दिल दीवाना ना जाने कब खो गया मेरा दिल [संगीत] चुरा गई। हेलो दोस्तों [संगीत] मेरे चैनल पर आपका स्वागत है। आपको नाइज के बॉलीवुड का [संगीत] वो हीरो चंद्रचूर सिंह याद है जो सिर्फ तीन फिल्मों से ही लोगों के बीच छा गया था। जान है तू ये [संगीत] जान ले तू। कामयाबी के घोड़े पर सवार होकर वो एक [संगीत] बड़े स्टार बनने जा रहे थे। [संगीत] मगर अचानक ही हिंदी सिनेमा से [संगीत] गायब हो गई। अपनी कोक से उसे जनाओ। औरत मेरी मां सिर्फ एक औरत है। [संगीत] मेरी मां का त्याग सिर्फ एक औरत का त्याग है। मेरी देवी जैसी मां को एक आम औरत का दर्जा सिर्फ तेरे जैसा घटिया इंसान ही दे सकता। आपको पता है [संगीत] कि एक दर्दनाक घटना उनका पूरा करियर ले डूबी थी। चलिए हम आपको इस वक्त उनके डूबने की पूरी [संगीत] कहानी सुनाते हैं। मेरे 90 के दौर में कई एक्टरों ने हिंदी सिनेमा में किस्मत आजमाई। मगर [संगीत] चंद्रचूर सिंह उस रेस में सबसे आगे निकल गए। पिया पिया [संगीत] रजवाड़े खानदान का बेटा जो एक म्यूजिक टीचर था और यूपीएससी की [संगीत] तैयारी कर रहा था वो आखिर सिनेमा कैसे पहुंच गया यह जानना बड़ा दिलचस्प है। ओसा के महाराज की [संगीत] बेटी की शादी उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ शहर के सांसद बलदेव सिंह से हुई। इनके घर ही 11 अक्टूबर 1968 को चंद्रचूर सिंह का जन्म हुआ था।
वैसे तो चंद्रचूर सिंह के दो भाई और हैं अभिमन्यु और आदित्य मगर वह दोनों से अलग थे। महाराजा की बेटी और सांसद का बेटा अब ऐसे-वैसे स्कूल में तो पढ़ेगा नहीं। इसी वजह से उनको भेज दिया गया मशहूर स्कूल जहां रहीस कारोबारी और बड़े नेताओं के बच्चे पढ़ा करते थे। राजीव गांधी से लेकर राहुल गांधी यहीं के छात्र रहे हैं। यहीं पर पढ़ाई करने लगे। मगर मन में सिर्फ दो ख्वाब थे। [संगीत] या तो आईएएस बनना है या फिर एक्टर में तेरी सांसों की है डोरियां मेरी [संगीत] जान संगीत में भी रुचि थी इसलिए स्कूल में क्लासिकल [संगीत] म्यूजिक सब्जेक्ट भी ले लिया था यहीं पर वह संगीत सीखते रहे और उस्तादों को सुनते रहते ताकि सुरताल सब समझ में आ जाए इन कदमों के नीचे शायद यह मेरा दिल है। खैर [संगीत] 12वीं पास हुए तो सीधा दिल्ली चले आए क्योंकि परिवार यहीं पर बस गया था। अब यहां बेटे का दाखिला दिल्ली के एक और मशहूर कॉलेज [संगीत] सेंट स्टीफेस में करवा दिया गया।
पैसों की कोई कमी तो थी नहीं। ऐसे में अपने सपने पूरा करने के लिए मैदान खुला था। 1988 में ग्रेजुएशन की डिग्री मिली तो परिवार को बता दिया कि मुंबई जा रहे हैं हीरो बनने। बड़े लोगों के साथ संबंध तो होते ही हैं बड़े [संगीत] लोगों के। इसको भी उनका फायदा मिल गया और भटकना भी नहीं पड़ा। पहुंचे तो मुंबई में डायरेक्टर महेश [संगीत] भट्ट से मुलाकात हो गई और वह उन दिनों एक फिल्म बनाने जा रहे थे आर्गी। महेश बोले कि पहले [संगीत] लोगों की फिल्में बनती कैसे हैं? थोड़ा सा यह सीख लो और समझो। [संगीत] उनको अपना असिस्टेंट बना लिया। फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर की जिम्मेदारी मिली तो काफी कुछ सीखते गए। मगर हीरो बनने आए थे [संगीत] तो डायरेक्शन में मजा नहीं आ रहा था। फिर से हाथ पैर मारने शुरू कर दिए। अपने