नीट 2026 का क्वेश्चन पेपर डॉक्टर्स के बच्चों को ₹3 लाख में भेजा गया था। यह पेपर महाराष्ट्र से राजस्थान, हरियाणा और केरल तक पहुंचा था। इसके लिए WhatsApp का इस्तेमाल किया गया।
नीट पेपर बी की यह पूरी कहानी सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं थी बल्कि पूरे देश में फैली एक बड़ी साजिश थी। सब्जेक्ट एक्सपर्ट से लेकर कोचिंग इंस्टट्यूट्स तक इसमें कई बड़े नाम शामिल थे। यह तमाम बातें की चार्जशीट में सामने आई हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 28 जुलाई को सीबीआई ने दिल्ली के राउस एवन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। इसमें कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें महाराष्ट्र के लातूर के रेणुकाई करियर कोचिंग इंस्टट्यूट के मालिक शिवराज रघुनाथ मोटे गांवकर को मुख्य आरोपी बनाया गया है। के मुताबिक एनटीए के पैनल सदस्य और ट्रांसलेटर पीवी कुलकर्णी ने पेपर लीक किया और इसके बाद लातूर में कोचिंग सेंटर चलाने वाले शिवराज मोटे गांवकर ने डॉक्टर मनोज भगवान राव शिरोरे के सिद्धि विनायक अस्पताल में जाकर सवाल हासिल किए।
इसके अलावा चार्जशीट में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की बायोलॉजी एक्सपर्ट मनीषा मंथरे, बायोलॉजी एक्सपर्ट प्रहल्हाद विट्ठल राव कुलकर्णी और फिजिक्स एक्सपर्ट मनीषा संजय हवलदार को भी आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा पुणे के एपीएमए कोचिंग इंस्टट्यूट चलाने वाले तेजस हर्षद कुमार शाह और आठ कथित बिचोलियों के नाम भी चार्जशीट में शामिल है। जैसे मनीषा संजय वाघमारे धनंजय निवृत्ति लोखंडे शुभम मधुकर खेरनार यश यादव मंगीलाल बवाल विकास बिवाल दिनेश बेवाल और डॉक्टर मनोज भगवान राव शेरू रिपोर्ट के मुताबिक की जांच का सबसे बड़ा फोकस शिवराज मोटे गांवकर पर है।
ऐसा क्यों? दरअसल इस व्यक्ति का कोचिंग नेटवर्क महाराष्ट्र के कई शहरों जैसे पुणे, नासिक, छत्रपति, संभाजीनगर, नांदेड़, सोलापुर, कोल्हापुर और अकोला समेत कई जगहों पर फैला हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक मोटे गांव कर पेपर लीक नेटवर्क का सक्रिय सदस्य था। आरोप है कि उसने केमिस्ट्री के सवाल ₹5 लाख देकर खरीदे। बाद में उसने यह सवाल अपने सह आरोपी डॉक्टर मनोज भगवान राव शेरू के जरिए अपने बेटे और कुछ अन्य स्टूडेंट्स तक भी पहुंचाए।
सीबीआई ने मोटे गांवकर के घर की तलाशी के दौरान उसका मोबाइल फोन जब्त किया था। फॉरेंसिक जांच में मोबाइल से 36 फोटो मिली हैं। जिनमें पांच डुप्लीकेट्स थे। इन तस्वीरों में केमिस्ट्री के 132 हाथ से लिखे हुए सवाल थे। जांच में सामने आया कि यह तस्वीरें 23 अप्रैल को Samsung फोल्ड 7 मोबाइल से खींची गई थी। यानी नीट परीक्षा से करीब 10 दिन पहले। इन 132 सवालों में से करीब 111 सवाल एनटीए के नीट यूजी 2026 मास्टर सेट से मेल खाते हैं।
