हजारों किलोमीटर दूर काम करने गई एक मां, सब कुछ अपनी बेटी के बेहतर भविष्य के लिए। एक परिवार जिसने अपनी बेटी को विदेश भेजने के लिए कर्ज भी लिया, आर्थिक स्थिति सुधारने की उम्मीद में, और एक खबर जिसने परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी।स्वीटी अख्तर, जो बांग्लादेश की रहने वाली थीं, सऊदी अरब के मक्का में ग्रैंड मस्जिद में क्लीनर के तौर पर काम करती थीं। परिवार को उम्मीद थी कि स्वीटी कड़ी मेहनत करेगी और पैसे कमाएगी। वो अपनी बेटी को एक अच्छी जिंदगी देगी और एक दिन घर लौट आएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
उन्हें अगस्त 2023 में गिरफ्तार किया गया और बाद में व्यभिचार के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई।सबसे दर्दनाक बात ये है कि परिवार को उनकी सजा के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी। उनके पिता ने आखिरी बार 13 अक्टूबर को उनसे बात की थी, और ठीक अगले ही दिन, सऊदी अरब ने स्वीटी सहित दो बांग्लादेशी नागरिकों की फांसी की घोषणा कर दी।आखिर स्वीटी अख्तर कौन थीं? उनकी जिंदगी में ऐसी क्या मुश्किलें थीं जिन्होंने उन्हें विदेश जाने का फैसला करने पर मजबूर किया? गिरफ्तारी के बाद उनके साथ क्या हुआ, और परिवार को उनकी मौत की खबर कैसे मिली? चलिए स्वीटी अख्तर की पूरी कहानी क्रमवार समझते हैं।
स्वीटी अख्तर बांग्लादेश के मध्य में स्थित टांगाइल जिले के मिर्जापुर उप-जिले के नगरी चावली गांव की रहने वाली थीं। उनके पिता का नाम फजल मियां और मां का नाम जोहरा बेगम है। स्वीटी पांच बहनों में सबसे छोटी थीं। उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था, और उनके पिता दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करके घर चलाते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी स्थिर नहीं थी कि वो अपनी सभी परेशानियों को आसानी से संभाल सकें।इसी बीच स्वीटी की जिंदगी में एक के बाद एक मुश्किलें आती रहीं।
बांग्लादेशी अखबार प्रोथोम आलो की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्वीटी की शादी तब हुई थी जब वो अभी आठवीं कक्षा में थीं। कम उम्र में शादी के बावजूद उनकी शादीशुदा जिंदगी सफल नहीं रही, और उनकी पहली शादी टूट गई। इसके बाद वो अपनी बेटी के साथ अपने माता-पिता के घर लौट आईं। परिवार के दबाव में उन्होंने दूसरी शादी की। लेकिन इस रिश्ते में भी उन्हें सहारा नहीं मिला। उनके दूसरे पति ने भी उनसे संपर्क करना बंद कर दिया।स्वीटी की चचेरी बहन सलमा अख्तर ने प्रोथोम आलो को बताया कि लगातार वैवाहिक समस्याओं और परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण स्वीटी को विदेश में नौकरी तलाशने के लिए मजबूर होना पड़ा। वो अपनी बेटी की परवरिश और भविष्य को लेकर चिंतित थीं। वो चाहती थीं कि उनकी बेटी को उन मुश्किलों का सामना न करना पड़े जो उन्हें खुद झेलनी पड़ी थीं।
इसी उम्मीद के साथ उन्होंने सऊदी अरब जाने का फैसला किया।स्वीटी का विदेश जाने का फैसला सिर्फ नौकरी ढूंढने तक सीमित नहीं था। इसके पीछे परिवार की आर्थिक जरूरतें और बेटी के बेहतर भविष्य की उम्मीद थी। द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, स्वीटी के पिता फजल मियां ने उन्हें सऊदी अरब भेजने के लिए 1.5 लाख बांग्लादेशी टका का कर्ज लिया था। परिवार को उम्मीद थी कि स्वीटी वहां काम करेगी। वो नियमित रूप से पैसे भेजेगी, और धीरे-धीरे कर्ज चुकाने के साथ-साथ उनके घर की स्थिति में भी सुधार होगा।मार्च 2023 में, स्वीटी एक रजिस्टर्ड रिक्रूटमेंट एजेंसी के जरिए सऊदी अरब पहुंचीं। बीबीसी बांग्ला की रिपोर्ट के अनुसार, उनका पासपोर्ट मई 2022 में जारी किया गया था।
