Cli

वो सुपरस्टार अभिनेत्री जो हीरो से ज्यादा फीस लेती थी! निधन पर दी गई थी तोपों की सलामी?

Uncategorized

[संगीत] रही ना रही हूं [संगीत] दर्द हिंदी सिनेमा की एकदम डर और खूबसूरत अभिनेत्री जिनका बंगाली फिल्मों से लेकर बॉलीवुड में डंका बजना था [संगीत] जिन्हें ऑस्कर अपने वाले निर्देशक सत्यजीत रे से लेकर राज कपूर जैसे बड़े-बड़े डायरेक्टर अपनी फिल्मों में कास्ट करने के लिए बेताब रहते थे हिरनी जैसी आंखों वाली लड़की जो बंगाली ब्यूटी और बंगाल की मधुबाला के नाम से जानी जाति थी और आज भी कल खूबसूरती और रहस्य की मिसल के तोर पर याद की जाति है तब बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान देवी दुर्गा लक्ष्मी और सरस्वती की प्रतिमाओं के चेहरे के चेहरे की तरह बनाए जान लगे थे सांसों से कजराना बा जाए लेकिन क्या आप जानते हैं की जी दूर में हीरोइन को हीरो के आदि फीस भी नहीं मिला करती थी तब ये ज्यादातर मेल एक्टर्स से ज्यादा पैसे चार्ज किया करती थी अगर जनता को मुझे नफरत है तो मुझे हटाने के लिए उन्हें मुझे इजाजत नहीं लेनी पड़ेगी जनता कम और दोनों जानते हैं क्या आपको पता है की ये सिर्फ अपने उसूलों पर कम करती थी और दादा साहब फालके जैसा प्रतिष्ठित अवार्ड भी ठुकरा दिया था [संगीत] 15 साल की उम्र में इनका बाल विवाह कर दिया गया था जब यह 16 साल की थी तो बेटी का जन्म हो गया इसके बाद इन्होंने फिल्मों में कम रखा और फिर धूम मचा दी मैं सब कुछ जानती हूं तो कौन थी यह अभिनेत्री जिन्होंने सिर्फ एक फिल्म फ्लॉप होते ही अचानक इंडस्ट्री छोड़ दी और 36 साल तक खुद को एक कमरे में बैंड रखा और मरते दम तक दुनिया से छुपकर गुमनामी भारी जिंदगी को गले लगा लिया [संगीत] है ऐसे में कछु कहां बताएंगे और भी बहुत कुछ आप बने रहिए हमारे साथ [संगीत] [संगीत] नमस्कार दोस्तों मैं हूं श्वेता जय और आप देख रहे हैं फिल्मी बातें दोस्तों आज हम जी फिल्म में हस्ती की कहानी बयान कर रहे हैं वह हैं हिंदी और बांग्ला फिल्मों की दिग्गज अभिनेत्री सूची देश की सेवा के लिए आपकी दुकान चलने के लिए नहीं और छोड़ रही

हूं तो अपना घर बेसन के लिए एक दूर था जब सुचित्र सेन बांग्ला सिनेमा की टॉप एक्ट्रेस हुआ करती थी तो साथ ही इन्होंने हिंदी सिनेमा में भी अपनी दमदार अदाकारी से हर किसी को प्रभावित किया बेहद कम उम्र में शादी होने के बाद भी इन्होंने फिल्मों में शानदार करियर बनाया और दर्जनों ब्लॉकबस्टर फिल्मों का हिस्सा रहे ये सिर्फ प्यार है किसी को गली मार्कर खत्म करना आसन है लेकिन उससे प्यार और मोहब्बत कायम रखना मुश्किल होते हुए भी इंसान का फर्ज है की सुचित्र सेन विदेश में अवार्ड अपने वाली पहले भारतीय अभिनेत्री रहे फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ एक्ट्रेस के अवार्ड से सम्मानित किया गया [संगीत] और क्या था इनका फैमिली बैकग्राउंड सिक्स्थ अप्रैल 1931 को एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था तब इनका परिवार अविभाजित भारत के बंगाल प्रांत के पवन जिले में रहकर था ये भंग बड़ी गांव था लेकिन 1947 में आजादी के समय सुचित्र का परिवार पूर्वी पाकिस्तान से पश्चिम बंगाल ए गया जो बाद में बांग्लादेश बन गया था सुचित्र का असली नाम रोमा दास गुप्ता था लेकिन घर में इन्हें सब प्यार से कृष्णा कहकर बुलेट थे इनके पिता का नाम करुणा में दास गुप्ता था जो एक स्थानीय स्कूल में हेड मास्टर थे और मां का नाम इंदिरा सेन आठ भाई बहन थी

