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‘हीरो’ पड़ा ज़ीरो: 23 साल के लड़के ने कोर्ट में हीरो कंपनी की हेकड़ी निकाली!

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एक बात मुझे आपको नोट करवानी है। मुझे आपको बताना है कि आज की बात जो आप 9:00 बजे से देखते हैं, इसका टाइम बदलेगा और 15 जून से यह शो आप देख सकेंगे 8:30 बजे से। बेंगलुरु में कोर्ट के एक फैसले ने साबित कर दिया कि कंज्यूमर ही किंग है और ग्राहक के साथ कोई भी धोखाधड़ी नहीं कर सकता। दरअसल, बेंगलुरु में गणेश नाम के एक युवक ने करीब ₹1 लाख में Hero कंपनी की बाइक खरीदी। लेकिन कुछ ही दिन बाद बाइक में दिक्कतें आने लगी। गणेश ने बार-बार शोरूम और वर्कशॉप के चक्कर काटे। कंपनी से शिकायत की लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। आखिरकार गणेश ने कोर्ट पे केस किया। अपनी दलीलों से उसने साबित कर दिया कि Hero Motक कंपनी ने उसे खराब बाइक भेजी है। आखिरकार कोर्ट ने Hero Motcop को आदेश दिया कि वह गणेश के बाइक का पैसा रिफंड करें। 23 साल के गणेश ने

Hero एक्सट्रीम 125R खरीदी थी। लेकिन एक्सट्रीम तो छोड़िए नॉर्मल बाइक राइड करना भी उसके लिए एक बड़ा चैलेंज बन गया। गणेश ने यह बाइक खरीदी थी 1 जुलाई 2024 और कीमत थी 98709 डीलर थाई मोटर्स। लेकिन कुछ ही दिनों में बाइक में खराबी आनी शुरू हो गई। चलते चलते इंजन अचानक बंद होने लगा। जब गणेश ने इसकी कंप्लेंट की तो साईं मोटर्स [संगीत] ने शिकायत को हल्के में लिया। वर्कशॉप से एक मैकेनिक को टेस्ट राइड के लिए भेज दिया। कंपनी की ओर से कोर्ट में पेश की गई दलील में कहा गया कि उनकी अधिकृत तकनीकी टीम ने बार-बार बाइक की गहन जांच की। उसकी टेस्ट राइड भी की गई और साथ ही कई बार उसके पुरजे भी बदले गए। यहां तक कि ग्राहक को बिठाकर 12 कि.मी. की एक टेस्ट राइड भी की गई। इसके बाद यह पाया गया कि जिस तरह से ग्राहक का दावा है कि उस बाइक में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट था। ऐसा दोष कहीं पर भी नहीं पाया गया। इसी वजह से कंपनी के वारंटी नियमों के तहत इस बाइक के लिए ग्राहक को रिफंड नहीं दिया जा सकता है। यह शायद संयोग था कि जब मैकेनिक बाइक चला रहा था तो इंजन बंद नहीं हुआ लेकिन गणेश भुक्त भोगी था। वह देख चुका था कि बाइक बार-बार बंद होती है। इसलिए सबूत को रिकॉर्ड करके उसने बाइक राइड के दौरान हेलमेट में कैमरा लगाकर इसे रिकॉर्ड करना शुरू किया।

जब एक दो बार बाइक बंद हुई तो वह रिकॉर्डिंग लेकर साईं मोटर्स के पास गया। गणेश को इस बात का भी डर सता रहा था कि चलती सड़क पे बाइक बंद हो जाने की वजह से दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती थी और इसके वजह से उसकी लाइफ को भी एक बड़ा रिस्क था। क्योंकि सबूत सामने था इसलिए शोरूम वाले इंकार नहीं कर सकते थे। तब जाकर उन्होंने बाइक के पार्ट्स बदलने शुरू किए। गणेश ने शोरूम के करीब 10 चक्कर लगाए। इस दौरान उसकी बाइक के कई स्पेयर पार्ट्स बदले गए। इसमें क्लच प्लेट, क्लच अप्टर स्विच, क्लच लीवर, पूरी वायरिंग किट, की सेट, फ्यूल पंप, फ्यूल इंजेक्टर और एयर फिल्टर शामिल था। थ्रोटलल बॉडी तो दो बार बदली गई। लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। गणेश समझ गया कि शोरूम वाले टालमटोल कर रहे हैं। समस्या को जड़ से खत्म नहीं कर रहे हैं। इसलिए उसने एक समझदारी वाला काम किया। सारे बिल, सारे जॉब कार्ड, शोरूम के साथ होने वाले सारे ऑफिशियल कम्युनिकेशन का रिकॉर्ड उसने संभाल कर रखा। इन जॉब कार्ड्स और बिल की कॉपीज को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि गणेश ने बाइक ठीक कराने के लिए कितने चक्कर काटे। गलती बाइक कंपनी की थी। लेकिन शोरूम वाले ठीक कराने के नाम पर गणेश से पैसे वसूलते रहे। कई पेड सर्विस तो डेढ़ से 2000 के बीच की थी। जब इतने पैसे खर्च करने के बाद भी बाइक ठीक नहीं हुई तो 1 जनवरी 2025 को गणेश ने कंज्यूमर फोरम की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवा दी। इस शिकायत में हीरो मोटर कॉप और डीलर को प्रतिवादी बनाया गया। लेकिन दोनों से कोई जवाब नहीं आया।

