कुत्तों की दुम सीधी होती अगर वो लोहे की होती। यह चीनी कहावत है। लेकिन लागू कहां होती है? इसे समझने के लिए आपको शहबाज शरीफ और जनरल आसिम मुनीर के इस दौरे की इनसाइड स्टोरी समझनी होगी। अब यह कहानी तो आम हो चुकी है कि ईरान मसले पर जब अमेरिका ने दोनों को लताड़ लगाई। इजराइल से दोस्ती का दबाव बनाया, तो दोनों दुम दबाकर चीन की शरण में गए।
यहां चीन के सामने कश्मीर का राग अलापा और पुराना पिट्ठू होने की दुहाई दी। जब जिनपिंग ने भी कहा चलो ठीक है ऐसे ही शरणागत रहो। इसके पीछे पाकिस्तान में चल रहे चीन के प्रोजेक्ट हैं जो गवादर से लेकर पीओके तक चल रहे हैं।
लेकिन मुनीर शहबाज की जोड़ी चीन की सरपरस्ती में ऐसे धन्य हो गई कि पूछिए मत। ऊपर से चीनी रक्षा मंत्रालय का यह बयान जो शहबाज मुनीर के पाकिस्तान लौटने के बाद आया। हाल ही में पाकिस्तान और चीन के राजनायिक संबंध के 75 साल पूरे हुए हैं। पाकिस्तान में लोग हमारी दोस्ती को पहाड़ से ऊंची और सागर से गहरी कहते हैं तो चीन के लोग पाकिस्तान को प्यार से आयरन पाकिस्तान कहकर बुलाते हैं। अब यह तो हुई दुनिया को दिखाने वाली बात।
अब समझिए इनसाइड स्टोरी। वैसे तो यह दौरा आधिकारिक तौर पर शहबाज शरीफ का था। लेकिन यहां ज्यादा भाव मिला जनरल मुनीर को। चीनी रक्षा मंत्रालय ने मुनीर की आव भगत शहबाज से कहीं ज्यादा की। लेकिन मुनीर ने क्या किया शहबाज के साथ?
यह एक पाकिस्तानी एक्सपर्ट से सुनिए। तो समझ लीजिए चीन में जो हुआ वो किसका खेल है और पाकिस्तान में जो होने वाला है वो किसका खेल है। चीन अपनी सेना और सैन्य समझौते के जरिए मुनीर को पटाने की कोशिश कर रहा है। और मुनीर आयरन मैन बनकर शबाज शरीफ की सत्ता हथियाने की फिराक में है। मोरल ऑफ द स्टोरी यही है।