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सुनीता के आरोपों पर गोविंदा ने तोड़ी चुप्पी, किया बड़ा चौंकाने वाला खुलासा, मचा चकचार!

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कि आपका और सुनीता जी का रिश्ता किसकी वजह से कब खराब था? शुरू हुआ। आपका नसीब चुराने के लिए लोग आपकी स्त्री चुरा लेते हैं। गोविंदा की स्त्री किसने चुरा ली? दूसरे का घर बिगाड़ने वाले ऐसे लोग सामने आने चाहिए। जूता मारूंगा ऐसे लोगों को मैं खींच अभी हाल ही में उन्होंने डिवोर्स जो फाइल किया था वो वापस ले लिया कैसे नहीं लेंगे धमकी से लिया या प्यार से माने अब वो कहती है आप किसी रूप के सौंदर्य में इतने व्याकुल हो गए हैं कि घर परिवार नहीं दिख रहा है।

आपको मेरी चार-चार मिस यूनिवर्स टाइप की हीरोइन जो है वो आई मैं कभी ठीक से मिला ही नहीं मस्ती करते हैं अभी पछतावा होता है कि क्यों नहीं कर पाए ढूंढ से हो रहा है पछतावा अभी मौका मिला तो मैं दांव लगा दूं कहते हैं कि ज़िंदगी हर किसी को हीरो बनने का मौका देती है। लेकिन हर कोई हीरो नंबर वन नहीं बन पाता। आज हमारे साथ एक ऐसी शख्सियत हैं जिनकी जिंदगी में कभी स्वर्ग जैसी खुशियां आई तो कभी संघर्ष के ऐसे दौर भी आए जब दुनिया की आंखें उनकी कामयाबी पर टिकी हुई थी।

कभी जिंदगी ने इन्हें दीवाना मास्ताना बनाया तो कभी वक्त ने ऐसे इम्तिहान लिए कि बड़े-बड़े हौसले डगमगा जाएं। लेकिन इन्होंने अपनी मुस्कुराहट को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और कमजोरी के आड़े भी नहीं आने दिया। हमेशा मुस्कुराते रहे। कॉमेडी के किंग और करोड़ों दिलों के चहेते सुपरस्टार गोविंदा इस वक्त हमारे साथ हैं। बहुत-बहुत स्वागत है आपका एबीपी न्यूज़ पर। धन्यवाद। कैसे हैं सर आप? ईश्वर कारुण्य। आज गोविंदा हर सवाल का जवाब देने को पूरी तरह से तैयार हैं।

ना हम मतलब भयंकर तरीके से। वो एक शेर है ना हमको किसके गम ने मारा ये कहानी फिर सही। नाम आएगा तुम्हारा ये कहानी फिर सही। नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है प्लीज मुझे किसी के गम नहीं मारा नहीं है किसी गम में नहीं है अभी नहीं कुछ भी नहीं है बिल्कुल भी नहीं कोई कोई गम नहीं है ही नहीं है कहीं नजर आ रहा है नहीं नजर तो नहीं आ रहा है मैं इतनी देर से आपसे बात कर रही हूं ऑफ एयर भी ऑन देखिए मैं आपसे ये कहना चाहता हूं कि मेरी माताजी निर्मला देवी जी आदरणीय वो उस हद में गरीब हो गई थी हीरोइन होने के बाद हमारे बंगले में से हमारे सब सामान लूट गए थे सब लोग पब्लिक उठा के लेके निकल क्या क्या हो गया और मेरी मां बेचारी आके साधु वस्त्र के अंदर जिस वक्त आई तो मेरे पिताजी ने कहा निर्मला तुम इतनी सुंदर हो तुम बाहर जाओगी काम मांगोगी तो लोग तुम्हें गलत निगाह से देखेंगे तो मेरी मां जाके बेचारी अपना सर मुंडा के आ गई।