वहीं, बांग्लादेश के ब्यूरो ऑफ मैनपावर, एम्प्लॉयमेंट एंड ट्रेनिंग ने फरवरी 2023 में उन्हें विदेश में रोजगार के लिए मंजूरी दी थी।सऊदी अरब पहुंचने के बाद, स्वीटी ने मक्का की ग्रैंड मस्जिद में क्लीनर के तौर पर काम करना शुरू किया। पहले 5 से 6 महीनों तक वो अपने परिवार को पैसे भेजती रहीं। परिवार के लिए ये राहत की बात थी, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि उनकी बेटी की कमाई से उनकी आर्थिक परेशानियां कम होंगी। लेकिन कुछ समय बाद पैसों का आना बंद हो गया। परिवार चिंतित हो गया कि स्वीटी को क्या हुआ है और वो पहले की तरह घर पैसे क्यों नहीं भेज रही है।द डेली स्टार से बातचीत में स्वीटी के पिता ने कहा कि उनकी बेटी ने पहले 5 महीनों तक पैसे भेजे थे। फिर एक दिन उसने फोन करके कहा कि उसे जेल भेज दिया गया है। परिवार को पता था कि स्वीटी जेल में है, लेकिन उन्हें उसके खिलाफ लगे आरोपों या आगे की कानूनी कार्यवाही के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी।स्वीटी की गिरफ्तारी के बारे में जो जानकारी सामने आई है वो कई सवाल खड़े करती है। द डेली स्टार द्वारा प्राप्त 18 अक्टूबर के एक गोपनीय कांसुलर मेमो के अनुसार, स्वीटी को 2 अगस्त 2023 को व्यभिचार के आरोप में हिरासत में लिया गया था। उनके साथ काम करने वाले एक बांग्लादेशी नागरिक नजमुल इस्लाम अब्दुल बासिद को एक दिन पहले सऊदी अरब के साइबर क्राइम कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। मेमो के अनुसार, दोनों अल-मजल कंपनी में काम करते थे। गिरफ्तारी के बाद स्वीटी को धहरान महिला जेल में रखा गया था।हालांकि, परिवार के साथ बातचीत के दौरान स्वीटी ने अपनी गिरफ्तारी की एक अलग वजह बताई थी।
उनके पिता के अनुसार, स्वीटी ने कहा था कि उनकी कुछ महिला सहकर्मियों ने कथित तौर पर अवैध रूप से एक कार खरीदी थी, और उसी मामले में उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया था। स्वीटी के रिश्तेदारों को शक था कि उन्हें इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। हालांकि, परिवार के इस शक की पुष्टि सामने आई जानकारी से स्वतंत्र रूप से नहीं होती है।दूसरी ओर, सऊदी अधिकारियों ने स्वीटी और नजमुल इस्लाम के खिलाफ कार्रवाई को अनैतिक कृत्यों से जुड़े मामलों में दोषसिद्धि से जोड़ा। यहां गौर करने वाली बात ये है कि गिरफ्तारी के बाद से परिवार को केस के बारे में पूरी जानकारी नहीं मिली थी। स्वीटी जेल में थी और उसके परिवार को उम्मीद थी कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद वो वापस आ जाएगी। परिवार को अंदाजा नहीं था कि मामला इतना गंभीर मोड़ ले लेगा।जेल में रहते हुए भी स्वीटी अपने परिवार के संपर्क में थी। कभी वो हर हफ्ते फोन करती थी, तो कभी परिवार से बात करने में एक महीने तक का अंतर आ जाता था।
बीबीसी बांग्ला की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार को पता था कि स्वीटी जेल में बंद है, लेकिन उन्हें उसके खिलाफ लगे आरोपों और मुकदमे की पूरी जानकारी नहीं थी। स्वीटी ने अपने परिवार से कहा था कि वो लौटने पर उन्हें सब कुछ बताएगी। इससे परिवार की उम्मीद बनी रही कि एक दिन वो घर लौट आएगी और वो अपनी बेटी के साथ फिर से जिंदगी शुरू कर सकेंगे।द डेली स्टार के अनुसार, स्वीटी को उम्मीद थी कि वो दो महीने के अंदर जेल से बाहर आ सकती है। उसके परिवार के लिए ये उम्मीद ही उनका सबसे बड़ा सहारा थी। वो उस बच्चे के लौटने का इंतजार कर रहे थे जिसे बेहतर भविष्य के लिए विदेश भेजा गया था। लेकिन ये इंतजार एक ऐसी खबर के साथ खत्म हुआ जिसकी परिवार ने कभी कल्पना भी नहीं की थी।स्वीटी अख्तर की कहानी का सबसे भावनात्मक पहलू उनके पिता के साथ उनकी आखिरी बातचीत है। प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, स्वीटी के पिता फजल मियां ने 13 अक्टूबर को मगरिब की नमाज के बाद उनसे बात की थी। ये बातचीत उनकी फांसी से ठीक एक दिन पहले हुई थी; इस दौरान स्वीटी ने न तो अपने मुकदमे के बारे में कोई जानकारी दी और न ही मौत की सजा का जिक्र किया। परिवार को अभी भी उम्मीद थी कि वो जेल से बाहर आ जाएगी। पिता को ये भी नहीं पता था कि ये उनकी बेटी के साथ आखिरी बातचीत साबित होगी।
