में ऑडिशन लिए जाने लगे। ऐसे में काजी ने भी तय किया कि वो भी इस शो का हिस्सा बनेंगे। [संगीत] मगर यह इतना भी आसान नहीं था। दरअसल तब कश्मीर का देश के बाकी हिस्सों से आग जैसा कनेक्शन नहीं था। ना ही काजी के पास कोई कश्मीरी रोल मॉडल था जिससे वह ऑडिशन के संबंध में गाइडेंस ले सके। फिर भी उन्होंने अपना पत्ता फेंका और ऑडिशन में सेलेक्ट [संगीत] हो गए। काजी उन 16 प्रतिभागियों में से एक थे जिन्हें फेम गुरुकुल के लिए चुना गया था। उनके अलावा रेक्स डिसूजा रूपरेखा बनर्जी, कीर्ति [संगीत] सगाठिया, संदीप बत्रा और श्रमित त्यागी जैसे नाम भी इस शो का हिस्सा थे। मगर इससे सबसे ज्यादा काजी और अरिजीत सिंह के लिए ही याद किया जाता है। शो में कंटेस्टेंट्स को गुरुकुल जैसे माहौल में ही रखा जाता है। वहां उन्हें गाने के साथ स्टेज परफॉर्मेंस की ट्रेनिंग भी दी जाती है।
हर हफ्ते वह जावेद अख्तर, शान, शंकर महादेवन और केके जैसे बड़े जजों के सामने परफॉर्म करते थे। फेम गुरुकुल में दर्शक एसएमएस के जरिए अपने पसंदीदा कंटेस्टेंट को वोट कर सकते थे। तब एक मैसेज करने के लगभग ₹6 लगते थे। आज के हिसाब से देखें तो यह काफी महंगा है। बावजूद इसके जनता खूब जोशों खरोशों से पार्टिसिपेट करती थी। जैसा हमने शुरुआत में बताया काजी तौकीर ने गाने की कोई ट्रेनिंग नहीं ली थी। इसलिए फेम गुरुकुल के मंच पर वो बाकी कंटेस्टेंट से थोड़ा उन्नेस रह [संगीत] जाते थे। जज अक्सर उनकी इस तकनीकी खामी पर उन्हें टोकते थे। कई बार उन्हें बुरी तरह झाड़ भी पड़ जाती थी। काजी खुद भी स्वीकारते हैं कि तब वो अच्छा नहीं गा पाते थे। [संगीत] ऐसे में उनका शो जितनातना किसी चमत्कार से कम नहीं था। फिर भी जब काजी को शो के बाकी [संगीत] 15 प्रतिभागियों के सामने खड़ा करे तो वो एक डिपार्टमेंट में 21 नजर आएंगे। यह डिपार्टमेंट है उनका कॉन्फिडेंस। काजी को चाहे कितनी ही डांट पड़ जाए, मंच पर वो अपनी परफॉर्मेंस [संगीत] से तूफान ला देते थे। उनका तरसा हुआ चेहरा, लंबे बाल और मुस्कुराहट को प्लस पॉइंट कहा जा सकता है। अमेरिका, बांग्लादेश, फ्रांस, इटली और नाइजीरिया से उन्हें फैंस [संगीत] मेल्स आते थे। लड़कियों के बीच भी काजी खास पॉपुलर हो गए थे। सबसे खास बात यह है कि लोगों को उनका इमोशनल साइड बहुत पसंद था। वो फेक नहीं लगते थे। उनमें उसी बच्चे जैसी बेसब्री थी जो सब जीतना चाहता था। हर हफ्ते जज ये कह देते थे कि वो अच्छा नहीं गाते हैं। हर हफ्ते वो खुद को फिर साबित करता। [संगीत] इसलिए टीवी देख रही जनता उनसे खूब कनेक्ट कर पाती थी। कहते हैं कि काजी फेम गुरुकुल केवल इसलिए नहीं जीते कि वो अच्छे परफॉर्मर थे बल्कि वह इसलिए भी जीते क्योंकि जनता को उनमें एक अच्छा इंसान देखने को मिल रहा था। तब Sony एंटरटेनमेंट के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस हेड तरुण कात्याल ने एक इंटरव्यू में कहा भी था हम इस लड़के का क्या करें? इसने साबित कर दिया है कि किसी स्टार की कामयाबी सिर्फ टैलेंट से तय नहीं होती बल्कि उससे भी कहीं बड़ी ताकतें होती है जो किसी को स्टार बना सकती है। काजी ने जाने-अजाने ऑडियंस से ऐसा कनेक्शन बना लिया था जो उनके लिए [संगीत] कर्ण के कवच जैसा था। शो पर वो 10 बार एलिमिनेट हुए। पूरे सीजन में शायद सबसे ज्यादा उन्हें ही बाहर किया गया था। लेकिन हर बार जनता का वोट उन्हें वापस शो पर ले आता था। मीडिया ने उन्हें जनता का दुलारा कहना शुरू कर दिया था। तब जजों के पैनल और दर्शकों में खींचातानी [संगीत] चल रही थी। इसका फायदा काजी को मिला और उनकी पॉपुलैरिटी आसमान छूने लगी। कश्मीर में तब ज्यादा सुविधाएं नहीं थी। फिर भी काजी [संगीत] को सुनने के लिए लोग कोई ना कोई जुगाड़ लगा लेते थे। परिवार साथ बैठकर टीवी पर उन्हें देखता। दुकानदार अपने ग्राहकों को उनका ट्रैक रिकॉर्ड देते रहते।
