क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि इंडोनेशिया जैसा देश जो दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला मुल्क है वहां आज भी बड़े स्तर पर भगवान राम की पूजा होती है और कंबोडिया में बना दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक अंगकोर वाट असल में एक भव्य हिंदू मंदिर हुआ करता था। साथियों यह फैक्ट्स भले आपको चौंकाते हो लेकिन इन जगहों पर एक दौर में भारतीय संस्कृति का दबदबा हुआ करता था। यह सारे इलाके एक ही भूखंड के अंदर आते थे जिसका नाम था ग्रेटर इंडिया। आज से सैकड़ों साल पहले यह एक ऐसा दौर था जब भारतीय संस्कृति, धर्म और भाषाएं अफगानिस्तान के बामियान से लेकर इंडोनेशिया के बाली तक फैली हुई थी। और आज हम इसी टॉपिक पर बात करने जा रहे हैं।
इसी क्रम में हम जानेंगे कि ग्रेटर इंडिया का कांसेप्ट असल में था क्या? दक्षिण पूर्व एशिया में इंडियन कल्चर कैसे पहुंचा और मुस्लिम बाहुल्य इंडोनेशिया एक समय में कैसे हिंदू बाहुल्य देश हुआ करता था। आइए जानते हैं पूरी कहानी। साथियों अंत तक जरूर बने रहिएगा क्योंकि वीडियो काफी दिलचस्प होने वाला है। नमस्कार मैं हूं आदित्य india.com में आपका स्वागत है। साथियों अक्सर हमें लगता है कि धर्म या संस्कृति फैलाने के लिए युद्ध या तलवार की जरूरत होती है। लेकिन दक्षिण पूर्व एशिया में ऐसा बिल्कुल नहीं था। यह कहानी है व्यापारियों की, नाविकों और विद्वानों की। पहली सदी ईवी के आसपास भारत के दक्षिण में मौजूद तमिल और कलिंग क्षेत्र के व्यापारी मसालों, सोने और कीमती पत्थरों की तलाश में समुद्र के रास्ते दक्षिण पूर्व एशिया की यात्रा करते थे। इन जहाजों पर सिर्फ व्यापारी ही नहीं बल्कि ब्राह्मण विद्वान और बौद्ध भिक्षु भी होते थे। वहां के स्थानीय राजाओं ने इन भारतीय विचारकों का स्वागत किया।
उन्हें लगा कि भारत की शासन प्रणाली, संस्कृत भाषा और धर्म उनके राज्य को और भी ज्यादा व्यवस्थित और शक्तिशाली बना सकते हैं। धीरे-धीरे स्थानीय शासकों ने खुद को राजा और महाराजा कहलाना शुरू कर दिया। अपने राज्य में मंदिर बनवाए और संस्कृत को दरबार की भाषा बना दिया। दक्षिण पूर्व एशिया में हिंदू धर्म की निशानियों की बात करें तो कंबोडिया यानी खमेर साम्राज्य का अंगोरवाट मंदिर वर्ल्ड फेमस है। यह दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। इसे राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने बनवाया था। यह भगवान विष्णु को समर्पित है। साथ ही वहां बायोन मंदिर भी मौजूद है। यहां के मंदिरों में शिव और ब्रह्मा के चेहरे उकेरे हुए हैं। अब आते हैं इंडोनेशिया पर जहां बाली और जावा में आज भी सैकड़ों मंदिर मौजूद हैं। जावा का मशहूर परमनंद टेंपल शिव, ब्रह्मा और विष्णु का एक विशाल मंदिर समूह है। बाली द्वीप में आज भी यहां की बहुसंख्यक आबादी हिंदू धर्म का पालन करती है। यहां के लोग स्थानीय मान्यताओं के साथ हिंदू त्यौहारों को मनाते हैं। वियतनाम यानी चंपा सभ्यता में माइसोन मंदिर काफी प्रसिद्ध है। यहां ईंटों से बने प्राचीन हिंदू मंदिर हैं। यह मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित है। थाईलैंड यानी श्याम के शाही दरबार में आज भी रामायण का गहरा प्रभाव है।
साथ ही वहां भी एक अयोध्या शहर मौजूद है। थाई किंग का राज्याभिषेक हिंदू वैदिक परंपराओं से होता है। मलेशिया की बात करें तो वहां के पारंपरिक छाया, कठपुतली नाटकों में हिंदू देवी देवताओं का आह्वान किया जाता है। ग्रेटर इंडिया का कांसेप्ट कोई एक देश का नहीं था बल्कि एक सांस्कृतिक प्रभाव था। इसे भारतीय करण भी कहा जाता है। पश्चिम में बामियान की बुद्ध प्रतिमाओं से लेकर पूरब के इंडोनेशिया के प्रवाननंद मंदिर तक उत्तर में तिब्बत के मानसरोवर से लेकर श्रीलंका के अशोक वाटिका तक हर जगह भारतीय स्थापत्य कला और दर्शन की छाप थी। स्थानीय लोगों ने इसे कॉपी नहीं किया बल्कि इसे अपनी लोक परंपराओं और एनिमेशन यानी प्राकृतिक पूजा के साथ मिलकर एक नई और अनोखी संस्कृति बनाई। यही वजह है कि आज भी इंडोनेशियाई हिंदू धर्म और भारतीय हिंदू धर्म में काफी ज्यादा अंतर है। फिर भी उनकी जड़े एक ही हैं। [संगीत] इंडोनेशिया की बात करें तो अब सवाल यह उठता है कि वो हिंदू जमीन मुस्लिम कैसे बन गई? दरअसल 13वीं और 14वीं सदी तक इंडोनेशिया में मजापाहित साम्राज्य का शासन था जो बहुत शक्तिशाली और हिंदू धर्म को मानने वाला था।
साथ ही बौद्ध धर्म की ठीक-ठाक आबादी हुआ करती थी। लेकिन उसी दौरान हिंद महासागर में व्यापार का रुख बदला। अरब और भारतीय तटों से आए मुस्लिम व्यापारी जब वहां पहुंचे तो उन्होंने ना केवल व्यापार किया बल्कि इस्लाम का संदेश भी फैलाया। यह कोई अचानक होने वाला बदलाव नहीं था। शुरुआत में बंदरगाहों के शहरों में इस्लाम का प्रभाव बढ़ा। फिर वहां के स्थानीय शासकों ने व्यापारिक लाभ और राजनीतिक गठजोर के लिए इस्लाम अपनाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे हिंदू साम्राज्य कमजोर पड़ते गए और इस्लाम मुख्यधारा बन गया। हालांकि बाली द्वीप ने अपनी पुरानी संस्कृति को बचाए रखा और आज भी वह हिंदू धर्म का गढ़ है। आज इंडोनेशिया का राष्ट्रीय प्रतीक गरुड़ है। उनकी एयरलाइंस का नाम भी गरुड़ इंडोनेशिया है और वहां की करेंसी पर गणेश जी की तस्वीर है। यह सबूत है कि भले ही समय के साथ धर्म बदल गए हो, लेकिन वह सांस्कृतिक रिश्ता आज भी कायम है। ग्रेटर इंडिया कोई जमीन हथियाने का मिशन नहीं था। बल्कि विचारों का आदानप्रदान था जिसने पूरे एशिया को एक सूत्र में पिरोया था। साथियों ग्रेटर इंडिया और दक्षिण पूर्व एशिया के हैंव सविता को लेकर यह थी हमारी खास रिपोर्ट। इसको लेकर आप अपनी राय जरूर कमेंट में बताएं। बने रहिए india.com के साथ। शुक्रिया।