14 अक्टूबर को, सऊदी अरब ने दो बांग्लादेशी नागरिकों, स्वीटी अख्तर और नजमुल इस्लाम अब्दुल बासिर की फांसी की घोषणा की। ये खबर परिवार तक किसी सीधे आधिकारिक नोटिफिकेशन के जरिए नहीं पहुंची। बीबीसी बांग्ला के अनुसार, स्वीटी की बड़ी बहन को उसकी मौत की सजा के बारे में एक दोस्त द्वारा भेजे गए फेसबुक वीडियो से पता चला। जरा सोचिए एक परिवार जो अपनी बेटी के लौटने का इंतजार कर रहा है उसे उसकी मौत की खबर इस तरह मिले। फजल ने अपनी बेटी से सिर्फ एक दिन पहले ही बात की थी। लेकिन उस समय उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि वो फिर कभी उससे बात नहीं कर पाएंगे।स्वीटी अख्तर और नजमुल इस्लाम अब्दुल बासिर की फांसी ने बांग्लादेश में आक्रोश पैदा कर दिया है। इसका एक बड़ा कारण ये है कि सऊदी अरब में बांग्लादेशी राजनयिक मिशन ने कहा कि फांसी होने से पहले उन्हें सूचित नहीं किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश ने दोनों मामलों में फैसले की कॉपी और न्यायिक कार्यवाही के बारे में जानकारी मांगी थी। हालांकि, बताया गया कि सऊदी अरब द्वारा इन सवालों का जवाब नहीं दिया गया।हालांकि बांग्लादेश के प्रवासी कल्याण मंत्रालय ने 19 अक्टूबर को फांसी पर चढ़ाए गए दो व्यक्तियों की पहचान की घोषणा की, लेकिन स्वीटी के परिवार ने कहा कि उन्हें अधिकारियों से उनकी मौत की कोई सीधी आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है।इस मामले ने ध्यान इसलिए खींचा क्योंकि परिवार को न तो स्वीटी की सजा के बारे में पहले से बताया गया था और न ही उसकी मौत की आधिकारिक खबर मिली थी। परिवार के लिए ये पचाना मुश्किल था कि जिस बेटी से उन्होंने सिर्फ एक दिन पहले बात की थी वो अब इस दुनिया में नहीं है।
स्वीटी की मां जोहरा बेगम अपनी बेटी की मौत की खबर सुनने के बाद सदमे में थीं। प्रोथोम आलो से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ सहा लेकिन कभी किसी से कुछ नहीं कहा। अब, उनकी सबसे बड़ी इच्छा है कि उनकी बेटी का शव बांग्लादेश वापस लाया जाए ताकि वो उसे आखिरी बार देख सकें।वो परिवार जिसने स्वीटी को विदेश भेजने के लिए कर्ज लिया था, उम्मीद करता था कि वो पैसे कमाएगी, कर्ज चुकाने में मदद करेगी और अपनी बेटी के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करेगी। लेकिन अब, वही परिवार अपनी बेटी के शव की वापसी के लिए गुहार लगा रहा है।स्वीटी की बेटी के भविष्य को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। उनकी चचेरी बहन सलमा अख्तर के अनुसार, बच्ची 9 साल की है और एक स्थानीय प्राइमरी स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ती है। हालांकि, द डेली स्टार ने स्वीटी की मां के हवाले से बच्चे की उम्र 4 साल बताई थी। इसका मतलब है कि बच्चे की उम्र को लेकर रिपोर्टों में अंतर है। लेकिन ये साफ है कि स्वीटी अपनी बेटी के भविष्य को बेहतर बनाने की उम्मीद के साथ सऊदी अरब गई थीं।स्वीटी अख्तर की कहानी सिर्फ एक महिला की गिरफ्तारी और मौत की सजा की खबर नहीं है।
ये एक ऐसे परिवार की भी कहानी है जिसने आर्थिक संघर्षों से निकलने और अपनी बेटी के भविष्य को संवारने की उम्मीद में उसे विदेश भेजा था। बाल विवाह, टूटे हुए रिश्ते, आर्थिक तंगी और बेटी की जिम्मेदारी के बीच फंसी स्वीटी ने काम करने का फैसला किया। परिवार ने कर्ज लिया। उसे सऊदी अरब भेजा और उसकी कमाई पर बेहतर भविष्य की उम्मीदें टिका दीं। लेकिन कुछ महीनों बाद उसने फोन करके कहा कि वो जेल में है।
परिवार को उम्मीद थी कि वो लौट आएगी, लेकिन 13 अक्टूबर को पिता के साथ आखिरी बातचीत के अगले ही दिन उसकी फांसी की घोषणा कर दी गई।परिवार मांग कर रहा है कि उनकी बेटी का शव वापस लाया जाए। इसके अलावा, ये भी सामने आया है कि बांग्लादेश ने इस मामले में न्यायिक दस्तावेजों और कार्यवाही से जुड़ी जानकारी मांगी है। स्वीटी की जिंदगी और उसकी मौत से जुड़े कई सवालों के जवाब परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। जिस बेटी को परिवार ने बेहतर कल की उम्मीद में विदेश भेजा था, अब उसी का चेहरा आखिरी बार देखने के लिए वो गुहार लगा रहे हैं।