एक ऐसा प्रदेश जो आतंक और हिंसा की गिरफ्त में था उसके लिए काजी उम्मीद की किरण लेकर आए। इसलिए उनका आगे बढ़ना पूरे कश्मीर के आगे बढ़ने जैसा [संगीत] महसूस हो रहा था। और फिर आता है 20 अक्टूबर 2005। उस रात फेम गुरुकुल का सीजन फिनाले [संगीत] था। देश भर के लोग अपने घरों में टीवी से चिपके हुए थे। जैसी उम्मीद थी काजी बड़े अंतर से इस शो के विजेता बन गए। तब वो केवल 20 साल के थे। लोगों ने उन्हें इतना वोट दिया कि वो एक रिकॉर्ड [संगीत] ही बन गया। कैसा रिकॉर्ड? इसे समझने के लिए आपको एक गणित जानना पड़ेगा। दरअसल जब इंडियन आइडल का पहला सीजन आया था तब अभिजीत सावंत और अमित साना जैसे कंटेस्टेंट्स को 3 करोड़ वोट मिले [संगीत] थे। वह भी पूरे सीजन को मिलाकर। उसकी तुलना में फेम गुरुकुल एक छोटा सा शो था। मगर वहां काजी को अकेले ही 2 करोड़ 50 लाख से ज्यादा वोट मिल गए थे। तब भारत में किसी भी रियलिटी शो कंटेस्टेंट को इतने वोट नहीं मिले थे। देश के अलग-अलग इलाकों से जनता ने उनके लिए एसएमएस भेजे कहते हैं कि तब ऑडियंस ने काजी के सपोर्ट में किए गए मैसेजेस पर 11 से ₹15 करोड़ खर्च कर दिए थे। यह अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है। फेम गुरुकुल में काजी ने विजेता का यह खिताब रूपरेखा बनर्जी के साथ शेयर किया था। उन्हें शो की फेम जोड़ी बताया गया। दोनों को ₹50-50 लाख मिले। साथ ही Sony म्यूजिक का कॉन्ट्रैक्ट और एक-एक Maruti Alto भी। वो ऐतिहासिक पल था। काजी को तब कश्मीर का हीरो घोषित कर दिया गया था। श्रीनगर में बड़ा जश्न मनाया जाने लगा। लोग नाचे गाए और उनके घर के बाहर जमा हो गए। अखबारों की सुर्खियां उनके नाम से पट गई। काजी को फेम गुरुकुल जाने [संगीत] से पहले भले खुद कोई मेंटर ना मिला हो मगर उनके जीतते ही कश्मीरी युवाओं ने सिंगिंग शोज़ के लिए ऑडिशन देना चालू कर दिया। इंडियन आइडल के श्रीनगर ऑडिशन में तब रिकॉर्ड तोड़ प्रतिभागी पहुंचे थे। काजी उस दौर में वायरल हुए जब वायरल [संगीत] होने जैसा कोई कांसेप्ट भी नहीं था। देखते ही देखते उनकी पॉपुलैरिटी दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में दस्तक देने लगी। उस साल फेम गुरुकुल के प्रतिभागियों को राष्ट्रपति भवन से [संगीत] भी बुलावा आया था। तब डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम काजी से मिले और उन्हें हीरो ऑफ कश्मीर घोषित कर दिया। काजी के लिए यह फेम गुरुकुल जीतने से भी बड़ी उपलब्धि थी क्योंकि वो हर कश्मीरी यंगस्टर [संगीत] के लिए प्रेरणा बन गए थे। जब शोहरत का यह शोरशराबा थोड़ा थमा तो सोनी के बैनर तले काजी [संगीत] और रूपरेखा का पहला एल्बम यह पल रिलीज़ हुआ। लगा कि काजी को वह शुरुआत मिल गई है जो उन्हें अगला सिंगिंग सुपरस्टार [संगीत] बना देगी। लेकिन इसके बाद जो कुछ हुआ उसकी कल्पना शायद किसी ने की भी ना होगी। दरअसल काजी ने तय किया [संगीत] कि वह सक्सेस के पीछे भागने की जगह केवल वही काम करेंगे जो उन्हें पसंद आएगा। वो वापस कश्मीर चले गए। साथ ही अपने गानों को लेकर भी बहुत सेक्टिव हो गए। 