जुलाई का महीना यानी कि मानसून का पीक सीजन। लेकिन ज़रा सोचिए कि एक तरफ किसान आसमान की तरफ देखकर बारिश का इंतज़ार कर रहे हैं तो दूसरी तरफ दुनिया के कुछ देशों में इतनी बारिश हो रही है कि पूरे के पूरे शहर पानी में डूब चुके हैं। भारत में खेत सूख रहे हैं। धान की बुवाई पिछड़ रही है।
किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। उधर चीन की बात करें तो लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों की छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? कहां बारिश कम हो रही है? कहां पर आसमान आफत बनकर बरस रहा है? क्या बिहार और झारखंड को जल्द राहत मिलने वाली है? क्या खरीफ की फसल खतरे में है?
और क्या दुनिया में मौसम का मिजाज पूरी तरीके से बदल चुका है? इस बार दक्षिण पश्चिम मानसून पूरे देश में पहुंचा लेकिन उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई। मानसून ने पूरे देश को एक दिन की देरी से कवर किया था। लेकिन कई राज्यों में बारिश अभी भी सामान्य से काफी कम है। यानी कि कैलेंडर कह रहा है कि बारिश का मौसम है लेकिन खेतों की हालत देखकर कहानी कुछ और समझ आती है। जहां इस वक्त खेतों में पानी चाहिए वहां पर कई जगहों पर किसान अभी भी बादलों का इंतजार कर रहे हैं। वह भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि जल्दी बारिश हो। अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा चिंता इस वक्त बिहार और झारखंड की दिखाई दे रही है।
क्योंकि बिहार में सामान्य से करीब 47% कम बारिश हुई। झारखंड में भी बारिश 41% कम रिकॉर्ड की गई है। उत्तर प्रदेश में भी हालात पूरी तरीके से सामान्य नहीं है। अब तक लगभग 16% कम बारिश रिकॉर्ड की गई। यानी तीनों बड़े कृषि राज्यों में किसान फिलहाल मौसम की बेरुखी से परेशान हो चुके हैं और भगवान से गुहार लगा रहे हैं कि जल्द से जल्द इतनी तो बारिश हो जाए कि कम से कम उनके आर्थिक जीवन पर कोई ज्यादा प्रभाव ना पड़े। अब सवाल यह है कि जब मानसून पूरे देश में पहुंच चुका है तो फिर बारिश आखिर कहां गायब हो गई? इसका जवाब मौसम विभाग के आंकड़ों में भी छिपा है। अब यह आंकड़े कुछ आपके सामने रख रहे हैं। जून के आखिर तक देश में बारिश की कमी करीब 38% थी और इसके बाद जुलाई की शुरुआती दिनों में थोड़ी अच्छी बारिश हुई तो लोगों को राहत भी मिल गई और बारिश की कमी घटकर करीब 14% तक पहुंची। लेकिन राहत ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकी।
पिछले कुछ दिनों में मानसून की रफ्तार फिर से धीमी दिखाई दे रही है। जिसके बाद बारिश की कमी दोबारा बढ़ने लगी है। यानी कि मानसून अभी पूरी ताकत में नहीं दिख रहा। देखिए सबसे ज्यादा चिंता किसानों की है क्योंकि अभी खरीफ सीजन अपने अहम दौर पर है। अगर जुलाई के बीच तक अच्छी बारिश नहीं होती है तो इसका सीधा असर खेती पर पड़ेगा। अब कृषि मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि इस बार खरीफ की बुवाई पिछले साल के मुकाबले काफी पीछे है
। धान की बुवाई कम हुई है। दालों की बुवाई भी घटी है और सबसे ज्यादा गिरावट तो तिलहन की खेती में दर्ज हुई। सोयाबीन और कपास जैसे अहम फसल भी प्रभावित है। यानी कि अगर अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है तो किसानों की लागत बढ़ सकती है। उत्पादन घट सकता है और यह किसानों के लिए परेशानी का सबब बनेगा और आम जनता पर भी महंगाई की मार पड़ेगी। कृषि मंत्रालय इस समय बिहार, झारखंड इसके अलावा असम, पंजाब, गुजरात, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के साथ ही छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। इन राज्यों में सामान से 20% या उससे ज्यादा बारिश की कमी रिकॉर्ड की गई। यही वजह है कि किसानों को वैकल्पिक फसलों की अब सलाह दी जा रही है। कम पानी में तैयार होने वाले जैसे फसल, मक्का, बाजरा और मूंग जैसी फसलें बोने की सलाह है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है कि क्या बिहार और झारखंड में अब बारिश होगी?
