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अमिताभ की ‘ज़िद’ या कोई गहरा राज़? क्यों कभी अपने गाँव नहीं गए ‘बिग बी’?

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अमिताभ बच्चन का घर आपने देखा है? जी हां, पैतृक निवास डीह है। डीह ना एक छत है, ना एक खपरेल का कोई टुकड़ा है, बस बची है मिट्टी और वहां पैदा हुए थे उनके पिता हरिवंश राय बच्चन जिन्होंने तमाम बड़ी-बड़ी रचनाओं का संपादन किया। अमिताभ बच्चन तो अपने घर पर नहीं गए। अब अंतिम पड़ाव है जीवन का। मैंने भी अनुरोध किया कि अमिताभ बच्चन जी अपने घर जाइए और म्थ टेक लीजिए। लोगों को पता है कि अमिताभ बच्चन का घर प्रयागराज इलाहाबाद में है। लेकिन ऐसा नहीं है दोस्त। अमिताभ बच्चन मूल रूप से प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं। प्रतापगढ़ में कौन सा उनका गांव है? और अमिताभ बच्चन क्यों नहीं गए अपने गांव? जबकि जया बच्चन अपने ससुराल चली गई थी। अमिताभ बच्चन को गांव वाले कहते हैं एक बार आजा आजा आजा आजा आजा। दीदार को तरसे अंखियां। तो आइए वैसे तो कई मिलियन में यह वीडियो गया है। प्रतापगढ़ में अमिताभ बच्चन का वह गांव कैसा है? और अमिताभ बच्चन आज तक क्यों नहीं गए अपने पिताजी के पैतृक निवास पर? दर्द नहीं होता है क्या अमिताभ बच्चन को? अमिताभ बच्चन इस जिद में क्यों हैं? क्या अगले जन्म में जाएंगे अपने घर? तो देखिए दोस्तों यह वीडियो और आपके कमेंट आदरपूक आमंत्रित किए जाते हैं। दोस्तों इस समय हम पहुंच गए हैं प्रतापगढ़ जनपद के बाबू पट्टी गांव में जो अमिताभ बच्चन का गांव है। उनका गांव नहीं घर पहुंच गया हूं। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का यह गांव है जहां डॉ. हरिवंश राय बच्चन पैदा हुए थे और उनके नाम पर यह पुस्तकालय बना है। लोग जानना चाहते हैं घर कैसा है? जलसा घर तो बहुत लोगों ने देखा होगा फिल्मों में जुहू वाले पते पर आप जाएंगे तो देख लेंगे लेकिन यह उनका डी है डी माने घर डी माने पुरखों का घर यही डी है और यहां कभी आई थी जया बच्चन तो गांव वालों ने आरती उतारा था महिलाओं ने आरती लेकर के जिस तरह से देवी दुर्गा और भवानी की आरती की जाती है वैसे ही आरती किया था अमर सिंह साथ में थे [नाक से की जाने वाली आवाज़]

और कब आए थे इसको भी बता बताता हूं गांव वाले क्या कहते हैं इसको भी आप सुनिए और जिस लाइब्रेरी की स्थापना की गई थी डॉ हरिवंश राय बच्चन जिसे सरस्वती सम्मान से लेकर के कई दर्जन बड़े-बड़े सम्मान देश विदेश के सम्मान उनकी झोली में गए पद्म पुरस्कारों से भी उन्हें नवाजा गया। हम इसके बारे में आपको दिखाएंगे। दोस्तों गांव के लोग भी जुट गए हैं। प्रधान जी भी आ गए हैं और गांव के अन्य भी युवा आ गए हैं। दोस्तों मैं यहां आया कैसे? बताते चले विकास खंड कौन सा है? गौरा गौरा और तहसील रानीगंज। रानीगंज जिला मुख्यालय से दूरी लगभग 25-30 कि.