दिल जलों का दिल जला के क्या मिलेगा दिलबा असल में दिलजला तो वो था जिस पर यह दिलरुबा डोरे डाल रही थी। तब फिल्म इंडस्ट्री में सिड एक्ट्रेस वैंप और कैबे डांसर जैसी तमाम उपमाओं और किरदारों से मशहूर हो चुकी ये नायिका उस दौर के दर्शक ही नहीं फिल्म प्रोड्यूसर्स का भी क्रश हुआ करती थी।
मेरी प्यारी बिंदु मेरी भोली री बिंदु लेकिन खुद इसे जिस पर क्रश होता वो किसी और की बाहों में चला जाता। नाम की जान से जिस्म कीजगी बात साल 1972 की है जब बिंदु अमिताभ बच्चन की तीन-चार फिल्मों में सपोर्टिंग एक्ट्रेस के तौर पर काम कर रही थी। बीते करीब 10 1 साल में लीड एक्ट्रेस होना तो नसीब नहीं हुआ लेकिन वह अपनी तरह के खास किरदारों में कुछ इस कदर फिट और हिट हो चली थी कि कईयों को फिल्में उनके बगैर अधूरी लगती।
अमिताभ बच्चन की तब तक लगातार करीब 10 फिल्में फ्लॉप हो चली थी और अब बड़ी हीरोइनें उनके नाम से ही फिल्म छोड़ भाग जाया करती थी। यह बात बिंदु को पता थी और वह इस मायने में अमिताभ को अपने लेवल पर देख रही थी और उसे लग रहा था कि जैसे उसके भीतर का लीड हीरोइन बनने का सपना आइटम डांसर और बैंप से समझौता कर चुका है। जल्द ही लंबा हैंडसम मासूम सा दिखने वाला एक्टर भी सपोर्टिंग रोल में आ जाएगा। ऐसे में वह उससे बेतक्लुफ बातें करती। कई बार उसकी उदासी को सहलाती और मजे भी लेती।
वो जानती थी कि अमिताभ लगातार नाकामी से इस कदर मायूस है कि फिल्में दुनिया छोड़ कर जाने का प्लान बना चुका है। लेकिन उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि ये फिल्म उस नाकामी और नाउदी की जंजीर तोड़ने वाली है। और इस दौर में जब अमिताभ बच्चन के साथ एक आउटडोर शूटिंग से लौटते हुए उसने पान खाकर गाड़ी के बाहर थूका, तो पीक पीछे बैठे अमिताभ बच्चन की शर्ट पर फैल गया। जैसे मैंने थूका तो पूरे छींटे अमिताभ जी के शर्ट्स पे जाके गिरे सारे तो इतनी शर्म आई मैंने सॉरी सॉरी सॉरी बोला अरे कोई बात नहीं कोई बात नहीं तो अमिताभ ने तब कुछ नहीं कहा और कहने की हालत में भी नहीं थे क्योंकि फिल्म में उनकी हालत जो भी हो सिड एक्ट्रेस उनकी लीड एक्ट्रेस से कहीं ज्यादा डिमांडिंग और मशहूर थी और उस पर फिल्मकारों की मेहरबानी भी कुछ ज्यादा ही रहती थी।
आज भी बिंदु को यह थूकने वाली बात सिर्फ इसलिए याद है कि उसने अनजाने में ही एक ऐसे शख्स पर थूका था जिसकी किस्मत हवा के झोंके के साथ बदलने वाली थी। और जब फिल्मी हवा ने रुख बदला तो बिंदु का चेहरा हमेशा के लिए शर्म से लाल कर गया। जंजीर सुपरहिट क्या हुई अमिताभ रातोंरात एक स्ट्रगलर से स्टार बन गए। जबकि बिंदु के लिए सितारे तो बदलते रहे। उनका अपना सितारा अभी सितारे से मिलने तक को मोहताज हो गया। मेहरबान खुद जंजीर के विलेन अजीत ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अमिताभ के प्रोफाइल को देखते हुए उन्हें लगता था कि उनका स्क्रीन राइवल तो प्राण साहब का किरदार है और अगर मैं उनसे पार पा लूं तो यह मेरी अपनी फेस वैल्यू वाली फिल्म हो जाएगी। फिल्म की लेखक जोड़ी सलीम जावेद उन दिनों नए तेवर और नए कलेवर के साथ कहानियां लिखती थी और वह पूरी स्क्रिप्ट कभी किसी प्रोड्यूसर डायरेक्टर को नहीं देते बल्कि उनकी माने तो वो पूरी स्क्रिप्ट लिखते ही नहीं थे एक बार में उतनी ही स्क्रिप्ट डायरेक्टर को देते जितने में हफ्ते 10 दिन की शूटिंग पूरी हो सके।