सारे संबंधों का इस्तेमाल किया और उनको पहला मौका भी मिल गया। सुचित्रा कृष्णमूर्ति के साथ एक [संगीत] फिल्म बन रही थी। जब प्यार किया तो डरना क्या? फिल्म में लीड हीरो के लिए ऑडिशन हुआ [संगीत] और चंद्रचूर सिंह ने बाजी मार ली। पहली फिल्म में हीरो बन गए। लगा कि सपना पूरा हो गया। मगर यह क्या? [संगीत] फिल्म की आधी शूटिंग पूरी होने के बाद अचानक से उसे बंद कर दिया गया। बताया गया कि बजट खत्म हो गया है। चंद्रचोड़ [संगीत] सिंह का सपना टूट गया और वह फिर वहीं आ गए जहां से शुरुआत [संगीत] की थी। खैर उम्मीद नहीं खोई मगर 2 सालों में इनके साथ ऐसी दो बदकिस्मत घटनाएं हो गई जिसने इनकी हिम्मत ही तोड़ कर रख दी। वहां मुंबई छोड़कर दिल्ली चले गए। चलिए जाने हुआ क्या था। 1990 के आसपास की बात है। सुभाष गई दिलीप कुमार और राजकुमार को लेकर फिल्म बनाने जा रहे थे। उसमें लीड हीरो की तलाश थी। चंद्रचूर सिंह को पता लगा तो ऑडिशन देने पहुंचे। ऑडिशन दिया और सुभाष घ गई को पसंद भी आ गए। उन्होंने अपनी फिल्म में हीरो का रोल दे दिया। दिलीप कुमार, राजकुमार जैसे दिग्गजों के साथ शुरुआत। इस बार फिर लगा कि सपना पूरा हो गया। मगर यह क्या? वक्त पर उनको फिल्म से हटाकर दूसरे एक्टर को हीरो बना दिया गया। फिल्म [संगीत] थी 1991 में आई। नाम था सौदागर। विवेक मुशरान वाला रोल पहले चंद्रचूर [संगीत] सिंह को ही मिला था। फिल्म सुपरहिट हो गई और विवेक रातोंरात स्टार बन गए। फिर हिम्मत करके जुटे रहे और एक बार फिर मौका मिला। 1991 में मशहूर अभिनेत्री तनुजा की बेटी काजोल अपने फिल्मी करियर [संगीत] की शुरुआत करने जा रही थी। उनके हीरो के लिए ऑडिशन हुए। इस बार भी चंद्रचोड़ ने [संगीत] ऑडिशन दिया। डायरेक्टर राहुल रवेल ने उनको पास भी कर दिया और वह काजोल के हीरो [संगीत] बना दिए गए। मगर एक बार फिर वही हुआ। फिल्म की शूटिंग से उनको हटाकर दूसरे नए एक्टर को हीरो बना दिया गया। 1992 में वह फिल्म थी बेखुदी जिसमें कमल सदाना का रोल पहले चंद्रचूर सिंह करने वाले [संगीत] थे।
इस फिल्म ने भी कमल सदाना को रातोंरात स्टार बना दिया था। तीन-तीन बार बदकिस्मती की मार झेल चुके [संगीत] अभिनेता की हिम्मत इस बार टूट गई। उन्होंने निराश होकर बोरिया बिस्तर बांधा और मुंबई छोड़कर दिल्ली चले आए। उन्होंने मान लिया कि हीरो बनना शायद उनकी किस्मत [संगीत] में था ही नहीं। अब दिल्ली में आकर म्यूजिक टीचर बन गए और छोटे बच्चों को संगीत [संगीत] सिखाने लगे। साथ-साथ यूपीएससी की तैयारी भी करने लगे। मगर उनको क्या पता था [संगीत] कि किस्मत में तो हीरो बनना ही लिखा था। 1994 या 95 [संगीत] की बात है। वह दिल्ली के स्कूल में संगीत सिखा रहे थे। अचानक चपरासी आया और बोला कि सर आपका फोन आया है। वह फौरन फोन [संगीत] सुनने आए तो पता लगा जया बच्चन का फोन था। उन्होंने बोला हमारी कंपनी एबीसीएल एक फिल्म बनाने जा रही है। [संगीत] उसमें लीड रोल करोगे। चंद्रचूर की तो जैसे लॉटरी लग गई। तुरंत हां बोला तो जया ने स्क्रीन [संगीत] टेस्ट के लिए मुंबई बुला लिया। ऑडिशन पास कर अरशद वारसी के साथ [संगीत] उनको लीड रोल मिला। 