अपने बाल आइब्रो के नचवा के आ गई क्या बात कर रहे हो हां और फिर एक साधु का दृश्य पहन के आ गए मेरे बच्चे पलने दो ऐसा उन्होंने कहा अब ऐसी मां का बेटा ये क्या है किसने क्या कह दिया किसने क्या इसने ऐसा कह दिया उसने ऐसा मैं इसमें नहीं हूं कहीं भी कहीं भी नहीं कहीं भी नहीं हूं दूर फर्क नहीं पड़ता फर्क [हंसी] मैं उस तरफ देख नहीं रहा हूं क्या मैं इसलिए इसलिए नहीं देख रहा हूं क्योंकि मुझे पता है कि वो ऐसे क्यों है क्यों है समय काल परिस्थिति देश काल परिस्थिति समय और प्रक्रिया पर क्रिया के अंदर आज इस वक्त देश में सब लोग कहीं ना कहीं किसी ना किसी रूप में अटके हुए हैं। ठीक है।

तो मैं इस सवाल पर आऊंगी क्योंकि बहुत सारे सवाल जो हमारे दर्शक हैं आपसे जानना चाहते हैं जो आपके चाहने वाले हैं, फैंस हैं जो आपकी चिंता करते हैं। हां पूछिए ना प्लीज पूछिए। पूछ लूं अभी पूछ लूं या पहले थोड़ा संघर्ष के दौर को याद कर लें। बिंदास पूछना मुझसे जो पूछना है क्योंकि मुझे आपसे ना वो वार्तालाप करनी है जो चित्र मैं चाह रहा हूं कि जो दुनिया देखे? जो लोगों तक पहुंचे। हां। जो लोग आपके चाहने वाले हैं जो हमेशा आपकी चिंता करते हैं वो आपसे जानना चाहते हैं कि मौजूदा वक्त में परिवार से ही इतनी बदनामी गोविंदा की क्यों हो रही है? क्या स्टेटस है गोविंदा का भी मौजूदा वक्त में सुनीता जी 4 साल पहले तक कहती थी कि मैं चाहती हूं कि गोविंदा के चारप अफेयर्स और रहती तो कितना अच्छा होता। आज वही सुनीता जी इतने लांछन आरोप क्यों लगाती हैं आपके ऊपर?

समय लेडीज के लिए मैं थोड़ा सा गुप्त रूप से कहना चाहूंगा। पूरा नहीं कहूंगा। इसलिए नहीं कहूंगा कि मैं मेरी नेचर है कि मैं जो जीवन का मंच है उसका पर्दा उस हद में कभी नहीं उठाता जिसमें लोग लज्जित हो जाए या समाज के सामने यह प्रश्न उठने लगे कि उनके साथ भी फिर दुर्व्यवहार हो जाए। सच यह है कि यह 8 9 वर्ष पहले मैं कहीं किसी से कह दिया था कि यह ऐसा होगा और जिस वक्त यह होगा तो मैं ऐसे दौर से निकल रहा होगा और उसके प्रवाह में उसके खेला के अंदर हम सब आ जाएंगे गोविंदा आपको लगता है ऐसा होगा? मैंने कहा हां पक्का होगा। ये किसी ने लिखा है तो होके रहेगा। तो ऐसे किसी ने क्या लिखा है? मैंने कहा देखिए जो लिखने वाला है वो भी साधारण है। सात आठ आज से पहले क्या कहा था वो दूसरे शादी वाला डायलॉग बता रहे हैं या कुछ और है? नहीं नहीं नहीं वो तो खैर जिस फिल्म लाइन में मैं आया हूं वैसे ही चल रहा है। मेरे नाम का बदनामी ना मेरे नाम का ना हमेशा हिस्सा रही है। हम ऐसा कभी नहीं हुआ कि बदनामी नहीं हुई।

नेम और फेम के साथ बदनामी जुड़ती रही। नाम ही ऐसा है वो हर किसी ने थोड़ा सा प्यार भी किया है ना तो शक किया है अरे तू बहुत आगे जाके दगा देने वाला है गोविंदा मुझे पता है अच्छा अच्छा अच्छा ठीक है ठीक है

