Cli

अगर ये डायरेक्टर ना होता तो बॉलीवुड को गोविंदा कभी ना मिलता?

Uncategorized

साल 1986 फिल्म इल्जाम की कास्टिंग चल रही थी। प्रोड्यूसर पहला ढिलानी को तलाश थी एक नई जोड़ी की जिसका एक हिस्सा तो गोविंदा ही थे। माने चाहिए थी एक्ट्रेस। 2 साल पहले एक फिल्म रिलीज हुई थी अबोध। इस फिल्म में माधुरी दीक्षित को देखकर प्रहलाद इतने एक्साइटेड [संगीत] थे कि कैसे भी उन्हें अपनी फिल्में लेना चाहते थे। प्रहलाद आज भी कहते हैं कि उनके सामने माधुरी की जो तस्वीरें आई थी, उससे ज्यादा खूबसूरत तस्वीरें उन्होंने आज तक नहीं देखी। खैर पहला ने माधुरी को कास्ट कर लिया था। उन्हें एक सेक्रेटरी भी दे दिया था जिसका नाम था राकेशनाथ। यह सब इसलिए था क्योंकि पहला माधुरी के साथ तीन फिल्में बनाना चाहते थे। लेकिन यह सारा सपना अधूरा रह गया क्योंकि पहला के हिसाब से उनके साथ हो गई थी गुटबाजी। इस गुट का हिस्सा थे अनिल कपूर, बोनी कपूर और सुभाष घई जैसे लोग जो उस वक्त एक बड़ा नाम थे। इंडस्ट्री पर प्रभाव रखते थे। पहला का आरोप था कि इस गुट ने माधुरी को पहला की फिल्म इल्जाम छोड़ने पर मजबूर कर दिया। यह कहकर कि गोविंदा अभी नया एक्टर है।

क्यों अपना करियर दांव पर लगा रही हो? नतीजा यह हुआ कि सिर्फ माधुरी दीक्षित ने ही नहीं बल्कि सेक्रेटरी राकेश ने भी फिल्म से अपना हाथ खींच लिया। माधुरी गई तो पहला ने साइन कर लिया नीलम को और फिर लिखा गया इतिहास। माने नीलम ने वो तीनों फिल्में की जिसमें माधुरी दीक्षित काम करने वाली थी। इल्जाम आग ही आग और पाप की दुनिया। इन तीनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर गोल्डन जुबली बनाई। माने यह फिल्में थिएटर में लगातार 50 हफ्तों तक चलती रही। नतीजा यह रहा कि नीलम सुपरस्टार बन गई। खैर, यह सब तो फिल्म रिलीज होने के बाद की बात है। लेकिन माधुरी के फिल्म छोड़ने से प्रहलाद दिलानी इतने नाराज थे कि उन्होंने किसी मैगजीन में नौ पन्नों का आर्टिकल लिख डाला था। जिसका शीर्षक था कोर्ट मार्शल, रिंकू और अनिल। इस आर्टिकल का इंपैक्ट यह हुआ कि अनिल और रिंकू को पहला के पास जाना पड़ा। यह कहना पड़ा कि वह माधुरी के साथ कोई फिल्म बनाएं। यह वही वक्त था कि जब माधुरी का करियर डूब रहा था। पहला, अनिल और रिंकू की बात मान गए और फिल्म स्थान स्टूडियो में तीन बड़ी फिल्मों का मुहूर्त रखा। भाग्य विधाता देवा और एक अन्य कोई और फिल्म। इन फिल्मों में पहला, अनिल कपूर, माधुरी दीक्षित और शिल्पा, सिरोड़कर जैसे सितारों को साथ ले आए। आपको जानकर हैरानी होगी पहला की फिल्मों के मुहूर्त वाला यह खेल पूरी तरह से दिखावा था