मी. होगी। जी। अच्छा। शुभ नाम आपका? भाई लाल। भाईाल आप तो फिल्मों में देखे होंगे उनको ना? हां। ऐसे नहीं देख पाए। देखने की इच्छा है ना? जी हां। हां। उनकी फिल्म देखे हैं। आए नहीं कभी कभी नहीं। झलक आजा दीदार को तरसे अंखियां एक बार आजा आजा आजा आजा आजा। भैया ये किस फिल्म का गीत है? कोई बताएगा इसमें से? अक्सर। ये अक्सर फिल्म का गाना है। अक्सर फिल्म का फिल्मों में बड़ी अभिरुचि लेते हैं? जी देखते हैं। इनकी फिल्म देखते हैं? हां, इनकी भी देखते हैं। ऐसे देखने की इच्छा कभी पूरी अब नहीं देखने का मन करता है क्योंकि वो अपने पैतृतक गांव आ ही नहीं रहे हैं। तो क्या मतलब? अब देखने की इच्छा नहीं देखना है। देखना है। दोस्तों हम बताते हैं आपसे आपका यहीं अगल-बगल घर है। नहीं मेरा प्रतापगढ़। अच्छा ये लोग हमको देखते थे। जी। और मैं जब आया हूं तो पहचान गए हैं। जी जी। आपको माघ मेले में हमने देखा था। माघ मेले में आपने भी देखा था? जी सर। क्या नाम है आपका? सूरज भट्ट सूरज भट्ट और आपका नाम निखिल पांडे निखिल पांडे और आपका मैं ऋषभ द्विवेदी हूं बेसिकली यहीं पैतृक गांव बाबू पट्टी से हूं और सर का मैं लगभग दो साल से सब्सक्राइबर हूं और इन्होंने बहुत अच्छे सोशल इवेंट पे काम किया तो उसी से आज कोइंसिडेंटली इनको देखा तो बड़ा शौक रह गया कि हमारे गांव बाबू पट्टी में सर आए हैं तो हमने कहा कि चलिए मुलाकात करते हैं। थैंक यू ब्रज भूषण अपने कभी-कभी अपने नाम की भी शाबाशी देनी चाहिए। अपने नाम की शाबाशी अगर कोई नहीं जिंदाबाद करेगा तो अपने नाम का जिंदाबाद कर लेना है। आपने ऐसा काम ही किया है कि सर नहीं ना नहीं ना नहीं ना नहीं ना नहीं ना नहीं ना नहीं ना नहीं ना नहीं ना नहीं ना नहीं ना नहीं नहीं नहीं अपने नाम का अपने नाम का कि शाबाश शाबाश ऋषभ अपना ही कह देना है कोई कहे ना कहे यह भी एक तरीका है उठाया है हम लोगों के गांव तो देखिए इन लोगों ने तो हमें नहीं बुलाया था लेकिन कई लोगों का आया और अब हम भीतर चलते हैं लाइब्रेरी में दिखाते हैं इसके पहले हम दिखाते हैं कि कब इसका शिलान्यास किया गया था

यह है सांसद निधि योजना अंतर्गत निर्माणाधीन बाबू पट्टी प्रतापगढ़ डॉ हरिवंश राय बच्चन के स्मृति में पुस्तकालय का शिलान्यास माननीय राम प्यारे सिंह पर्यटन मंत्री उत्तर प्रदेश शासन के कम कर कर कमलों द्वारा 17 फरवरी 2004 को संपन्न हुआ। अध्यक्षता सांसद मछली सर ने किया और यह यह लोग हैं जिलाधिकारी आर एस वर्मा और मुरलीधर दुबे मुख्य विकास अधिकारी। अब चलिए लोकार्पण कब हुआ? बहुत से योजनाओं का और भवन का शिलान्यास हो जाता है। लोकार्पण नहीं होता है। लेकिन यह लोकार्पण भी हो गया और देखिए आप ₹22 लाख की लागत से 5 मार्च 2006 को संपन्न हुआ सीएन सिंह पूर्व सांसद मछली शहर यह स्वागताध्यक्ष है और यह श्रीमती जया बच्चन जया बच्चन ने इसका किया था। लोकार्पण किया था। अमर सिंह जी आए थे। अमर सिंह अब अमर सिंह बिचारे अमर नहीं रह पाए। अब