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मां का क!टा हाथ लेकर कमिश्नर ऑफिस पहुंचा युवान फिर…

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इसलिए मैं घूम रहा हूं। मेरी मां किसी ने खाना खिलाया। मुझे इतना बड़ा किया उसके लिए घूम रहा हूं। कोई न्याय नहीं रहा। यह इंडो तिब्बतन बॉर्डर पुलिस के जवान विकास सिंह हैं। बर्फ की सिल्ली में ढके अपनी मां का कटा हाथ लेकर घूम रहे हैं। लेकिन न्याय नहीं मिल रहा। इस लड़ाई में यह अकेले नहीं है।

जब कहीं से न्याय की कोई उम्मीद नजर नहीं आई तो आईटीबीपी के करीब 40-50 जवान पुलिस कमिश्नर के ऑफिस पहुंच गए। पुलिस और जवान आमने-सामने आ गए। घंटों मीटिंग हुई तब जाकर एफआईआर दर्ज की गई और एक टीम बनाई गई।

लेकिन ऐसा क्या हुआ कि एक कटे हाथ की वजह से आईटीबीपी के 50ों जवानों को कमिश्नर के पास जाना पड़ा। मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर का है। आईटीबीपी कांस्टेबल विकास सिंह महाराजपुर के 32वीं बटालियन में पोस्टेड हैं। उनकी 56 साल की मां निर्मला देवी को सांस की समस्या थी।

आज तक से जुड़े सिमर चावला की रिपोर्ट के मुताबिक 13 मई को सांस की दिक्कत ज्यादा बढ़ गई थी। जल्दबाजी में उन्हें कानपुर के कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। लेकिन तबीयत बिगड़ती चली गई। संक्रमण लगातार फैल रहा था।

जब बात हाथ से निकल गई तो कृष्णा से निकालकर कानपुर के दूसरे हॉस्पिटल पारस हॉस्पिटल ले जाया गया। पारस में डॉक्टर्स ने बताया कि कृष्णा हॉस्पिटल में कुछ लापरवाही की गई है जिसकी वजह से मरीज के हाथ में पूरी तरह से इंफेक्शन फैल चुका है। शरीर के दूसरे हिस्सों में इंफेक्शन ना पहुंचे इसलिए 17 मई को निर्मला देवी का एक हाथ काट दिया गया। मां को सांस की दिक्कत थी। ज्यादा सीरियस होने के कारण मैं पारस ले जा रहा था। कृष्णा में ले जाना पड़ा।

कृष्ण ले गए तो वहां पर अगले दिन ही हाथ दाहिने हाथ में इंफेक्शन आ जाता है और सूजन आ जाती है। ले गया था सांस के लिए हाथ में क्या हुआ फिर अगले दिन ही मैं पारस लेके चला जाता हूं हाथ की वजह से सांस में तो आराम मिल जाता पर हाथ में पता नहीं क्या इंजेक्शन लगाया क्या किया पारस में वहां इलाज करने इलाज काफी हुआ नहीं बचा पाए हाथ तो मैं बोला क्या हुआ था बोले अब कृष्णा वाले ने क्या किया क्या नहीं किया 17 तारीख को हाथ कट जाता है।

मेरी मम्मी का ये चाहता हूं कि कृष्णा हॉस्पिटल के डॉक्टरों और आईसीयू स्टाफ के ऊपर कारवाई हो कृष्णा हॉस्पिटल बंद हो विकास की मांग है कि कृष्णा हॉस्पिटल को बंद कराया जाए इसके के बाद विकास सिंह अपनी मां का कटा हाथ लिए शिकायत दर्ज कराने पहुंचे। जब पुलिस की कारवाही से वह संतुष्ट नहीं हुए तो उन्होंने अपने विभाग से बात की। 23 मार्च की सुबह आरटीबीपी के कमांडेंट गौरव प्रसाद अपने करीब 50 जवानों के साथ पुलिस कमिश्नर के ऑफिस पहुंच गए।

पूरे ऑफिस को घेर लिया गया और मांग उठी कि जवान की शिकायत पर टीम बनाई जाए और जांच शुरू हुए। वैसे उन्होंने अपने बयान में जो घेराव वाली बात है उसे मना किया है। हमने कोई ऐसा घेरने या कुछ ऐसी कोई कारवाई नहीं हुई है। कमिश्नर सर की तरफ से पूरा सपोर्ट है हमें और अब जो भी जांच रिपोर्ट इस मामले में आएगी तो न्याय होगा। सर के ऊपर हमें पूरा भरोसा है। अपर पुलिस आयुक्त डॉक्टर विपिन ताडा ने बताया कि विकास की शिकायत पर जांच पहले से ही शुरू कर दी गई थी। लेकिन रिपोर्ट से विकास खुश नहीं थे। उसने कुछ चीजों पर दोबारा जांच की मांग रखी। पुलिस ने बताया कि मामले में टीम बनाई गई है जो यह पता लगाएगी कि क्या सच में गलत इंजेक्शन की वजह से संक्रमण फैला था। सुनिए पुलिस का बयान। दोनों पक्षों की रजामंदी से जो आपत्ति के बिंदु थे उस पर पुनः जांच के लिए राजी हुए हैं। दोनों पक्षों की बात हुई है और इसमें जो भी जांच के बाद तथ्य सामने आएंगे उसी आधार पर इसमें अग्रिम विधिक कार्यवाही की जाएगी।

जो आईटीबीपी का जवान था वह अपने कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ यहां पर आए थे वार्ता करने के लिए। उस दौरान उनके जो हमरा थे वह बाहर खड़े थे। इस पर जो उनसे वार्ता की गई और उन्हें समझाया गया तो उन्होंने अपने जवानों को वापस भेज दिया और उन्हें यह बताया गया उनके द्वारा कि यह कोई इस प्रकार का काम नहीं था। ये केवल वार्ता करने के उद्देश्य से आए थे और वार्ता करने के पश्चात वो संतुष्ट हैं और जो इनका पत्र है।

वह सीएमओ साहब से वार्ता कर उन्हें प्रेषित किया गया है। जो भी तथ्य सामने आएंगे उसी आधार पर आगे कार्यवाही की जाएगी। पुलिस ने बताया कि केस में दोबारा जांच के आदेश दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगे का एक्शन लिया जाएगा। l

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