अब सवाल यह है कि मोटे गांवकर के पास यह सवाल आए कैसे? यह समझने के लिए इस पूरे गेम में डॉ. मनोज भगवान राव शिरूरे का रोल समझना होगा। वे लातूर में एक निजी अस्पताल चलाते हैं। सीबीआई का आरोप है कि अप्रैल के तीसरे हफ्ते में परीक्षा से ठीक पहले मोटे गांवकर के बेटे को इसी अस्पताल में केमिस्ट्री का पेपर दिखाया गया था।
इतना ही नहीं डॉक्टर शेरूरे ने दो और डॉक्टरों के बच्चे को भी इस नेटवर्क से जोड़ा। आरोप है कि उन दोनों ने भी पेपर के लिए ₹3 लाख दिए। के मुताबिक आरोपी प्रहलाद कुलकर्णी ने पूछताछ में बताया कि उसकी मुलाकात धनंजय लोखंडे से 2021 में हुई थी। इसके बाद उसने मनीषा वाघमारे के साथ मिलकर पेपर हासिल करने और उसे आगे पहुंचाने की साजिश रची। जांच में पता चला कि कुलकर्णी के नेटवर्क के जरिए ही पेपर छात्रों तक पहुंचा। सीबीआई ने यह भी दावा किया है कि लीक हुए पेपर के लिए दिए गए ₹5 लाख का भुगतान मोटे गांवकर की पत्नी ने किया था। यह रकम बाद में शिरोरे परिवार के एक सदस्य के घर से बरामद की गई। सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे मामले का पहला सुराग किसी जांच एजेंसी ने नहीं बल्कि राजस्थान के सीकर के केमिस्ट्री शिक्षक शशिकांत सुथार ने दिया था। 7 मई को सुथार ने एनटीए को एक ईमेल भेजा।
इसमें उन्होंने बताया कि नीट परीक्षा से पहले ही सॉल्वड क्वेश्चन पेपर छात्रों के बीच घूम रहे थे। सुधार ने लिखा था कि 3 मई को शाम 6:00 बजे परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद उनके मकान मालिक दो पीडीएफ फाइलें लेकर आए और उनसे कहा कि इनको असली नीट पेपर से कंपेयर करें। सुधार ने जब दोनों पीडीएफ देखी तो पाया कि उनमें मौजूद सवाल असली नीट पेपर से पूरी तरह मेल खाते हैं। उन्होंने अपने कुछ साथियों से भी इसकी पुष्टि करवाई और फिर एनटीए को इसकी जानकारी दे दी। जब सुधार ने अपने मकान मालिक से पूछा कि यह पीडीएफ कहां से आई? तो उन्होंने बताया कि यह फाइल उन्हें उनके बेटे ने WhatsApp पर भेजी थी। उनका बेटा केरल में एमबीबीएस फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट है। उस छात्र ने बताया कि उसे यह फाइलें 2 मई को उसके साथ रहने वाले एक छात्र ने भेजी थी।
जांच में सामने आया कि इस पूरी चेन की शुरुआत एक ऐसे व्यक्ति से हुई जिसने पहले लीक पेपर के लिए ₹400 मांगे। बाद में सौदा ₹00 में तय हुआ। यह रकम फोन पे के जरिए भेजी गई। सीबीआई के मुताबिक पैसे मिलने के बाद उस व्यक्ति ने 2 मई की रात 11:00 बजे नीट के 450 हल किए हुए सवाल और उनके जवाब भेज दिए थे। यानी परीक्षा शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही पूरा क्वेश्चन पेपर और उसके जवाब कुछ छात्रों और बिचौलियों तक पहुंच चुके थे। का कहना है कि अब तक की जांच से साफ है कि यह काम किसी एक व्यक्ति ने नहीं किया। इसके पीछे कई राज्यों में फैला एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।
इस मामले की सुनवाई विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में अब 3 अगस्त को होनी है। रिपोर्ट में फिलहाल इतना ही। मामले में आगे जो भी अपडेट्स आएंगी हम आप तक पहुंचाते रहेंगे।