ना कोई फॉलो किया ना कोई नियम का पालन किया। सामने देश के प्रधानमंत्री थे। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू सम्मान देने के लिए वहां पर मौजूद थी।लेकिन एक मां आती है, अपना आंचल फैलाती है। भर-भर कर आशीर्वाद नरेंद्र मोदी को देती हैं। और उसके बाद जब राष्ट्रपति मुर्मू के पास पहुंचती है तो सीधा उनके कंधे पर हाथ रख देती हैं और ऐसे बतियाती हैं जैसे सखी सहेली बतियाती हैं।
पिछले 24 घंटे से सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल है। कुछ सेकंड्स को देखने के बाद एक ही बात लिखी जा रही है कि भैया कौन है ये दादी जो कोई फॉलो नहीं कर रही हैं। बहुत इनको अगर आप सर्च करेंगे तो भले ही आपको नाम नजर ना आए लेकिन जब आप इनके कामों का जिक्र करेंगे तो एक पूरा का पूरा लेख आपके सामने आजाएगा।
अगर आप भी इस महिला को ढूंढ रही हैं, पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह दादी कौनlहै जिन्होंने ना प्रधानमंत्री ना राष्ट्रपति के सामने किसी नियम का पालन किया। तो आइए मैं आपको इस रिपोर्ट में बताती हूं। देखिए यह बात है साल 2023 की। पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई। 54 हस्तियों को पद्म अवार्ड से सम्मानित किया गया और इनमें से सारे ऐसे नाम थे जो जमीनी स्तर पर काम कर रही हैं। अपने समुदाय को, अपने समाज को आगे बढ़ाने के लिए, अपने क्षेत्र के उत्थान के लिए, भारत के उत्थान के लिए काम कर रही हैं। और यह वो लोग हैं जिनके पास कोईसोर्स नहीं है। यह वो लोग हैं जो बिना किसी शोरगुल के इस तरह का काम कर रही हैं।
अपने समाज यानी कि सिद्धि समाज को आगे बढ़ाती हुई यह महिला नजर आई हैं। इनका जन्म गुजरात में हुआ था। बहुत मेहनत से यह इस स्तर पर पहुंची हैं कि इन्हें पद्म पुरस्कार दिया गया। इनका नाम है श्रीमती हीराबाई इब्राहिमभाई लोभी। ये जब पद्म पुरस्कार लेने के लिए राष्ट्रपति भवन पहुंची तो सबसे पहले तो जरा इनकी तस्वीरें देखिए या अमित शाह के सामने आंचल फैला लिया। यह बताने की कोशिश की कि आप जमीन से जुड़े हुए लोगों को उठाने का जिस तरीके से काम कर रही हैं। आपको मेरा आशीर्वादउसके बाद जब ये राष्ट्रपति मुर्मू के सामने आई तो देखिए कैसे पहले कंधे पर हाथ रख लिया फिर तस्वीरें खिंचवाने लग गई और सोशल मीडिया पर इनका वायरल हो गया जैसा कि आप देख भी सकते ।
पहले तो यह भावुक हो गई यहां पर। इन्होंने कहा कि मुझे अपार खुशी मिली है। इस सम्मान से नहीं बल्किजिस तरीके से मुझे प्रेस किया गया, मुझे पसंद किया गया, मुझे यहां तक पहुंचाया गया और संबित पात्रा हो या बीजेपी के तमाम और नेता कोई मातृशक्ति को नमन करता हुआ नजर आया। कोई दादी नमस्ते कहता हुआ नजर आया।लेकिन जो लोग जानना चाहते हैं इन महिला के बारे में आइए मैं आपको बता देती हूं।
1 जनवरी 1953 को गुजरात के गिर के जमूर गांव में इनका जन्म हुआ। बचपन में इनके माता-पिता का निधन गया था। इनकी दादी ने इनको पाला। यह शुरुआत में शिक्षा नहीं ले पाई क्योंकि आर्थिकस्थिति बहुत ज्यादा कमजोर थी। ना स्कूल गई ना कॉलेज गई। कम उम्र में उनकी शादी श्री इब्राहिम भाई लोबी से हो गई। वो अपने पति के साथ जमीन के एक छोटे से टुकड़े में खेती करके गुजर-बसरर करने लगी। तब आधुनिक संसाधन या उपकरण नहीं थे तो वो हाथ से मिट्टी खोदा करती थी। वो सिद्धि समुदायसे आती हैं। जंबूर की कुल आबादी का 98% यही है और इसी समाज से ही आती हैं।
सिद्धि वास्तव में अफ्रीकी जनजाति है। 400 साल पहले जूनागढ़ के शासक के राज में गुलाम बनाकर उन्हें भारत लाया गया था और तब से ये लोग भारत में ही बस गई हैं। तो ये उस समाज से आती है और इनका कनेक्शन अफ्रीका से भी है। और इनका चेहरा देखकर आपको थोड़ा-थोड़ा महसूस भी हो जाएगा।
गुजरात के सबसे ज्यादा पिछड़े समुदायों में से एक है सिद्धि जनजाति जहां से ये आती हैं। दशकों तक के इन लोगों ने मामूली जीवन जिया लेकिन अब देखिए जिस तरीके से ये 18 गांव के लिए काम कर रही हैं। यह क्रांति ला रही हैं। इन्होंने रोजगार स्वास्थ्य खानपान को बेहतर करने और जागरूकता फैलाने के लिए बहुत काम किया है। 700 से ज्यादा महिलाओं और बच्चों की जिंदगी बदल दी है। जाहिर सी बात है देश विदेश में उन्हें इतना सम्मान मिल चुका है।