नहीं है। उनको श्रद्धांजलि विनम्र श्रद्धा श्रद्धांजलि देता हूं। अब भीतर चलने से पहले भीतर का का दृश्य आपको देखने लायक होगा। लेकिन अमिताभ बच्चन आएंगे कब? सवाल इस बात का खड़ा होता है। [नाक से की जाने वाली आवाज़] जब कुली फिल्म के दौरान उन्हें चोट लगी थी तो गांव वालों ने यहां यज्ञ किया था। यहां गांव वालों ने लगातार पूजा पाठ किया था। जहां पूजा पाठ किया था वो अभी उनके पिता और उनके दादाजी का यह पूजा स्थल है उसे भी दिखाता हूं। यही किया था और इस कुएं से पानी निकाल करके किया था। यह कुआं भी बाट जो रहा है। कुएं हमारे दैव स्वरूप हैं। कुएं पर दीपावली मनाई जाती है। कुएं से लोग पानी पीते थे। लेकिन कुआं भी जीर्णशील अवस्था में है। काफी पुराना था। पट गया है। कुओं को पाटा नहीं जा सकता। यह जल स्रोत सर्वोच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण विनिश्चय है। हिंचलाल तिवारी बनाम कमला देवी अन्य के मामले में अभी निर्धारित किया गया है कि जल स्रोतों को पाटा नहीं जा सकता। यह देखिए स्वर्गीय डॉ. हरिवंश राय बच्चन की स्मृति में जीर्णोद्धार सौजन्य से पंकज शुक्ला ग्राम प्रधान बाबू पट्टी। यह जीर्णोद्धार के समय का है। उसके पहले यह नहीं रहा होगा। लेकिन जीर्णोद्धार भी हुआ तो अब सब भी काम खत्म हो गया और इसमें कोई घिर नहीं लगाई गई थी कि कोई पानी निकले और अगर घिररी लगेगी भी तो पानी निकालेगा कौन क्योंकि लोग सुविधा भोगी हो गए ये स्थान इसको क्या बोलते हैं प्रधान जी चौरा देवी है सर अच्छा आपका शुभ नाम राजदेव सरोज राजदेव सरोज तो आप प्रधान है

कि नहीं हमारी पत्नी है सर अच्छा आपकी पत्नी है क्या नाम है उनका कलावती देवी कलावती देवी कन्या कलावती आपने सत्यनारायण भगवान की कथा में कलावती देवी का नाम सुना होगा आप सुने हैं कि नहीं जी सर कन्या कलावती और साधु बनिया और पंडित जी तो मान लीजिए तो इस तरह से था तो प्रधान जी प्रधान जी के प्रधान हैं प्रधान जी के प्रधान हैं सही बात है ना तो प्रधान जी कभी निकलती विकलती है मीटिंग में सही है जी पता नहीं मुझे नहीं पता है क्योंकि मैं भी जनप्रतिनिधि रहा हूं जस्ट ब्लॉक प्रमुख जिला पंचायत का मेंबर और ये सब तो प्रचलन में रहा है एक गांव में मैंने पूछा भैया प्रधान जी को कोई देखा है तो पूरा गांव चुप एक आदमी ने कहा हां देखा है कहां देखे हो घास कर रही थी प्रधान से पहले दो महीना पहले प्रधान जी हो जाएंगे तो घास क्यों करेंगी आइए प्रधान जी तो यह है शीतला मां का मंदिर प्रधान जी का कार्यकाल अब समाप्त हो रहा है नया चुनाव होगा और यह तुलसी के बिरवे कुछ लगा दिए गए हैं और इस स्थान पर लोगों ने पूजा पाठ किया था जब अमिताभ को कोरोना हो गया था अभी तो लगातार जैसे ही आप कोई फोन मिलाएंगे भैया आ जाएंगे और बताएंगे जब तक दवाई नहीं तब तक ढिलाई नहीं तो अमिताभ बच्चन के लिए पूजा पाठ उस समय भी हुआ था। प्रधान जी हुआ था। जी सर जी सही बात है। जी