ये वो दौर था जब राजेश खन्ना यानी काका का नाम ही फिल्म की सफलता की गारंटी माना जाता था। अरुणा ईरानी ने उनके साथ काम करते हुए इस स्टारडम को बिल्कुल करीब से देखा था।एक बार अरुणा ईरानी राजेश खन्ना के साथ शूटिंग कर रही थीं। तभी एक-दो नहीं, बल्कि करीब छह-सात निर्माता काका को अपनी फिल्म में साइन करने के लिए सेट पर पहुंच गए। मुश्किल ये थी कि राजेश खन्ना किसी को मना करके नाराज नहीं करना चाहते थे।काका ने सबको शाम को चेंबूर बुलाया।
जब सभी निर्माता वहां पहुंचे तो उन्होंने एक अनोखा रास्ता निकाला। राजेश खन्ना ने कहा कि किसी एक निर्माता का नाम चुनना मुश्किल है, इसलिए लॉटरी निकाली जाए।
सभी निर्माताओं के नाम पर्चियों पर लिखे गए और फिर एक पर्ची निकाली गई। संयोग से जिस निर्माता का नाम निकला, काका ने उनकी फिल्म करने की हामी भर दी।अरुणा ईरानी ने बताया कि वह खुद इस पूरे वाकये की गवाह थीं और काका का ऐसा स्टारडम देखकर हैरान रह गई थीं। सचमुच, उस दौर में राजेश खन्ना सिर्फ स्टार नहीं थे-वो अपने आप में एक दौर थे।