ऐसा लग रहा है अच्छा ठीक है ये बहुत साल निकल गए 2930 वर्ष जब आदमी किसी के साथ बहुत ईमानदार रह जाता है हां और उसे जब पता लगे कि इसकी भी वफादारी जो है कहीं पे गिरवी पड़ी है तो ऐसा लगता है कि अरे आदमी को दया करनी पड़ती है कि कि ये किसी पक्ष से आया है। ये किसी ना किसी पर कृपा का इस पे सहयोग रहा है। तो वहां से निकल के आया है। तो हमें इसका ख्याल रखना है। उसकी ताकत को हिला देने की वजह से उसका अगला जो है वो इस हद में बिगड़ जाए कि वो अस्तित्व ढूंढता फिरे। यह हमारे लिए अच्छा नहीं है क्योंकि वह लोग जो इस वक्त सक्षम हुए हैं उनकी खिलाफत है। हमें उनकी सक्षमता का भी ख्याल रखना है, सम्मान भी रखना है। उनकी खिलाफत को भी सम्मान देना है। कीजिए आप। आपको इज्जत मिलेगी। अपनी पत्नी को कौन खिलाफत के लिए कह देगा कि कीजिए आप। आपको बहुत प्रसिद्धि मिलेगी। मैं क्योंकि मैं उनके भाग्य का इतना भाग्य का हिस्सा खा चुका हूं और इतना भोगा है मैंने कि मुझे जो नाम मिला जो इज्जत मिली वो मेरी मां के आशीर्वाद से मिली और मेरी पत्नी जिस दिन से मेरे घर में आई है मैं कभी पीछे पलट के नहीं देखा वो भाग्यवान तो है ही है तो मुझे उसके गुणधर्म से उसको पहचानना थोड़ी ना है तो सुनीता जी को समझाने की कोशिश नहीं करते हैं ।

आपकी जो भी है कमरे में बैठकर सुलझा लेते हैं चीज अभी यूं निकल रही है समय के साथ मुझे ऐसा लग रहा है कि यूं निकल रही है अब मैं उसको समझाने बैठ जाऊंगा वो समझ ही नहीं पाएंगे वो तो मुझे लगता है वो इसीलिए हैं कि आप आइए पर्दा पड़ा हुआ है और कभी ड्रामा देखा है क्या? नहीं। पर्दा उठता है और फिर ड्रामा होता है। किसके प्रभाव में आ गई सुनीता जी? अब ये सब नहीं कहेंगे। यही तो मेरा पॉइंट है ना कि मैं मैं कभी उसे लज्जित नहीं करता। वो आपको इतना लज्जत लज्जित करती हैं। आप कह रहे हैं कि मैं नहीं करता। मैं हो ही नहीं रहा हूं। लज्जित कहां से मुझे लग रहा है मैं तो मुझे तो जो मिला है ऊपर वाले ने बेशर्मी से दिया है ऊपर वाले ने। अरे कोई लगातार आपको बुरा बुरा बुरा बुरा बोलता चला जाए और आप पलट कर कुछ नहीं कहें। या आप मतलब ऐसे गोलमोल घुमाए कि मैसेज चला जाए लेकिन बिल्कुल दिल पे इतना गोल-गोल घुमाऊंगा कि उन्हें चक्कर ही आता रहे वो ठहर जाए पर दुनिया गोल घूमती रहे उनके साथ में आजू-बाजू में क्योंकि तभी तो पता लगेगा गोविंदा से मुलाकात हुई है। कड़वाहट से कभी मिठास नहीं आएगी। सही बात है सर। और वो जो समय निकल जाएगा उस वक्त लोग कहेंगे यार देखो ये तो तमीज से था।