और तीन भाई और पांच बहनों में यह पांचवें नंबर पर आई थी सुचित्र सेन ने अपनी स्कूल की पढ़ाई पबन के गर्ल्स स्कूल से पुरी की लेकिन फिर शिफ्ट होने के साथ ही 1947 में परिवार ने कम उम्र में ही बेटी की शादी करवा दी एक तरह से बाल विवाह जो की तब आम हुआ करता था तब सुचित्र सेन की सिर्फ 15 साल की उम्र थी इनके हमसफर बने थे बेहद रईस खानदान के बिजनेसमैन शख्स दिवा नाथ सेन ये कोलकाता के जाने-माने उद्योगपति आदिनाथ सेन के बेटे थे शादी के 1 साल बाद यानी महल 16 साल की उम्र में सुचित्र ने एक बेटी मुनमुन सेन को जन्म दिया और घर गृहस्ती में ग गई लेकिन सुचित्र सेन का फिल्मों की तरफ बचपन से ही काफी झुकाव था ये एक्ट्रेस बन्ना चाहती थी पर शादी और बच्ची के जन्म से यह बेहद कम उम्र में ही भारी जिम्मेदारियां के बोझ तले डब गए लेकिन जब इनकी इस खाट को इनके पति और ससुर ने जाना तो इन्हें इनकरेज किया और अपना करियर और सपना पूरा करने की सलाह दी पश्चिम बंगाल में तब फिल्मों को कल के मंच के तोर पर देखा जाता था और इसमें कम करने वाले कलाकारों की भी हिंदी फिल्मों से ज्यादा इज्जत हुआ करती थी इसके बाद सुचित्र आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चली गई और समर विले कॉलेज ऑफ ऑक्सफोर्ड से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया भारत वापस आने के बाद पति दीवाना नहीं सुचित्र को फिल्मों में कम करने के लिए प्रोत्साहित किया सुचित्र ने साल 1952 में 21 साल की उम्र में पहले बंगाली फिल्म शेष कोठाई और फिर साथ नंबर कैदी में कम किया लेकिन ये दोनों ही फिल्में रिलीज नहीं हो पी इनकी तीसरी फिल्म साढे 74 सबसे पहले रिलीज हुई इस फिल्म में इनके अपोजिट हीरो थे सुपरस्टार एक्टर उत्तम कुमार जिनके साथ अगले 20 साल तक फिल्मों में सुचित्र की हिट जोड़ी रही [प्रशंसा] जाता है की सुचित्र ने अपने करियर में 61 में से लगभग 30 फिल्में उत्तम कुमार के साथ ही इन दोनों की जोड़ी पर बंगाल में दर्शन जान छिड़कते थे [संगीत] लेकिन फिलहाल आज के एपिसोड में हम इनकी बंगाली फिल्म नहीं बल्कि सिर्फ हिंदी फिल्मों की बात करेंगे जो की महक या साथ ही रही होगी लेकिन कमल की रही तो 1955 में फिल्म देवदास से इन्होंने हिंद सिनेमा में देबू किया [संगीत] जिसमें सुचित्र ने प्रो की भूमिका निभाई और उनके साथ थे