जब कंज्यूमर फोरम की वेबसाइट पर की गई शिकायत का कोई जवाब नहीं आया तो गणेश ने कंज्यूमर कोर्ट का रुख किया। इस दौरान उसे साईं मोटर्स के शोरूम, वर्कशॉप और हीरो मोटोक तीनों को ही प्रतिवादी बनाया। खास बात यह है कि कंज्यूमर कोर्ट में सुनमाई के दौरान गणेश ने अपना पक्ष खुद रखा। 23 साल के गणेश के लिए 30 से 4000 की लॉयर फीस देना उतना आसान नहीं था। इसीलिए उसने कानूनी प्रक्रियाओं की बेसिक पढ़ाई लाइब्रेरी में जाकर की और खुद ही केस लड़ने का फैसला भी कर लिया। केस के दौरान उसने अपनी दलील में वो तमाम दस्तावेज और सबूत कोर्ट के सामने पेश किए। कोर्ट इस बात से कन्विंस हो गया कि उसके साथ अन्याय हुआ है और एक साल की कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार गणेश ने केस जीत लिया। कंज्यूमर कोर्ट में हीरो मोटोकp ने अपनी दलील में कहा कि उसकी ऑथराइज्ड टेक्निकल टीम ने बाइक की जांच की, टेस्ट राइड किया जिसमें कोई तकनीकी समस्या नहीं आई। कंपनी की तरफ से यह भी कहा गया कि ग्राहक की संतुष्टि के लिए थ्रोटलल बॉडी, इंजेक्टर, वायरिंग हॉर्नेस और फ्यूल पंप जैसे [संगीत] पार्ट बदले गए। लेकिन कोर्ट ने कंपनी की दलील स्वीकार नहीं की। कोर्ट ने कहा कि वादी की तरफ से पेश दस्तावेज यह बताते हैं कि बाइक खरीदने के बाद से ही उसमें खराबी आनी शुरू हो गई थी। जॉब कार्ड और सर्विस रिकॉर्ड यह दिखाते हैं कि बाइक में समस्या लंबे समय तक [संगीत] बनी रही। कोर्ट ने यह भी कहा कि बाइक में लगातार तकनीकी दोष आने से ग्राहक की जिंदगी पर भी खतरा पैदा हो सकता है। कोर्ट ने साफ कहा कि गाड़ी में खराबी थी। सर्विस में कमी देखी गई। गणेश ने बाइक की पूरी कीमत यानी करीब ₹1 लाख पर 2% प्रतिमाह ब्याज के हिसाब से

₹121591 के रिफंड की मांग की थी। साथ ही मानसिक पीड़ा और असुविधा के लिए ₹5 लाख और लीगल खर्च के लिए ₹00 की मांग की थी। इसी आधार पर कंज्यूमर कोर्ट में वादी यानी गणेश को बाइक के रिफंड के रूप में 30 दिनों के भीतर ₹88,000 वापस करने का निर्देश दिया। साथ ही ₹2000 अदालती खर्च के तौर पर देने को कहा गया। खास बात यह है कि कोर्ट द्वारा गलत ठहराए जाने के बावजूद कंपनी अपनी गलती मानने को तैयार नहीं थी। जब इंडिया टीवी संवाददाता टी राघवन [संगीत] ने Hero Motocopp से Faultी बाइक और खराब सर्विसिंग से उनका पक्ष जानना चाहा तो कंपनी की तरफ से कहा गया कि ग्राहक की संतुष्टि ही उनकी प्राथमिकता है और उन्होंने बाइक संबंधी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उसे ठीक करने की हर मुमकिन कोशिश की। अब कानून जो भी फैसला करे वो उसे मानेंगे। हालांकि बाइक में खराबी आने की वजह से गणेश को जो तकलीफ हुई उसका हजाना मिलना तो मुमकिन नहीं है। लेकिन एक अकेले शख्स ने जिस तरह Hero Motocopp जैसी कंपनी को कोर्ट में मात दी उसने यह फिर साबित कर दिया है कि कंज्यूमर इज किंग। गणेश ने जो कानूनी लड़ाई खुद लड़कर जीती है उससे एक बात साबित होती है कि अगर कंज्यूमर राइट्स के प्रति अवेयरनेस हो तो कोई भी ग्राहक अपने इंसाफ की लड़ाई खुद ही लड़ सकता है और जीत भी सकता है।

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