मिट्टी का जिस्म लेकर पानी के घर में हूं। मंजिल है मेरी और मैं लंबे सफर में हूं। सड़क किनारे जादू दिखाने वाला एक बच्चा हाथ में कुछ सिक्के, कुछ गेंदे और आंखों में बड़े सपने। शायद उसे भी नहीं पता था कि उसका यह सफर एक दिन देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों की नजरों तक पहुंच जाएगा। उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल से निकली है। लेकिन इसकी गूंज अब देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों तक पहुंच चुकी है। कहते हैं कि प्रतिभा किसी बड़े मंच की मोहताज नहीं होती और अगर हुनर सच्चा हो तो उसे पहचान वाले भी कहीं ना कहीं मिल ही जाते हैं। आज हम आपको एक ऐसे बच्चे की कहानी को दिखाने जा रहे हैं, बताने जा रहे हैं जो नैनीताल की सड़कों पर लोगों का मनोरंजन करता था।
कुछ सिक्कों, छोटी-छोटी गेंदों और एक जादुई छड़ी के सहारे लोगों को हैरान करता था। लेकिन शायद उसे खुद भी नहीं पता था कि एक दिन उसका यही हुनर देश के अरबपति उद्योगपति आनंद महिंद्रा की नजरों में आ जाएगा। जी हां, उत्तराखंड के नैनीताल की सड़कों पर जादू दिखाने वाले एक छोटे से बच्चे साहिल की किस्मत शायद अब बदलने वाली है।
वजह है देश के जानेमाने उद्योगपति आनंद महिंद्रा। सोशल मीडिया पर हमेशा नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए मशहूर आनंद महिंद्रा की नजर जब इस बच्चे के वीडियो पर पड़ी तो वह खुद को उसकी तारीफ करने से रोक नहीं पाई। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्ट्स पर साहिल का वीडियो शेयर किया और ऐसा संदेश लिखा जिसने पूरे देश का ध्यान इस बच्चे की तरफ खींच लिया। आनंद महिंद्रा ने लिखा क्या कोई मेरी उसके माता-पिता तक पहुंचने में मदद कर सकता है?
सिर्फ इतना ही नहीं उन्होंने आगे कहा कि वह इस बच्चे की पढ़ाई लिखाई और जादू में उसकी रुचि को आगे बढ़ाने में मदद करना चाहते हैं। अब सोचिए नैनीताल की सड़क पर अपना हुनर दिखाने वाला एक बच्चा और दूसरी तरफ देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों में से एक व्यक्ति इन दोनों को जोड़ने का काम किसने किया? एक छोटे से हुनर ने। उस जुनून ने जिसने साहिल को सड़क पर खड़े होकर भी बड़े-बड़े मंचों जैसा आत्मविश्वास दिया। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि साहिल के पास कोई महंगा जादुई सेट नहीं है।
ना कोई चमकदार मंच, ना कोई बड़ी टीम, बस एक छोटा सा बैग, एक कटोरा, कुछ लाल गेंदे, एक सिक्का और एक जादुई छड़ी। लेकिन जब वो अपने हाथों का कमाल दिखाता है तो देखने वाले दंग रह जाते हैं। लोग रुकते हैं, वीडियो बनाते हैं, तालियां बजाते हैं और कुछ पल के लिए उसकी जो दुनिया का हिस्सा है वो बन जाते हैं। शायद यही वजह है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो ने लाखों लोगों का दिल जीत लिया है। और जब यह वीडियो आनंद महिंद्रा तक पहुंचा तो उन्होंने सिर्फ इसकी तारीफ ही नहीं की बल्कि मदद का हाथ भी आगे बढ़ा दिया।
दरअसल आनंद महिंद्रा उन चुनिंदा लोगों में से हैं जो अक्सर सोशल मीडिया पर छिपी प्रतिभाओं को ढूंढकर उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं। इससे पहले भी कई ऐसे उदाहरण जो है वो सामने आए जब उन्होंने किसी कलाकार, खिलाड़ी, इनोवेटर या फिर जरूरतमंद प्रतिभा की मदद की।
लेकिन इस बार बात उत्तराखंड के एक बच्चे की। एक ऐसे बच्चे की जिसकी पहचान शायद उसके मोहल्ले या नैनीताल तक सीमित थी। लेकिन अब पूरा देश उसे जान रहा है। सोचिए अगर यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल ना होता, अगर किसी ने इसे रिकॉर्ड ना किया होता, अगर यह वीडियो आनंद महिंद्रा तक ना पहुंचता तो शायद साहिल आज भी उसी सड़क पर जादू दिखा रहा होता और दुनिया उसके हुनर से अनजान रहती। यही सोशल मीडिया की सबसे बड़ी ताकत भी है। यह किसी को रातोंरात स्टार बना सकता है और किसी छिपी हुई प्रतिभा को दुनिया के सामने ला सकता है। लेकिन यहां एक सवाल भी है। हमारे आसपास कितने साहिल हैं? कितने बच्चे हैं जिनके पास असाधारण प्रतिभा है लेकिन उन्हें मंच नहीं मिलता, मौका नहीं मिलता, संसाधन नहीं मिलते और धीरे-धीरे उनका हुनर भीड़ में कहीं खो जाता है।
साहिल की कहानी सिर्फ एक बच्चे की कहानी नहीं है। यह उन लाखों बच्चों की कहानी है जिनके सपने बड़े हैं, लेकिन साधन छोटे हैं। जिनकी आंखों में चमक है, लेकिन उन्हें पहचानने वाली नजरें कम है। और शायद यही वजह है कि आनंद महिंद्रा का यह कदम लोगों को इतना पसंद आ रहा है क्योंकि उन्होंने सिर्फ एक वीडियो को शेयर नहीं किया बल्कि उन्होंने एक उम्मीद जगाई है। एक संदेश दिया है कि प्रतिभा चाहे किसी भी गली, कस्बे या सड़क पर क्यों ना हो उसे मौका जरूर मिलना चाहिए। अब सबसे दिलचस्प बात यह कि सोशल मीडिया पर लोग भी साहिल को ढूंढने और उसके परिवार तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। लोग चाहते हैं कि यह बच्चा आगे बढ़े।
अच्छी शिक्षा उसे मिले। अपने जादू को और बेहतर वो बनाएं और एक दिन बड़े मंचों पर देश का नाम रोशन करें। क्योंकि अगर आज सड़क पर दिखाया गया यह जादू लोगों को हैरान कर सकता है तो सोचिए कि सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलने के बाद यह बच्चा क्या कर सकता है? तो यह कहानी हमें एक बहुत बड़ा सबक भी देती है। कभी किसी को उसके कपड़ों से मत आकिए। कभी किसी को उसकी आर्थिक स्थिति से मत आकिए। क्योंकि प्रतिभा का कोई धर्म नहीं होता। कोई जाति नहीं होती। कोई अमीरी गरीबी नहीं होती।
प्रतिभा सिर्फ प्रतिभा होती है और जब उसे पहचानने वाला मिल जाता है तो उसकी उड़ान आसमान से भी ऊंची हो जाती है। अब जाते-जाते आपसे भी कुछ सवाल। क्या आपको यहां पर लगता है कि देश में ऐसे हुनरमंद बच्चों को खोजने और आगे बढ़ाने के लिए कोई राष्ट्रीय व्यवस्था यहां होनी चाहिए? क्या सोशल मीडिया आज प्रतिभाओं के लिए सबसे बड़ा मंच बन चुका है? और क्या आपको लगता है कि साहिल जैसे बच्चों को सरकार और समाज दोनों की तरफ से एक विशेष यहां पर मदद मिलनी चाहिए?