हां ये तो सच बात है। ये तो कह ना गोविंदा बहुत होशियार बनता है ना तो देख तेरी भी लग गई ना वाट। यह कहने वाला मुझे कुछ भी नहीं है। बल्कि मैं इस इंटरव्यू के माध्यम से यह कहूंगा कि मैं बहुत धन्यवाद देता हूं के एक सही समय पे एक उस आयु में जिस वक्त मेरा स्वास्थ्य इतना भी ज्यादा खराब नहीं हो गया था कि मैं चल नहीं पा रहा हूं या बैसाखी पे आ गया हूं या व्हीलचेयर पे हो। ऐसे में ये सब हो गया। बहुत अच्छा हुआ। अगर मैंने कहीं उस अवस्था में आ गया होता जब गोली लगी थी यार देखो बहुत नाच रहा था अभी चलने के बाद तो मेरी बहुत बैंड बज जाती या व्हीलचेयर पे आ जाता जैसे कि बहुत सारे लोगों ने ऑफर किया था मुझे रोल लंगड़े का और मैं वो रिफ्यूज करता चला गया 18 करोड़ से भी ज्यादा 202 करोड़ आई रिफ्यूज्ड वो अवतार नाम की एक फिल्म आई थी हां वो मुझे दे रहे थे बहुत सारे करोड़ों रुपए मैंने नहीं लिए नहीं पैसे। इसमें बहुत सारे मीम्स हैं। मैंने कहा यार तुझे लोगों को इच्छा का भगवान नहीं इच्छा के माता-पिता नहीं मिलते। भाई बहन नहीं मिलते, मित्र नहीं मिलते, इच्छा की पत्नी नहीं मिलती, इच्छा के बच्चे नहीं मिलते। तुझे तेरी इच्छा का भगवान चाहिए। मैंने कहा यार सरदार जी रंग कहो के यार ये सब इस 7 साल इसकी पिक्चर ही नहीं बनेगी मुझे लगता है। तो वैसे ही हुआ।

उसकी पिक्चर तो सात साल क्या? 9 साल नौवें साल में रिलीज हुई। अब वो अवतार का डायरेक्टर है तो लोग उसको इस तरह से देख रहे हैं कि गोविंदा की क्या औकात है? क्यों नहीं है भाई? सभी ने तो उन्होंने ऑफर किया मेरे जूनियर मेरे जूनियर्स ने भी कितनी सारी इंग्लिश फिल्म सोशल मीडिया पे बड़े मीम्स बनते हैं इसको लेकर इस फर्क बनता है मुझे ये बताइए कि मेरे मान सम्मान से जो आजकल लोग प्रधानमंत्री के साथ में तमीज से नहीं रह पा रहे जो लोग सीएम के साथ तमीज से नहीं रहे मां-बाप के साथ नहीं रहते वो अगर मुझे अपमानित करते हैं तो मुझे वो लोग की तरफ कहां देखना है मुझे ऐसा लगता है कि अपनी मैं देख के अपनी दृष्टि से जो है ना बेईमानी करूंगा ूंगा हम कि बहुत ज्यादा मैं उसी तरफ देख रहा हूं जहां पे इतने सारे तो मैं कहा था कि मुझ पे दोष लगा के क्या मिलेगा फूल चाहे गुलाब का हो या कमल का कीचड़ में खिलेगा क्या बात है तो मुझे तो कीचड़ में बहुत अच्छा लग रहा है मुझे ये पता है कि कीचड़ में गोविंदा खिल रहे हैं खिले ही रहेंगे खिले ही रहेंगे मैं आम आदमी की तरह सवाल आपसे पूछ रही हूं एबीपी न्यूज़ पर एक बार खुलासा कर ही दीजिए कि आपका और सुनीता जी का रिश्ता किसकी वजह से कब खराब होना शुरू हुआ।

