भीषण गर्मी का कहर लेकर आ रहा अलनीनो। मई से दिखने लगेगा असर। डब्ल्यूएमओ का अलर्ट। भीषण गर्मी की आहट और अब एक नई चेतावनी ने चिंता बढ़ा दी है। क्या आने वाले महीनों में तापमान सारे रिकॉर्ड तोड़ देगा? क्या मानसून कमजोर पड़ सकता है और क्या इसका असर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी खासतौर पर पानी, खेती और स्वास्थ्य पर पड़ेगा। विश्व मौसम संगठन यानी डब्ल्यूएमओ ने एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। संगठन के मुताबिक एलनीनो की स्थिति इस साल पहले अनुमान से कहीं जल्द यानी कि मई से जुलाई के बीच विकसित हो सकती है। पहले कहा जा रहा था कि इसका असर मानसून के दूसरे हिस्से यानी कि अगस्त या सितंबर में दिखेगा। लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि इसकी शुरुआत पहले ही हो सकती है। तो अब सवाल है यह अलनो आखिर है क्या? एलनो एक जलवायु प्रणाली है जो हर 2 से 7 साल के बीच बनती है और करीब 9 से 12 महीने तक असर दिखाती है।
इसके दौरान प्रशांत महासागर के भूमध्य रेखीय हिस्से में समुद्र की सतह तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है। यही बदलाव दुनिया भर के मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है। डब्ल्यूएमओ के मुताबिक इस समय समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है और सभी प्रमुख मॉडल इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि आने वाले महीनों में एलनीनो बनने की संभावना मजबूत है। इसका सीधा असर यह होगा कि दुनिया के कई हिस्सों में गर्मी बढ़ेगी और भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। मई, जून और जुलाई के दौरान जमीन का तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना जताई गई है। यानी साफ है इस बार गर्मी और ज्यादा तीखी हो सकती है। हीट वेव के मामले बढ़ सकते हैं और इससे खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए खतरा बढ़ जाएगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग पहले ही संकेत दे चुका है
कि इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। अलनीनो की वजह से आमतौर पर भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया जैसे देशों में बारिश कम होती है। इसका असर सीधे खेती पर पड़ता है। फसलों की पैदावार घट सकती है और इससे खाद्य कीमतों पर भी बड़ा असर पड़ सकता है। सिर्फ खेती ही नहीं पानी की उपलब्धता पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र इस साल बर्फबारी सामान्य 27.8% कम रही है जो पिछले 20 सालों में सबसे कम है। इसका मतलब है कि नदियों में पानी का प्रवाह कम हो सकता है जिससे करोड़ों लोगों की जल सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। अलनीनो का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहता।
जहां भारत और एशिया के कुछ हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बनती है। वहीं दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। यानी यह एक ग्लोबल क्लाइमेट इवेंट है जो पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करता है। डब्ल्यूएमओ के विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में सटीक मौसम पूर्वानुमान बेहद जरूरी हो जाते हैं।
इससे सरकारों को पहले से तैयारी करने में मदद मिलती है। चाहे वह जल प्रबंधन हो, ऊर्जा की मांग हो या फिर स्वास्थ्य आए। कुल मिलाकर एलनो की यह दस्तक एक चेतावनी है कि आने वाले महीने आसान नहीं होने वाले हैं। बढ़ती गर्मी, कमजोर मानसून और पानी की कमी यह तीनों मिलकर बड़ी चुनौती बन सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि सरकार से लेकर आम आदमी तक हर कोई सतर्क रहे और समय रहते तैयारी कर ले। क्योंकि मौसम अब सिर्फ खबर नहीं एक गंभीर संकेत बन चुका है। इस खबर में इतना ही। अपडेट्स के लिए देखते रहिए वन इंडिया हिंदी। सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। डाउनलोड द 1 इंडिया ऐप नाउ।