क्या अब मानसून की सक्रियता दिखेगी? तो मौसम विभाग ने राहत की खबर दी है। आखिर क्यों एक तरफ भारत बारिश का इंतजार कर रहा है? जबकि चीन में बाढ़ ने लाखों लोगों की जिंदगी तबाह कर दी है। अगर आप बिहार या झारखंड में रहते हैं तो आपके लिए राहत भरी खबर है। मौसम विभाग ने दोनों ही राज्यों के कई जिलों में अच्छी बारिश और कहीं पर भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया। अगले दो से तीन दिनों तक बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल। इसके अलावा देखिए उड़ीसा के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। यानी कि जिस बारिश का इंतजार पिछले कई दिनों से किया जा रहा है, उसकी शुरुआत अब एक से दो दिनों में हो सकती है। लेकिन क्या सिर्फ दो या तीन दिन की बारिश पूरे सीजन की कमी को पूरी कर पाएगी? इस सवाल का जवाब है नहीं। और इसकी वजह से आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अब इसके पीछे की वजह क्या है? क्या जानकारी इसको लेकर है? वो भी आपके सामने रख रहे हैं। देखिए खेती के जो जानकार हैं वो बताते हैं कि अगर अच्छी खेती के लिए बारिश नहीं होती है अच्छी तो फिर मुश्किल भरा समय होता है बल्कि समय पर और लगातार होने वाली जो बारिश होती है वो ज्यादा जरूरी होती है। अगर एक बार में बहुत ज्यादा बारिश हो जाए तो यह खेती के लिए बेहतर नहीं है। लेकिन लगातार कई दिनों तक बारिश हो रुक-रुक कर अच्छी बारिश हो जाए तो यह खेती के लिए अच्छा माना जाता है। अभी फिलहाल क्या हो रहा है कि कई दिन बारिश नहीं हो रही है और कई दिन पानी बहुत ज्यादा बरस रहा है तो इसका फायदा भी सीमित रह जाता है। धान जैसी फसल को लगातार नमी चाहिए। अगर मिट्टी बार-बार सूखती है तो पौधों की जो बढ़त है वह रुक जाती है। यानी कि बारिश सिर्फ होना ही जरूरी नहीं है बल्कि सही समय पर होना उतना जरूरी है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले छ से सात दिनों तक उत्तर पश्चिम भारत का जो इलाका है, पश्चिम मध्य भारत का इलाका है। इसके अलावा जो दक्षिण भारत के कई मैदानी इलाके हैं। बारिश वहां पर सामान्य से कम रिकॉर्ड हो सकती है।
यानी कि दिल्ली, एनसीआर, हरियाणा, इसके अलावा पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश इन इलाकों में परेशानी बढ़ सकती है। दक्षिण भारत के कई मैदानी क्षेत्रों में बारिश की रफ्तार धीमी रह सकती है। हालांकि पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड इसके अलावा पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के कई इलाकों में अच्छी बारिश की संभावना है। लेकिन सिर्फ भारत ही मौसम की मार नहीं झेल रहा। दुनिया के कई देशों में बारिश अब आफत बन चुकी है। जहां भारत का किसान बारिश के लिए दुआ कर रहा है, वहीं चीन में लोग यह दुआ कर रहे हैं कि बस अब वहां पर बारिश रुक जाए। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज बहुत तेजी से बदल रहा है। कहीं पर सूखा, कहीं पर बादल फटना, कहीं पर रिकॉर्ड बारिश और कहीं पर विनाशकारी बार। विशेषज्ञ लगातार यह कह रहे हैं कि बदलते मौसम का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। बारिश का पैटर्न पहले जैसा बिल्कुल नहीं रहा। कुछ जगहों पर जरूरत से ज्यादा बारिश हो रही है। कुछ इलाकों में बादल आते हैं लेकिन बरसते नहीं और सबसे ज्यादा चीन में इस बार देखने को मिल रही है। कई प्रांतों में यहां पर लगातार भारी बारिश हो रही है।