ताकि डूबते करियर और इंडस्ट्री को फिर से खड़ा किया जा सके। अगर यूं कहें कि यह पूरा किस्सा बॉलीवुड के उस दौर को बयां करता है जहां दोस्ती, दुश्मनी और बिजनेस के बीच की लकीरें बहुत धुंधली थी। इसी धुंधलेपन में खुद को चमकता हुआ सितारा बनाए हुए थे पहला नेहलानी। 4 जून 2026 के दिन विवादों और सिनेमाई धमाकों से भरा यह सफर हमेशा के लिए थम गया। लीवर से जुड़ी बीमारी के कारण 76 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। ऐसे में आज हम प्रहलाद निहलानी के करियर पर एक नजर डालेंगे। जानेंगे कि कैसे उन्होंने गोविंदा को स्टार बनाने में मदद की लेकिन कभी अपना दोस्त नहीं माना। प्रहलाद निहलानी के साथ अनुराग कश्यप, डेविड धवन और सलमान खान की क्या रार रही? नमस्कार, मेरा नाम है रविशंकर। आप देख रहे हैं खबरगांव। पहला नेहलानी 10 जनवरी 2050 को मुंबई के एक सिंधी परिवार में जन्मे थे। पिता धागे का कारोबार करते थे। इसलिए पहला को भी उसी में लगाना चाहते थे। लेकिन जब पहला महज 8 साल के थे उन्होंने एक छोटे पर्दे पर देख ली थी फिल्म जागृति जिसका गाना हम लाए हैं तूफान में कश्ती निकाल के। इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के पहला के ज़हन में घर कर गया। जागृति के बाद 1958 में आई फिल्म मधुमती ने भी पहला के मन में गहरा असर डाला। माने अब पहला लगातार फिल्में देखने लगे थे। खुद तो देखते ही थे साथ में अपनी हम उम्र वाले लड़कों को भी दिखाने ले जाते थे। हालांकि उनके पिता चाहते थे कि पहला कुछ दिनों तक पिता के साथ उनकी दुकान पर बैठे। ऐसा हुआ भी लेकिन पहला ने फिल्में देखना कभी नहीं छोड़ा। यही वो दौर था जब उनकी व्यापारिक समझ और फिल्मी शौक का मिलन हुआ और उन्होंने खुद का रास्ता बनाने की सोची। इसी तरह वह बड़े हुए। धीरे-धीरे वह फिल्मों की ओर रुख करने लगे। लेकिन अपना व्यापारिक अनुभव लेकर। इसे आप यूं भी कह सकते हैं कि बहुत कम उम्र में पहला ने अपने पिता का हाथ ले लिया था। माने जब फिल्में थोड़ी पुरानी हो जाती थी तब पहला उसके शो ऑर्गेनाइज करते थे एक कॉमन जगह पर और उससे पैसे कमाते थे। पहला ने सबसे पहले बेवकूफ की स्क्रीनिंग की थी। जब उनका यह काम चल निकला तब उन्होंने इसे और बड़ा किया। अब दो हफ्ते या ओपन रन के लिए सिनेमा हॉल बुक कर लेते थे। धीरे-धीरे पब्लिसिटी और ट्रेलर देखकर उन्हें यह समझ आने लगा कि बतौर दर्शक जनता को क्या पसंद आएगा और यहीं से वे एक सफल फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर बन गए।

डिस्ट्रीब्यूशन के दौरान उनकी दोस्ती डायरेक्टर सुरेंद्र मोहन से हुई। 1979 में विनोद खन्ना की सोलो फिल्म हत्यारा का डिस्ट्रीब्यूट करते समय उन्हें बहुत बड़ी सफलता मिली और फिल्म ने अपनी लागत से पांच गुना ज्यादा बिजनेस किया। इस कामयाबी ने उन्हें फिल्म जगत में एक कदम और बढ़ाया। माने अब वह प्रोडक्शन की दुनिया में कदम रखने वाले थे। सुरेंद्र मोहन के साथ मिलकर ही उन्होंने अपनी पहली फिल्म की हथकड़ी। शत्रुघ्न सिन्हा स्टारर यह फिल्म 1982 में रिलीज हुई जिसके डायरेक्टर सुरेंद्र मोहन थे और प्रोड्यूसर प्रहलाद नेहलानी। इसके बाद साल 1985 में प्रहलाद नेहलानी मिथुन स्टारर फिल्म आंधी तूफान प्रोड्यूस कर रहे थे। बहुत खास नहीं रही। लेकिन फिर प्रहलाद की जिंदगी में आया एक खास [संगीत] शख्स गोविंदा। दोनों ने मिलकर इंडस्ट्री में कई ऐतिहासिक फिल्में दी। जिसकी शुरुआत हुई 1986 में आई इल्जाम [संगीत] से। इल्जाम की कास्टिंग के लिए जब पहला ने पहली बार गोविंदा की तस्वीरें देखी तो उन्हें पसंद नहीं आई। पहला को लगा था कि उनमें एक हीरो वाली बात नहीं है। रिजेक्ट होने के अगले ही दिन गोविंदा अपनी एक वीडियो कैसेट लेकर आए जिसमें उन्होंने ब्रेक डांस रिकॉर्ड किया था। गोविंदा का वो टैलेंट देखकर पहला दंग रह गए और उन्होंने गोविंदा के लिए खासतौर पर फिल्म इल्जाम की पूरी स्क्रिप्ट ही बदल डाली। सिर्फ इतना ही नहीं पहला नेहलानी गोविंदा के डांसिंग स्टाइल को और बेहतर बनाने के लिए खुद लॉस एंजेलिस गए। जहां उन्होंने माइकल जैक्सन के डांस स्टेप्स और स्टाइल पर रिसर्च किया ताकि गोविंदा को एक डांसिंग स्टार के तौर पर प्रेजेंट कर सकें। गोविंदा इल्जाम के लिए साइन किए गए। यहां दो चीज दांव पर लगी थी। पहला गोविंदा का करियर क्योंकि यह उनकी लॉन्चिंग थी। दूसरा पहला की परख क्योंकि गोविंदा के लिए उन्होंने फिल्म की पूरी स्क्रिप्ट बदल दी थी। रिजल्ट दोनों के फेवर में रहा। फिल्म इल्जाम ब्लॉकबस्टर रही। इधर गोविंदा रातों-रात स्टार बन गए। इसी फिल्म में गोविंदा की अपोजिट थी नीलम जहां पहले होने वाली थी माधुरी दीक्षित। फिर क्या हुआ? इसका किस्सा हमने आपको शुरुआत में ही बताया था। प्रहलाद नीलानी कहते हैं गोविंदा से कभी मेरी सच्ची दोस्ती नहीं रही क्योंकि गोविंदा उस दौर में बहुत ज्यादा झूठ बोला करते थे। अक्सर वे सेट पर लेट आते थे और फोन पर कहते थे कि बस निकल चुका हूं या आ गया हूं। जबकि वे घर से निकले भी नहीं होते थे। इसे आप यूं भी कह सकते हैं कि पहला और गोविंदा के बीच सिर्फ प्रोड्यूसर और कलाकार जैसा संबंध था। उधर इल्जाम की सफलता के बाद गोविंदा ने एक साथ 3035 फिल्में साइन कर ली थी। जिनमें से ज्यादातर बी और सी ग्रेट की फिल्में थी।