2009 में उन्होंने सरकार की दुनिया रियलिटी शो में पार्टिसिपेट किया। हालांकि वहां से वो जल्द ही बाहर हो गए। [संगीत] काजी हमेशा से जानते थे कि वो बहुत अच्छे सिंगर नहीं हैं। पर साथ ही उन्हें यह भी पता था कि उन जैसा परफॉर्मर कोई और नहीं। इसलिए उन्होंने फिल्मों में काम करने का फैसला [संगीत] किया। सिंगर नहीं बल्कि एक्टर के तौर पर। खास बात यह है कि उन्हें दो मूवीज मिल भी गई। वेटन कोरियोग्राफर और डायरेक्टर गणेश आचार्य ने उन्हें अपनी फिल्म टेक ऑफ [संगीत] में लीड रोल दे दिया। प्रोजेक्ट पर काम शुरू भी हो गया। मगर फिर सेट पर एक ऐसी दुर्घटना हुई जिसने काजी [संगीत] की बची खुची उम्मीद तोड़ दी। दरअसल एक इंटेंस डांस सीक्वेंस की प्रैक्टिस करते [संगीत] हुए उनके गले में बहुत बुरी चोट लग गई। उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट करना पड़ा।
इस कारण पहले फिल्म की शूटिंग रुकी और बाद में इस पूरे प्रोजेक्ट को ही शेल्व करना पड़ा। वैसे गणेश आचार्य से पहले कोरियोग्राफर अहमद खान [संगीत] ने भी काजी को एक मूवी ऑफर की थी। मगर वो फिल्म कभी बन ही नहीं पाई। खैर, उस चोट के बाद काजी लाइमलाइट से पूरी तरह दूर हो चुके थे। उन्होंने कश्मीर में लाइव शोज़ और इवेंट में परफॉर्म करना शुरू कर दिया था। साथ ही वह पुराने गानों का रिमेक भी बनाने लगे। फिर आया 2015। डायरेक्टर कबीर खान, [संगीत] कैटरीना कैफ और सैफ अली खान के साथ फैंटम बना रहे थे। उसमें एक गाना शूट होना था गाने का नाम अफगान जलेबी। [संगीत] नई पीढ़ी काजी को इसी गाने की वजह से जानती है। वह बिग बॉस 20 में भी अक्सर इसे गाते रहते हैं। मगर लोगों को भ्रम है कि वह इस गाने के ओरिजिनल सिंगर हैं। पर ऐसा [संगीत] नहीं है। दरअसल अफगान जलेबी को पाकिस्तान सिंगर असरार ने गाया है। काजी केवल इसमें फीचर हुए हैं। लेकिन उन्हें यह गाना कैसे मिला? यह एक अलग हिस्सा है। दरअसल एक दिन काजी मुंबई के पृथ्वी थिएटर गए थे। वहां उनकी मुलाकात शाहनवाज नाम के अपने एक फैन से हुई। शाहनवाज फेम गुरुकुल के दिनों से ही काजी के बहुत बड़े फैन थे। इसलिए उन्हें देखकर वह इमोशनल हो गए। दोनों गले मिले साथ में फोटो खिंचवाई। नंबर एक्सचेंज हुए और दोनों अपने-अपने घर चले गए। [संगीत] कुछ दिन बाद शाहनवाज ने काजी को कॉल किया और उनसे मिलने की इच्छा जताई। काजी ने उन्हें घर बुला लिया। शाहनवाज ने आते ही उन्हें बताया कि कोरियोग्राफर अहमद खान के असिस्टेंट ने उन्हें कांटेक्ट किया है। दरअसल उस असिस्टेंट ने Facebook पर काजी और शाहनवाज की फोटो देखी थी। इसलिए उसे भी एकाएक उनका ख्याल आ गया। शाहनवाज ने दोनों की बात करवा दी। उस असिस्टेंट ने काजी को बता दिया कि वो दो दिन बाद कैटरीना कैफ के साथ एक गाना शूट करने वाले हैं। [संगीत] क्या वह उसमें काम करना चाहेंगे? काजी इस बात से हैरान थे। उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि इस गुमनामी में इतने सालों बाद एक फैन से वह अचानक मिले और अगले ही पल उन्हें कैटरीना कैफ के साथ एक गाना ऑफर हो गया। पता चला कि उन्हें गाने में फीचर होना है। उसे गाना नहीं है। पहले काजी को लगा कि [संगीत] वह बैकग्राउंड में रहेंगे इसलिए उन्होंने कुछ खास रुचि नहीं दिखाई। मगर