हालात खराब हो चुके हैं। सड़कें नदी बन चुकी हैं। गाड़ियां खिलौनों की तरह पानी में बहती हुई दिखाई दी और कई मंजिलें की इमारतें जो हैं वह धराशाई हो जा रही हैं। ताश के पत्तों की तरह पानी में गिरते और इसके बाद डूबने की जो तस्वीरें हैं सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई। कई परिवार अपने घरों में कैद हो चुके हैं। छतों पर फंस चुके हैं। जहां तक पहुंचने के लिए राहत टीमों को लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन कई दिनों तक चलाना पड़ रहा है और नाव और हेलीकॉप्टर का सहारा लिया जा रहा है। कुछ इलाकों में पानी का बहाव इतना तेज है कि मजबूत तटबंध और बांध भी उसका सामना नहीं कर पा रहे। जहां बांध टूटे वहां देखते ही देखते पानी रिहाइशी इलाकों में दाखिल हो गया। लोगों को कुछ मिनटों में ही घर छोड़कर भागना पड़ा।
देखिए चीन के गुंसी इलाके की एक तस्वीर काफी तेजी से वायरल हुई और बाढ़ का पानी सिर्फ घरों तक नहीं पहुंचा बल्कि एक स्नेक ब्रीडिंग फॉर्म की चपेट इसमें दिखाई देती है। एक स्नेक ब्रीडिंग फॉर्म इसकी चपेट में आ गई। बताया जा रहा है कि वहां से करीब 900 सांप बाढ़ के पानी में एक साथ बहते हुए दिखाई दिए। और इसके बाद कई इलाकों में लोगों ने यह तस्वीरें देखी। इन तस्वीरों को मोबाइल में कैद किया गया। सड़कों पर, गलियों में, घरों के आसपास सिर्फ सांप दिखाई दे रहे थे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने लोगों की चिंता और परेशानी बढ़ा दी। देखिए मौसम वैज्ञानिक लगातार यह कह रहे हैं कि दुनिया का मौसम पहले जैसा नहीं है। अब बारिश का पैटर्न तेजी से बदल रहा है।
कई इलाकों में लंबे समय तक बारिश नहीं होती और फिर अचानक बहुत कम समय के लिए बहुत ज्यादा बारिश हो जाती है। यही वजह है कि एक जगह पर सूखा पड़ता है। दूसरी तरफ बाढ़ की स्थिति आ जाती है। भारत भी इस बदलते मौसम से अछूता नहीं है। कहीं पर हीट वेव है, कहीं पर बारिश बहुत ज्यादा होना, कहीं पर बादल फटना, कहीं पर फ्लैश फ्लड की स्थिति बन जाना और कभी लंबे समय तक सूखे की स्थिति में पहुंच जाना। पिछले कुछ सालों में ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। यानी मौसम अब पहले से कहीं ज्यादा अनिश्चित हो चुका है। जिसको प्रेडिक्ट करना आईएमडी के लिए भी आसान नहीं रहा है। आज की जो कहानी हमने आपके सामने रखी, स्थितियां जो आपके सामने रखी अलग-अलग जगहों की और सिर्फ देश की नहीं बल्कि विदेशों की भी यह दो हिस्सों में बंटी हुई तस्वीर दिखती है।
एक तरफ भारत का किसान है जो आसमान की तरफ देखकर सिर्फ यही गुहार लगा रहा है। भगवान से प्रार्थना कर रहा है कि समय पर बारिश हो जाए ताकि कम से कम उनकी मेहनत बच जाए। उसकी फसल बच जाए और उसके परिवार का भविष्य सुरक्षित हो जाए। अब दूसरी तरफ चीन और दूसरे देशों के लाखों लोग इस वक्त परेशान हैं और वह भी प्रार्थना कर रहे हैं कि बारिश रुक जाए ताकि उनकी जान बच जाए, उनका घर बच जाए और जिंदगी फिर से पटरी पर लौट आए। यानी एक ही बारिश कहीं पर उम्मीद बनती है, कहीं पर सबसे बड़ी मुसीबत बन जाती है।
फिलहाल मौसम विभाग की नजर लगातार मानसून पर बनी हुई है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भारत के सूखे वाले इलाके में अच्छी बारिश हो सकती है। जिन इलाकों में बाढ़ का खतरा है, वहां पर हालात जल्द सामान्य होंगे। l