दिलीप कुमार वैजयंती माला और मोतीलाल [संगीत] तो यह नहीं तो मुझे ना लगी फिल्म सुपर डुपर हिट रही और इन सभी कलाकारों के करियर के लिए मिल का पत्थर साबित हुई पर मुझे कोई विश्वास नहीं मेरे माता-पिता मेरी मंगल कामना करते हैं उन्होंने जो किया है मेरी भलाई के लिए किया है सुंदरता छोड़ दो 1957 में इनकी दूसरी हिंदी फिल्म आई मुसाफिर जिससे ऋषिकेश मुखर्जी ने एक डायरेक्टर के तोर पर देबू किया था फिल्म में तीन अलग-अलग कहानी थी जिसमें सुचित्र लीड रोल में थी [संगीत] शकुंतला वर्मा के किरदार में सुचित्र सेन ने खुद को काफी अच्छी तरह से डाला था और खूब पसंद भी की गई चंपाकली जिसमें भारत भूषण प्राण और मुबारक की मुख्य भूमिकाएं थी [संगीत] लोगों की जुबान पर चढ़ गए चुप गया कोई रे मूर्ख पुकार के दर्द साल 1960 में सुचित्र सेन की दो फिल्में आई और दोनों में ही इनके साथ देव आनंद थे इनमें से एक फिल्म थी मुंबई का बाबू जो राज खोसला डायरेक्टेड एक बेहतरीन फिल्म साबित हुई सुन तो सुपरहिट हुई साथ ही इसके गाने भी खूब लोकप्रिय हुए दीवाना मस्ती जैसे कुछ बंगाली कलाकारों ने भी कम किया छोड़ के किसी की गली हम तो कहानी ना जा इस बीच सुचित्र बंगाली फिल्मों में भी लगातार कम करती रही और एक के बाद एक दर्जनों ब्लॉकबस्टर फिल्में देती रही छह साल बाद इनकी एक और हिंदी फिल्म आई 1966 में रिलीज बेहतरीन फिल्म ममता जिसमें इनके साथ अशोक कुमार और धर्मेंद्र ने कम किया था मेरा जिया ले ले सांवरिया [संगीत] सुचित्र सेन का किरदार जैसे हमेशा के लिए अमर हो गया केमिस्ट्री [संगीत] हो गए कहा जाता है की इस फिल्म में सुचित्र का रूल तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी से इंस्पायर था कहा गया की फिल्म की नायिका सुचित्र सेन का पूरा गैप इंदिरा जी से ही प्रेरित है सफेद कॉटन की साड़ी और आगे से सफेद बाल तो वही कांग्रेस ने भी यह दवा किया की इसमें इंदिरा गांधी के किरदार को गलत तरीके से पेस किया गया है ये विरोधियों की साजिश है और पार्टी इसका विरोध करेगी मैं सिर्फ इतना ही पूछना चाहूंगी अपने विरोधी भाइयों से की हम इलेक्शन लाड रहे हैं या जंग अगर यह जंग है स्मोकिंग और ड्रिंकिंग करते दिखाएं गया है जो की गलत छवि पेस करता है यह फिल्म फरवरी 1975 में रिलीज हुई थी और जुलाई 1975 में देश यह इमरजेंसी लागू हुई थी और फिल्म बन हो गई इमरजेंसी खत्म होने के बाद जब देश में सत्ता पलटी तब जाकर फिल्म को क्लीन चित मिली और ये फिर से थियेटरो में चल पी और फिर दर्शन इसे देखने के लिए वाकई टूट पड़े लेकिन इस पॉलीटिकल ड्रामा फिल्म में सुचित्र ने इतना जबरदस्त अभिनय किया था की इन्हें उसे साल सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए नॉमिनेट किया गया और खूब तारीफ फैमिली ठीक है ये क्या तरीका है जागने का जागने का नहीं

चीनी और मैं क्या करूं नजर नहीं आया और उन्होंने एक्सेप्ट नहीं किया लेकिन यह आदमी के बस में है की चाहे वो इंसान बने चाहे जानवर सुचित्र लगभग 25 साल तक अभिनय की दुनिया में शीर्ष पर कायम रहे और अपनी दमदार छवि बनाई 1978 में इनकी एक फिल्म आई प्रोमो पास इत्तेफाक से ये एक फ्लॉप फिल्म रही ये एक बंगाली फिल्म थी और इसके बाद सुचित्र को कुछ ऐसा आभास हुआ की ये अचानक फिल्म में छोड़कर गुमनामी में चली गई और सन्यास ले लिया ये एक झटका में लाइन लाइट से दूर हो गई थी इन्होंने खुद को एक छोटे से कमरे में बैंड कर लिया ये जमीन में चटाई पर सोई थी और यहां तक की बिना इनकी मर्जी के इनका परिवार भी इसे नहीं मिल सकता था यह बस एक बार पैदल बेलूर मठ जाति स्पॉट की गई थी बताते हैं की तब सुचित्र ने अध्यात्म की र पकड़ ली थी और अपना ज्यादातर समय रामकृष्ण मिशन में गुजरते लगी अब प्रेयर और मेडिटेशन इनके जिंदगी का हम हिस्सा बन गए हरि तब इनके तुलना स्वीडिश ग्रेट एक्ट्रेस ग्रेटर गर्दा से की गई जिन्होंने कामयाबी के शिखर पर पब्लिक लाइफ को छोड़कर एकांतवास को अपना लिया था इनकी पर्सनल लाइफ की बात करें तो इनके पति बाद में अमेरिका चले गए थे कुछ बंगाली अखबारों ने छाप की वो एक्ट्रेस पत्नी के साथ तालमेल नहीं बिठा का रहे थे साथ ही उन्हें हुए और शराब की लट थी जिससे पति पत्नी में मनमुटाव शुरू हो गया था तो साथ ही बेहद अमीर पति और बेहद शोहरत मंद पत्नी के हम भी टकराने लगे थे और फिर दीवाना सेन पत्नी और बेटी को छोड़कर विदेश जा बेस सुचित्र सेन तब बहुत दुखी हुई और साथ में अमेरिका के मैरीलैंड के बाल्टी मोर में एक हादसे में उनकी मौत हो गई तब सुचित्र का सर गुस्सा कफ और हो गया और यह लंबे वक्त तक अफसोस में रहे [संगीत] कम पर चलते हुए बंगाली फिल्मों के साथ हिंदी फिल्मों में भी नजर आई और एक अभिनेत्री के तोर पर अपनी पहचान बनाई जो मिली तो फूल के [संगीत] हिले तो आगे चलकर मुनमुन सेन की दोनों बेटियों ने भी फिल्मों में ही करियर बनाया ये है राइमा सेन और रिया सेन जो बेहद ग्लैमरस और टैलेंटेड एक्ट्रेस के तोर पर जानी जाति हैं [संगीत] कहा जाता है