बावजूद इसके कि पहला ने उन्हें आगाह किया था कि इतने सारे छोटे प्रोजेक्ट्स उनके करियर को नुकसान पहुंचाएंगे। लेकिन गोविंदा का तर्क था अभी पैसा मिल रहा है तो ले लेना चाहिए। इसी वजह से धीरे-धीरे गोविंदा का मार्केट गिरने लगा और वे फ्लॉप फिल्मों के दौर में फंस गए। हुआ भी यही गोविंदा ने लव 86 मेरा लहू और हत्या जैसी सोलो फिल्में की लेकिन नहीं चली शत्रुघ्न सिन्हा और रजनीकांत जैसे सुपरस्टार के साथ फिल्में की वो [संगीत] भी नहीं चली माने इल्जाम के बाद अचानक गोविंदा का करियर डाउनफॉल की ओर जा रहा था। ऐसे में फिर उन्हें पहला का साथ मिल गया फिल्म शोला और शबनम में जो उस वक्त सुपरहिट रही थी। पहला इस बारे में कहते हैं कि मैंने हमेशा गोविंदा के साथ तब काम किया जब उनका वक्त खराब था ना कि उनके अच्छे वक्त में। शोला और शबनम फिल्म के डायरेक्टर डेविड धवन थे और प्रोड्यूसर प्रहलाद नेहलानी दोनों की जुगलबंदी में गोविंदा बिल्कुल फिट बैठे और फिल्म सुपरहिट हो गई। लेकिन प्रहलाद और डेविड के बीच तनाव जरूर शुरू हो गया। पहला कहते हैं डेविड धवन एक स्वार्थी इंसान है क्योंकि डेविड ने गोविंदा के कान भरने शुरू कर दिए थे। आगे पहला कहते हैं कि डेविड धवन अक्सर गोविंदा को यह महसूस कराते थे कि उनकी सफलता का श्रेय केवल डेविड को जाता है। आपको बता दें कि यह मामला पूरी तरह से क्रेडिट का था। शोला और शबनम के साथ साल 1993 में रिलीज हुई आंखें भी। पहला के अनुसार डेविड इसे अपने आईडिया बताते थे। जबकि पहला के अनुसार यह पूरी तरह उनका आईडिया था। प्रहलाद गोविंदा के बारे में यह भी कहते हैं कि वह कान के कच्चे थे। लोगों की बातों में जल्दी आ जाते थे और मेरे ही खिलाफ हो जाते थे। इसलिए मेरे और गोविंदा के रिश्तों में कभी मजबूती नहीं आ पाई। फिल्म आंखें के वक्त एक विवाद भी हुआ था। दिव्या भारती ने चंकी पांडे के अपोजिट काम करने से मना कर दिया था क्योंकि वह गोविंदा के साथ काम करना चाहती थी। बाद में पहला ने पूरी स्टार कास्ट बदल दी और ऋतू शिवपुरी और शिल्पा शिरोडकर को ले लिया। सिर्फ इतना ही नहीं पहला कहते हैं आंखें के 27 दिनों के क्लाइमेक्स शूट के दौरान डेविड धवन सेट पर एक भी दिन मौजूद नहीं थे और वह सारा एक्शन सीक्वेंस पहला ने खुद शूट करवाया था। इसके बाद 1998 में फिल्म भाई-भाई की शूटिंग के दौरान एक बड़ा विवाद हुआ जब पहला के अनुसार डेविड धवन ने गोविंदा के कान भर दिए और उन्हें पहला की फिल्म छोड़कर अपनी फिल्म करने के लिए उकसाया। आंखें के बाद जब गोविंदा और डेविड धवन के साथ उनके रिश्ते खराब हुए तो प्रहलाद ने अनिल कपूर के साथ अंदाज और आजाद जैसी फिल्में शुरू की। इससे गोविंदा काफी नाराज हो गए। हालांकि गोविंदा बाद में नीलानी के पास फिल्म आजाद के सेट पर आए और माफी मांगी।

