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मौत के मुंह से खींचे गए 19 लोग, गुजरात में अगले 48 घंटे भारी तबाही!

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सिर्फ कुछ घंटे की बारिश और सड़कें नदियां बन गई। स्कूल बसे पानी में फंस गए। गाड़ियां बहने लगी। लोग मदद के लिए चीखते रहे और फायर टीम ने जान की बाजी लगाकर 19 लोगों को मौत के मुंह से बाहर निकाला। आखिर गुजरात में ऐसा क्या हुआ कि पूरा इलाका बाढ़ जैसी तबाही में बदल गया। आइए जानते हैं इस रिपोर्ट में। नमस्कार, मैं हूं जजस्वी कौशिक और आप देख रहे हैं वन इंडिया हिंदी।

देश भर में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चिंता गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम भारत के कई हिस्सों को लेकर है। गुजरात के जूनागढ़, जामगर, सूरत, तापी, ढांग और कई जिलों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। सबसे पहले बात करते हैं गुजरात के जूनागढ़ किले की जहां हालत सबसे ज्यादा गंभीर दिखाई दे रही है। जूनागढ़ जिले के मेंडरडरा क्षेत्र के समधियाला गांव के पास अचानक पानी का स्तर इतना तेजी से बढ़ा कि चार गाड़ियां बाढ़ के पानी में फंस गई। इन वाहनों में मौजूद कुल 19 लोग पानी के बीच गिर गए। सूचना मिलते ही फायर विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कई घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। सबसे राहत की बात यह रही कि इस पूरे अभियान में किसी भी व्यक्ति की हाथाहत होने की सूचना नहीं आई। रेस्क्यू के वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

जिनमें तेज भाव के बीच राहतकर्मी रस्सियों की मदद से लोगों को सुरक्षित निकालते दिखाई दे रहे हैं। अब चलते हैं जामनगर की ओर। जामनगर जिले के ध्रोल इलाके में लगातार बारिश के कारण मुख्य सड़कें पूरी तरह पानी में डूब गई। हालात ऐसे बन गए कि बच्चों से भरी स्कूल बसें भी बीच रास्ते में फंस गई। लोगों को कमर तक पानी में उतरकर सड़क पार करनी पड़ी। कई इलाकों में यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ और सामान्य जनजीवन ठप हो गया। अगर बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो जूनागढ़ जिले के मंगरोल तालुका में सबसे ज्यादा लगभग 22.24 इंच बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा मालिया हटीना में लगभग 14.09 इंच बारिश दर्ज की गई है। केशोड़ में 12.80 इंच बारिश मेंडरडा में 12.56 इंच बारिश दर्ज की गई है। दक्षिण गुजरात के डांग जिले में भी भारी बारिश हुई। बधाई में लगभग 13 43 इंच, सुबीर में 13.23 इंच और अहवा में 9.09 इंच बारिश दर्ज की गई। सूरत जिले के अंबिका क्षेत्र में भी लगभग 13.19 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। तापी, नवसारी, बलसाड और गिर सोमनाथ सहित कई जिलों में लगातार भारी बारिश के कारण जल भराव की स्थिति बनी हुई है। राज्य के 225 से अधिक तालुकों में बारिश दर्ज की गई है। अब बात करते हैं मौसम विभाग यानी आईएमडी की।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने गुजरात के कई जिलों जूनागढ़, पूरब बंदर, गिर, सोमनाथ, भावनगर, महीसागर, दाहोद, पंचमल, छोटे उदयपुर, भरूच, नर्मदा, सूरत, तापी और दव में तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। अनुमान है कि इन इलाकों में 41 से 61 कि.मी./ घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती है। साथ ही कई जगहों पर मध्यम से भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मानसून का असर सिर्फ गुजरात तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र के भिवंडी में बाजारों में करीब 3 फीट तक पानी भर गया। दुकानें बंद करनी पड़ी। लोग कमर तक पानी में चलने को मजबूर दिखाई दे रहे हैं। राजस्थान की राजधानी [संगीत] जयपुर में तेज बारिश के बाद सवाई मानसिंह अस्पताल के माइनर ऑपरेशन थिएटर में भी पानी भर गया। जिसके बाद मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा। मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत दो दर्जन से अधिक जिलों में तेज बारिश हुई। उज्जैन में एक युवक पुलिया पार करते समय अपनी मोटरसाइकिल समेत तेज भाव में बह गया।

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी भारी बारिश हुई है। कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज परिसर में जल भराव के कारण कई गाड़ियां और बाइक पानी में आधी डूब गई। वहीं जम्मू कश्मीर में भूस्खलन के चलते रामनगर उधमपुर रोड को अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना मजबूत कम दबाव का क्षेत्र मानसून को और अधिक सक्रिय कर रहा है। इसी वजह से पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। कोनकड़, गुजरात, मध्य महाराष्ट्र के कई इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। मुंबई और गांधीनगर सहित कई शहरों में अत्यंत भारी बारिश, तेज हवाओं और बिजली गिरने की आशंका जताई जा रही है। मौसम विभाग ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने, अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की है। फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि गुजरात में इस समय रहते रेस्क्यू टीमों ने 19 लोगों की जान बचा ली। लेकिन जिस तरह लगातार भारी बारिश हो रही है और अगले 48 घंटों के लिए भी भारी बारिश का अनुमान है। उसे देखते हुए हालत अभी पूरी तरह सामान्य नहीं कही जा सकती। ऐसे में प्रशासन की तैयारियां और लोगों की सतर्कता दोनों ही बेहद जरूरी है। क्या अगले 48 घंटे पश्चिम भारत के लिए और ज्यादा मुश्किल साबित होंगे? क्या भारी बारिश का यह दौर बड़े खतरे की ओर इशारा कर रहा है? मौसम से जुड़ी हर बड़ी और विश्वसनीय अपडेट के लिए जुड़े रहिए वन इंडिया के साथ। [संगीत] सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। [संगीत] इंडिया ऐप नाउ।

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