क्या दिलजीत दोसा की फिल्म सतलुज की ओटीटी पर वापसी होने वाली है? जिस फिल्म को रिलीज के महज 48 घंटे के अंदर Zee5 से हटा दिया गया था। अब उसी फिल्म को लेकर मामला सीधे पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। फिल्म हटाने को जो है फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन पर हमला बताया जा रहा है। जबकि दूसरी तरफ सरकार सिक्योरिटी चिंताओं की बात कर रही है।
आखिर पूरा मामला क्या है? आइए जानते हैं। दिलजीत दोसांज की फिल्म सतलुज एक बार फिर से हेडलाइंस में आ गई हैं। लेकिन इस बार वजह फिल्म की कहानी नहीं बल्कि इसे दोबारा ओटीटी पर लाने की मांग है। दरअसल 3 जुलाई को Zee5 पर रिलीज हुई सतलुज को रिलीज के महज 48 घंटे के अंदर प्लेटफार्म से हटा दिया गया था। इसके बाद Zee5 ने एक स्टेटमेंट जारी कर कहा कि अगले आदेश तक यह फिल्म भारत में स्ट्रीम नहीं की जाएगी। फिल्म हटते ही सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर ऐसी क्या वजह थी जिसके चलते रिलीज के दो दिन बाद ही फिल्म को हटा दिया गया। अब इसी मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
फिल्म की वापसी की मांग को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन यानी कि पीआईएल दायर की गई है। याचिका में कहा गया कि बिना किसी स्पष्ट कानूनी अधिकार और पब्लिक कारण बताए फिल्म को हटाना इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन के अनुच्छेद 19 यानी कि फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि फिल्म को दोबारा Zee5 पर रिलीज करने की अनुमति दी जाए और सरकार इस फैसले के पीछे की वजह पब्लिक करें। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो यह जनहित याचिका पंजाब के रहने वाले और Zee5 के सब्सक्राइबर श्रवण सिंह की ओर से दायर की गई है। उनके वकील का कहना है कि फिल्म को बिना किसी पूर्व सूचना और बिना जो है किसी
भी ट्रांसपेरेंसी प्रोसेस के जरिए जो है हटा दिया गया है। उनका कहना है कि अगर किसी कंटेंट पर रोक लगाई जाती है तो उसके पीछे की वजह बताई जाती है। वहीं वकील का कहना तो यह भी है कि केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्य समिति बनाई है। लेकिन अब तक यह साफ नहीं किया गया है कि फिल्म को हटाने की असली वजह क्या थी। उन्होंने उम्मीद जताई है कि
इस याचिका पर जल्द ही हाईकोर्ट में सुनवाई हो सकती है। अब बात करते हैं उस फिल्म की जिस पर इतनी बड़ी कंट्रोवर्सी छिड़ी हुई है। सतलुज जिसे पहले पंजाब 95 के नाम से जाना जाता था। फेमस ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी पर इंस्पायर्ड है। बताया जाता है कि यह फिल्म पिछले 3 से 4 साल तक सीबीएफसी यानी कि सेंसर बोर्ड के पास अटकी रही। रिपोर्टेडली फिल्म में 127 कट्स सुझाए गए थे। इसके बाद मेकर्स ने फिल्म का नाम बदलकर सतलुज रखा। अब यह कंट्रोवर्सी में गिरती नजर आ रही है। सो, व्हाट्स योर टेक ऑन दिस? प्लीज डु कमेंट।