जिसके बाद उनके बीच कुछ समय के लिए सुलह हो गई। 90 का दशक खत्म होते-होते प्रहलाद ने बहुत कम फिल्में बनाई। जो बनाई वह भी बहुत चली नहीं। ऐसे में एसोसिएशन ऑफ मोशन पिक्चर्स एंड टीवी प्रोग्राम प्रोड्यूसर्स यानी एएमपीटीपीपी के अध्यक्ष के रूप में काम करना शुरू किया। इस दौरान उन्होंने बॉलीवुड को इंडस्ट्री स्टेटस दिलाने और बैंक फाइनेंस की सुविधा शुरू करवाने में मुख्य भूमिका निभाई। तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा और सुषमा स्वराज के साथ मिलकर बैंकों को फिल्म फंडिंग के लिए राजी किया। इसके अलावा उन्होंने वीडियो पाइरेसी के खिलाफ लड़ाई लड़ी और भारत में मल्टीप्लेक्स संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए गोपीनाथ मुंडे के साथ मिलकर काम भी किया। इन सबके अलावा पहला के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 2015 में उन्होंने [संगीत] सीबीएफसी यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन का अध्यक्ष पद संभाला। हुआ कुछ यूं था कि जनवरी 2015 में एक शादी समारोह के दौरान प्रहलाश की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई। इसके अगले ही दिन सरकार ने उन्हें सीबीएफसी का अध्यक्ष चुनने का आदेश जारी कर दिया। इसे लेकर पहला कहते हैं कि उन्होंने बिना किसी लॉबिंग किए जिम्मेदारी संभाली है। जबकि इंडस्ट्री के अशोक पंडित और मधुर भंडारकर जैसे लोग इस पद की दौड़ में थे। यहीं पर आपको बता दें कि पहला को साल 2003 में अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में भी यह ऑफर मिला था। तब वो इसके लिए राजी नहीं हुए। प्रहलाद नेहलानी के जीवन में विवादों का असली खेल तब शुरू हुआ जब वो सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष बने। अगस्त 2017 तक सिर्फ अपने 2 सालों के कार्यकाल में प्रहलाद नीलानी ने बवाल मचा कर रख दिया। आते ही उन्होंने 28 अपशब्दों की एक लिस्ट जारी की जिन्हें फिल्मों में इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई थी। इस लिस्ट का फिल्म इंडस्ट्री में जमकर विरोध हुआ और उन्हें संस्कारी चेयरमैन कहा जाने लगा। उन्होंने जेम्स बॉन्ड की फिल्म स्पेक्ट में किसिंग सीन छोटे करवाए

