यह कहना बहुत ही निश्चित दावा होगा कि “भारत सरकार ने उसे बड़ी मुश्किल से मारा।” उपलब्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि स्नेहलता रेड्डी को आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किया गया था और जेल में रखा गया था, जहाँ उनका स्वास्थ्य गंभीर रूप से बिगड़ गया था।
स्नेहलता रेड्डी सिर्फ एक अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि थिएटर की एक प्रसिद्ध कलाकार और समाज सेविका भी थीं। 1975 में लगाए गए आपातकाल के दौरान, उन्होंने सरकार की नीतियों का विरोध किया था। मई 1976 में, उन्हें बड़ौदा डायनामाइट केस के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था और MISA के तहत बेंगलुरु सेंट्रल जेल में रखा गया था।स्नेहा को बचपन से ही गंभीर अस्थमा की समस्या थी। जेल में उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता रहा।
उपलब्ध दस्तावेजों में उल्लेख है कि उन्हें जेल में उचित चिकित्सा देखभाल नहीं मिली और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। उनकी अपनी जेल डायरी में भी खराब परिस्थितियों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का विवरण दर्ज है।अंत में, उन्हें स्वास्थ्य के आधार पर पैरोल दी गई और जनवरी 1977 में उनकी हिरासत समाप्त हो गई। लेकिन जेल से रिहा होने के कुछ ही दिनों बाद, 20 जनवरी 1977 को उनका निधन हो गया।
उनकी मृत्यु आपातकाल के दौरान नागरिकों, स्वतंत्रता और कैदियों के साथ व्यवहार को लेकर उठे गंभीर सवालों का एक मार्मिक उदाहरण बन गई है। आपातकाल के बाद, शाह आयोग ने उस अवधि के दौरान सत्ता के दुरुपयोग और ज्यादतियों की जांच की थी।