उन्हें बताया गया कि उन्हें अफगान जलेबी में कैटरीना कैफ जितना [संगीत] ही स्क्रीन टाइम दिया जाएगा। काजी को लगा कि उनकी एक्टिंग का सपना पूरा हो रहा है। इसलिए वो इसके लिए झट से तैयार हो गए। लगे हाथ उन्होंने उस असिस्टेंट को भी बता दिया कि अहमद खान उन्हें सालों पहले एक मूवी ऑफर कर चुके थे। तब दोनों साथ काम नहीं कर पाए मगर अब घड़ी की सुई घूम कर वहीं [संगीत] आ गई है। अगले दिन काजी शूट पर पहुंचे। वहां कैटरीना की तरह उन्हें भी वैनिटी [संगीत] वैन दी गई। अफगान जलेबी की शूटिंग दो दिन तक चली। काजी बताते हैं कि अहमद खान ने उन्हें गाने में मुस्कुराने कहा था। मगर उन्होंने ऐसा करने से साफ मना कर दिया क्योंकि पठानों का अपना एक अलग एटीट्यूड होता है। जो भी हो गाना रिलीज हुआ और इंटरनेट पर भयंकर वायरल हो गया।
टी सीरीज ने काजी को क्रेडिट में मेंशन भी नहीं किया। फिर भी हजारों लोग कमेंट बॉक्स में काजीज [संगीत] बैक लिखने लगे। उन्हें हजारों फोंस आए। पिछले दिनों खुद सलमान खान ने भी बिग बॉस 20 के मंच पर उन्हें अफगान जलेबी [संगीत] को पॉपुलर करने का श्रेय दिया था। मगर अफगान जलेबी की सक्सेस भी उन्हें [संगीत] फिल्मों में ज्यादा काम नहीं दिलवा पाई। इसलिए उन्होंने कश्मीर में अपने शोज़ का काम जारी रखा। तब तक भारत में इंटरनेट और सोशल मीडिया ने भी काफी [संगीत] रफ्तार पकड़ ली थी। ऐसे में काजी ने अपने गानों को YouTube व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर करना शुरू कर दिया। यही कारण है कि इतने उतार-चढ़ाव देखने के बाद भी वह चर्चा में बने [संगीत] रहते हैं। समय-समय पर उनके गाने सोशल मीडिया पर भी वायरल हो जाते हैं। काजी तौकीर को फेम गुरुकुल का विजेता बने 21 साल बीत गए हैं। इस दौरान उन्होंने अर्श और फर्श दोनों देखा। बावजूद इसके अरिजीत सिंह और उनकी दोस्ती जस की तस बनी हुई है। काजी के मुताबिक फिल्म इंडस्ट्री से केवल अरिजीत ही हैं जिनसे वह अब तक कांटेक्ट में हैं। दोनों लगातार फोन और मैसेज पर बातें करते रहते हैं। कभी-कभी काजी वेस्ट बंगाल में अरिजीत के घर भी चले जाते हैं।
वहां दोनों साथ में स्कूटी पर घूमते हैं। क्रिकेट खेलते हैं और गाने भी बनाते हैं। काजी अक्सर कहते हैं कि उन्हें [संगीत] अरिजीत पर बहुत गर्व होता है। दूसरी तरफ अरिजीत ने भी पब्लिकली ये कहा है कि वो बिग बॉस 20 केवल इसलिए देखेंगे क्योंकि उसमें [संगीत] उनका दोस्त काजी आया है। कुल मिलाकर काजी की कहानी का दो पड़ाव है। एक वो जहां उन्होंने अंधाधुंध शोहरत देखी। दूसरा [संगीत] वो जहां वो दशकों तक गुमनामी में रहे। इन सबके बावजूद उन्होंने अपना अंदाज नहीं बदला। वो बिग बॉस 20 में भी उतने ही कॉन्फिडेंट हैं जितना 21 साल पहले फेम गुरुकुल में थे। उनके जिंदगी ने स्टारडम चखने के बावजूद वो फास्ट पेस रास्ता नहीं पकड़ा जो उन्हें मालामाल कर सकता था। उल्टा वो वापस कश्मीर चले गए उन्हीं लोगों के बीच जिन्होंने उन्हें स्टार [संगीत] बना दिया था। वहां की जनता के लिए वह आज भी इस बात की सबसे बड़ी मिसाल है कि बम धमाकों और गोलियों के बीच एक 20 साल का लड़का कैसे कश्मीर की दिशा बदल [संगीत] सकता है। यह तमाम जानकारी मेरे साथी शुभांजल ने जुटाई है। आपकी इस पूरी खबर पर क्या राय है? हमें कमेंट [संगीत] बॉक्स में जरूर बताइएगा। मैं हूं कनिष्का। देखते रहिए ललन टॉप सिनेमा। शुक्रिया। [संगीत]