1996 में फिल्म आई थी। तेरे मेरे सपने और आखिरकार [संगीत] पहली बार वो बतौर हीरो बॉलीवुड में उतरे। फिल्म का एक गीत लड़की [संगीत] आंख मारे खूब मशहूर हुआ। आंख मारे ओ लड़की [संगीत] आंख मारे फिल्म तो चली नहीं लेकिन इस फिल्म ने उनको वो फिल्म दिलवा दी जिसने अभिनेता की किस्मत रातोंरात पलट कर रख दी हुआ यह कि गुलजार साहब आतंकवाद पर एक फिल्म बनाने जा रहे थे। उसमें एक भटके हुए सिख युवक की किरदार के लिए किसी नए चेहरे की तलाश हो रही थी। अचानक उनकी नजर चंद्रचूर सिंह के उस ऑडिशन टैप पर पड़ गई जो उन्होंने तेरे मेरे सपने के लिए दिया था। गुलजार को वह पसंद आ गए और उन्होंने चंद्रचूर सिंह को कृपाल सिंह का किरदार दे दिया। 1996 में फिल्म आई माचिस। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा कर रख दिया। फिल्म की स्टोरी से लेकर चप्पा चप्पा [संगीत] चरखा चली। बनी-बनी मेरी उंगली। चप्पा चप्पा चरखा चली। जैसे गीतों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। चंद्रचूर [संगीत] सिंह ने इतनी बेहतरीन अदाकारी की कि लोगों ने उनको सैर आंखों [संगीत] पर बैठा लिया। मैं लकीर के उस तरफ निकल चुका हूं। मैं अब नहीं लौट सकता। या रातोंरात वो स्टार बन गए। सारे एक्टरों [संगीत] की लाइन को तोड़फोड़ कर उन्होंने बेस्ट डेब्यू एक्टर का फिल्म फेयर अवार्ड अपने नाम कर लिया। मित्र [संगीत] रे लग जा। वैसे क्या आपको पता है कि उनका नाम बदलने के लिए खूब दबाव हुआ करता था। उनको स्कूल में रॉकी कहकर बुलाया जाता था। फिल्मों में आने के बाद फिल्म मेकर्स बोले कि अपना नाम बदलकर रॉकी रख लो मगर वो नहीं माने। आखिरकार गुलजार के पास मामला पहुंचा तो वह बोले चंद्रचूर सिंह नाम में क्या बुराई है? ठीक ही तो है। इस तरह से उनको अपना नाम बदलना नहीं पड़ा था। उनके स्टारम का आलम ऐसा हो गया था कि करण जौहर जब अपनी फिल्म कुछ होता है। बनाने जा रहे थे तो सलमान खान वाले रोल के लिए पहले उनके पास गए थे। मगर किन्हीं वजह से चंद्रचूर सिंह [संगीत] ने उनको मना कर दिया था। वैसे ही माचिस के बाद चंद्रचूर सिंह ने तीन फिल्में हिट देकर बॉलीवुड पर धमाका [संगीत] मचा दिया था। कुछ मेरे दिल ने कहा।
1999 में आई डाग द फायर जिसमें संजय दत्त भी थे। [संगीत] दूसरी फिल्म थी साल 2000 में आई जोश जिसमें शाहरुख खान और ऐश्वर्या भी थे। उसमें ऐश्वर्या के प्रेमी का रोल उनको मिला था। जो पहले आमिर खान करने वाले थे। इस फिल्म के [संगीत] दो गीतों मेरे ख्यालों की मलिका मलिका मेरे ख्यालों की मलिका और हारे-हारे हारे [संगीत] हम दिल से हारे हारे हारे हारे। ने उनको युवाओं के बीच खासा मकबूल कर दिया था। [संगीत] अिया मटका है। तीसरी फिल्म थी क्या कहना जो साल 2000 में आई थी। प्रीति [संगीत] जिंता और सैफ अली खान के साथ इनकी अदाकारी की खूब तारीफ हुई थी। वहीं साल 2001 में आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया में भी इनकी एक्टिंग लाजवाब रही। एक साथ चार-चार हिट फिल्में देकर चंद्रचूर सिंह का कैरियर सातवें आसमान पर चल रहा था। डायरेक्टर प्रोड्यूसर इनको मुंह मांगी फेस देकर शाइन कर रहे थे। एक साथ ही इनके पास बड़े-बड़े बैनर की कई फिल्में आ गई थी। जिसमें मशहूर हीरोइनें भी थी। मगर दोस्तों फिर अचानक कुछ ऐसा हुआ कि एक ही झटके में सब कुछ बर्बाद हो गया। वो हिंदी