दे टेकिंग माय पेरेंट्स। सुनहरे पिंजरे के इन मजबूत कगारों पर नजरें टिकी रहती है बस बंद हुए द्वारों पर। इच्छा है कि नदियां चीर कर एक बार ना जाऊं और भीगे खेतों में बादलों का संगीत सुन पाऊं। गुमनाम गलियों में जाकर मैं खुलकर सांस लूं। अपने ही हाथों से अपनी जिंदगी का इतिहास लूं। यह सोने की जंजीरें मेरी रूह को बांधती है। यह हवाएं भी बस महल तक आकर मुझे झांकती है। क्या कभी मिलेगा मुझे वह अनंत आसमान का सुख या महलों की इन कैद में बीत जाएगा मेरा जीवन भर का दुख। कविता की यह पंक्तियां दुबई पर बिल्कुल सटीक बैठती है। उस दुबई पर जहां दुनिया भर से महिलाएं जाती है। ऊंची ऊंची मीनारों के साथ अपनी सेल्फी लेती है। लेकिन उन मीनारों में कुछ कैद भी है जो शायद कभी किसी ने झांक कर नहीं देखा। जिसके अंदर वहां की कितनी राजकुमारी हर रोज तड़प कर रह जाती है। नमस्कार मैं राजीव चौधरी। खाड़ी देशों खासकर दुबई के शाही परिवारों से कई राजकुमारियों ने अपनी आजादी के लिए भागने की कोशिश की। जिनमें सबसे चर्चित नाम राजकुमारी लतीफा और राजकुमारी शमशा का है। यह दोनों दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की बेटियां हैं। शमशा ने सबसे पहले साल 2000 में ब्रिटेन के सरे स्टेट से भागने की कोशिश की थी। लेकिन कैंब्रिज की एक सड़क से उनके पिता के कहने पर उनका अपहरण कर लिया गया।
उन्हें दुबई वापस लाया गया। इसके बाद लतीफा ने साल 2002 में सिर्फ 16 साल की आयु में ओमान की सीमा के रास्ते से भागने की कोशिश की। लेकिन वह भी पकड़ी गई। इसके बाद उन्होंने साल 2018 में एक और योजना बनाई और समुद्र के रास्ते एक नाव पर सवार होकर भाग निकली। लेकिन गोवा के करीब अंतरराष्ट्रीय जल में भारत और यूएई की संयुक्त कारवाही के दौरान उन्हें पकड़ लिया गया और वापस दुबई ले जाया गया। इन दोनों बहनों के अलावा शेख मोहम्मद की पूर्व पत्नी राजकुमारी हया बिंति अल हुसैन जो जॉर्डन की राजकुमारी भी है उन्हें भी अपनी जान के डर से दुबई छोड़कर ब्रिटेन में शरण लेनी पड़ी। हाल ही में एक और राजकुमारी मेहरा बिंत मोहम्मद ने भी सोशल मीडिया पर अपने पति से तलाक की घोषणा करके शाही परंपराओं को चुनौती दी। इन सभी मामलों ने खाड़ी देशों में महिलाओं की स्थिति और शाही परिवारों की कठोर नियमों पर पूरी दुनिया में सवाल खड़े किए हैं। जब यह कहानी घूम ही रही थी। अचानक दुबई से एक खबर आ गई। फिर से सबके जेहन में सवाल खड़े हो गए। दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मखतूम के भतीजे शेख सईद बिन मखतूम की पत्नी जैनब जाउद अली एक बार फिर से चर्चा में है। जिसे हाल ही में दुबई पुलिस ने उन्हें और उनकी तीन बेटियों को हिरासत में लिया है। दरअसल राजकुमारी लतीफा, राजकुमारी शमसा या हया बिन ताल हुसैन से अलग नहीं है। यह कहानी भी एक ऐसी लड़की की है जो कभी दुबई के शाही परिवार की बहू थी। जिसके ससुराल में करोड़ों की संपत्ति जहां सोने की चम्मच जहां हवा भी अमीर लगती है। लेकिन आज वही लड़की जेल में है और उसके साथ उनकी तीन छोटी-छोटी बेटियां भी। कारण सिर्फ इतना है कि उसे महल की कैद में घुटन होने लगी थी। उसने बचपन आजादी में जिया था। अगर ऐसा था तो सवाल उठते हैं आखिर जैनब कौन है? उसकी शादी दुबई के शासक के भतीजे से कैसे हुई? शादी के बाद फिर क्या हुआ? और आखिर उसे जेल क्यों जाना पड़ा? आप इस कहानी को शुरू से जाने तो शायद अच्छे से सब कुछ समझ आ जाए। अजर बैजान नाम का एक देश है। इसी देश में जैनब जाउदली का जन्म एक आम से परिवार में हुआ था।
मिडिल परिवार में। उनके पिता का नाम मोहम्मद जाऊद अली और मां का नाम फातिमा। जैनब वैसे तो बचपन में बहुत तेजतर्रार थी। समझदार और मेहनती थी। खेलों में बहुत रुचि थी। खासकर कलात्मक यानी जिम्नास्टिक में। जिम्नास्टिक में कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा भी लिया। पढ़ाई में भी वह अवबल थी। मतलब एक नंबर की पड़ाकू। अज़र बैजान से अमेरिका गई। एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से मार्केटिंग और बिजनेस की डिग्री हासिल की। जे ना वह लड़की थी जिसे हर कोई देखता था। खूबसूरत, पढ़ी लिखी, आत्मनिर्भर और अपने सपनों को पूरा करने वाली। सपना था कि वह अपने पैरों पर खड़ी हो। कोई बड़ी कंपनी चलाए, शायद अपना खुद का बिजनेस करे। लेकिन जिंदगी ने कुछ और ही लिखा हुआ था। अब कहानी में आता है शरीयत कानून और एक नाम शेख सईद बिन मकदूम। दुबई के शासक का भतीजा। यानी वह सीधे तौर पर दुबई के शाही खानदान से ताल्लुक रखता है। उनका परिवार दुबई पर राज करता है। उनके पास अपार, धन, शोहरत और ताकत है। अमेरिका में एक अंतरराष्ट्रीय मंच था। जैनब जादली इमाम महिलाओं के फ्रीडम की बात कर रही थी। उन्हें उनके सपने पूरे करने के लिए बता रही थी। वहां एक शख्स बैठा सुन रहा था। वह जैनब की बात तो कितनी सुन रहा था पता नहीं। पर वह जैनब की आवाज, उनकी खूबसूरती और उनके आत्मविश्वास को देख रहा था। यह शख्स था शेख सईद बिन मकतूम। कार्यक्रम संपन्न हुआ। शेख सईद बिन मकतूम जैनब के पास गया। उनकी स्पीच की सराहना की। अपना परिचय भी दिया। जैनब की सुंदरता की भी तारीफ की। जल्द ही दोनों में बातचीत शुरू हो गई। फिर दोस्ती हुई और फिर दोस्ती प्यार में बदल गई। फिर एक दिन शेख शहीद ने जैनब से शादी का प्रस्ताव रख दिया। जैनब के लिए एक परिकथा जैसा लगा।
एक आम लड़की दुबई के राजकुमार के साथ शाही परिवारों में शादियां इतनी आसान नहीं होती। पहले तो सब कुछ जांचा परखा जाता है। परिवार पृष्ठभूमि साख मजहब रीति रिवाज लेकिन प्यार में खोई जैनब भूल गई। जैनब जावद अली का परिवार मिडिल वर्क उनके पास शाही ठाट बाट नहीं। फिर भी जैनब ने अपने दिल की सुनी और निकाह के लिए हां कर दिया। निकाह भी बड़े धूमधाम से हुआ। जैनब अब शाही परिवार की बहू बन चुकी थी। उनके नाम के आगे शाही उपाधि लग गई थी। अब वह शेख जैनब कहलाने लगी। कुछ दिन तो सब कुछ ठीक रहा। धीरे-धीरे महल की बंदी से नकाब हिजाब सब कुछ जैनब का दम घोटने लगा। कहां एक आजाद ख्यालात की लड़की पढ़ी लिखी जो शान और शौकत के लिए गुलाम का जीवन जीने लगी थी। शाही महल में सब कुछ था। सोना चांदी हर एक चीज लेकिन आजादी नहीं थी। जैनब को अपनी पढ़ाई, अपनी नौकरी, अपने शौक सब कुछ छोड़ना पड़ा। दिखावे के लिए उसे उसके परिवार से दूर कर दिया गया। पुराने मित्रों, सहेलियों से उसका संबंध समाप्त कर दिया गया। अपने परिवार और दोस्तों से दूर कर दिया गया। एक नए देश में नए रीति-रिवाजों के बीच वह अकेली पड़ गई। साल दर साल के अंदर तीन लड़कियों की मां भी बन गई। पर इसके बाद उनके पति शेख शहीद का व्यवहार बदलने लगा। कुछ रिपोर्ट के अनुसार तो जैनब को शारीरिक और मानसिक रूप से तंग करना शुरू कर दिया गया। घर से बाहर निकलने नहीं दिया जाता था। उनके फोन पर नजर रखी जाने लगी। उनकी हर बात पर नियंत्रण होने लगा। अब जैनब समझ गई कि यह कोई परी कथा नहीं है। यह तो एक जेल है। सोने की जेल जिसकी दीवारों पर हीरे जवाहरात जड़े हैं। लेकिन उससे बाहर का आसमान देखने की इजाजत नहीं। फिर भी जैनब का पूरा संसार अब उनकी तीन बच्चियों में बस गया। सोचा कि शायद बच्चियां शेख शहीद का दिल बदल देगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालात और बिगड़ने लगे। जैनब को अपने और बच्चियों के लिए डर होने लगा। सोचने लगी। उनकी बेटी इस महल में जन्मी और इसी में दम तोड़ देगी। कई बार शेख शहीद से बात करने की कोशिश की।
परिवार वालों से गुहार लगाई लेकिन कोई नहीं सुनता था। फिर एक दिन फैसला किया यहां से निकलना होगा। अपनी बच्चियों को इस माहौल से बाहर निकालना होगा। महीनों का मानसिक युद्ध दिमाग में चलता रहा या कहो महीनों का मानसिक लड़ाई लड़ने के बाद एक दिन जैनब ने दुबई छोड़ने की कोशिश की। वह अपनी बेटियों को लेकर भाग निकली। पर दुबई के शाही परिवार के खिलाफ कोई नहीं जीत सकता। शेख सईद ने कानूनी कारवाई शुरू कर दी। आरोप लगाए कस्टडी और अपहरण के मामले दर्ज करवा दिए गए। जैनब कुछ समय के लिए किसी तरह बाहर निकलने में कामयाब रही। उन्होंने कई देशों से शरण मांगी लेकिन हर जगह वही हुआ क्योंकि दुबई का दबाव बहुत बड़ा था क्योंकि वहां के शासकों का कानूनी दबदबा है। अब दुबई के एक होटल में पुलिस ने छिपी जैनब को उनकी तीन बेटियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस का कहना है कि कस्टडी कानूनों का उल्लंघन किया। लेकिन जैनब के समर्थकों का कहना है कि यह उचित नहीं है। एक मां अपनी बेटियों को बचाने की कोशिश कर रही है और उसे जेल में डाल दिया गया। आज तीनों बेटियां अपनी मां के साथ हिरासत में है। छोटी-छोटी बच्चियां जो इस बात को भी नहीं समझती कि उन्होंने क्या अपराध किया है। सिर्फ इतना कि उन्होंने शाही परिवार में जन्म लिया। फिलहाल जैनब और उनकी तीनों बेटियां दुबई पुलिस की हिरासत में हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस मामले पर नजर रखे हुए हैं। लेकिन सच क्या है? यह तो सयद अदालत ही तय करेगी। राजकुमारी लतीफा राजकुमारी शमसा शेख मोहम्मद की पूर्व पत्नी राजकुमारी हया बिंति अल हुसैन राजकुमारी मेहरा बिंद मोहम्मद के बाद अब जैनब का भी नाम इस लिस्ट में जुड़ गया है। केवल दुबई ही नहीं सऊदी अरब में भी शाही परिवार की महिलाओं की कहानियां भी कम दर्दनाक नहीं है।
इसमें राजकुमारी मिसाल बिंति फैद का किस्सा सबसे चौंकाने वाला है। साल 1977 में एज 19 साल की इस राजकुमारी को व्याभचार के आरोप में सार्वजनिक रूप से गोली मारकर मार दिया था। दरअसल मिसाल को पढ़ाई के लिए लेबनान की राजधानी बेरूत भेजा गया था। जहां उन्हें एक युवक से प्यार हो गया। जब वे सऊदी अरब लौटी तो उन्होंने उस युवक के साथ भागने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने खुद को पुरुष के कपड़ों में छिपाया। लेकिन जिद्दा हवाई अड्डे पर पासपोर्ट जांच अधिकारी ने उन्हें पहचान लिया। वे पकड़ी गई। इसके बाद उन्हें और उनके प्रेमी को मौत की सजा सुनाई गई। इस घटना पर बनी ब्रिटिश डॉक्यूमेंट्री डेथ ऑफ प्रिंसेस ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था।
इसके अलावा राजकुमारी बस्मा बिन सऊद की कहानी भी काफी चर्चित है। वे सऊदी अरब के दूसरे शासक की बेटी है और मानवाधिकारों तथा संवैधानिक सुधारों के लिए आवाज उठाने के लिए जानी जाती है। साल 2018 के अंत में जब वे इलाज के लिए स्विट्जरलैंड जाने वाली थी तो उन्हें हवाई अड्डे पर रोक लिया गया। तब से वे लापता हो गई। बाद में पता चला कि उन्हें बिना किसी आरोप के नजरबंद कर दिया गया। खबरों के अनुसार तो उन्होंने Twitter पर राजा से अपनी रिहाई की गुहार भी लगाई थी। हालांकि बाद में वे ट्वीट्स हटा दिए गए। यह घटनाएं साफ दिखाती है कि खाड़ी देशों की तरह सऊदी अरब में भी शाही परिवार की महिलाओं की आजादी पर कड़ी पाबंदियां है। विद्रोह की कोशिश की भारी कीमत चुकानी पड़ती है। आसानी से कहा जा सकता है कि कैदी कैदी होता है। चाहे वह लोहे की सलाखों के पीछे हो या सोने के पिंजरों में।