जी अच्छा आइए शुभ नाम आपका? ऋषभ द्विवेदी नाम है मेरा। ऋषभ तो ऋषभ पूजा पाठ हुआ था कि हमारे गांव का जो लाल है जी जी। अच्छा भूरी आंखों वाली उनकी एक बहू है। उनको देखा है कि नहीं? ऐश्वर्या। चलिए उन्हीं को नहीं देखा उनको। फिल्म देखा है। तो ऐश्वर्या को लोग देखना चाहते हैं। बहू आई थी इस गांव में। आइए हम लाइब्रेरी की तरफ चलते हैं। क्या नाम है भैया आपका? आइए। बताइए ना मोहनचंद्र रामचंद्र रामचंद्र कह गए सिया से एक दिन सदी का महानायक आएगा और कब आएगा और गांव को जगाएगा गांव का विकास कराएगा और दीदार को तरसे अखिया झलक दिखला जा अमिताभ बच्चन जी हमने एक बार आपके खिलाफ एक मुकदमा किया था आपने एक प्रचार किया था यूपी में दम है क्योंकि जुर्म यहां कम है जुर्म देश में कहां-कहां है कौन ऊपर कौन नीचे है यह केंद्र रिपोर्ट यह कहती है यूपी बहुतों से पीछे है। यूपी में दम है क्योंकि जुर्म हकम है।

उस समय ब्रांड एंबेसडर हुआ करते थे आप मुलायम सिंह के गवर्नमेंट में और जया बच्चन जी फिल्म विकास परिषद में थी और अमर सिंह जी विकास परिषद के अध्यक्ष हुआ करते थे। तो हमने आरटीआई लगाया। अमिताभ के अधिवक्ता प्रदीप राय के तरफ से आया कि अमिताभ ने कोई लाभ नहीं लिया है। इसलिए आरटीआई उन पर अधिरोपित नहीं होता है। तो हमने कहा अगर डॉक्टर पेट फाड़ दे और फाड़ करके उसी में उसमें कॉटन छोड़ दे, कैंची छोड़ दे तो उसकी जिम्मेदारी कम नहीं होगी। तो कैसे आपने कहा? बहरहाल यह लड़ते-लड़ते सुप्रीम कोर्ट तक मामला गया।कि कैमरे के सामने बोल रहा हूं। सच में लड़ाई हुई है दमदारी से। मैं सदी के महानायक से लड़ रहा था और सुप्रीम कोर्ट में मेरा मामला खारिज कर दिया गया। अब अमिताभ बच्चन से विनम्रता के साथ मैं अनुरोध करना चाहूंगा उनके उनके उनकी पत्नी जो आकर के कही थी कि हम आएंगे और अंकिता आ गई थी कौन बनेगा करोड़पति में? कुछ है संज्ञान आपको? उनके एक रिलेटिव थे अंकिता जी के तो उन्होंने अमित अंकल से कहा कि मेरी बात सुनने से पहले मैं आपका एक मिनट लेना चाहूंगा कि आप वहां के गांव वासी जो भी हैं आज तक आपका इंतजार कर रहे हैं कि आप वहां कब जाएंगे। तो अमित जी ने तुरंत उनको रिप्लाई किया कि ये सौभाग्य कहें या जैसे कहें कि अभी एक हफ्ते पहले हमारी अभिषेक और ऐश्वर्या जया जी से यही बात हो रही थी कि हम अपने गांव बाबू पट्टी बाबू जी के पैतृक गांव बाबू पट्टी को चलते हैं। वहां पे जो विद्यालय और जो लाइब्रेरी है और हॉस्पिटल वहां पे कुछ करते हैं उन लोगों के लिए। इतना बात उन्होंने अमित जी ने आदरणीय अमिताभ बच्चन जी बड़े हैं, अग्रज हैं और बड़ी बड़ा सम्मान मिला है। उनके पिताजी को भी पद्म पुरस्कारों से लेकर के सरस्वती सम्मान और आप तो धन्य हैं। बड़ी शख्सियत हैं साहब और एक बार आ जाइए। आ जाइए गांव बुला रहा है। मुझे कई लोगों ने कहा फोन करके तो उस क्रम में यद्यप कि आप भी हमारा वीडियो देखते हैं। यह भी हमारा वीडियो देखते हैं। क्या नाम बताया आपने? सूरज भट्ट। सूरज भट्ट और आप भी देखते हैं

क्या नाम बताएं निखिल पांडे निखिल औरकि ऐसे ही यह लोग मिल गए हैं इन लोगों में से किसी ने नहीं कहा था एक बार आ जाइए आ जाइए गांव में और सब अपना डीह देखना चाहते हैं अपने पूर्वजों का स्थान देखना चाहते हैं और जो भी आज आप हुए हैं कहीं ना कहीं उन पूर्वजों की पृष्ठभूमि जिन लोगों ने त्याग तपस्या किया है तो उसको इंकार नहीं किया जा सकता भैया इसकी चाबी यहां कोई कर्मचारी नहीं रहता जिनके पास चाबी रहती है उनसे भी मिलवाता हूं क्या नाम है आपका सुनील कुमार यादव जी सुनील कुमार यादव तो यह सुनील की गुमटी है जहां चाय मिल जाएगी आपको अगर आएंगे और सुनील के यहां बिस्किट मिल जाएगा। हमको चाय भी सुनील ने पिलाया है। प्रधान जी ने पिलाया है तो सुनील का धन्यवाद और फिर अब हम भीतर चलते हैं लाइब्रेरी में। सुनील आओ रोज बंद कर देते हो और सुबह खोल देते हो। यहीं रहते हो ना? जी। चलिए अब यह देखिए सीढ़ियां में चढ़ रहा हूं। यह उनका घर है। घर में हम उनके चल रहे हैं। और घर में चलते हुए हम दिखा रहे हैं कि इधर तो आपने देख लिया अब आगे बढ़िए आप। ये लाइब्रेरी है। इसमें क्या रखा जाता है?

इसमें रामलीला का सामान जैसे अच्छा अच्छा रामलीला का सामान रखा जाता है। चलिए आइए भीतर एक बार चल के दिखा देते हैं। ये एक शौचालय भी बना था। सप्रेम भेंट किसी ने किया है और यह शौचालय है इसमें पानी वानी कुछ है नहीं ऐसे ही बना दिया गया अब हम बाहर चलते हैं रामलीला भी होता है काश काश अमिताभ साहब एक बार रामलीला में आ जाते अपने एक बार आ जाते बड़ी-बड़ी फिल्मों में आपने काम किया बड़े बड़े सम्मान से नवाजा गया एक बार रामलीला में आकर के 10 मिनट के लिए आ जाते नहीं गांव गांव धन्य हो जाता गांव धन्य हो जाता दोस्तों आइए हम आगे बढ़ते हैं और बताते हुए कि जब इन लोगों से भी हम बात कर रहे हैं। मानस का प्रसंग आ गया है तो जब श्री रामचंद्र जी ने रावण को मार करके और जब विजय प्राप्त किया तो लक्ष्मण ने कहा उस समय विभीषण ने कहा कि कुछ दिन प्रभु रुकिए प्रधान जी आगे आ जाइए। कुछ दिन रुकिए यहां आप थक गए हैं लड़ते लड़ते और कुछ दिन विश्राम करिए यहां सब है सोने की लंका है क्या नहीं है यहां तो राम ने कहा कि यद्यपि स्वर्णमय लंका नमे लक्ष्मण रोजते यह स्वर्णमय लंका मुझे तनिक भी अच्छी नहीं लग रही है जननी जन्मभूमि स्वर्गद गरसी हमारी जन्मभूमि जो स्वर्ग से भी अच्छी है वह मुझे याद आ रही है तो भैया आ जाइए आ जाइए मुझसे अनुरोध किया है इस वीडियो तो मैं रोज बनाता हूं चलता ही रहता है। लेकिन अमिताभ जी आपके यहां मैं नहीं पहुंच पाऊंगा लेकिन आवाज हमारी जरूर पहुंचेगी। यह जो निर्माण हुआ था वो टूट टूट करके गिर रहा है और इसकी भौतिक स्थिति आप देख रहे हैं। कहीं कोई इसका ध्यान नहीं दिया गया है और आपने नहीं सोचा होगा कि अमर भाई इतना जल्दी चला जाएगा। चले गए क्योंकि किसी पर वह नहीं है। अभी उन्होंने अंकिता के मामले में कहा था ऋषभ कि सोच रहा हूं अभी जया से और ऐश्वर्या से बात हो रही थी। सोच रहा हूं अभिषेक तो आने से रहे। जब आप ही नहीं आए तो अभिषेक कहां से आएगा। तो यह देखिए यह नहीं रहे और किसी ने नहीं जाना है कि कब किसका समय आ जाएगा। मैं प्रतापगढ़ हूं। मुझे नहीं पता कि मैं गाजीपुर जा पाऊंगा कि नहीं जा पाऊंगा। यह अब नहीं रहे। अह धूल पड़ गई है। यह कितना मेहनत से बनवाया होगा लोगों ने। यह है और पीछे एक फोटो देख रहा हूं। शायद धरती पुत्र दिख रहे हैं। धरतीपुत्र मुलायम सिंह लगातार बीमार रह रहे हैं। तो एक बार निकाल दीजिए बाबू। हां। यह देखिए। एक बार एक बार झाड़वाड़ के भैया आज तो सफाई हो जाए। अरे फूंक से नहीं कुछ। अरे देखिए देखिए झाड़ रहे हैं बिचारे अपने पैंट से। एक बार एक बार साफ सफाई हो जाए।

है कोई माई का लाल जो सफाई कर देगा है कोई अरे उससे नहीं कुछ चलिए अब मैं बता रहा हूं डॉक्टर हरिवंश राय बच्चन की याद में तू ना थकेगा कभी तू ना थमेगा कभी तू ना झुकेगा कभी कर शपथ कर शपथ कर शपथ अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ अब सुनिए मधुशाला मधुशाला की यह चार पंक्तियां स्वयं स्वयं नहीं पीता औरों को किंतु पिला देता हला स्वयं नहीं छूता औरों को पर पकड़ा देता प्याला पर उपदेश कुशल बहुतेरों से मैंने यह सीखा है स्वयं नहीं जाता औरों को पहुंचा देता मधुशाला हरिवंश राय बच्चन एक बार आ जाओ एक बार आ जाइए और जन्मभूमि स्वर्ग से भी न्यारी है। एक बार आ जाइए। गांव के लोग नहीं है लेकिन जो भी नौजवान यहां इकट्ठा है वह सब की इच्छा है। नहीं क्या कह रहे हैं आप? आपकी आवाज आमीन एक बार आ जाए। एक बार आ जाए एक बार आ जाए। देखिए यह सांस टूट रही है और यह पूरी तौर पर भावुक हो गए हैं कहने। कह रहे हैं तो एक बार आ जाये एक बार आ जाओ। एक बार आ जाओ। नहीं प्रकृति अमिताभ जी प्रकृति माफ नहीं करेगी प्रकृति माफ नहीं करेगी प्रकृति सवाल पूछेगी आने वाली अपनी ही पीढियां सवाल करेंगी यह सवाल आपसे भी होगा यह सवाल अभिषेक बच्चन से भी होगा यह सवाल ऐश्वर्या से तो बाद में होगा बहू है लेकिन यह सवाल होगा और इसका उत्तर नहीं मिलेगा क्या नाम है बेटा आपका नाम क्या नाम है आलोक आलोक अमिताभ बच्चन को जानते हो नहीं जानते हो ना उनको कभी देखे हो आलोक नहीं जानता कि अमिताभ बच्चन कौन थे ऐसे ही आने वाली पीढ़ियां हम लोग कई जगह पूछे और बहुलता में लोग नहीं बता रहे थे कि बाबू पट्टी अमिताभ बच्चन का पैतृक गांव है। तो दोस्तों बस आज के दिन इतना ही विनम्र निवेदन करते हुए सदी के महानायक अमिताभ बच्चन से कि अपने गांव बाबू पट्टी प्रतापगढ़ में आ जाइए। मैं हूं बृजभूषण दुबे YouTube चैनल बृजभूषण मार्कंडे और अपना अनुरोध बच्चन परिवार से ज्ञापित कर रहा हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद।

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