असिस्टेंट डायरेक्टर का एक्टिंग में आना कोई बिल्कुल अनसुखी बात नहीं है. भारतीय सिनेमा में ऐसे कई फिल्ममेकर रहे हैं, जिन्होंने निर्देशन के साथ एक्टिंग भी की. गुरुदत्त, राज कपूर से लेकर फरहान अख्तर ने तक ने ‘रॉक ऑन’ और ‘भाग मिल्खा भाग’ जैसी फिल्मों में एक्टिंग से भी खूब वाहवाही बटोरी. लेकिन आज जिस असिस्टेंट डायरेक्टर की बात कर रहे हैं उनके लिए मजबूरी हो गई थी. कौन हैं ये असिस्टेंट डायरेक्टर चलिए बताते हैं…
फिल्म इंडस्ट्री में पर्दे के पीछे की कहानियां अकसर पर्दे पर दिखने वाली कहानियों से भी ज्यादा दिलचस्प और हैरान करने वाली होती हैं. कभी-कभी कोई फिल्म सिर्फ एक कमर्शियल प्रोजेक्ट नहीं रह जाती. बॉलीवुड के इतिहास में हमने कई बार देखा है कि कैमरे के पीछे रहकर कलाकारों से एक्टिंग करवाने वाले दिग्गज डायरेक्टर अचानक खुद कैमरे के सामने आ जाते हैं. फरहान अख्तर ने ‘रॉक ऑन’ से लेकर ‘भाग मिल्खा भाग’ तक अपनी एक्टिंग का शानदार लोहा मनवाया. वहीं, अनुराग कश्यप ‘अकीरा’ और ‘एके वर्सेज एके’ में अपने अभिनय से सबको चौंका चुके हैं. तिग्मांशु धूलिया को भला कौन भूल सकता है, जिन्होंने ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ में रामाधीर सिंह का आइकॉनिक किरदार निभाकर एक्टिंग की दुनिया में भी अपना डंका बजा दिया था. आज कहानी उस असिस्टेंट डायरेक्टर की जो बॉक्स ऑफिस पर डंका मचा रहा है.
कोई कलाकार सालों तक छोटे-मोटे किरदार करता रहता है और अचानक उसे ऐसा रोल मिल जाती है, जो उसकी पूरी जिंदगी बदल देती है. वहीं, कभी कैमरे के पीछे काम करने वाला शख्स अचानक कैमरे के सामने आ जाता है और दर्शकों के बीच अपनी जगह बना लेता है. बॉलीवुड और साउथ सिनेमा में ऐसे कई उदाहरण रहे हैं, जहां डायरेक्टर या असिस्टेंट डायरेक्टर ने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा और खूब नाम कमाया. लेकिन ‘हनुमान अंश’ से जुड़ी कहानी कुछ अलग है. यहां एक कलाकार का हीरो बनना महज एक कास्टिंग चेंज नहीं, बल्कि पूरी टीम के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं माना गया.
‘हनुमान अंश’ की शूटिंग शुरू होने से पहले फिल्म के लीड हीरो के लिए किसी दूसरे हीरो को साइन किया गया था. लेकिन शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले उनकी तबीयत खराब हो गई. ऐसे में मेकर्स के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई. इसी दौरान फिल्म के असिस्टेंट डायरेक्टर शोभिनव सत्य को बाबा का किरदार निभाने का मौका दिया गया. खास बात यह थी कि शोभिनव खुद भी बाबा के भक्त हैं. कैमरे के पीछे काम करने वाला यह शख्स अचानक कैमरे के सामने लीड रोल में आ गया.
डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी के मुताबिक, इसके बाद शूटिंग का पूरा माहौल भी सामान्य फिल्मों से काफी अलग रहा. फिल्म शुरू होने से पहले लगातार 43 दिनों तक रोज हनुमान चालीसा का पाठ किया गया. शूटिंग शुरू होने से पहले और दिन का काम खत्म होने के बाद भी पूरी टीम हनुमान चालीसा का पाठ किया करती थी.
मेकर्स ने फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट पर कुछ खास नियम बनाए गए थे. सेट पर चिकन, मटन और फिश समेत किसी भी तरह का नॉनवेज पूरी तरह बंद था. शराब के लिए किसी को सेट पर कोई इजाजत नहीं थी. इतना ही नहीं, टीम को गाली-गलौज, लड़ाई-झगड़े और किसी भी तरह के विवाद से दूर रहने के लिए कहा गया था.
अगर शूटिंग के दौरान किसी तरह की परेशानी आती तो पूरी टीम एक साथ बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करती थी. डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी का कहना है कि कई बार कैमरा या प्रोडक्शन से जुड़ा काम अचानक अटक जाता था. टीम चालीसा पढ़ना शुरू करती और कई मौकों पर चालीसा खत्म होते-होते समस्या का समाधान भी निकल आता था. यही वजह है कि डायरेक्टर इन घटनाओं को महज संयोग नहीं, बल्कि चमत्कार के तौर पर देखते हैं.फिल्म की शूटिंग के दौरान एक और घटना ने पूरी टीम का ध्यान खींचा. सेट पर अचानक एक लंगूर पहुंच गया. खास बात यह रही कि वह सिर्फ कुछ देर के लिए नहीं आया, बल्कि करीब दो दिनों तक टीम के आस-पास ही रहा. टीम को यह घटना भी बेहद खास लगी और बाद में उस लंगूर को फिल्म में भी दिखाया गया.
फिल्म की शूटिंग के लिए टीम चित्रकूट पहुंची थी. वहां एक सीन के लिए एक पुराने कमरे का इस्तेमाल किया गया. बाद में टीम को पता चला कि इसी कमरे में कभी नीम करौली बाबा भी रुके थे. इस जानकारी के बाद उस जगह से जुड़ी शूटिंग टीम के लिए और भी खास हो गई. अब इन तमाम घटनाओं को संयोग कहा जाए या आस्था से जुड़ी कोई लीला, इसका जवाब किसी के पास नहीं है. लेकिन फिल्म से जुड़े लोगों के लिए ये एक्सपीरियंस हमेशा यादगार रहेंगे.