यहां पर जो प्रिंसिपल आ रहे थे, आ रहे थे, बच्चों के सामने थे और इसी क्लास में छोटी-छोटी बच्चों के सामने सो जाते थे। तो उसके लिए हमने कहा था अगर उनको नहीं हटाया जाता है तो हम आंदोलन करेंगे। हम आज आंदोलन पर बैठे हैं। तो लेकिन अभी-अभी पता चला है कि उस प्रिंसिपल को हटाया गया है। तो ये एक बहुत बड़ी जीत है इन गांव वालों के लिए और मैं गांव वालों का बहुत-बहुत अभिनंदन करना चाहता हूं।
आप सब ने आप सब ने झुका दिया इन लोगों को और अभी भी आंदोलन खत्म नहीं हुआ है क्योंकि अभी और डिमांड है। दो और टीचर चाहिए जब तक वो दो और टीचर का अपॉइंटमेंट आता नहीं है तब तक गांव वाले पीछे नहीं हटेंगे और गांव वालों के साथ में यहीं पर बैठा रहूंगा जब तक ये यहां बैठे रहेंगे। बहुत सारे जिला परिषद की स्कूल की हालत खराब है। बेंच नहीं है स्कूल में। आगे का प्लानिंग क्या है आपका और आंदोलन कैसा रहेगा? नहीं आगे तो हम ये पूरा देश भर आंदोलन कर रहे हैं।
जहांजहां सरकारी स्कूलों में बेंचेस नहीं है वहां पर हम बोलेंगे कि पहले सबसे पहले बेंचेस लो। क्योंकि जितने भी एजुकेशन डिपार्टमेंट में जो ऑफिशियल्स काम करते हैं उनके बच्चे तो बेंचेस फ्री बैठते होंगे ना प्राइवेट स्कूल में। आपको जिम्मेदारी क्या दी थी? आपको जिम्मेदारी दी थी स्कूल अच्छे करने के लिए सरकारी। आपने क्या किया? कि किया आपने? अच्छे आपने नहीं किए। आप अपने बच्चों को भेजते हो प्राइवेट स्कूलों में और आपके बच्चे को मिलती है .
डिजिटल क्लास रूम बेंचेस मिलते हैं आरओ का पानी मिलता है लेकिन आपके पास जिन बच्चों की जिन स्कूलों की जिम्मेदारी दी थी उन स्कूलों में ना पानी आता है ना बेंचेस है ना डिजिटल क्लास रूम है तो आप अपना काम ठीक नहीं कर रहे हो तो आपको अपना काम ठीक करना पड़ेगा और अगर आप वो भी नहीं करोगे तो फिर तो यही करना पड़ेगा कि आपके बच्चों का एडमिशन यहां करवाना पड़ेगा।
जब सारे एजुकेशन डिपार्टमेंट के ऑफिशियल्स के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ने चले जाएंगे तब देखना अपने आप सारे स्कूल कैसे दो दिनों में ठीक हो जाएंगे क्योंकि जब इनके बच्चों की बात आएंगी ना तब इनको समझ में आएगा कि क्या झेलना पड़ता है गांव में पढ़ने वाले बच्चों को नहीं आप यहां पर नहीं भी आएंगे इसके अगले बारे में भी कोई दिक्कत नहीं काम हो जाएगा काम हो जाएगा वही कह रहा हूं मुझे आने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी हां वही बता रहा हूं आप लोग ऐसे ही बैठ जाओगे ना सही है सही जैसे मैं दारू पीकर आ रहा था जिस दिन वो पहले दिन आया उसी दिन आपको गेट के सामने बैठ जाना चाहिए कि हमें या हुआ या जो भी ऐसा अल्कोहलिक प्रिंसिपल है नहीं चलेगा। तुम्हारे लिए बेंचेस लाएंगे। बेंचेस चाहिए ना? हां चाहिए।
सबको बेंचेस देंगे अपन अभी। और ये जो लोग हैं ना जिनके ऊपर जिम्मेदारी है सबको आपकी स्कूल चलानी चाहिए। इनके खुद के बच्चे प्राइवेट स्कूल में बेंचेस पर बैठते हैं लेकिन आपको इसी बिठाते हैं। ये तो ये नहीं होने देंगे। हम बेंचेस दिलाएंगे सबको।
दीजिए जहां पर गरीबों के बच्चों की शिक्षों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले। ये अब्दुल है। ये सबके लिए हीरो होना चाहिए। आज नफरत की राजनीति की वजह से अब्दुल ने अपने पिता को खो दिया। क्या बात कर रहे थे उसके पिता? क्या बात कर रहा था अब्दुल? किस चीज के लिए लड़ रहे थे? स्कूल ठीक कराने के लिए लड़ लड़ रहे थे। क्यों उनके ऊपर हमला किया गया?
दूसरों के लिए लड़ रहे थे ना वो। लेकिन जैसे कि हमने देखा इस देश में नफरत की राजनीति चल रही है कुछ कई साल पिछले 10 साल से उसी का शिकार अब्दुल और उसका परिवार हुआ है। उसी के वजह से उसके पिता की जान गई है। लेकिन उसके बाद भी अब्दुल का देश प्रेम है। उसके बाद भी ये देशभक्त अब्दुल का देश प्रेम है कि वो कह रहा है कि भैया कोई बात नहीं। मैं फिर से कल बाहर निकलूूंगा
। मैं फिर से स्कूल जाऊंगा। जब मेरी हिम्मत टूट गई थी अब्दुल से बात करते वक्त तब उसी अब्दुल ने मुझे हिम्मत दी है। और उसने बुलाया कि भैया आप जाओ स्कूल और उसकी वजह से आज मैं आया हूं। तो आज का जो प्रिंसिपल को फायर किया गया है, सस्पेंड किया गया है, मैं अब्दुल को धन्यवाद देना चाहता हूं और मैं अब्दुल को कहना चाहता हूं ये जीत तुम्हारे लिए अब्दुल ये जीत तुम्हारे पिता के लिए और उनको बताना कि हम लड़ रहे हैं। पिता अंकल जहां कहीं भी हो हम अंकल को कहेंगे हम लड़ेंगे। अंकल जैसा आपने कहा था अब्दुल से कि ये मूवमेंट रुकनी नहीं चाहिए। मूवमेंट रुकेगी नहीं और ये तब तक नहीं रुकेगी जब तक हम सारे स्कूल ठीक करने नहीं कर नहीं सकते.