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कौन है मोदी की सुरक्षा करने वाली ये नॉर्थ ईस्ट की महिला?

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आपको पता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुलाई के आखिरी हफ्ते में यूके की यात्रा पर गए थे। एक तस्वीर की। लोगों की नजरें आटिकी पीएम मोदी के पीछे खड़ी उस महिला पर जो काले सूट में इयर पीस लगाए पूरे आत्मविश्वास के साथ खड़ी थी। आपको मालूम है कि यह कौन है? इनका नाम है अदासो कपेसा और इस वक्त वो प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगी एसपीजी यानी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप का हिस्सा हैं।

और खबरों की मानें तो एसपीजी की इस टीम की पहली महिला सदस्य हैं। सिर्फ इतना ही नहीं वो पूर्वोत्तर भारत माने नॉर्थ ईस्ट इंडिया की भी पहली अधिकारी हैं जिन्हें यह जिम्मेदारी मिली। बता दें कि दसो कपेसा एक माओ नागा समुदाय की महिला हैं जो मणिपुर के सेनापति के छोटे से गांव कईबी से आती हैं। इनकी शुरुआत हुई थी सशस्त्र सीमा बल यानी एसएसबी से।

वैसे तो इनकी पोस्टिंग उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में 55वीं बटालियन में है। लेकिन नियमों के तहत उनका एसपीजी में डेपुटेशन हुआ है। यानी कुछ समय तक उनको एसपीजी में अपनी सेवाएं देनी है। अदासों ने गांव के स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की सेवा ज्वाइन की। 2020 में एसपीजी ट्रेनिंग पूरी की और साल 2024 में एसपीजी की एक्टिव ड्यूटी जॉइ की।

आपको बता दें कि एसपीजी कोई आम यूनिट नहीं है। व्यक्तियों की सुरक्षा में लगी यह भारत की सबसे एलट सुरक्षा इकाई है जो प्रधानमंत्री और उनके परिजनों की व्यक्तिगत सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाती है। एसपीजी का गठन कैसे हुआ? इसकी भी एक कहानी है। आपको मालूम ही है कि साल 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा के लिए एक डेडिकेटेड टीम बनाने पर जोर दिया गया।

गृह मंत्रालय ने पहल की। मार्च 1985 में राष्ट्रपति के आदेश के बाद कैबिनेट सचिवालय के तहत एसपीजी का गठन हुआ। यह छोटी कहानी थी। विस्तृत कहानी कभी और। लेकिन इतना जान लीजिए कि साल 2019 में इस व्यवस्था को बदल दिया गया। एसपीजी एक्ट में संशोधन किया गया और तय हुआ कि यह समूह सिर्फ प्रधानमंत्री और उनके परिजनों को ही सुरक्षा देगा। इस यूनिट में शामिल होने के लिए जरूरत होती है कॉम्बैट इंटेलिजेंस निगरानी और संकट प्रबंधन जैसी बेहद कठिन ट्रेनिंग की और अपने गठन से लेकर अब तक एसपीजी एक मेल डोमिनेटेड फोर्स रही।

यानी इसमें पुरुष ज्यादा थे। लेकिन अब अद्दासो कपेसा इस चुनौतीपूर्ण टीम का हिस्सा बन चुकी हैं। इसलिए अदासो कपेसा का एसपीजी में शामिल होना केवल एक रणनीतिक फैसला नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक बदलाव है। इस खबर में इतना ही। इन जानकारियों को जुटाया था हमारे साथी आकांक्षा गोगोई ने।

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