ऐसे में कोस्टार्स को तो भनक ही नहीं लगती कि कहानी क्या मोड़ लेने जा रही है और उनके किरदार का आखिरकार क्या हास्य होने वाला है। अजीत भी तब ऐसे ही कुछ गफलत में जी रहे थे और तब बिंदु को भी लग रहा था कि फिल्म में उनका रोल जया भादुड़ी से कहीं ज्यादा एक्सप्रेसिव होने वाला है। और इस एक्टर पर तो वो हर सीन में हावी होने की कोशिश कर रही थी। जनों का दिल जला के क्या मिलेगा? उन्हीं दिनों ऋषिकेश मुखर्जी अमिताभ और जया को लेकर एक अलग ही तरह की फैमिली मेलो ड्रामा बना रहे थे। अभिमान और बिंदु की मानें तो पहली बार किसी ने उन्हें थोड़ा डिसेंट रोल दिया था। हालांकि था वो भी सीड्यूजिंग ही लेकिन फिल्म साफ सुथरी म्यूजिक अपील वाली थी। यह फिल्म जंजीर के बाद आई लेकिन उससे पहले आई जंजीर अभी बॉक्स ऑफिस पर अपना रंग दिखा रही थी और उसके सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन में भी बिंदु को यह एहसास नहीं हुआ कि अमिताभ के सितारे कुछ इस कदर बुलंद होने जा रहे हैं कि एक आध साल में ही वह तब के सुपरस्टार राजेश खन्ना का सुपरस्टारडम अपने नाम कर लेंगे। इस दौरान उनकी एक और फिल्म गहरी चाल फ्लॉप हो गई थी।
इसके बावजूद कि इसमें जितेंद्र और हेमा जैसे एस्टैब्लिश चेहरे थे और जितेंद्र को तो अमिताभ से कई गुना ज्यादा फीस दी गई और यह जितेंद्र का स्टारडम ही था कि बिंदु को जंजीर के हिट होने की खुशी से ज्यादा गहरी चाल के फ्लॉप होने का दुख था। तब वह अमिताभ संग इस आइटम सॉन्ग के मुकाबले जितेंद्र संग अपने इस एक्ट के कसीदे पढ़े जाने के सपने देख रही थी। कितनी लागत हीरे हैं आपके पास? कैलाश तो फिर कल रात को हीरा लेकर आप मेरे पंगले पर आ जाएंगे। खैर जंजीर के बाद जैसे-जैसे दीवार, शोले जैसी फिल्मों ने अमिताभ की किस्मत और स्टारडम के पैमाने बदले, यही बिंदु इस गाने को लेकर इतनी ऑब्सेस्ड थी कि अब इसे वो अपनी लाइफटाइम आर्काइव में शुमार कर चुकी हैं। मेहरबानी फिल्म बेशर्म असल में शुरू तो साल 72 में ही हो गई। लेकिन बाद में कई वजहों से लटकती चली गई और करीब 5- 6 साल की देरी से 1978 में रिलीज हुई। उस साल ये अमिताभ बच्चन की छह फिल्मों में से एकमात्र फ्लॉप थी और चार फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस को ऐसे हिलाया कि अब बिंदु के लिए गाना ही सबसे बड़ी पूंजी हो गया। की ये जवानी जवानी तब उन्होंने एक स्ट्रगलर अमिताभ संग ये गाना शूट किया था कि उनकी पान की पीक को भी अपनी शर्ट पर ऐसे सोख गया था जैसे कोई अपमान का घूंट पी जाता है।
लेकिन जब ये फिल्म 5- 6 साल की देरी से पर्दे पर आई तो दुनिया बिंदु को सुपरस्टार अमिताभ बच्चन संग एक्ट करते देख रही थी। मेहरबानी और तब बिंदु के लिए एक छोटा सा गाना ही बड़ी उपलब्धि बन गया था। खैर बिंदु को अमिताभ संग छिटपुट अपीयरेंस आगे भी मिले। लेकिन आज जब वो किसी इंटरव्यू में पुरानी यादें ताजा करती हैं तो उन पुरानी फिल्मों के एक-एक फ्रेम को रिवाइंड करने की कोशिश करती हैं जिनमें वो अमिताभ बच्चन संग को एक्टर थी। और दोस्तों, यह कहानी केवल बिंदु की नहीं है। पहले भी आपको बता चुका हूं कि उस दौर की तमाम छोटी बड़ी हीरोइनें जिन्होंने अमिताभ बच्चन को तब कोई भाव नहीं दिया था। या तो उनके साथ एक-एक फिल्म को तरस गई या फिर पुरानी फ्लॉप फिल्मों को ही यादों में ऐसे संजो कर रखा जैसे वो उनकी लाइफ टाइम अचीवमेंट हो।