क्या वजह रही? क्योंकि जो आप उनको क्रेडिट दे रहे हैं कि आप यहां तक पहुंचे तो सुनीता आपके घर में आई। अब वो लक्ष्मी साबित हुई आपके लिए हमेशा साथ में रही। क्या हो गया ऐसा? वो इतना आपको बोलती रहती है। हम पर क्रिया से संबंधित है। अब इससे ऊपर मैं नहीं कहूंगा। वो परक्रिया प्रक्रिया क्या है? पर प्रक्रिया एक हुआ करती है जिसमें जो समाज में है। और उस क्रिया से संबंधित औरतों को कर दिया जाता है। समटाइ्स किसी ने चढ़ा दिया उनको आपके खिलाफ। आपने चिढ़ा नहीं दिया। उन्हें उन्हें बंधित किया है। बहुत से बंधन होते हैं। मैं इस इंटरव्यू के माध्यम से यह भी कहूंगा के बंधन, सामाजिक, पारिवारिक, घर में और राजकीय, राष्ट्रीय और स्त्री के मन को बंधित करना तो बहुत ही इजी है। उसके साथ में तो ऐसा तुम कुछ कर दो कि ये कहो कि बच्चों के लिए कैसे कल्याण होगा? बस इसी में वो आ जाती है। तो आप यह बात क्यों नहीं समझा पा रहे हैं अभी कि दो-दो बच्चे क्यों समझाऊं? क्यों नहीं समझाएंगे आप? मैं लड़की लोगों से लेडी लोगों से मैं पूछता हूं। मैं उन्हें पूछता आया हूं कि मैं क्या करूं? मैं ऐसा करूं मैं वैसा करूं। मैं उसे क्यों समझाऊं? मुझे पता है कि वो जो कर रही है बच्चों के कल्याण के लिए कर रही है। हो सकता है सुनीता जी इसीलिए नखरे दिखाती हो। बुरा बुरा बोलती हो कि एक समय फोन लगाकर आप पूछे माफी मांगे। भाई पति-पत्नी में तो इस तरह का रिश्ता आप लोगों का स्टेटस क्या है? अभी हाल ही में उन्होंने डिवोर्स जो फाइल किया था वो वापस ले लिया। वो लिया लेना पड़ेगा भी लेना पड़ेगा भी लेना पड़ेगा हां कैसे नहीं लेंगे धमकी से लिया या प्यार से नहीं नहीं हम हिंदू आदमी हैं हमारे यहां डवोर्स शब्द नहीं है हम हमारे यहां तलाक शब्द नहीं है बिल्कुल हम हिंदू हैं लेकिन एक व्यवस्था और सनातन सभी व्यवस्थाएं हमारे अंतर्गत है। पूरी दुनिया की सभी व्यवस्थाएं जो हैं देखिए सब गुरुओं की तैयार की हुई है। आप सच देखेंगे ये तो सनातन में ही है।

ये तो कभी तो डिस्कस ही नहीं था कि कहां कौन कहां जाएगा और कैसे होगा। आप मनाने के लिए जाएंगी सुनीता जी को या जैसी हैं बस अब हो गया खत्म बात मैं जहां हूं मैं वहीं हूं और मैं जैसा हूं किसी ना किसी कारण की वजह से वैसा हूं और मुझे ऐसा लगता है कि आप आपकी जगह से हिलेंगे तो अपनी शक्ति के ऊपर आप स्वयं प्रश्न उठाएंगे और मैं नहीं चाहूंगा कि आप ऐसा प्रश्न उठा दे अपने आप पे कि जिसमें आप कलंकित हो आगे इन फ्यूचर प्रश्न प्रश्न पूछे जाए पर जाति धारण करें या पर प्रयोग के अंदर आ जाए नहीं चाहूंगा क्यों क्योंकि वहां पे मैं कल्याण नहीं देख रहा हूं वो एक क्रिया है बस खेलना है इससे ज्यादा मैं क्या कह सकता हूं इससे ज्यादा आप ये कह सकते हैं कि अगर दरवाजे पर सुनीता जी नॉक करें और कहें कि मैं वापस आ गई हूं तो गोविंदा क्या उनका वेलकम करेंगी या इतनी तल्खी आ चुकी है कि अब बस नहीं वापस आ गई है तो उसको तब कहना पड़ेगा जब वो कहेगी कि मैं जा चुकी हूं। मैं नहीं मानता कि किसी जीवित रूप के अंदर मुझसे कोई जा सकता है। मैं इस मामले में बहुत ही कितनी भी माफियां मांगता फिरूं पर मैं अंदर-अंदर वैसा ही हूं कि भैया मेरे यहां पर कमिंग प्लेस है। यू कैन नॉट गो आउट अनलेस आई फील कि हां ये अभी निकले। अब ये निकले। मेरा कहने का मतलब अच्छा नहीं होता। फिर मेरा ये कहने का मतलब होता है कि आप अंदर आ गए। आप अंदर इधर हैं खेलिए। आपको जो भी खेलना है आप ये घर में खेलिए। आप वो घर में खेलिए। आपके किस घर में खेलना है खेलिए। आप ही का घर है। मेरा ही घर है। जिधर जाइए आप, आप गोविंद के घर में पड़ी हैं। गोविंदा का ही है। मुझे ऐसा मेरा सोचना है भाई। हो सकता है।