जिसके लिए उन्हें बहुत ट्रोल किया गया। पहला निहलानी के कार्यकाल का सबसे बड़ा विवाद उड़ता पंजाब फिल्म को लेकर हुआ। सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म में 89 कट्स लगाने का सुझाव दिया था। फिल्म से 20 गालियां हटाने का आदेश दिया गया था। गालियों के अलावा इलेक्शन, एमपी, एमएलए और पार्लियामेंट कुत्ते का नाम जैकी चैन था इसलिए उसे हटाने को कहा गया था। कहा यह भी गया था कि फिल्म के टाइटल में शहरों का नाम ना इस्तेमाल किया जाए। इसके चलते निर्देशक अनुराग कश्यप नेलानी के सजेशन के खिलाफ खड़े हो गए और उन्होंने नेहलानी पर तानाशाही का आरोप लगाया। अनुराग का कहना था नीलानी एक बुली की तरह काम कर रहे हैं और फिल्मों को जानबूझकर डिले करते हैं ताकि मेकर्स कट्स [संगीत] मान लें। बाद में यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट गया और कोर्ट ने फिल्म को सिर्फ एक कट के साथ रिलीज़ करने का आदेश दिया। नीलानी [संगीत] का इस पर कहना था कि उन्होंने सरकार के दबाव में नहीं बल्कि नियमों के हिसाब से काम किया था। सेंसर बोर्ड में रहते हुए उनके संबंध अपने ही बोर्ड के सदस्यों जैसे अशोक पंडित, चंद्र प्रकाश द्विवेदी और प्रोड्यूसर मुकेश भट्ट के साथ भी बहुत खराब रहे। पहला का आरोप था यह लोग खुद चेयरमैन बनना चाहते थे इसलिए उनके खिलाफ माहौल बना रहे थे। एक और बड़ा विवाद तब हुआ था जब नेहलानी ने फिल्म लिपस्टिक अंडरमय बुर्का को यह कहकर सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया था कि यह लेडी ओरिएंटेड है। इसके अलावा हंसल मेहता की फिल्म अलीगढ़ को ए सर्टिफिकेट देने पर भी काफी विवाद हुआ था। नीलानी पर यह भी आरोप लगा कि वो अपनी फिल्मों में तो खड़ा है, खड़ा है और मैं हूं मालगाड़ी जैसे डबल मीनिंग गाने रखते हैं लेकिन दूसरों की फिल्मों पर सेंसरशिप लगाते हैं। इस पर उनका यह तर्क था कि यह गाने उस समय के बोर्ड ने पास किए थे और उनमें कोई विजुअल व्गैरिटी नहीं थी। ऐसे ही कुछ विवादों के कारण पहला के रिश्ते लोगों के साथ बहुत अच्छे नहीं रहे। लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा के साथ उनकी कभी भी नहीं बिगड़ी।

वो शत्रुघ्न सिन्हा को अपना बड़ा भाई मानते हैं और उनके साथ उन्होंने आंधी तूफान, इल्जाम और आग ही आग जैसी कई फिल्में की। नेहलानी का कहना था शत्रुघ्न सिन्हा एक ऐसे इंसान हैं जो एक बार किसी का हाथ पकड़ लें तो कभी नहीं छोड़ते। सिर्फ शत्रु ही नहीं चंकी पांडे के साथ भी उनकी दोस्ती आखिर तक चली। सेंसर बोर्ड की अध्यक्षता खत्म होने के बाद अपने आखिरी सालों में प्रहलाद नीलानी ने एक बार फिर फिल्मों में हाथ आजमाया था। उन्होंने एक फिल्म रंगीला राजा प्रोड्यूस की थी जो साल 2019 में आई थी और बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही थी। इस फिल्म से जुड़ा भी एक किस्सा है। साल 2018 के आसपास जब रंगीला राजा की शूटिंग चल रही थी। सेट पर गोविंदा मौजूद थे। इस दौरान एक अजीब सा किस्सा हुआ जिसे पहला अक्सर याद करते हैं। पहला के मुताबिक गोविंदा ने सुबह छह बादामों वाली चाय पी और उसके बाद उन्हें चक्कर आने लगे। वो उस दिन शूटिंग नहीं कर पाए और शेड्यूल 3-4 महीने के लिए आगे बढ़ गया। कैलाश के लिए यह एक बड़ा झटका था क्योंकि वह फिल्म को एक ही शेड्यूल में खत्म करना चाहते थे। हालांकि गोविंदा का वह बादाम वाला सस्पेंस आज भी एक मिस्ट्री बना हुआ है कि आखिर उस दिन उन्हें हुआ क्या था क्योंकि इसके लिए गोविंदा ने 4 महीने का रेस्ट लिया था। यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रहलाद नेहलानी के जीवन में विवाद जरूर रहे लेकिन उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को इंडस्ट्री स्टेटस दिलाने और बैंकों से फाइनेंस की सुविधा शुरू करवाने में बड़ी भूमिका निभाई। कैलाश नीलानी की कौन सी फिल्में आपको पसंद हैं या उनसे जुड़ा कोई किस्सा आपको याद हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताइए। इस वीडियो में फिलहाल इतना ही। इस पूरे वीडियो को रिकॉर्ड किया है आनंद ने। शुक्रिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *