बहुत दुख के साथ, बहुत पीड़ा के साथ और बहुत शर्म के साथ यह कह रहा हूं कि जो पार्टी करप्शन खत्म करने की कसम खाकर बनी थी वो पार्टी आज करप्ट और कॉम्प्रोमाइज्ड लोगों के हाथ में बुरी तरीके से फंस चुकी है। तो हम अपना करियर बनाने के लिए राजनीति में नहीं आए थे। हम लोग अपना करियर छोड़ के देश के लिए राजनीति में आए थे। इसलिए आज हम यह अनाउंस करते हैं। मैं यह अनाउंस करता हूं कि
मैं आम आदमी पार्टी से दूर जा रहा हूं और जनता के पास जा रहा हूं। क्या एक आंदोलन से निकली पार्टी अब अपने ही रास्ते से भटक गई है? यह वही आंदोलन है जिसने देश को नई राजनीति का सपना दिखाया था। आज उसी के नेता उस पर सवाल उठा रहे हैं। राघव चड्डा ने आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी ज्वाइन कर ली है और इस पर अन्ना हजारे ने जो कहा है वो अब देश की नई राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। अन्ना हजारे की बातें इसलिए भी जरूरी हो जाती हैं क्योंकि आम आदमी पार्टी का अस्तित्व उसी आंदोलन से जुड़ा हुआ है जो अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के विरोध में शुरू किया था और आपके संस्थापक अरविंद केजरीवाल खुद उसी आंदोलन से निकले नेता हैं जिन पर
अब उनके पार्टी के सभी दिग्गज भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं। नमस्कार मेरा नाम है रिचा पराशर और आप देख रहे हैं वन इंडिया हिंदी। दिल्ली की राजनीति में इस वक्त जो भूचाल आया है उसने सिर्फ एक पार्टी नहीं बल्कि पूरी राजनीतिक सोच पर बहस छेड़ दी है। आम आदमी पार्टी से राघव चड्डा समेत सात राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा और बीजेपी में उनका शामिल होना अब सिर्फ एक सियासी खबर नहीं रह गया है। यह उस आंदोलन की आत्मा पर सवाल बन चुका है जिसमें यह सभी नेता निकले हुए हैं। और अब इस बहस को और हवा दे दी है सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के बयान ने। अन्ना हजारे जिनके भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से ही आम आदमी पार्टी की नींव पड़ी।
उन्होंने साफ कहा है अगर पार्टी सही रास्ते पर चलती तो राघव चड्डा जैसे नेता उसे छोड़कर नहीं जाते। यही बयान अब राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल बन चुका है। क्या आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है? दरअसल राघव चड्डा ने पार्टी छोड़ते हुए खुद को गलत पार्टी में सही आदमी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस नैतिकता और जनहित की सोच के साथ पार्टी बनी थी अब वह रास्ता बदल चुकी है। उनके मुताबिक पार्टी अब देश हित से ज्यादा निजी हितों को प्राथमिकता देने लगी है। राघव चड्डा के साथ जिन नेताओं ने पार्टी छोड़ी उनमें स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रम साहनी और राजेंद्र गुप्ता जैसे बड़े-बड़े नाम भी शामिल हैं। हालांकि फिलहाल बीजेपी में आधिकारिक तौर पर तीन सांसद ही शामिल हुए हैं। लेकिन दावा किया जा रहा है कि कुल सात सांसदों ने पार्टी छोड़ दी है। यह घटनाक्रम आपके लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि राज्यसभा में उसके कुल 10 सांसद हैं। ऐसे में अगर सात सांसद अलग हो जाते हैं तो यह पार्टी की संसदीय ताकत पर सीधा
असर डाल सकती है। इस पूरे विवाद के बीच अन्ना हजारे का बयान बेहद अहम हो जाता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी राह चुनने का अधिकार है। लेकिन अगर नेता पार्टी छोड़ रहे हैं तो इसका मतलब है कि कहीं ना कहीं पार्टी में ही कुछ गड़बड़ जरूर है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वार्थ आ गया तो लोग समाज और देश को भूल जाते हैं और सत्ता और पैसे के पीछे भागने लगते हैं। यानी एक तरफ राघव चड्डा और उनके साथियों का आरोप है कि पार्टी अपने सिद्धांतों से भटक गई है तो दूसरी तरफ अन्ना हजारे का इशारा है कि समस्या सिर्फ पार्टी में नहीं बल्कि नेताओं की नियत में भी हो सकती है। आपको बता दें कि इससे पहले भी अन्ना हजारे अरविंद केजरीवाल के खिलाफ ऐसी बातें बोल चुके हैं। तो अब सवाल उठता है कि सच्चाई क्या है? क्या आप वाकई अपने मूल एजेंडे से दूर हो गई है
या फिर यह सिर्फ सत्ता की राजनीति का नया खेल है? कुल मिलाकर यह मामला सिर्फ एक पार्टी में टूट का नहीं है बल्कि उसकी विचारधारा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिसने कभी देश की राजनीति को बदलने का दावा किया था। आपको याद होगा जब अरविंद केजरीवाल भारत की राजनीति में आए थे, दिल्ली की राजनीति में आए थे तो उन्हें अनिल कपूर की पिक्चर एक फिल्म थी नायक उससे जोड़कर देखा जा रहा था। लेकिन अब एक-एक करके उनकी वो जो दीवार है वो गिरती जा रही है। टूट चुकी टूट चुकी है पार्टी। और अब आगे क्या-क्या होने वाला है ये तो आने वाला समय बताएगा। फिलहाल इस खबर में इतना ही, लेकिन पल-पल के अपडेट्स पर हमारी नजर बनी हुई है। देखते रहिए वन इंडिया। सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। डाउनलोड द वन इंडिया ऐप नाउ।