आपको ऐसा लगता होगा कि पता नहीं इसके दिमाग कितना खराब है। सोचिए ना। तो गांव में ही लोग सोचा करते थे कि अपने आप को पता नहीं क्या समझता है। हां। ये सोचता है इसको विहार की छोटी सी चावल में निकल के ये हीरो हो जाएगा। क्या किसी ने सोचा था मैं हीरो से निकल के हीरो नंबर वन हो जाऊंगा? बिल्कुल। अच्छा टैग जो है ना टैग जो मिला हुआ होता है वो छीनने का प्रयास होता है। कि हीरो नंबर वन का टैग इससे निकाल के किसी और को दे दिया जाए दे दिया जाए। बिल्कुल ये अपात्र नहीं है। सुपात्र नहीं है। तो वो पात्रता किसी और जगह धारण कर ली जाए। कैसे होगा? आपका नसीब चुराने के लिए लोग आपकी स्त्री चुरा लेते हैं। बहुत बड़ी बात कह रहे हैं आप। जी यही सच है। आपका नसीब में स्त्री चुरा लेते हैं। आपका भाग्य चुराने के लिए लोग स्त्री चुरा देते हैं। आपका भाग्य चुराने के लिए लोग आपका धर्म स्थान चुरा लेते हैं। आपका भाग्य चुराने के लिए लोग आपकी की हुई क्रियाएं, आपकी जो उपाधियां, आपका नाम सम्मान नाम की ही सीढ़ियों से पीढ़ियां निकलती हैं। लोग आघात आपके नाम पे करते हैं।

आज राम नाम चल रहा है। पूरी दुनिया में चल रहा है और सदैव रहेगा। बिल्कुल। तो लोग पता है कि इस नाम के साथ ही तो खेलना है लोगों को। आज गोविंदा फुल मूड में बैठे हुए हैं और बेबाक इतनी बातें हो रही हैं। भयंकर भयंकर हो रही है। एक्चुअली आपने कहा कि आपको अपयश करने के लिए गिराने के लिए आपकी स्त्री चुरा लेते हैं। गोविंदा की स्त्री किसने चुरा ली? नहीं नहीं। अरे भाई समय चुराता है। पूरी दुनिया में मानव है। और नो डाउट डेफिनेटली पीछे लोग होंगे। पर मैं कभी तो पीछे देखा ही नहीं आज तक। तो जैसे 22 लोगों की जाके आपने कुटाई की कभी मन नहीं आया कि जो लोग हमारे स्त्री को भड़काने का काम कर रहे हैं वो 22 लोगों 17 साल वाला याद नहीं रहा किसी औकात हो सामने तो आए किसी की औकात हो सामने तो आए आपको लगता है सामने आएगा तो मैं राष्ट्रीय राष्ट्रीय मंच पे हूं इस वक्त आपके सामने हूं समक्ष छोडूंगा नहीं नहीं छोडूंगा नहीं बहुत छोटी मामूली बात है क्या बात कर मैं इतने आघात करूंगा कि वो अपनी पुष्ट तक याद रखेंगे कि ये गोविंदा को इतने आघात पता है मैं शारीरिक मानसिक बौद्धिक वैचारिक एक भौतिक सामाजिक सभी खेला मुझे दुनिया में ईश्वर दिखा चुके हैं।

