1989 की दो कैदी वो आखिरी फिल्म है जिसमें गोविंदा और अमरीश पुरी ने लास्ट बार साथ में काम किया था। इसके बाद दोनों इंडस्ट्री में एक्टिव तो रहे लेकिन एक साथ किसी भी फिल्म में नजर नहीं आए। इसके पीछे रीज़न यह बताया जाता है कि दो कैदी की शूट पर एक दिन गोविंदा को सुबह 9:00 बजे आना था।
लेकिन वो पहुंचे शाम को 6:00 बजे और गोविंदा के लेट आने की वजह से अमरीश पुरी को पूरे दिन इंतजार करना पड़ा था क्योंकि अमरीश पुरी को उस दिन गोविंदा के साथ सींस देने थे। गोविंदा के लेट जाने की इस आदत से अमरीश पुरी इतना गुस्सा हो गए कि उन्होंने गोविंदा को गंदी नाली का कीड़ा तक कह दिया। एक कहानी यह भी मशहूर है कि गोविंदा को खरी-खरी तो सुनाई ही अमरीश पुरी ने बल्कि उन्होंने गोविंदा को थप्पड़ तक जड़ दिया था और इसी इंसिडेंट के बाद गोविंदा ने कसम खा ली थी कि वो अमरीश पुरी के साथ कभी काम नहीं करेंगे। यही वजह है कि उस फिल्म के बाद दोनों ने कभी साथ में काम नहीं किया।
अब सालों बाद इस इंसिडेंट पर चुप्पी तोड़ी है अमरीश पुरी के बेटे राजीव ने और उन्होंने बताया है कि क्या वाकई में अमरीश पुरी ने गोविंदा को थप्पड़ मारा था। राजीव का कहना है कि हां यह बात मैंने भी बहुत सुनी है और लंबे समय से सुनता आ रहा हूं। लेकिन जहां तक मुझे पता है मेरे पिता ऐसे ही किसी पर हाथ नहीं उठाते हैं। हां वो इरिटेट जरूर हो जाते हैं। अगर किसी ने एक बार गलती की दो बार तीन बार-बार सेम गलती रिपीट कर रहा है
तो इरिटेट होकर वो सामने वाले को कुछ कह जरूर सकते हैं लेकिन हाथ उठाया होगा या मारा होगा यह बात मैं नहीं मान सकता। फिर जब अमरीश पुरी के बेटे से पूछा गया कि अगर हाथ नहीं उठाया दोनों के बीच दिक्कत नहीं हुई तो फिर ऐसा क्यों है कि दो कैदी फिल्म के बाद दोनों ने कभी भी साथ में काम नहीं किया। तो इसके पीछे अमरीश पुरी के बेटे ने गोविंदा के लेट आने की आदत को ही जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि उस टाइम गोविंदा सेट पर लेट पहुंचते थे और हो सकता है कि अमरीश पुरी को वह आदत गोविंदा की नहीं जमी हो। इसीलिए उन्हें लगा हो कि आगे कुछ फिल्मों में हम साथ में काम नहीं कर सकते हैं
कि लेट आने वाले लोग मुझे पसंद नहीं। यही वजह है कि दोनों ने एक दूसरे से दूरी बनाई लेकिन थप्पड़ मारा होगा यह बात तो मैं सच नहीं मान सकता। जहां तक बात है गोविंदा की तो यह बात सच है कि उस दौरान गोविंदा मल्टीपल फिल्मों में काम करते थे। लेकिन यह भी सच है कि इन मल्टीपल फिल्म्स में से गोविंदा ने कई फिल्मों के लिए प्रोड्यूसर्स को ना तक कह दिया था। लेकिन फिर भी प्रोड्यूसर्स जिद पर अड़े रहे और कहा कि आप बस हां बोल दो। आपका टाइम कैसे लेना है, आपको शूट कैसे करना है, वह हम मैनेज कर देंगे। अब प्रोड्यूसर गोविंदा को क्या बात कह रहा है, किस बात पे राजी कर रहा है वो दूसरे एक्टर्स को तो पता नहीं होती थी। यही वजह है कि जब गोविंदा लेट आते थे तो प्रोड्यूसर को दिक्कत नहीं होती थी। उन्हें तो पता है कि गोविंदा उन पर एहसान कर रहे हैं। लेकिन दूसरे एक्टर्स गोविंदा की इस बात से बौखला जाते थे और उसके लिए गोविंदा को ही जिम्मेदार ठहराया गया और गोविंदा को ही बदनाम किया गया। उन प्रोड्यूसर्स के बारे में कोई बात नहीं करता है जो गोविंदा को किसी भी तरह से कॉम्प्रोमाइज करके अपनी फिल्म में लेना चाहते