सिनेमा से गुमनाम हो गए थे। ये बात साल 2000 की है जब जोश और क्या कहना जैसी हिट फिल्मों को रिलीज़ [संगीत] के बाद चंद्रचूर सिंह ने छुट्टियां मनाने की योजना बनाई। वह फिल्मों से ब्रेक लेकर गोवा में मस्ती करने [संगीत] पहुंच गए। मगर मस्ती के बीच ही उनके जीवन में सबसे बड़ा खौफनाक हादसा हो गया। वह गोवा में वाटर स्किंग करने पहुंचे जैसे [संगीत] सभी करते हैं। मोटर बोट की रफ्तार धीरे-धीरे तेज होती जा रही थी। वह पीछे रस्सी के सहारे [संगीत] पानी पर फिसलते जा रहे थे। अचानक बोट की रफ्तार बहुत तेज हो गई और उनका एक हाथ फिसल [संगीत] गया। जबकि दूसरा हाथ रस्सी में फंस गया। रफ्तार इतनी तेज थी कि उनका दूसरा हाथ शरीर से बस उखड़ने वाला था। मगर अचानक बोट रोक दी गई। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उनका बाया हाथ कंधे से डिस्लोकेट [संगीत] हो गया था। इसके बाद वह वापस मुंबई आए और उनका इलाज शुरू हुआ। भयंकर दर्द की वजह [संगीत] से ढेरू दवाइयां खाने लगे। फिजियोथरेपी शुरू हुई। इस वजह से साल भर तक उनका करियर ठप रहा। उनके पास कई फिल्में थी
जिनकी [संगीत] शूटिंग भी करनी थी। वह वापस काम पर लौटे। मगर यह क्या? जैसे ही डांस या कोई एक्शन सीन करते फिर [संगीत] से दर्द शुरू हो जाता। शूटिंग रोकनी पड़ जाती। फिल्म मेकर्स का करोड़ों का घाटा होने लगा। [संगीत] अब चंद्रचूर सिंह ने ऑपरेशन करवाया मगर उसमें भी कोई फायदा नहीं हुआ। ढेर सारी फिल्मों [संगीत] में ना वो डांस सीन कर पाते और ना ही एक्शन सीन। दवाइयों की वजह से [संगीत] वजन भी बढ़ता जा रहा था। उनकी वजह से शूटिंग प्रभावित होने लगी। तो डायरेक्टर ने भी उनसे किनारा करना शुरू कर दिया। एक के बाद एक उनके हाथ से सारी फिल्में निकलती गई और एक हादसे [संगीत] ने उनका पूरा करियर बर्बाद कर दिया। करीब 10 साल तक [संगीत] यही चलता रहा। अब जाकर उनका कंधा ठीक हुआ। मगर तब तक फिल्म इंडस्ट्री बहुत आगे बढ़ [संगीत] चुकी थी। तब उनका स्टारडम खत्म हो गया था और कैरियर चौपाट। साल [संगीत] 2012 में दोबारा वापसी की। 4 दिन की चांदनी फिल्म से मगर लोग उनको भूल चुके थे।
बॉलीवुड ने भुला दिया तो टीवी पर काकोरी शो करने लगे। लेकिन वो दुर्घटना अगर ना हुई होती तो शायद आज कुछ कहानी और होती। वैसे उनकी शादीशुदा जिंदगी भी अच्छी नहीं रही। चंद्रचूर सिंह ने 1999 में अवंतिका कुमारी से शादी की थी। कांगड़ा हिमाचल प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली अवंतिका मशहूर होटल व्यवसाय और राजनेता ठाकुर अजय सिंह की बेटी हैं। दोनों का एक बेटा हुआ जिसका नाम संजय रखा गया। मगर कुछ ही सालों में दोनों का रिश्ता खराब हो गया। अब दोनों [संगीत] अलग रहते हैं। चंद्रचूर सिंह अपने बेटे के साथ रहते हैं और उनकी देखरेख संभालते हैं। कभी कबभार किसी वेब [संगीत] सीरीज में भी नजर आ जाते हैं। दोस्तों आपको चंद्रचूर सिंह कैसे लगते थे? उनकी [संगीत] कोई फिल्म आपको याद हो तो हमें कमेंट जरूर करिएगा और ऐसे ही और स्टोरीज को जानने के लिए आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब [संगीत] भी कर सकते हैं। बस बेल आइकॉन दबाना मत भूलिएगा। थैंक्स फॉर वाचिंग। मेरे [संगीत] पागल और दया मैं क्या बोलूं