मैं गणतंत्र के अंदर हूं परंतु एक गणतंत्र मेरे अंदर भी है। बिल्कुल और ये मां के आशीर्वाद की वजह से है। और मैं अगर किसी के क्षमा करता हूं या मुझे ऐसा लगता है कि नहीं नहीं इनके साथ तो मैं मेरी ईमानदारी थोड़ी सी बनती है। इनके साथ थोड़ा सा अच्छा रहूं मैं प्रेम से रहूं और प्रेम से ही समझा दूं अच्छा रहेगा। अब [नाक से की जाने वाली आवाज़] इसमें मैं सब कह गया। आपकी पूरी जिंदगी अभी मौजूदा वक्त में ना एकदम फिल्मी रियलिटी शो की तरह ड्रामा इमोशंस इल्जाम मतलब सब कुछ नजर आते हैं और गोविंदा जी ऐसे सस्पेंस बना कर रखे हुए हैं कि भाई किसी ने घर तोड़ा है लेकिन उसका नाम नहीं लूंगा मैं बस इशारोंइशारों में उसको किसी ने तोड़ा नहीं है ये तो ईश्वर करवाता है ना ईश्वर देखिए आपको एक सुरक्षित स्थान पे ले जाता है जहां वो आपको महसूस करता है कि आप यहां असुरक्षित है हम आपके साथ यहां खेला होने वाला है तो आपके परिवार को उठा के वो कहीं और ले जाएगा किसी और स्थान पर ले जाएगा। आपको समुंदर के पार ले जाएगा।

कहीं और ले जाएगा। वो ईश्वर करता है। पर जिस वक्त आप समक्ष हुआ करते हैं तो ऐसे कई भक्तगण हुए हैं जो ईश्वर के समक्ष आए हैं और कहा है कि आप ये अलग प्रयोजन कीजिए। मैं आपका अलग भक्तगण हूं और मैं थोड़ा व्यवस्था से अलग। एक तो रूपा फिल्म लेकर आ रहे हैं। उसमें अपना अलग-अलग रूप भी आप दिखा रहे हैं। इस समय दिखाएंगे ना। [हंसी] क्यों नहीं दिखाएंगे? मैं रूपा तैयारी इसलिए कर रहा हूं कि यंगस्टर्स समझे। हां देखिए यंगस्टर्स समझे कि किसी ने सोच लिया कि आपकी अर्धांगिनी अर्ध जली है तो हम उसे स्वीकार नहीं करेंगे।

क्या स्वीकार नहीं करेंगे? स्त्री के समय कि वो रूपरेखा कि मैं वैसा व्यवहार या वो भाग्य की परिस्थिति जिसके अंदर उसके साथ घात हो हम नहीं स्वीकारेंगे। तब वो कहती हैं आप किसी रूप के सौंदर्य में इतने व्याकुल हो गए हैं कि घर परिवार नहीं दिख रहा है आपको। सुनीता जी 40 सालों का रिश्ता आप दोनों का हो। आप फिर हंस रहे हैं। देख मैं वैसा आइटम नहीं हूं प्लीज। प्लीज मेरी चार-चार मिस यूनिवर्स टाइप की हीरोइन जो है वो आई। मैं कभी ठीक से मिला ही नहीं। हेलो हाय से ऊपर वार्तालाप शायद हो जाती तो अच्छा होता। आपने कहा कि तीन फिर पार्टियां करते हम चक्कर मस्ती करते हैं। अभी पछतावा होता है कि क्यों नहीं कर पाए। भयंकर रूप से हो रहा है पछतावा। अभी मौका मिले तो मैं दांव लगा दूं।

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