की सुचित्र फिल्मों का चयन करने में कोई ढलाई नहीं बरकाती थी बड़ा सोच विचार करने के बाद ही यह फिल्मों का सिलेक्शन करती थी जी वजह से इन्हें कई बड़े फिल्मकारों के फिल्म प्रस्ताव ठुकराने भी पड़े इनके द्वारा फिल्म ठुकराने के कई किस काफी मशहूर हैं बताते हैं की इन्होंने राज कपूर की एक फिल्म को इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि राज कपूर द्वारा झुक कर फूल देने का तरीका इन्हें पसंद नहीं आया था तो वहीं दिग्गज फिल्म मकर सत्यजीत रे की फिल्म का ऑफर भी सुचित्र ने यह कहकर ठुकरा दिया था की इनके पास डेट्स नहीं है इनके कम को मिले सम्मानों की बात करें तो बंगाली फिल्मों में कम के लिए इन्होंने दर्जनों अवार्ड हासिल किया साथ ही मास्को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में मिले बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड के अलावा इन्हें साल 1972 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से नवाज गया साल 2012 में पश्चिम बंगाल सरकार के सर्वोच्च पुरस्कार टांगों विभूषण से सम्मानित किया गया सुनकर सब हैरान र गए थे दरअसल सुचित्र सेन को इनके शानदार अभिनय के लिए दादा साहब फालके अवार्ड देने की घोषणा हुई और इसे लेने के लिए आमंत्रित किया गया ये सम्मान समारोह हमेशा की तरह दिल्ली में होना था लेकिन सुचित्र ने यह पुरस्कार लेने से माना कर दिया उन्होंने कहा की मैंने अपने दर्शकों से कहा था की अब मैं कभी भी फिर से लाईमलाईट में नहीं आऊंगी इसलिए ऐसा संभव नहीं है अगर आप ये पुरस्कार मुझे देना ही चाहते हैं तो घर आकर दे दीजिए और इस तरह सुचित्र ने इतने बड़े अवार्ड को लेने में कोई दिलचस्प नहीं दिखाई जिसकी इंडस्ट्री में खूब चर्चा रही किसी ने इन्हें घमंडी कहा तो किसी ने बेवकूफ कानून देवी के बाद बंगाली सिनेमा की कोई भी दूसरे एक्ट्रेस हिंदी फिल्मों में सुचित्र की तरह नाम हासिल नहीं कर पी ब्लैक और व्हाइट फिल्मों के युग में सुचित्र फिर जबरदस्त अभिनय इन्हें दर्शकों के दिलों की रानी बना दिया बांग्ला फिल्मों से हिंदी सिनेमा में आने वाली सुचित्र ने मुख्य रूप से बांग्ला फिल्मों में ही कम किया और बंगाल की ही होकर रही हिंदी फिल्मों में इन्होंने बहुत कम कम किया लेकिन जितना भी किया यादगार किया सुचित्र सेन डायबिटीज की बीमारी से पीड़ित हो गई थी बाद में जब ये ज्यादा बीमा हो गई तो कुछ समय कोलकाता के एक हॉस्पिटल में ही इनका इलाज चला और 17th जनवरी 2014 को 82 साल की उम्र में हार्ट अटैक से सुचित्र सेन का निधन हो गया इनके निधन की खबर से पूरा देश दुखी था इनके कद का अंदाज़ आप इसी से लगा सकते हैं की तब भारत के तत्कालीन प्रेसिडेंट प्रणब मुखर्जी तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना और बीजेपी के प्राइम मिनिस्ट्रियल कैंडिडेट नरेंद्र मोदी सहित सैकड़ो बड़े पॉलीटिशियंस ने इनके निधन पर शोक जाहिर किया था साथ ही वेस्ट बंगाल की के मिनिस्टर ममता बनर्जी ने क्रीमेशन से पहले गम सलूट से सुचित्र सेन को आखरी सलाह सेन हमारे बीच नहीं है लेकिन इनके चने वालों के दिलों में यह हमेशा जिंदा रहेंगे मेहता का रे हिंदी और बांग्ला दर्शन जब भी इनकी बेहतरीन फिल्में देखेंगे इनके अभिनय क्षमता और खूबसूरती के चर्चा जरूर करेंगे ऐसे कलाकारों ने ही अंतरराष्ट्रीय पाताल पर हमारे सिनेमा को मजबूत पहचानती है भारतीय सिनेमा में इनके अमूल्य योगदान को हमेशा याद किया जाएगा और इनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा [संगीत] [संगीत]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *