एक समय था जब हर सुबह उठते ही सिर्फ एक ही चर्चा होती थी ट्रंप टैरे। अमेरिका की तरफ से लगाए गए भारी भरकम टैक्स ने भारतीय एक्सपोर्टर्स की नींद उड़ा रखी थी। हर दिन नए नियमों से भारतीय बिजनेस परेशान थे, हैरान थे।
लेकिन कहते हैं कि वक्त बदलते देर नहीं लगती। आज भारत के लिए एक ऐसी ऐतिहासिक और बड़ी खुशखबरी आई है। अमेरिका भी झुकने पर मजबूर हो गया है। अमेरिका ट्रंप टेरिफ के तौर पर जमा किए गए $ अरब डॉलर क्यों अमेरिका को पीछे हटना पड़ा?
यह पूरा मामला शुरू हुआ अप्रैल 2025 में। अमेरिका ने एक सख्त और कड़ा व्यापार कानून लागू किया। इस कानून का मकसद उन देशों पर जुर्माना लगाना था जिनका अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस था। यानी जो देश अमेरिका को सामान बेचते ज्यादा थे और वहां से खरीदते कम थे। भारत भी इसी लिस्ट में था। नतीजा क्या हुआ? इसका नतीजा निकला 7 अगस्त 2025 को। अमेरिका ने भारत पर सीधा 25% का टेरिफ लगाया। बात यहीं नहीं रुकी। इसके ठीक कुछ दिन बाद 27 अगस्त 2025 को रूस से कच्चे तेल के आयात को लेकर अमेरिका ने भारत पर एक और 25% का अतिरिक्त जुर्माना लगा दिया।
डबल टैक्स की वजह से भारतीय एक्सपोर्टर्स पर मानो दुख का पहाड़ टूट पड़ा। भारत के जो मुख्य एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स हैं जैसे हमारा टेक्सटाइल, कपड़ा, इंजीनियरिंग का सामान, लेदर प्रोडक्ट्स और जो ज्वेलरी है इन सब पर कुल मिलाकर 50% का भारी भरकम टैक्स बोझ आ गया। सोचिए जो सामान पहले ₹100 का बिकता था उस पर ₹50 सिर्फ टैक्स देना पड़ रहा था।
इससे भारतीय सामान अमेरिकी मार्केट में महंगे होने लगे और जो हमारे भारत के एक्सपोर्टर्स हैं उनका मुनाफा खत्म होने लगा। अगस्त 2025 से लेकर फरवरी 2026 के बीच व्यापारियों ने भारी दिल से यह करोड़ों अरबों का टैक्स अमेरिका को चुकाया। फिर तारीख आई 20 फरवरी 2026। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ट्रंप प्रशासन के इस टेरिफ को सीधे तौर पर असंवैधानिक यानी अनकस्ट्टिट्यूशनल घोषित कर दिया। कोर्ट के इस एक फैसले ने पूरे खेल को पलट दिया और अमेरिका के लिए भारत का पैसा दबाकर बैठना नामुमकिन हो गया।
इसी फैसले के बाद रास्ता साफ हुआ इस रिफंड का। यह 94,649 करोड़ की वो रकम है जो अगस्त 2025 से फरवरी 2026 के बीच भारतीय एक्सपोर्टर्स से वसूली गई थी। बिजनेस लाइन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने कंफर्म किया है कि एक्सपोर्टर्स के खाते में छोटी रकम आनी शुरू भी हो गई है। हालांकि बड़ी रकम आने में अभी थोड़ा समय और लगेगा लेकिन शुरुआत जो है वो हो चुकी है।
इसमें कई तकनीकी दिक्कतें भी आई थी। लेकिन यहां एंट्री होती है रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की। आरबीआई ने एक बड़ा मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए उन भारतीय बैंकों की राह आसान कर दी है जिनकी अमेरिका में कोई अपनी डायरेक्ट ब्रांच नहीं है। आरबीआई ने नियमों में ढील दी और साफ किया कि ऐसे बैंक अमेरिका में काम कर रहे किसी दूसरे विदेशी बैंक के साथ मिलकर एक स्पेशल कलेक्शन अकाउंट खोल सकते हैं और भारत का पैसा वापस मंगा सकते हैं। इसके साथ ही डिजिटल पेमेंट गेटवेज ने भी इस प्रोसेस को रफ्तार दी है। वो भी बहुत ही कम लागत पर।
हालांकि कहानी में एक छोटा सा ट्विस्ट अभी भी है। जिन एक्सपोर्टर्स ने फ्रेड फॉरवर्ड्स के जरिए या सीधे अमेरिकी इंपोर्टर्स को ड्यूटी पेमेंट किया था उनके बीच रिफंड की शेयरिंग और डॉक्यूमेंटेशन को लेकर अभी बातचीत चल रही है। उम्मीद है कि यह मामला भी जल्द सुलझ जाएगा। लेकिन कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था और हमारे एक्सपोर्टर्स की एक बहुत बड़ी जीत है। ट्रंप का जो टेरिफ डर बनकर आया था वो अब धराशाई हो चुका है और भारत का पैसा घर वापस आ रहा है।